रविवार, 14 जून 2020

बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के करीब पहुंचा मानसून; गुजरात में आज या कल दस्तक दे सकता है

मानसून पश्चिम बंगाल में गंगा के तटवर्ती इलाके और ओडिशा में सक्रिय है। शनिवार को यह मध्य महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों, मराठवाड़ा और विदर्भ के अधिकतर हिस्सों, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों, झारखंड के अधिकांश हिस्सों और बिहार के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ा है।

मध्य अरब सागर के शेष हिस्सों में और उत्तर अरब सागर के कुछ हिस्सों और महाराष्ट्र के शेष हिस्सों (मुंबई सहित), छत्तीसगढ़, झारखंड, दक्षिण मध्य प्रदेश और बिहार के हिस्सों और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों के लिए अगले 24 घंटों के दौरान आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बन रहेहैं। इन इलाकों में मानसून रविवार या सोमवार को दस्तक दे सकता है।

दक्षिण गुजरात सहित प्रदेश में अगले 3 दिन भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल के पर्वतीय हिस्से, सिक्किम, असम, मेघालय, मध्य महाराष्ट्र, कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

मध्यप्रदेश: मानसून पहले होशंगाबाद, जबलपुर और इंदौर में दस्तक देगा

मानसून मप्र में तय समय 15 जून से एक दिन पहले रविवार को पहुंच सकता है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि यह सबसे पहले होशंगाबाद, जबलपुर और इंदौर में दस्तक देगा। मानसून की उत्तरी सीमा हरनेई, अहमदनगर, औरंगाबाद, गोंदिया, चांपा, रांची, भागलपुर से गुजर रही है। इसकी अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी दोनों ब्रांच भी एक्टिव हैं। इस वजह से इसके जल्द ही भोपाल में भी पहुंचने की संभावना बढ़ गई है।

उधर, मानसून की आहट के साथ शनिवार को मालवा-निमाड़, महाकौशल, विंध्य के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। जुन्नारदेव में 100, मेघनगर में 74, हरदा में 73, मंडला में 60 मिमी, खातेगांव में 58 मिमी में बारिश रिकॉर्ड हुई।

सियर जोन, जिसने मानसून को ज्यादा सक्रिय किया, रफ्तार दी
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी हवाएं आपस में 19 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर मध्य भारत के आसपास 6 किमी ऊंचाई तक मिल रही हैं। इसे सियर जोन कहते हैं। इससे मानसूनी गतिविधियां तेज हो जाती हैं।

नॉलेज- ऐसे पता चलता है
मानसून आया... हवा दक्षिणी-पश्चिमी हो। धरती से निकलने वाली गर्मी 200 वॉट प्रति वर्ग मीटर से कम हो। जमीन से 4 से 5 किमी ऊपर नमी हो। बारिश लगातार हो।

अलर्ट- आज यहां बारिश
आलीराजपुर, अनूपपुर, बड़वानी, बैतूल, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, हरदा, जबलपुर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, नरसिंहपुर, सिवनी में रविवार को तेज बारिश के आसार।

भोपाल: शाम को कई इलाकों में हुई बारिश, 3.1 डिग्री गिरा पारा
मानसून की आहट से शहर का मौसम इन दिनों हर शाम बदल जाता है। शनिवार को भी दोपहर तक तो तेज धूप चटकी लेकिन शाम साढ़े 4 बजे तक घने बादल छा गए। शहर के कई इलाकों में करीब 20 मिनट तक बूंदाबांदी हुई। शनिवार को दिन का तापमान, यह शुक्रवार के मुकाबले 3.1 डिग्री कम रहा। मौसम वैज्ञानिक उदय सरवटे ने बताया कि इस दौरान हवा का रुख उत्तर-पश्चिमी था। उत्तर पश्चिमी मप्र में बने हवा के चक्रवाती घेरे के कारण नमी में इजाफा हुआ है।

छत्तीसगढ़:बिलासपुर-रायगढ़ तक पहुंचा

राजधानी रायपुर में सक्रिय मानसून शनिवार को आगे बढ़ते हुए बिलासपुर, जांजगीर चांपा और रायगढ़ के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया। इन इलाकों में बारिश शुरू हो गई है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिन हिस्सों में मानसून अभी नहीं पहुंचा है वहां भी प्री-मानसून की वर्षा होने लगी है। अगले एक-दो दिन में पूरा छत्तीसगढ़ दक्षिण-पश्चिम हवा के प्रभाव में रहेगा। गुरुवार को मानसून ने बस्तर में दस्तक दी और 48 घंटे के भीतर वह बस्तर से बिलासपुर तक पहुंच गया। मानसूनी गतिविधियां तेज हैं। इसलिए अगले एक-दो दिन में दक्षिण-पश्चिम हवा पूरे छत्तीसगढ़ में सक्रिय हो जाएगी।राजधानी में शनिवार-रविवार को शाम-रात में गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है।

बिहार:भागलपुर के रास्ते मानसून पहुंचा, 18 तक पूरे प्रदेश में छाएगा

भागलपुर में हुई बारिश के बाद माैसम विभाग ने शनिवार काे बिहार में मानसून के दस्तक देने की घोषणा कर दी। फिलहाल बिहार में मानसून के कवर हाेने के लिए सिस्टम बना हुआ है। अगले 24 से 30 घंटाें में पटना व इससे सटे जिलाें के साथ ही बिहार के नाॅर्थ ईस्ट के जिलाें सुपाैल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा जिलाें में मानसून की बाैछार हाेगी। पटना में भी सिस्टम बना हुआ है। बूंदा-बांदी हुई है। इससे पहले 2008 में मानसून ने 9 जून काे दस्तक दी थी।अगले तीन दिनाें तक बिहार के 38 जिलाें में गरज के साथ कहीं हल्की ताे कहीं भारी बारिश की चेतवानी दी गई है।

फोटो पटना बिहार की है।

पहले 10 जून थी आने की तिथि, 60 साल बाद बदलाव
बिहार में पहले आने की तारीख 10 जून थी। पर मानसून तय वक्तपर नहीं आ रहा था। इस साल माैसम विभाग ने 60 साल के आंकड़े को परखा, फिर तरीख में बदलाव हुआ। बिहार में 15 जून के बाद तय की है। 2002 से लेकर 2019 तक इन 18 सालाें में केवल चार साल ही ऐसा रहा जब मानसून ने 10-11 जून या इससे पहले दस्तक दी। 2017 से 2019 की बात करें ताे मानसून ने 20 जून के बाद दस्तक दी है।


झारखंड: संथाल के रास्ते मानसून की एंट्री 24 घंटे में पूरे राज्य में छा जाएगा

झारखंड में तय समय से दाे दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी है। शनिवार काे संथाल परगना और पूर्वी सिंहभूम के रास्ते मानसून ने झारखंड में प्रवेश किया। अगले 24 घंटे के भीतर यह पूरे राज्य में छा जाएगा। माैसम विभाग के निदेशक डाॅ. एसडी काेटाल ने मानसून के आगमन की घाेषणा की। उन्हाेंने बताया कि पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, धनबाद, जामताड़ा, देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, खूंटी जिले में मानसून प्रवेश कर गया है। गुमला, हजारीबाग व गिरिडीह के कुछ हिस्सों में भी मानसून की बारिश हाे रही है।

जमशेदपुर में मानसून की पहली बारिश।


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फोटो भोपाल के बड़े तालाब की है। शनिवार को शहर में आंधी के साथ हल्की बारिश हुई। फोटो-अनिल दीक्षित


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गेस्ट हाउस की बुकिंग रद्द होने पर ओलिंपियन दीपिका की घर में ही होगी शादी, अर्जुन मुंडा करेंगे कन्यादान, धोनी हो सकते हैं शामिल

पद्मश्री ओलिंपियन दीपिका कुमारी 30 जून को रातू चट्‌टी (रांची) स्थित अपने पैतृक आवास में अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज अतनु दास के साथ सात फेरे लेंगी। जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा कन्यादान करेंगे। कोरोना महामारी काे देखते हुए खास लोगों को शादी में आमंत्रित किया जा रहा है।

इनमें झारखंड की राज्यपाल द्राैपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अलावा डीजीपी, मुख्य सचिव, सुदेश महतो समेत अन्य हस्तियां शरीक होंगी। इसके अलावा दीपिका के पांच साथी खिलाड़ी व कोच को भी विवाह कार्ड भेजकर निमंत्रण दिया जाएगा।

सुरक्षा कारणों से पुलिस ने बुकिंग रद्द कर दी

उल्लेखनीय है कि दीपिका-अतनु की शादी डोरंडा स्थित खुखरी गेस्ट हाउस में होनी थी, लेकिन काेरोना संकट और लॉकडाउन में सुरक्षा कारणों से पुलिस ने बुकिंग रद्द कर दी थी। इसलिए अब परिवार वालों ने रातू स्थित घर में शादी के आयोजन का निर्णय लिया है।

दोनों की सगाई भी 10 दिसंबर 2018 को घर में ही हुई थी।परिजनके अनुसार, 15 जून को तिलक की रस्म होगी। इसके लिए दीपिका के पिता शिवनारायण, भाई छोटू, पंकज सोनी के साथ 5 लोग अतनु के कोलकाता स्थित आवास जाएंगे। 16 जून से कार्ड बांटे जाएंगे। महज 35 से 40 लोगों को ही कार्ड भेजे जाएंगे। धोनी के शादी में आने की पूरी संभावना है।

26 साल की हुईं दीपिका

दीपिका ने शनिवार को रातू स्थित अपने घर पर 26वां जन्मदिन मनाया। कुछ खास मेहमानों के सामने बर्थडे केक काटा। इस दाैरान उनके माता-पिता, भाई-बहन आदि मौजूद थे। भारतीय तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष अर्जुन मुंडा सहित कई लोगों ने दीपिका को फोन पर बधाई दी।

शादी की खरीदारी कर लौट रहीं दीपिका के मां से चेन छिनी

दीपिका की शादी की खरीदारी कर रांची शहर से लौट रहीं दीपिका की मां गीता देवी के गले से बाइक सवार दो अपराधियों ने सोने की चेन छीन ली और फरार हो गए। घटना शनिवार दोपहर 2.30 बजे रातू थाना क्षेत्र के तिलता में सोडा फाउंटेन रेस्तरां के पास घटी।

पिता शिव नारायण के अनुसार, चेन की कीमत करीब डेढ़ लाख होगी। वह पत्नी के साथ शादी के सामान खरीदने के बाद बाइक से घर लौट रहे थे। इधर, रातू थानेदार राजीव रंजन लाल ने बताया कि इस बारे में अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज दीपिका के परिजनने रातू थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।



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दीपिका ने रातू स्थित अपने घर पर जन्मदिन मनाया। इस मौके पर माता-पिता और उनके भाई-बहन समेत कुछ मेहमान मौजूद थे।


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स्पेन के गांव बने टूरिज्म हब, सीजन के पहले ही 15 हजार में से आधे कंट्रीहाउस बुक; पिछली बार से 25 फीसदी ज्यादा

कोरोना संक्रमण काल में गर्मी की छुटि्टयां बिताने के लिए स्पेन के लोगों ने अनोखा तरीका ढूंढ़ निकाला है। इस बार लोगों ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने का मन बनाया है। स्पेन में पिछले कुछ सालों में दोस्तों और परिवारों के साथ वीकेंड या छुट्टियां बिताने के लिए ‘कंट्री हाउस’ काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

देशभर में ऐसे 15 हजार से ज्यादा ग्रामीण घर हैं और यह हर तरह से पारंपरिक स्पैनिश छुट्टियां बिताने की जगह बन चुके हैं। इन गर्मियों में भी स्पैनिश लोग रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट की भीड़ से बचने, कोरोना से सुरक्षा और आर्थिक कारणों से भी छुट्टियां बिताने के लिए ऐसे ही कंट्री हाउस की बुकिंग करवा रहे हैं।

कंट्री हाउस की 7 हजार से ज्यादा बुकिंग अभी से ही हो गई

स्थिति यह है कि जुलाई में शुरू होने वाले सीजन के लिए कंट्री हाउस की 7 हजार से ज्यादा बुकिंग अभी से ही हो गई है जोकि पिछले साल की अपेक्षा 25% ज्यादा है। दुनियाभर में कोरोनावायरस के खतरे की वजह से पर्यटन उद्योग ठप पड़ा है, वहीं स्पेन में सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने कुछ सावधानी के साथ ग्रामीण पर्यटन को फिर से शुरू करने को हरी झंडी दे दी है।

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री यानी आतिथ्य उद्योग स्पेन के प्रमुख सेक्टर्स में एक है। 2019 में इस इंडस्ट्री ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए लगातार 7 वें साल 8.37 करोड़ पर्यटकों का रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, इस साल ऐसा संभव होता नजर नहीं आ रहा, लेकिन इसका समाधान ग्रामीण पर्यटन के रूप में नजर आ रहा है।

लोग अपनी छुट्टियों के लिए पसंदीदा फार्म हाउस ढूंढ़ सकते हैं

यहां ऐसे कई प्लेटफार्म हैं, जहां पर लोग अपनी छुट्टियों के लिए पसंदीदा फार्म हाउस ढूंढ़ सकते हैं और बुक कर सकते हैं। एक ऐसी ही वेबसाइट पर 29 अप्रैल से 5 मई के बीच सप्ताहभर में ही आगामी जुलाई और अगस्त के लिए 7 हजार से ज्यादा बुकिंग हो गई हैं।

कंपनी के प्रवक्ता मिरयम तेजादा का कहना है कि लोगों को अब ग्रामीण पर्यटन के रूप में सुरक्षित और सस्ता तरीका मिल गया है। इससे वे अपने देश को और बेहतर तरीके से जान सकेंगे।

फ्रांस, इटली, ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देशों ने सीमाएं खोलीं

कोरोना से डरे यूरोप के कई देशों ने कारोबारी, शैक्षणिक, यातायात और पर्यटन गतिविधियां रोक दी थीं। सीमाएं भी सील कर दी थीं। अब फ्रांस, इटली, ब्रिटेन, नीदरलैंड, फिनलैंड और ग्रीस ने सीमाएं खोल दी हैं जबकि सबसे ज्यादा मौतों के मामले में छठे स्थान पर रहने वाला स्पेन 1 जुलाई से दुनियाभर के पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है।



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जुलाई में शुरू होने वाले सीजन के लिए कंट्री हाउस की 7 हजार से ज्यादा बुकिंग अभी से ही हो गई है जोकि पिछले साल की अपेक्षा 25% ज्यादा है।


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थार एक्सप्रेस बंद होने के बाद पाक ने बदला रेलवे स्टेशन का नाम, जीरो पॉइंट स्टेशन अब हुआ 'मारवी'

भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली साप्ताहिक थार एक्सप्रेस कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से भले ही बंद हाे, लेकिन पाक रेलवे ने भारत के सामने जीरो पॉइंट रेलवे स्टेशन का नाम बदल दिया है। पाक रेलवे ने इसका नाम मारवी रखा है। नाम बदलने की कवायद काे सुरक्षा एजेंसियां भी समझ नहीं पाई हैं।

इस प्रेमकथा पर सिंधी में बनी फिल्म मार्च 1956 में हुई थी रिलीज

उमर-मारवी की प्रेमकथा पर पाकिस्तानी फिल्म 12 मार्च 1956 को रिलीज हुई थी। यह वहां बनी पहली सिंधी फिल्म थी। मारवी का संबंध थार के खानाबदोश कबीले से था। इस पूरे किस्से को शाह अब्दुल लतीफ ने शायरी का विषय बनाया और मारवी को देशप्रेम और अपने लोगों से मोहब्बत की मिसाल बनाकर पेश किया है। पाकिस्तान में मारवी को अब भी प्रेम और सच्चाई की पहचान के रूप में जाना जाता है।

भास्कर में पढ़िए रेलवे स्टेशन के नामकरण के पीछे की कहानी

पाकिस्तान में उमर-मारवी की प्रसिद्ध पेंटिंग।

सिंध में उमर-मारवी की प्रेमकथा काफी प्रचलित है। मारवी को प्यार का प्रतीक माना जाता है। एक समय सिंध के अमरकोट में उमर सुमरो का शासन था। वहीं गांव में एक चरवाहा रहता था। उसकी मारवी नाम की बेटी थी। उसने मारवी का विवाह बचपन में ही खेतसेन से तय कर दिया था, पर युवावस्था में संपन्न किसान फोगसेन शादी के लिए दबाव डालने लगा।

किसान ने इनकार किया तो वह बादशाह के दरबार में पहुंचा और मारवी के सौंदर्य का बखान किया। बादशाह खुद मारवी को चाहने लगा, पर मारवी कभी तैयार नहीं हुई। उसने मारवी को एक साल अमरकोट के किले में कैद रखा। अंतत: मारवी की शादी खेतसेन से की गई।

खेतसेन उसे शक की निगाह से देखता था। जब बादशाह को यह पता चला, तो वह मारवी के गांव आया और अग्नि परीक्षा दी। इसमें वह बेगुनाह साबित हुए। मारवी गांव में खेतसेन के साथ रही और बादशाह अपने शहर अमरकोट लौट गया।



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बाड़मेर. पाकिस्तान का पॉइंट जीरो स्टेशन, जिसका नाम बदलकर अब मारवी कर दिया गया है।


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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के 3 सर्वे में डोनाल्ड ट्रम्प पिछड़े, सिर्फ 13 राज्यों में आगे, विरोधी जो बिडेन 25 में भारी

अमेरिका मेंराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल को लेकर शंका-कुशंकाएं चल रही हैं। नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनावों के दौरान ट्रम्प के दोबारा जीत हासिल कर दूसरी बार राष्ट्रपति बनने का सपना टूट सकता है। इसकी वजह यह है कि तीन बड़े सर्वे में उन्हें दौड़ में विरोधी उम्मीदवार जो बिडेन से पिछड़ते हुए दिखाया गया है।

इनमें कहा गया है कि ट्रम्प की जीत की संभावनाएं पिछले 4 महीने में कभी भी बेहतर नहीं दिखीं। महाभियोग के मुकदमे से बरी होने के बाद उनकी रेटिंग 3 साल के उच्च स्तर पर जरूर पहुंची थी, लेकिन कोरोना संकट और जॉर्ज फ्लॉयड के मामले से निपटने के उनके तरीके ने मिस्टर ट्रम्प के राजनीतिक शेयरों को जमीन पर ला पटका।

बिडेन सहानुभूति हासिल करने के मामले में भी ट्रम्प से आगे निकल गए

कोरोना से 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत, 3 करोड़ लोगों की नौकरियों का नुकसान और नस्लवाद को लेकर प्रदर्शन के दौरान उनके रवैये ने विरोधी उम्मीदवार और बराक ओबामा के पसंदीदा उप-राष्ट्रपति रहे जो बिडेन को बढ़त दिला दी है। यहां तक कि बिडेन सहानुभूति हासिल करने के मामले में भी ट्रम्प से आगे निकल गए हैं। इसने दोनों के बीच बड़ा अंतर पैदा कर दिया है।

बिडेन की बढ़त का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि राष्ट्रपति पद के लिए पसंद के मामले में फरवरी में वे ट्रम्प से मामूली आगे थे। फिर ये अंतर 5% का रहा, उसके बाद 12% और जून आते-आते बिडेन की बढ़त 14% की हो गई है।

दोनों उम्मीदवारों के पास तैयारी के लिए काफी वक्त

राष्ट्रीय स्तर पर देखें, तो मौजूदा वक्त में चुनाव होने की स्थिति में बिडेन अमेरिका के 50 राज्यों में से 25 में सीधे-सीधे बढ़त ले चुके हैं, जबकि ट्रम्प सिर्फ 13 राज्यों में स्पष्ट जीत हासिल करते दिख रहे हैं। 8 राज्यों में दोनों उम्मीदवारों के मामला 50-50 है, जबकि 4 राज्यों में फिलहाल अनिश्चितता की स्थिति है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नवंबर में होने हैं, ऐसे में दोनों उम्मीदवारों के पास अपनी तैयारी के लिए काफी वक्त है।

वोटों का संभावित पैटर्न...
इस मॉडल से समझिए कि कैसे बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

द इकोनॉमिस्ट ने देशभर में सर्वे, राजनीतिक स्थिति, आर्थिक तथ्य और अन्य घटनाओं को देखते हुए वोटर्स की सोच, वोट शेयर और मतदाताओं के रवैये में बदलाव को समझने की कोशिश की है। इसमें अमेरिका के 50 राज्यों से जुड़े इन तथ्यों से यह समझने की कोशिश की गई है कि कौनसे राज्य के मतदाता कैसा व्यवहार कर सकते हैं। इसके मुताबिक, एक जैसी सोच वालों के साथ जाने की संभावना ज्यादा है। जैसे ट्रम्प अगर मिनेसोटा में जीत जाते हैं, तो उनकी विस्कोंसिन में भी जीतने की संभावना बढ़ जाएगी।

वॉशिंगटन पोस्ट का सर्वे...
ज्यादातर महिलाएं बिडेन के साथ, वहीं कॉलेज छात्र ट्रम्प के पक्ष में

वॉशिंगटन पोस्ट-एनबीसी सर्वे में भी ट्रम्प पिछड़ते दिख रहे हैं। इसमें बिडेन को 50%, जबकि ट्रम्प को 42% वोट मिले हैं। महिलाएं बिडेन के पक्ष में ज्यादा हैं, वहीं ट्रम्प को कॉलेज जाने वाले युवाओं का साथ ज्यादा मिला है। चौंकाने वाली बात यह है कि 80% अमेरिकियों ने माना कि कोरोना और नस्लवाद के मामले में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। दूसरी बड़ी बात यह है कि जिन राज्यों में ट्रम्प आगे थे, वहां भी बिडेन ने बढ़त बना ली है। ऐसे राज्यों में बिडेन को 50% जबकि ट्रम्प को सिर्फ 42% वोट मिल रहे हैं।

सीएनएन का सर्वे...
बिडेन-55%, ट्रम्प-41% वोट, ट्रम्प ने सर्वे वापस लेने को कहा

सीएनएन के सर्वे में भी ट्रम्प को बिडेन से पिछड़ते हुए बताया गया है। 2020 के चुनाव में बिडेन करीब 14% वोटों से आगे दिख रहे हैं। उन्हें 55% वोटर्स ने समर्थन दिया है, जबकि ट्रम्प को सिर्फ 41% ने। सर्वे में ट्रम्प को कोरोना वायरस और अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों मौत के बाद भड़के नस्लवाद के खिलाफ प्रदर्शन से काफी नुकसान हुआ है। डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सर्वे को गलत बताते हुए सीएनएन से इस सर्वे को वापस लेने को कहा है, लेकिन सीएनएन ने साफ कर दिया है कि इसे वापस नहीं लिया जाएगा।

2016 में जहां ट्रम्प आसानी से जीते थे, वहां इस बार चुनौती

ट्रम्प के लिए उन राज्यों में ज्यादा चुनौती होगी, जहां से वे 2016 में आसानी से जीते थे। इनमें जॉर्जिया, टेक्सास, ओहिओ और लोवा भी हैं। लेकिन इस बार यहां बिडेन आगे हैं। ट्रम्प के दबदबे वाले फ्लोरिडा और एरिजोना तक में बिडेन मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। जॉर्जिया को तो इस बार चुनावी युद्ध का सबसे बड़ा मैदान माना जा रहा है क्योंकि यहां के 32% से ज्यादा मतदाता अमेरिकी-अफ्रीकी मूल के अश्वेत हैं।

इनके अलावा हिस्पैनिक 31.2% हैं, इनमें अश्वेत भी हैं। नस्लवाद विरोधी प्रदर्शन के दौरान बिडेन इनकी सहानुभूति हासिल करने में कामयाब रहे हैं। जॉर्जिया में तीन दिन पहले ही प्राइमरी चुनाव में वोटिंग मशीन खराब होने, गायब होने और उनसे छेड़छाड़ का मामला गरमाया था।



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मौजूदा वक्त में चुनाव होने की स्थिति में बिडेन अमेरिका के 50 राज्यों में से 25 में सीधे-सीधे बढ़त ले चुके हैं, जबकि ट्रम्प सिर्फ 13 राज्यों में स्पष्ट जीत हासिल करते दिख रहे हैं। (फाइल)


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एनआईए ने लश्कर-ए-तैयबा की महिला हैंडलर को हिरासत में लिया, जांच एजेंसी की टीम कोलकाता कार्यालय में उससे पूछताछ करेगी

एनआईए ने पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के लिए जासूसी करने वाली महिलाओं के नेटवर्क का भंडाफाेड़ किया है। उसने कोलकाता में लश्कर-ए-तैयबा की 22 वर्षीय महिला हैंडलर तानिया परवीन को 10 दिन के लिए हिरासत में लिया है। एनआईए की एक टीम कोलकाता कार्यालय में उससे पूछताछ करेगी।

एनआईए सूत्राें ने दावा किया कि तानिया काे एसटीएफ ने पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में बांग्लादेश की सीमा के पास बादुरिया से कुछ हफ्ते पहले एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। वह माैलाना आजाद काॅलेज की छात्रा है।

एक साल से एनआईए निगाह रख रही थी

एनआईए उस पर एक साल से निगाह रख रही थी। वह मुंबई हमले के सरगना और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद सहित पाकिस्तान में कई हैंडलर्स के संपर्क में थी। वह कई सिम कार्ड का उपयोग कर रही थी। साथ ही वाॅट्सएप ग्रुप और फेसबुक के जरिए भी हैंडलर्स से संपर्क में थी।

सूत्राें के अनुसार आईएसआई उसका इस्तेमाल अधिकारियाें काे हनीट्रैप में फांसने और विभिन्न खुफिया सूचनाएं हासिल करने के लिए कर रही थी।

कुलगाम: मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, आईडी बरामद
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के निपाेरा में सुरक्षा बलाें ने शनिवार सुबह मुठभेड़ में दाे आतंकियाें काे मार गिराया। पुलिस के अनुसार सेना, सीआरपीएफ और पुलिस ने शुक्रवार रात काे निपाेरा इलाके की घेराबंदी कर तलाशी शुरू की थी। वहीं बांदीपाेरा जिले में सुरक्षा बलाें ने विस्फाेटक आईईडी का समय रहते पता लगाकर उसे निष्क्रिय कर दिया। सुरक्षा बलाें ने जम्मू-कश्मीर में पिछले एक सप्ताह में 16 आतंकी मार गिराए हैं।



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एनआईए सूत्राें ने दावा किया कि तानिया काे एसटीएफ ने पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में बांग्लादेश की सीमा के पास बादुरिया से कुछ हफ्ते पहले एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। -प्रतीकात्मक फोटो


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बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के करीब पहुंचा मानसून; गुजरात में आज या कल दस्तक दे सकता है

मानसून पश्चिम बंगाल में गंगा के तटवर्ती इलाके और ओडिशा में सक्रिय है। शनिवार को यह मध्य महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों, मराठवाड़ा और विदर्भ के अधिकतर हिस्सों, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों, झारखंड के अधिकांश हिस्सों और बिहार के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ा है।

मध्य अरब सागर के शेष हिस्सों में और उत्तर अरब सागर के कुछ हिस्सों और महाराष्ट्र के शेष हिस्सों (मुंबई सहित), छत्तीसगढ़, झारखंड, दक्षिण मध्य प्रदेश और बिहार के हिस्सों और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों के लिए अगले 24 घंटों के दौरान आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बन रहेहैं। इन इलाकों में मानसून रविवार या सोमवार को दस्तक दे सकता है।

दक्षिण गुजरात सहित प्रदेश में अगले 3 दिन भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल के पर्वतीय हिस्से, सिक्किम, असम, मेघालय, मध्य महाराष्ट्र, कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

मध्यप्रदेश: मानसून पहले होशंगाबाद, जबलपुर और इंदौर में दस्तक देगा

मानसून मप्र में तय समय 15 जून से एक दिन पहले रविवार को पहुंच सकता है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि यह सबसे पहले होशंगाबाद, जबलपुर और इंदौर में दस्तक देगा। मानसून की उत्तरी सीमा हरनेई, अहमदनगर, औरंगाबाद, गोंदिया, चांपा, रांची, भागलपुर से गुजर रही है। इसकी अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी दोनों ब्रांच भी एक्टिव हैं। इस वजह से इसके जल्द ही भोपाल में भी पहुंचने की संभावना बढ़ गई है।

उधर, मानसून की आहट के साथ शनिवार को मालवा-निमाड़, महाकौशल, विंध्य के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। जुन्नारदेव में 100, मेघनगर में 74, हरदा में 73, मंडला में 60 मिमी, खातेगांव में 58 मिमी में बारिश रिकॉर्ड हुई।

सियर जोन, जिसने मानसून को ज्यादा सक्रिय किया, रफ्तार दी
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी हवाएं आपस में 19 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर मध्य भारत के आसपास 6 किमी ऊंचाई तक मिल रही हैं। इसे सियर जोन कहते हैं। इससे मानसूनी गतिविधियां तेज हो जाती हैं।

नॉलेज- ऐसे पता चलता है
मानसून आया... हवा दक्षिणी-पश्चिमी हो। धरती से निकलने वाली गर्मी 200 वॉट प्रति वर्ग मीटर से कम हो। जमीन से 4 से 5 किमी ऊपर नमी हो। बारिश लगातार हो।

अलर्ट- आज यहां बारिश
आलीराजपुर, अनूपपुर, बड़वानी, बैतूल, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, हरदा, जबलपुर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, नरसिंहपुर, सिवनी में रविवार को तेज बारिश के आसार।

भोपाल: शाम को कई इलाकों में हुई बारिश, 3.1 डिग्री गिरा पारा
मानसून की आहट से शहर का मौसम इन दिनों हर शाम बदल जाता है। शनिवार को भी दोपहर तक तो तेज धूप चटकी लेकिन शाम साढ़े 4 बजे तक घने बादल छा गए। शहर के कई इलाकों में करीब 20 मिनट तक बूंदाबांदी हुई। शनिवार को दिन का तापमान, यह शुक्रवार के मुकाबले 3.1 डिग्री कम रहा। मौसम वैज्ञानिक उदय सरवटे ने बताया कि इस दौरान हवा का रुख उत्तर-पश्चिमी था। उत्तर पश्चिमी मप्र में बने हवा के चक्रवाती घेरे के कारण नमी में इजाफा हुआ है।

छत्तीसगढ़:बिलासपुर-रायगढ़ तक पहुंचा

राजधानी रायपुर में सक्रिय मानसून शनिवार को आगे बढ़ते हुए बिलासपुर, जांजगीर चांपा और रायगढ़ के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया। इन इलाकों में बारिश शुरू हो गई है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिन हिस्सों में मानसून अभी नहीं पहुंचा है वहां भी प्री-मानसून की वर्षा होने लगी है। अगले एक-दो दिन में पूरा छत्तीसगढ़ दक्षिण-पश्चिम हवा के प्रभाव में रहेगा। गुरुवार को मानसून ने बस्तर में दस्तक दी और 48 घंटे के भीतर वह बस्तर से बिलासपुर तक पहुंच गया। मानसूनी गतिविधियां तेज हैं। इसलिए अगले एक-दो दिन में दक्षिण-पश्चिम हवा पूरे छत्तीसगढ़ में सक्रिय हो जाएगी।राजधानी में शनिवार-रविवार को शाम-रात में गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है।

बिहार:भागलपुर के रास्ते मानसून पहुंचा, 18 तक पूरे प्रदेश में छाएगा

भागलपुर में हुई बारिश के बाद माैसम विभाग ने शनिवार काे बिहार में मानसून के दस्तक देने की घोषणा कर दी। फिलहाल बिहार में मानसून के कवर हाेने के लिए सिस्टम बना हुआ है। अगले 24 से 30 घंटाें में पटना व इससे सटे जिलाें के साथ ही बिहार के नाॅर्थ ईस्ट के जिलाें सुपाैल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा जिलाें में मानसून की बाैछार हाेगी। पटना में भी सिस्टम बना हुआ है। बूंदा-बांदी हुई है। इससे पहले 2008 में मानसून ने 9 जून काे दस्तक दी थी।अगले तीन दिनाें तक बिहार के 38 जिलाें में गरज के साथ कहीं हल्की ताे कहीं भारी बारिश की चेतवानी दी गई है।

फोटो पटना बिहार की है।

पहले 10 जून थी आने की तिथि, 60 साल बाद बदलाव
बिहार में पहले आने की तारीख 10 जून थी। पर मानसून तय वक्तपर नहीं आ रहा था। इस साल माैसम विभाग ने 60 साल के आंकड़े को परखा, फिर तरीख में बदलाव हुआ। बिहार में 15 जून के बाद तय की है। 2002 से लेकर 2019 तक इन 18 सालाें में केवल चार साल ही ऐसा रहा जब मानसून ने 10-11 जून या इससे पहले दस्तक दी। 2017 से 2019 की बात करें ताे मानसून ने 20 जून के बाद दस्तक दी है।


झारखंड: संथाल के रास्ते मानसून की एंट्री 24 घंटे में पूरे राज्य में छा जाएगा

झारखंड में तय समय से दाे दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी है। शनिवार काे संथाल परगना और पूर्वी सिंहभूम के रास्ते मानसून ने झारखंड में प्रवेश किया। अगले 24 घंटे के भीतर यह पूरे राज्य में छा जाएगा। माैसम विभाग के निदेशक डाॅ. एसडी काेटाल ने मानसून के आगमन की घाेषणा की। उन्हाेंने बताया कि पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, धनबाद, जामताड़ा, देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, खूंटी जिले में मानसून प्रवेश कर गया है। गुमला, हजारीबाग व गिरिडीह के कुछ हिस्सों में भी मानसून की बारिश हाे रही है।

जमशेदपुर में मानसून की पहली बारिश।


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फोटो भोपाल के बड़े तालाब की है। शनिवार को शहर में आंधी के साथ हल्की बारिश हुई। फोटो-अनिल दीक्षित


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शनिवार, 13 जून 2020

कुलगाम के निपोरा इलाके में सुरक्षा बलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया; 13 दिन में 25 आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के निपोरा इलाके में सुरक्षा बलों ने 2आतंकियों को मार गिराया है। सर्च ऑपरेशन जारी है। सिक्योरिटी फोर्सेज ने पिछले कई दिनों से ऑपरेशन चला रखा है। इस महीने 13 दिन में 25 आतंकी मारे जा चुके हैं।

1 जून: नौशेरा सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश करते हुए 3 पाकिस्तानी आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया।

2 जून: पुलवामा के त्राल इलाके में 2 आतंकी मारे गए।

3 जून: पुलवामा के ही कंगन इलाके में सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों को ढेर कर दिया।

5 जून: राजौरी जिले के कालाकोट में एक आतंकवादी मारा गया।

7 जून: शोपियां के रेबन गांव में 5 आतंकी मारे गए।

8 जून: शोपियां के पिंजोरा इलाके में 4 आतंकी ढेर।

10 जून: शोपियां के सुगू इलाके में 5 आतंकी ढेर

13 जून: कुलगाम के निपोरा इलाके में 2 आतंकी मारे गए।

पिछले 2 हफ्ते में आतंकी संगठनों के 6 टॉप कमांडर ढेर
पिछले दिनों हुए एनकाउंटर में रियाज नायकू समेत 6 टॉप कमांडर मारे गए। जम्मू-कश्मीर केडीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक कश्मीर इलाके में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर आतंकी ठिकानों में 150-250 आतंकी हो सकते हैं। जम्मू इलाके में 125-150 आतंकियों के होने का अनुमान है।



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पाकिस्तान से आतंकी घुसपैठ के इनपुट के बाद सुरक्षा बलों ने पिछले महीने से सर्च ऑपरेशन चला रखा है। (फाइल फोटो)


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कामाख्या मंदिर में 500 साल में पहली बार बिना बाहरी साधकों के होगा अंबुवाची उत्सव; बाहरी तांत्रिक, अघोरी भी नहीं आ सकेंगे

लॉकडाउन के कारण असम के शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर का प्रसिद्ध अंबुवाची मेला इस साल नहीं लगेगा। लगभग 500 साल में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब मंदिर के सबसे बड़े पर्व में कोई बाहरी साधक शामिल नहीं होगा। 22 से 26 जून के बीच लगने वाले इस मेले में दुनियाभर से तंत्र साधक, नागा साधु, अघोरी, तांत्रिक और शक्ति साधक जमा होते हैं। लेकिन, इस बार कोरोना वायरस के चलते इस पर्व की परंपराओं को मंदिर परिसर में चंद लोगों की उपस्थिति मेंपूरा किया जाएगा।

गुवाहाटी प्रशासन ने मंदिर के आसपास मौजूद होटलों, धर्मशालाओं और गेस्ट हाउस को भी हिदायत दी है कि फिलहाल वे कोई बुकिंग ना लें। अंबुवाची मेला कामाख्या मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। यहां देवी की पूजा योनि रूप में होती है, माना जाता है अंबुवाची उत्सव के दौरान माता रजस्वला होती हैं, हर साल 22 से 25 जून तक इसके लिए मंदिर बंद रखा जाता है। 26 जून को शुद्धिकरण के बाद दर्शन के लिए खोला जाता है।

अंबुवाची मेला के दौरान हर साल यहां 10 लाख से ज्यादा लोग आते हैं। मंदिर बंद रहता है, लेकिन बाहर तंत्र और अघोर क्रिया करने वाले साधकों के लिए ये समय काफी महत्वपूर्ण होता है, इस समय में वे अपनी साधनाएं करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी मोहित सरमा के मुताबिक परंपराएं वैसी ही होंगी जैसी हर बार होती हैं, बस मेला नहीं लगेगा और बाहरी लोगों का प्रवेश नहीं हो सकेगा।

अंबुवाची मानसून का उत्सव है

अंबुवाची संस्कृत शब्द 'अम्बुवाक्षी' से बना है। स्थानीय भाषा में इसे अम्बुबाची या अम्बुबोसी कहते हैं। इसका अर्थ है मानसून की शुरुआत से पृथ्वी के पानी को सहेजना। यह एक मानसून उत्सव की तरह है।

यहां गिरा था सती का योनि भाग

कामाख्या मंदिर को देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथा है कि सती ने जब अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अग्नि समाधि ले ली थी और उनके वियोग में भगवान शिव उनका जला हुआ शव लेकर तीनों लोगों में घूम रहे थे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव को काट दिया था। जहां-जहां उनके शरीर के अंग गिरे वहां शक्तिपीठ स्थापित हुआ। कामाख्या में सती का योनि भाग गिरा था। तभी यहां कामाख्या पीठ की स्थापना हुई थी। वर्तमान मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी का माना जाता है।

उत्सव के 5 दिन यहां बड़ी संख्या में साधक मौजूद होते हैं। इस दौरान मंदिर के पास स्थिति श्मशान में भी कई तरह की साधनाएं करते हैं। अघोर पंथ और तांत्रिकों के लिए कामाख्या मंदिर सबसे बड़े तीर्थों में से एक है।

तंत्र और अघोर साधकों के लिए मुख्य उत्सव है अंबुवाची

अंबुवाची उत्सव दुनियाभर के तंत्र और अघोरपंथ के साधकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि यहां इस दौरान पराशक्तियां जागृत रहती हैं और दुर्लभ तंत्र सिद्धियों की प्राप्ति आसानी से होती है। 26 जून को जब मंदिर खुलता है तो प्रसाद के रुप में सिंदूर से भीगा हुआ वही कपड़ा यहां दिया जाता है, जो देवी के रजस्वला होने के दौरान उपयोग किया गया था। कपड़े में लगा सिंदूरबहुत ही सिद्ध और चमत्कारी माना जाता है।



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कामाख्या मंदिर को 30 जून तक के लिए बंद रखने का फैसला किया गया है। मंदिर में फिलहाल सन्नाटा है। केवल कुछ पुजारी मंदिर की दैनिक पूजाएं कर रहे हैं।


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पिछले 24 घंटे में 11314 मरीज बढ़े, लेकिन 7269 मरीज ठीक भी हुए, यह 14 दिन बाद दूसरा बड़ा आंकड़ा; देश में 3.09 लाख केस

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 3 लाख 9 हजार 603 हो गई है। शुक्रवार को एक दिन में सबसे ज्यादा 11 हजार 314 मरीज बढ़े और 388 ने जान गंवाई। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं। उधर, स्वस्थ हो रहे मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। कल 7269 मरीज ठीक हुए। ठीक होने वाले मरीजों में यह दूसरा बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 11 जून को 6044 मरीज, 10 जून को 6275 और 29 मई को सबसे ज्यादा 11736 मरीज ठीक हुए थे।
8दिन सेएक्टिव केस से ज्यादा रिकवर केस

तारीख एक्टिव केस रिकवर केस
12 जून 3667 7529
11 जून 4690 6044
10 जून 4523 6275
9 जून 4075 5634
8 जून 3092 5711
7 जून 5430 5191
6 जून 4677 5433
5 जून 4416 4790
4 जून 5162 4390

महाराष्ट्र 1 लाख संक्रमितों वाला देश का पहला राज्य बन गया। पश्चिम बंगाल 10 हजार मरीजों वाला देश का 8वां राज्य हो गया। दिल्ली में एक दिन में सबसे ज्यादा 2123 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। तमिलनाडु में मरीजों की संख्या 40 हजार के पार हो गई।

5 दिन जब सबसे ज्यादा मामले आए

तारीख

केस
12 जून 11314
11 जून 11128
10 जून 11156
9 जून 9979
7 जून 10882

5 राज्यों का हाल
मध्यप्रदेश: यहां शुक्रवार को 202 नए मामले सामने आए और 9 मरीजों की जान गई। राज्य में संक्रमितों का आंकड़ा 10 हजार 443 हो गया है, इनमें से 2802 एक्टिव केस हैं। अब तक 440 मौतें हो चुकी हैं। सरकार ने भोपाल मेंसप्ताह में पांच दिन पूरा शहरखोलने का ऐलान किया। यहांशनिवार-रविवार को जरूरी चीजों की दुकानों को छोड़कर शहर पूरी तरह बंद रहेगा।

यह तस्वीर भोपाल की है। यहां हाई सेंकडरी की परीक्षाएं चल रही हैं। सावधानी के तौर पर क्लास के बाहर सभी स्टूडेंट्स के जूते और सैंडिल उतरवा लिए गए।

उत्तरप्रदेश: यहांशुक्रवार को कोरोना के 528 मामले सामने आए और 20 की जान गई।नोएडा में एक दिन में सबसे ज्यादा 95 मरीज सामने आए। सहारनपुर जिले में संक्रमितों की संख्या 270 हो गई है। राज्य में संक्रमितों की संख्या 12 हजार 616 हो गई है, इनमें से 4642 एक्टिव केस हैं। अब तक 365 लोगों की मौत हुई।

महाराष्ट्र: यहां शुक्रवार को कोरोना के 3493 केस मिले और 127 मरीजों की मौत हुई। मुंबई में 55 हजार से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं।राकांपा नेता और कैबिनेट मंत्री धनंजय मुंडे पॉजिटिव पाए गए।प्रदेश में मरीजों की संख्या 1 लाख 1 हजार 141 हो गई, इनमें से 49 हजार 628 एक्टिव केस हैं। अब तक 3717 की जान गई।

यह तस्वीर मुंबई की है। संक्रमण से एक व्यक्ति की मौत हो गई। कब्रिस्तान में उसके रिश्तेदारों ने अंतिम संस्कार किया। मुंबई में शुक्रवार को 61 लोगों की मौत हुई।

राजस्थान: यहां शुक्रवार को 230 नए मरीज सामने आए और 7 की जान गई। सिरोही में 47, अलवर में 32, जयपुर और जोधपुर में 29-29 मरीज मिले।प्रदेश में अब संक्रमितों की संख्या 12 हजार 68 हो गई है, इनमें से 2785 एक्टिव केस हैं। अब तक 272 लोगों की मौत हुई।

बिहार: यहां शुक्रवार को कोरोना के 148 मामले बढ़े और 1 की मौत हुई। प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 6096 हो चुकी है, इनमें से 2745 एक्टिव केस हैं। अब तक 35 की जान गई। बिहारमें कुल 325 कंटेनमेन जोन हैं। वहीं, 34 कंटेनमेन जोन ग्रीन जोन में बदल दिया गया।



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कुलगाम के निपोरा इलाके में सुरक्षा बलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया; 13 दिन में 25 आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के निपोरा इलाके में सुरक्षा बलों ने 2आतंकियों को मार गिराया है। सर्च ऑपरेशन जारी है। सिक्योरिटी फोर्सेज ने पिछले कई दिनों से ऑपरेशन चला रखा है। इस महीने 13 दिन में 25 आतंकी मारे जा चुके हैं।

1 जून: नौशेरा सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश करते हुए 3 पाकिस्तानी आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया।

2 जून: पुलवामा के त्राल इलाके में 2 आतंकी मारे गए।

3 जून: पुलवामा के ही कंगन इलाके में सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों को ढेर कर दिया।

5 जून: राजौरी जिले के कालाकोट में एक आतंकवादी मारा गया।

7 जून: शोपियां के रेबन गांव में 5 आतंकी मारे गए।

8 जून: शोपियां के पिंजोरा इलाके में 4 आतंकी ढेर।

10 जून: शोपियां के सुगू इलाके में 5 आतंकी ढेर

13 जून: कुलगाम के निपोरा इलाके में 2 आतंकी मारे गए।

पिछले 2 हफ्ते में आतंकी संगठनों के 6 टॉप कमांडर ढेर
पिछले दिनों हुए एनकाउंटर में रियाज नायकू समेत 6 टॉप कमांडर मारे गए। जम्मू-कश्मीर केडीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक कश्मीर इलाके में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर आतंकी ठिकानों में 150-250 आतंकी हो सकते हैं। जम्मू इलाके में 125-150 आतंकियों के होने का अनुमान है।



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पाकिस्तान से आतंकी घुसपैठ के इनपुट के बाद सुरक्षा बलों ने पिछले महीने से सर्च ऑपरेशन चला रखा है। (फाइल फोटो)


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तमिलनाडु में जब 6500 कोरोना केस थे तो इसमें 29% संक्रमितों का सोर्स कोयंबेडू बाजार था, राज्य के लिए यही बाजार सबसे बड़ा कोरोना क्लस्टर साबित हुआ

40 हजार से ज्यादा कोरोनावायरस संक्रमितों के साथ तमिलनाडु देश का दूसरा सबसे संक्रमित राज्य है। शुरुआत में अन्य राज्यों की तरह ही यहां मामलों में सामान्य बढ़ोतरी हो रही थी लेकिन फिर यह इस रेस में लगातार आगे निकलता गया। यह इस हालात में कैसे पहुंचा, यह जानने के लिए थोड़ा पीछे देखें तो 2 बड़े कारण नजर आते हैं- पहला तब्लीगी जमात और दूसरा कोयंबेडू बाजार।

तब्लीगी जमात ने अप्रैल के पहले हफ्ते में तमिलनाडु में अचानक मामले बढ़ा दिए थे, यह कुछ हद तक निंयत्रित भी हो गया था लेकिन कोयंबेडू बाजार ने मई के पहले हफ्ते में इस कदर संक्रमण बढ़ाया कि तमिलनाडु उबर ही न सका। इन्हीं दो कारणों के चलते देशभर में सबसे ज्यादा कोरोना टेस्ट करने के बावजूद तमिलनाडु में पिछले 2 महीनें में टेस्ट पॉजिटिविटी रेट भी लगातार बढ़ती गई।

अप्रैल में जो टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 1% के आसपास थी, वह मई में 4 से 6 के बीच में रही और अब जून में यह 10% तक पहुंच गई है यानी 100 लोगों के टेस्ट में 10 लोग संक्रमित मिल रहे हैं। यह तब हो रहा है जब तमिलनाडु में हर दिन 15 से 17 हजार टेस्ट हो रहे हैं।

अब कहानी जरा शुरू से शुरू करते हैं...

एयरपोर्ट स्क्रिनिंग: 22 फरवरी तक चेन्नई एयरपोर्ट पर सिर्फ 6 देशों से आने वालों की स्क्रिनिंग होती रही, जबकि इस दिन तक 29 देशों में कोरोना पहुंच चुका था
भारत में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग 18 जनवरी से शुरू हुई थी। लेकिन यह सिर्फ 3 एयरपोर्ट पर शुरू हुई। देश का चौथा सबसे व्यस्त रहने वाला चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसमें शामिल नहीं था।

21 जनवरी से चेन्नई को भी इस लिस्ट में शामिल हुआ।इन एयरपोर्ट्स पर महज चीन और हांगकांग से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग के ही आदेश थे। अगले एक महीने तक चेन्नई एयरपोर्ट पर इन्हीं दोनों देशों के पैसेंजरों की स्क्रीनिंग हो रही थी, जबकि 30 जनवरी तक ही 20 देशों में कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हो चुकी थी।

22 फरवरी को चीन और हांगकांग के अलावा नेपाल, इंडोनेशिया, वियतनाम और मलेशिया से आने वाले यात्रियों की भी स्क्रीनिंग शुरू की गई लेकिन इसमें भी इटली और अमेरिका जैसे देश जहां कोरोना पॉजिटिव की संख्या 20-20 से ज्यादा हो गई थी उनका नाम शामिल नहीं था।

इस साल मार्च-अप्रैल के दौरान तमिलनाडु में 2.31 लाख इंटरनेशनल पैसेंजर और 10.50 लाख डोमेस्टिक पैसेंजर का मूवमेंट रहा, जो दिल्ली और महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा है।

4 मार्च को जब देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 27 पहुंच गई, तब सभी इंटरनेशनल फ्लाइट्स की स्क्रीनिंग शुरू की गई। लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी क्योंकि अब विदेशों से लौटे यात्रियों में कोरोना के लक्षण सामने आने लगे थे और मामलों की पुष्टि होने लगी थी। 7 मार्च को यहां कांचीपुरम का रहने वाला एक 45 वर्षीय शख्स ओमान से लौटने के बाद संक्रमित पाया गया। यह तमिलनाडु में संक्रमण का पहला मामला था।

अभी भी यहां भारत के बाकी राज्यों से आ रहे लोगों की स्क्रीनिंग नहीं की जा रही थी। 18 मार्च को जब दिल्ली से लौटे एक शख्स को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद 19 मार्च से चेन्नई एयरपोर्ट पर डोमेस्टिक पैसेंजर्स की भी स्क्रीनिंग शुरू की गई। लेकिन यह भी दिल्ली और केरल से आए यात्रियों तक ही सीमित रही।

दिल्ली मरकज: तमिलनाडु में कोरोना का पहला क्लस्टर
7 अप्रैल को तमिलनाडु स्वास्थ्य सचिव बिला राजेश ने राज्य में कुल 690 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि की थी। इनमें से 637 लोग दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में लगे तब्लीगी जमात के मरकज में शामिल हुए थे। यानी कुल संक्रमितों का 92% हिस्से का सोर्स एक ही था। इस दिन तक राज्य से तब्लीगी जमात में शामिल हुए करीब 1427 लोगों को ट्रैस किया जा चुका था। यह तमिलनाडु में संक्रमण में अचानक बढ़ोतरी का पहला ही मामला था।

तमिलनाडु के वरिष्ठ पत्रकार विवेक टीआर बताते हैं कि तब्लीगी जमात के कारण तमिलनाडु में कोरोना के मामलों में अचानक बढ़ोतरी जरूर हुई थी लेकिन प्रशासन ने कान्टैक्ट ट्रैसिंग और क्वारैंटाइन कर इस क्लस्टर को अच्छे से नियंत्रित कर लिया था, लेकिन कोयंबेडू बाजार से फैला संक्रमण रोकने में सरकार सफल नहीं हो पाई।

मार्च में दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तब्लीगी जमात का मरकज लगा था। इसमें देश-विदेश के पांच हजार से ज्यादा लोग जमा हुए थे। इस मरकज से देशभर के राज्यों में लौटे लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया था।

कोयंबेडू बाजार: पूरे तमिलनाडु में कोरोना फैलने की असल जड़
चेन्नई के बीचोंबीच यह थोक बाजार करीब 65 एकड़ में फैला हुआ है। 1000 से ज्यादा थोक विक्रेता और 2000 से ज्यादा रिटेल दुकानों वाले इस बाजार में आम दिनों में हर दिन एक लाख लोगों का आना जाना होता है। लॉकडाउन के बाद यहां लोगों और व्यापारियों का आना-जाना 50% तक कम हो गया लेकिन फिर भी यह संख्या 40 हजार से ज्यादा ही थी।

एशिया के सबसे बड़े बाजारों में गिने जाने वाले फल, सब्जी, अनाज और फूलों के इस बाजार को चालू रखना प्रशासन की मजबूरी भी थी क्योंकि चेन्नई समेत आसपास के कई जिलों में में खाने-पीने की सप्लाई का यह सबसे बड़ा मार्केट था।

विवेक टीआर के मुताबिक, इतने भीड़भाड़ वाले और बड़े इलाके में फैले इस सब्जी बाजार को चालू रखना ही शायद तमिलनाडु सरकार की सबसे बड़ी गलती रही, क्योंकि यहां से पूरे राज्य में फैले संक्रमितों की कॉटेक्ट ट्रेसिंग नहीं हो सकी और मामले बढ़ते गए।

लॉकडाउन के ठीक एक महीने बाद यानी 24 अप्रैल को इस बाजार में पहला संक्रमित मिला। कॉन्टेक्ट ट्रैसिंग के बाद जब बाजार से लगातार पॉजिटिव मिलते गए तो 5 मई को पूरा बाजार बंद कर दिया गया।

हालत यह थी कि जब 9 मई को तमिलनाडु में कोरोना संक्रमितों की संख्या 6500 पहुंची तो इसमें 1867 मामले कोयंबेडू बाजार से जुड़े हुए थे। यानी कुल मामलों का 29% हिस्सा महज एक इलाके से जुड़ा हुआ था। चेन्नई समेत आसपास के दो जिलों- चेंगलपट्टू, तिरूवल्लुर से लेकर 200 किमी दूर तक के जिले कुड्डालोर जिले में इस बाजार से लौटने वालों मेंकोरोना संक्रमण पाया गया।

9 मई तक चेन्नई के 10 जिलों में कोयंबेडू बाजार से लौटे लोग संक्रमित पाए गए थे। इस दिन के बाद इस बाजार से जुड़े कितने लोग संक्रमित पाए गए, इसका डेटा नहीं है लेकिन स्थानीय मीडिया में चर्चा है कि इस बाजार से 10 हजार से ज्यादा संक्रमित हुए।

दिल्ली, मुंबई की तरह ही चेन्नई भी घनी आबादी वाला शहर
विवेक टीआर यह भी बताते हैं कि दिल्ली, मुंबई की तरह ही चेन्नई भी घनी आबादी वाला शहर है। यही तीनों शहर कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं। कोलकाता और बैंगलुरू जैसे शहर इस लिस्ट में इसलिए नहीं जुड़ पाए क्योंकि वहां उस स्तर पर टेस्टिंग नहीं हो पाई।

विवके यह भी कहते हैं कि तमिलनाडु में ज्यादातर टेस्टिंग चेन्नई तक सीमित रही। दूसरे जिले नजरअंदाज किए जा रहे हैं। ये राज्य के लिए और बुरा साबित हो सकता है।

कोरोना से सबसे कम मृत्यू दर का दावा करती है तमिलनाडु सरकार
तमिलनाडु कोरोना से दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य जरूर है लेकिन जिस दर से नए मामले सामने आ रहे हैं उसकी तुलना में यहां कोरोना से होने वाली मौतें बहुत कम हैं।

पॉलिटिकल एनालिस्ट डॉ. सुमंत सी रमन बताते हैं कि यहां बुजुर्गों के मुकाबले युवा लोगों में संक्रमण ज्यादा फैला है और युवाओं पर कोरोना का असर कम ही देखा गया है। मौत की दर कम होने का यह एक कारण हो सकता है।

डॉ. सुमंतराज्य में कोरोना से कम हो रही मौतों को टेस्टिंग से जोड़कर भी देखते हैं। वे बताते हैं कि अन्य राज्यों की तुलना में तमिलनाडु में कोरोना के टेस्ट ज्यादा हो रहे हैं। बाकी राज्यों में लक्षण दिखाई देने पर ही टेस्टिंग हो रही है, कई मामलों में तो सामान्य लक्षण दिखने पर टेस्टिंग न होने की भी खबरें आ रही हैं, ऐसे में इन राज्यों में गंभीर स्थिति में पहुंच चुके संक्रमितों की ही टेस्टिंग होती है, जिन्हें बचा पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वहां कोरोना से मृत्यू दर अधिक है, जबकि तमिलनाडु में सामान्य लक्षण और संक्रमितों के संपर्क में आने पर भी टेस्ट हो रहे हैं। समय रहते संक्रमित हॉस्पिटल में पहुंच जाते हैं, इससे मौतों की दर कम हो जाती है। डॉ. सुमंत यह भी बताते हैं किराज्य में कई ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि कोरोना संक्रमित की मौतों को छिपाया जा रहा है।

हाल ही में ग्रेटर चेन्नई कार्पोरेशन के रजिस्टर में दर्ज कोरोना से हुई मौतों और राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय में दर्ज मौतों में 236 मौतों का अंतर आया था। इस पर जांच चल रही है।

जुलाई के दूसरे हफ्ते तक कुल संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख पहुंचने का अनुमान, कितना तैयार है तमिलनाडु?
डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने तमिलनाडु में जुलाई के दूसरे हफ्ते तक कुल संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। डॉ. सुमंत सी रमन कहते हैं कि राज्य में अब हर दिन डेढ़ हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार हॉस्पिटल बेड की क्षमता भी लगातार बढ़ा रही है। लेकिन जिस तरह से नए मामले सामने आने लगे हैं, उस हिसाब से बेड और वेटिलेटर्स की कमी का सामना करना पड़ेगा।

फिलहाल, यहां हर प्राइवेट हॉस्पिटल को भी कम से कम 5 बेड हमेशा उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। कोविड के लिए बनी तमिलनाडु सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर देखें तो ऐसे 161 प्राइवेट हॉस्पिटल्स में खाली पड़े बेड और वेटिंलेटर की संख्या दी गई है। फिलहाल ज्यादातर हॉस्पिटल्स में खाली बेडो की संख्या 0 से 10 के बीच हैं। कुछ में यह संख्या 100 से ज्यादा भी है। लेकिन इन प्राइवेट हॉस्पिटलों में उपलब्ध वेंटिलेटर्स की कुल संख्या करीब 500 ही है।



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कोयंबेडू बाजार चेन्नई के बीचोंबीच करीब 65 एकड़ में फैला हुआ है। मई के पहले हफ्ते में यह तमिलनाडु में कोरोना का सबसे बड़ा हॉट स्पॉट बनकर उभरा था।


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वेटेरन और वॉर हीरोज के जन्मदिन को खास बनाने खुद एयरफोर्स चीफ करते हैं फोन, घर पर केक लेकर जाते हैं ऑफिसर्स

भारतीय वायुसेना अमेरिका, चीन और रूस के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है। एयरफोर्स अपने जांबाजों और उनके योगदान को कभी नहीं भूलती और यही जताने के लिए अब वो अपने वॉर हीरोज, वेटेरन के जन्मदिन को एक अलग अंदाज में मना रही है।

वायुसेना के सबसे उम्रदराज रिटायर्ड वॉरंट ऑफिसर पीडी पांडियन ने हाल ही में अपना 100वां जन्मदिन मनाया है। तमिलनाडु के थूथुकुडी में रहने वाले पांडियन के 100वें जन्मदिन पर एयरफोर्स के ऑफिसर उनके घर केक लेकर पहुंचे थे। यही नहीं इस मौके पर खुद वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने उन्हें फोन कर जन्मदिन की बधाई दी और वायुसेवा में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

पांडियन कहते हैं, ‘मुझे तो पता ही नहीं था कि त्रिवेंद्रम से एयरफोर्स के ऑफिसर मेरे घर आकर मेरे जन्मदिन को इस तरह यादगार बना देंगे। खुद एयरफोर्स चीफ ने कॉल किया तो मैं सचमुच भावुक हो गया। यह जानकर खुशी हुई कि एयरफोर्स अपने वेटेरन को कभी नहीं भूलती है।’

31 साल में हजारों वायुसैनिकों को किया प्रशिक्षित
पांडियन 1944 में रॉयल इंडियन एयर फोर्स में बतौर एयरक्राफ्टमैन भर्ती हुए और 1975 में 55 साल की उम्र में ग्राउंड ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर के रूप में रिटायर्ड हुए। भर्ती होने से पहले, वे दो साल तक एक स्कूल में बतौर शिक्षक पढ़ाया करते थे। अपनी 31 सालकी सर्विस में पांडियन ने हजारों वायुसैनिकों को प्रशिक्षित किया है।

पांडियन अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने दक्षिणी कमान वॉलीबॉल टीम को लीड किया और विजयवाड़ा दक्षिण रेलवे संस्थान वॉलीबॉल टीम के कोच भी रहे। वो कहते हैं, ‘मेरे लिए यह खुशी की बात है कि मैं इतनी लंबी उम्र जी रहा हूं। इसके लिए मैंने अपनी हेल्थ, डाइट और फिटनेस का खास ख्याल रखा है। वो कहते हैं, ‘मैं अपने समय में एक सख्त ट्रेनर था इसलिए मुझे अपने साथियों के बीच रफ एंड टफ व्यक्ति कहा जाता था। मैं आज भी अपने दिन की शुरुआत आसपास साफ-सफाई से करता हूं। रोजअखबार पढ़ता हूं और एक्सरसाइज करता हूं।’

अपने 100वें जन्मदिन पर केक काटते पीडी पांडियन।

पांडियन के बेटे जैकब जबराज कहते हैं कि, ‘अगर दस साल पहले पापा को चिकनगुनिया नहीं होता तो वो इस उम्र में भी बॉलीवॉल खेल सकते थे। चिकनगुनिया और डायबिटीज के उपचार के दौरान उनके दाहिने पैर के 20 फीसदी हिस्से में लकवा मार गया।’ जैकब के मुताबिक उनके पापा आज भी वक्त के पाबंद हैं, अपना हर काम खुद और तय समय पर करते हैं। वे रोज बगैर शीशा देखे 3 मिनट में खुद शेविंग करते हैं। कोरोना के इस दौर में उन्होंने लॉकडाउन का बखूबी पालन किया और लोगों को भी प्रेरित किया। उन्होंने खुद मशीन से सिलाई कर पांच फेस मास्क भी बनाए हैं।

ब्रिटिश आरआईएएफ के दौर को याद करते हुए पांडियन कहते हैं, तब ट्रेनिंग अलग होती थी, आज की तुलना में काफी ज्यादा मुश्किल। तब भारतीय और ब्रिटिश सोल्जर्स की सैलरी में भी काफी असमानता थी। एक अंग्रेज फिजिकज ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर को 1 हजाररुपए महीना वेतन मिलता था जबकि उसी रैंक के एक भारतीय को महज 40 रुपए वेतन दिया जाता था। उस दौर में ब्रिटिशर्स को आगे की लाइन में गद्दीदार कुर्सियां दी जाती थीं और भारतीयों को लकड़ी की बेंच पर बैठाया जाता था।

12 मई को वायुसेना ने रिटायर्ड कमोडोर खेड़ा के 100वें जन्मदिन पर बधाई दी

इससे पहले 12 मई कोवायुसेना ने रिटायर्ड कमोडोर मलिक सिंह खेड़ा के 100वें जन्मदिन पर बधाई दी थी। इसी तरह पिछले साल भी 30 अक्टूबर को इंडियन एयर फोर्स की ओर से रिटायर्ड एयर मार्शल पीवी अय्यर के 90वें जन्मदिन पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें अय्यर जिम में पुशअप्स करते दिख रहे थे। वायुसेना ने ट्वीट में लिखा भी था - "एयर मार्शल बहुत लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। उन्होंने साबित किया है कि उम्र तो महज एक नंबर है।’



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भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड वॉरंट ऑफिसर पीडी पांडियन का 100वां जन्मदिन मनाते ऑफिसर्स।


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दुनिया पर चीन की 5 ट्रिलियन डॉलर की उधारी; 150 देशों को ही चीन ने जितना लोन दिया, उतना तो वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ ने नहीं दिया

महिंदा राजपक्षे। 2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे और अब प्रधानमंत्री हैं। राजपक्षे को देश में तीन दशकों से जारी गृहयुद्ध को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है। लेकिन, राजपक्षे के ही दौर में श्रीलंका सबसे ज्यादा कर्ज के बोझ में दब गया।

राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका की भारत से दूरी और चीन से नजदीकियां बढ़ीं। इन नजदीकियों का फायदा श्रीलंका ने कम और चीन ने ज्यादा उठाया। राजपक्षे के राष्ट्रपति रहते ही श्रीलंका में हम्बनटोटा बंदरगाह प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट के लिए 2007 से 2014 के बीच श्रीलंकाई सरकार ने चीन से 1.26 अरब डॉलर का कर्ज लिया। ये कर्ज एक बार में नहीं बल्कि 5 बार में लिया गया।

हम्बनटोटा बंदरगाह पहले से ही चीन-श्रीलंका मिलकर बना रहे थे। इसे चीन की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी हार्बर इंजीनियरिंग ने बनाया है। जबकि, इसमें 85% पैसा चीन के एक्जिम बैंक ने लगाया था।

लगातार कर्ज लेने का नतीजा ये हुआ कि श्रीलंका पर विदेशी कर्ज बढ़ता गया। ऐसा माना जाता है कि कर्ज बढ़ने की वजह से श्रीलंका को दिसंबर 2017 में हम्बनटोटा बंदरगाह चीन की मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को 99 साल के लिए लीज पर देना पड़ा। बंदरगाह के साथ ही श्रीलंका को 15 हजार एकड़ जमीन भी उसे सौंपनी पड़ी। ये जमीन भारत से 150 किमी दूर ही है।

इस पूरे वाकये को एक मिसाल के तौर पर पेश किया जाता है कि कैसे चीन पहले छोटे देश को इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर कर्ज देता है। उसे अपना कर्जदार बनाता है। और फिर बाद में उसकी संपत्ति को कब्जा लेता है।

ये तस्वीर हम्बनटोटा बंदरगाह की है। जब श्रीलंका-चीन ने मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया, तब भी श्रीलंका में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। उस समय जानकारों ने इस प्रोजेक्ट को सबसे खराब भी बताया था।

इसे कहते हैं 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी'
इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के नाम पर पहले कर्ज देना और फिर उस देश को एक तरह से कब्जालेना, इसे 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' कहते हैं। ये शब्द चीन के लिए ही इस्तेमाल होता है। इस पर चीन तर्क देता है कि इससे छोटे और विकासशील देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। जबकि, उसके विरोधी मानते हैं कि चीन ऐसा करके छोटे देशों को कब्जारहा है।

अमेरिकी वेबसाइट हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट बताती है कि, चीन शुरू से ही छोटे देशों को कर्ज देता रहा है। 1950 और 1960 के दशक में चीन ने बहुत से छोटे-छोटे देशों को कर्ज दिया। ये ऐसे देश थे, जहां कम्युनिस्ट सरकारें थीं।

जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी ने वर्ल्ड इकोनॉमी पर जून 2019 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके मुताबिक, 2000 से लेकर 2018 के बीच देशों पर चीन की उधारी 500 अरब डॉलर से बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर हो गई। आज के हिसाब से 5 ट्रिलियन डॉलर 375 लाख करोड़ रुपए होते हैं।

इन सबके अलावा भी हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट कहती है कि चीन की सरकार और उसकी कंपनियों ने 150 से ज्यादा देशों को 1.5 ट्रिलियन डॉलर यानी 112 लाख 50 हजार करोड़ रुपए का लोन भी दिया है। इस समय चीन दुनिया का सबसे बड़ा लेंडर यानी लोन देने वाला देश है। इतना लोन तो आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक ने भी नहीं दिया। दोनों ने 200 अरब डॉलर (15 लाख करोड़ रुपए) का लोन दिया है।

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो दुनियाभर की जीडीपी का 6% बराबर कर्ज चीन ने दूसरे देशों को दिया है।

फोटो क्रेडिट : कील यूनिवर्सिटी

एक दर्जन देशों पर उनकी जीडीपी का 20% से ज्यादा कर्ज चीन ने दिया

  • हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 में चीन ने 50 से ज्यादा देशों को उनकी जीडीपी का 1% या उससे भी कम कर्ज दिया था, लेकिन 2017 के आखिर तक चीन उनकी जीडीपी का 15% से ज्यादा तक कर्ज देने लगा।
  • इनमें से जिबुती, टोंगा, मालदीव, कॉन्गो, किर्गिस्तान, कंबोडिया, नाइजर, लाओस, जांबिया और मंगोलिया जैसे करीब दर्जन भर देशों को चीन ने उनकी जीडीपी से 20% से ज्यादा कर्ज दिया है।

सबसे ज्यादा कर्ज अफ्रीकी देशों को
कर्ज देने के लिए चीन की पहली पसंद अफ्रीकी देश हैं। इसका कारण है कि ज्यादातर अफ्रीकी देश गरीब और छोटे हैं और विकासशील भी।

अक्टूबर 2018 में आई एक स्टडी बताती है कि हाल के कुछ सालों में अफ्रीकी देशों ने चीन से ज्यादा कर्ज लिया है। 2010 में अफ्रीकी देशों पर चीन का 10 अरब डॉलर (आज के हिसाब से 75 हजार करोड़ रुपए) का कर्ज था। जो 2016 में बढ़कर 30 अरब डॉलर (2.25 लाख करोड़ रुपए) हो गया।

अफ्रीकी देश जिबुती, दुनिया का इकलौता कम आय वाला ऐसा देश है, जिस पर चीन का सबसे ज्यादा कर्ज है। जिबुती पर अपनी जीडीपी का 80% से ज्यादा विदेशी कर्ज है। इसमें भी जितना कर्ज जिबुती पर है, उसमें से 77% से ज्यादा कर्ज अकेला चीन का है। हालांकि, कर्ज कितना है? इसके आंकड़े मौजूद नहीं है।

सिर्फ कर्ज ही नहीं, इन्वेस्टमेंट भी कर रहा है चीन

  • पिछले साल जून में यूएन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में दुनियाभर के देशों ने 1.3 ट्रिलियन डॉलर (आज के हिसाब से 97.50 लाख करोड़ रुपए) का इन्वेस्टमेंट किया था। ये आंकड़ा 2017 की तुलना में 13% कम था।
  • दुनिया के कई देशों ने 2018 में अपना इन्वेस्टमेंट घटा दिया था। इसके उलट दूसरे देशों में चीन का इन्वेस्टमेंट 4% तक बढ़ा था। चीन ने 2017 में 134 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया था और 2018 में 139 अरब डॉलर का। जबकि, अमेरिका का इन्वेस्टमेंट घटकर 252 अरब डॉलर हो गया था।

हमारे पड़ोसियों को भी कर्ज तले दबा रहा है चीन
2013 से चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़क, रेल और समुद्री रास्ते से जोड़ना है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 75 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। चीन के इस प्रोजेक्ट को जो देश समर्थन दे रहा है, उनमें से ज्यादातर अब चीन के कर्जदार बन गए हैं।

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर या सीपीईसी भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस पर चीन और पाकिस्तान दोनों मिलकर काम कर रहे हैं। ये कॉरिडोर चीन के काशगर प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ता है। इसकी लागत 46 अरब डॉलर (करीब 3.50 लाख करोड़ रुपए) है। इसमें भी करीब 80% खर्च अकेले चीन कर रहा है। नतीजा-पाकिस्तान धीरे-धीरे चीन का कर्जदार बनता जा रहा है। आईएमएफ के मुताबिक, 2022 तक पाकिस्तान को चीन को 6.7 अरब डॉलर चुकाने हैं।

फोटो क्रेडिट : GISreportsonline.com

इसी तरह नेपाल भी चीन के इस प्रोजेक्ट का समर्थन कर रहा है। पिछले साल अक्टूबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो दिन के दौरे पर नेपाल गए थे। ये 23 साल बाद पहला मौका था, जब चीन के किसी राष्ट्रपति ने नेपाल का दौरा किया। इस दौरे में जिनपिंग ने नेपाल को इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 56 अरब नेपाली रुपए (35 अरब रुपए) की मदद देने का ऐलान किया था।

पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका की तरह बांग्लादेश भी चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट का हिस्सा है। जनवरी 2019 तक चीन और बांग्लादेश के बीच 10 अरब डॉलर का कारोबार हो रहा था। ऐसा अनुमान है कि 2021 तक दोनों देशों के बीच 18 अरब डॉलर का कारोबार होने लगेगा। बांग्लादेश का चीन के प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना इसलिए भी चिंता का कारण है क्योंकि ये कोलकाता के बेहद करीब से गुजरेगा।

क्या भारत पर भी चीन का कर्ज?
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2019 तक भारत पर 40 लाख 18 हजार 389 करोड़ रुपए का विदेशी कर्ज है। हालांकि, किस देश का कितना कर्ज है? इसके आंकड़े नहीं मिल सके हैं।

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