बुधवार, 6 जनवरी 2021

पढ़िए, इस हफ्ते की मधुरिमा की सारी स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

बच्चे जो भी सीखते हैं, अपने माता-पिता और घर के माहौल से सीखते हैं। ऐसे में अगर वे आपस में किसी बात पर जब असहमति या नाराजगी जताते हैं, तो बच्चे के मन पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इससे बच्चे पर कैसा और क्या-क्या असर हो सकता है, इस लेख में पढ़िए...

दवाइयों का हमेशा सोच समझकर सेवन करना चाहिए। अमूमन लोग डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई खा लेते हैं। इसलिए दवाई के पत्तों या डिब्बों पर कुछ निशान बने होते हैं, जो दवाई खरीदने के नियम बताते हैं। इनकी जानकारी के लिए ये लेख पढ़िए...

दैनिक जीवन को कुछ चीजें भले सुगम बनाती हैं, लेकिन सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसमें से एक है नेफ्थलीन की गोलियां, जिसके बारे में इस लेख में पढ़िए...

खुद के शौक और कला को सोशल मीडिया पर पोस्ट करती हैं, तो इसे यहीं तक सीमित मत रखिए। अपनी कला को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के साथ-साथ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनिए। ये आय का जरिया बनेगा और आप कई महिलाओं की प्रेरणा बनेंगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनाने के लिए पढ़ें ये लेख...

जब दूसरे विश्व युद्ध में जापान के विरुद्ध अमेरिका ने परमाणु बम का इस्तेमाल किया, तब जापान के दो शहर खंडहरों की तस्वीर बन गए। आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। इसके बावजूद जापान चंद वर्षों में दुनिया के विकसित और औद्योगिक क्षमताओं से भरपूर देशों की पंक्ति में अग्रणी हो गया। इस तथ्य से जुड़ी एक प्रेरक कथा यहां पढ़िए...

सुमित्रा भी पति के साथ घर गृहस्थी के खर्च में हाथ बंटाती थी। वह सिर्फ बच्चों की ही नहीं, बल्कि रोहन की पढ़ाई को लेकर भी परेशान रहती। परिवार को साथ लेकर चलने की कोशिश में वो हर कदम पर त्याग किए जा रही थी पर सच में परिवार को एक साथ बांध सकी थी? पढ़िए इस लेख में...

हरदयाल जी ने कई साल पहले एक लड़की की मदद की थी, जिसे वे तो भूल गए थे। लेकिन संजना को आज भी उनकी वो मदद याद थी और आज वही मदद हरदयाल जी के लिए बहुत बड़ी राहत बनकर लौटी थी। पढ़िए इस लेख में...

माइंडफुल वॉकिंग से मस्तिष्क हल्का रहता है। इसे करने से चीजों के प्रति गहरी समझ या बारीकी से सोचने की क्षमता विकसित होती है। इसे कैसे करना है पढ़िए इस लेख में...

देश का पहला पॉलीनेटर पार्क विकसित किया गया है। यहां तितली, मधुमक्खी, विभिन्न कीट और पक्षियों की 40 प्रजातियों को संरक्षित किया गया है। पार्क में और क्या है खास पढ़िए इस लेख में...

अनुभव हर किसी के जीवन में होते हैं, फिर चाहे वो बड़ा हो या बच्चा, लेकिन एक लेखक के तौर पर आपकी सफलता इसी बात पर निर्भर करती है कि कितने अधिक लोग आपके अनुभव, आपकी रचना से जुड़ाव महसूस करते हैं। लेखन की बारीकियों को समझने के लिए पढ़िए इस लेख को...​​​​​​​

आजकल अमूमन सभी नॉन स्टिक पैन में भोजन पकाते हैं। लेकिन इस तरह के बर्तनों को इस्तेमाल करते समय खास ख्याल रखना जरूरी होता है, ताकि कई शारीरिक समस्याओं से बचा जा सके। अधिक जानकारी के लिए पढ़िए ये लेख...​​​​​​​

महिलाओं को अक्सर कंजूस कहा जाता है, जबकि घर-परिवार की सारी जिम्मेदारी व प्रबंधन वे बखूबी संभाल लेती हैं। फिर भी उनके कंजूसी करने की वजह क्या है, साथ ही कंजूसी करने के क्या फायदे हैं, जानिए इस लेख में...​​​​​​​

हम सभी लोग दिनभर में न जाने कितने लोगों से मुलाकात करते हैं, लेकिन कुछ लोग हमें याद रह जाते हैं, इसका कारण होता है उनका आकर्षक व्यक्तित्व। यदि आप भी आकर्षक व्यक्तित्व पाना चाहते हैं तो कुछ खास बातों का ख्याल रखकर अपनी पर्सनैलिटी को निखार सकते हैं। पढ़िए इस लेख में...​​​​​​​

पत्नियों की अक्सर ये शिकायत रहती है कि उनके पति उनसे झूठ बोलते हैं या बातें छुपाते हैं। कई बार वे कुछ छुपाने या गलत इरादे के लिए ऐसा नहीं करते, बल्कि वे ऐसा पत्नियों को खुश रखने के लिए करते हैं। पति क्या-क्या झूठ बोलते हैं और ऐसा क्यों करते हैं, पढ़िए इस लेख में...

शहरों के विस्तार ने घरों को छोटा कर दिया है। ऐसे में घर को खूबसूरत बनाने के लिए सही जमावट के साथ घर की सही सजावट करना एक चुनौती बन गई है। आप भी अपने घर को खूबसूरत बनाने के लिए सजावट करना चाहते हैं, तो इन तरकीबों को अपना लीजिए। पढ़िए इस लेख में...

सुनील कोठारी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की शिक्षा ली थी, लेकिन बाद में उनकी रुचि नृत्यों के प्रति जागी और उन्होंने सारा जीवन उन्हीं को समर्पित कर दिया। इसके अलावा अलग-अलग नृत्यों को जानने के लिए उन्होंने क्या-क्या किया, पढ़िए इस लेख में....​​​​​​​

आज के युग में मेकअप की परिभाषा काफी बदल गई है। अब सिर्फ सुंदर दिखने के लिए ही नहीं, बल्कि सबसे अलग और नए अंदाज में दिखने में मेकअप में प्रयोग किए जाते हैं। आज के दौर में संवरने के नए तरीकों को जानने के लिए पढ़िए ये लेख...

भोजन गर्म रखने वाला एल्यूमीनियम फॉयल शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है। इसका अधिक इस्तेमाल कई बीमारियों को बुलावा दे सकता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़िए ये लेख...​​​​​​​

गुड़ के मिष्ठान और चाय के स्वाद से तो लगभग सभी परिचित हैं, लेकिन गुड़ के पराठे और हलवे का स्वाद लेकर भी देखिए। रेसिपी जानने के लिए पढ़ें ये लेख...​​​​​​​

क्रीम से भरा बन मस्का का स्वाद काफी पसंद किया जाता है। अगर आप भी इसके स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो घर पर ही बना सकते हैं स्वादिष्ठ बन मस्का, रेसिपी के लिए पढ़िए लेख ... ​​​​​​​

घर को व्यवस्थित करने के लिए फर्नीचर की आवश्यकता कभी भी पड़ जाती है। ऐसे में अपनी जरूरत के मुताबिक इन्हें स्वयं बना लें। कैसे बनाना है, इस लेख से जानिए... ​​​​​​​

अगर आप भी करते हैं डिस्पोजेबल कप और प्लेट का इस्तेमाल, तो सतर्क हो जाएं। इससे सेहत को कैसे नुकसान पहुंच सकता है, इस लेख में पढ़िए...​​​​​​​

इन मजेदार चुटकुलों को पढ़ कर आप भी हो जाएंगे हंस-हंस कर लोटपोट। इन्हें खुद भी पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ाएं...​​​​​​​

कई बार बैठकर जब अचानक उठते हैं, तो चक्कर सा महसूस होता है। ऐसे में इसका निदान क्या है, इस लेख में पढ़िए...​​​​​​​



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भाजपा का मूल मंत्र है- प्रतीकों और धार्मिक भावनाओं का नशीला विमर्श

2021 में राष्ट्रीय स्तर वाली राजनीति में कोई खास हलचल नहीं होगी। एक तरह की जड़ता जारी रहेगी क्योंकि ऐसा विपक्ष नदारद है जो दिल्ली की राजनीति में हलचल तो छोड़िए, एक ढंग की बहस भी छेड़ पाए। नए साल में विधानसभा चुनावों का रोमांच होगा। सबसे पहले बात बंगाल की। इसे जीतना भाजपा का ड्रीम प्रोजेक्ट है।

यहां 27% की मुस्लिम आबादी भाजपा को वो स्क्रिप्ट लिखने की ज़मीन देती है, जिसमें भाजपा की महारत है- ध्रुवीकरण। उधर ममता के खिलाफ एंटी इंकम्बेन्सी का मूड है, लेकिन ममता का जुझारूपन भी कम नहीं। भाजपा यहां जनाधार बढ़ाने के लिए ममता पर तुष्टिकरण, बांग्लादेशी लोगों का आना, भ्रष्टाचार की बातें करती रही है। लेकिन पार्टी कैडर खड़ा करना अभी चुनौती है। इसीलिए टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को तोड़कर भाजपा में लाना उसकी एक बड़ी रणनीति है।

भाजपा यहां भी मुख्यमंत्री का चेहरा पहले नहीं बता पाएगी। इसलिए ये चुनाव दीदी बनाम मोदी ही होगा। 2019 में भाजपा को 18 लोकसभा सीटें और 40% वोट मिले थे। लेकिन ये कहानी दोहरा पाना मुश्किल है। इससे पहले 2016 की विधानसभा में भाजपा को 10% वोट मिले जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उसने 17% का आंकड़ा छू लिया था।

ताज़ा सर्वे बताते हैं कि फिलहाल टीएमसी भाजपा से आगे है। बंगाल का चुनाव त्रिकोणात्मक होगा। लेकिन कई सीटों पर एआईएमआईएम भी होगी। यानी मुस्लिम बहुल 125 सीटों पर वोट बंटने की संभावना है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब तक लिबरल मिज़ाज का बंगाल क्या भाजपा की व्याख्या वाले हिंदुत्व को अपना लेगा।
तमिलनाडु चुनाव में भाजपा किंग मेकर बनने के लिए उतर रही है। बड़ी महत्वाकांक्षा है कि द्रविड राजनीति में पहली बार बड़ी ग़ैर द्रविड पार्टी बड़े रोल में उतरे। इसके लिए उत्तर भारत की हिंदी भाषी पार्टी, तमिल दिखना चाहती है। एक उदाहरण पर गौर कीजिए- प्रधानमंत्री मोदी का तमिलनाडु फ़ोकस। शी जीनपिंग का स्वागत तमिलनाडु में, मोर के साथ तस्वीर, जो मुरुगन का वाहन है।

भाजपा का मूल मंत्र है- प्रतीकों और धार्मिक भावनाओं का नशीला विमर्श। इसीलिए अगर तमिलनाडु में उत्तर का ‘जय श्रीराम’ नहीं चलेगा तो ये लो- मुरुगन यानी गणेश के भाई कार्तिकेय। ज्यादातर तमिल मुरुगन को इष्टदेव मानते हैं।
नए तमिलनाडु की राजनीति की धुरी हैं पेरियार। द्रविड़ उभार के जनक थे। जातीय विषमता के खिलाफ संघर्ष और समाज सुधार के आंदोलन के इस प्रणेता को भी भाजपा कैसे अपना बना ले, ये भी एक समानांतर कथा चल रही है। भाजपा का गेम प्लान यहां डीएमके-कांग्रेस को सत्ता में वापस आने से रोकना है।

एआईएडीएमके के खिलाफ एंटी इंकम्बेन्सी है। भाजपा की कोशिश है, लोकल नेताओं का अधिग्रहण कर उन्हें भाजपा के टिकट पर लड़ाए। कर्नाटक के बाद तमिलनाडु में मौजूदगी बढ़ती है, तभी उत्तरी राज्यों पर उसकी निर्भरता कम होती है, ये मूल आइडिया है।
डीएमके, लेफ्ट व कांग्रेस गठजोड़ मजबूत है लेकिन करुणानिधि के बाद उसका ये पहला चुनाव है। एमके स्टालिन करुणानिधि के राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं। इसलिए उनके नाराज़ भाई अलगिरी भाजपा के साथ जुगलबंदी में रहेंगे। एक गुत्थी है जो कुछ दिनों में साफ़ हो जाएगी। जयललिता की हमराज़ शशिकला ने जेल से छुट्टी मांगी है। मुख्यमंत्री ई पालनिसामी और ओ पन्नीरसेलवम, दोनों ही उनके कृपापात्र थे। उनका साथ छोड़ा और उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया। शशिकला के भाई ने एक नई पार्टी बना ली, अब शशिकला का राजनीतिक औज़ार वही पार्टी होगी। तमिलनाडु इस बार पक्के तौर पर नए समीकरण देखने जा रहा है। देखना यह होगा कि गैर द्रविड़ राजनीतिक किरदारों को ये राज्य कितनी जगह देता है।
केरल में लेफ्ट फ्रंट को हराना भाजपा का पुराना सपना है। मुस्लिम व ईसाई केरल में बड़ा फैक्टर हैं। यहां विडंबना देखिए- कम्युनिस्ट पार्टियां व भाजपा जानी दुश्मन हैं। लेकिन यहां लेफ्ट फ्रंट का बड़ा जनाधार हिंदू वोटर हैं। यानी भाजपा को पनपना है तो उसे लेफ्ट फ्रंट के वोटरों को लुभाना है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ भी मजबूत है। लेकिन भाजपा का आक्रामक अभियान इस बार अनिश्चित नतीजों वाला त्रिकोणात्मक खेल बना सकता है।
2021 के राज्य चुनावों में भाजपा जीती तो ये रिपोर्ट कार्ड में एक और ऐतिहसिक साल के रूप में दर्ज होगा। लेकिन एक मायने में ये राज्य चुनाव अहम हैं कि इसे काफी लोग लोकसभा की ड्रेस रिहर्सल के रूप में देखेंगे क्योंकि उत्तर के कई राज्यों में भाजपा उच्चतम ग्राफ़ छू चुकी है।

वहां के संभावित नुकसान की भरपाई के लिए इन ग्रीन फ़ील्ड इलाक़ों में जीतना भाजपा के लिए ज़रूरी है। 2021 के राज्य चुनाव नतीजों का आकार प्रकार जैसा भी हो, एक बात पक्की है। भाजपा ने चुनाव शास्त्र को जिस कल्पनातीत स्तर पर पहुंचा दिया है, उसके नए एपिसोड जारी रहेंगे और विपक्ष इस शास्त्र को समझने में इस साल भी संघर्षरत ही रहेगा। (ये लेखक के अपने विचार हैं)



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संजय पुगलिया, ‘दि क्विंट’ के संपादकीय निदेशक


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अब समय है कि भारत खुद को समाजवाद के पंजे से मुक्त करे और वैसी संपन्नता हासिल करे

आरंभ से ही मेरा मत रहा है कि कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था को लगे धक्के से पूरी तरह उबारने के लिए हमें नागरिकों के आवागमन को पहले जैसी स्थिति में लाना होगा। जब तक नागरिक सामान और सेवा की खरीद-बेच की प्रक्रिया पहले जैसे नहीं कर पाते या कार्यस्थल पर स्वतंत्र रूप से नहीं जा पाते, आर्थिक बहाली अधूरी रहेगी। यद्यपि अब लगभग सभी कानूनी बाधाएं हटा दी गई हैं, वायरस के डर से नागरिकों ने अभी भी पूरी तरह आवागमन शुरू नहीं किया है। आर्थिक गतिविधियों में भी इस प्रक्रिया का प्रतिबिंब नजर आता है।
इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान जब लॉकडाउन सबसे कड़ा था तो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 24% गिर गया। विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं में भी इसी तरह की भारी गिरावट रही। जैसे-जैसे आवागमन बढ़ा, अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ी। इससे भारत में जुलाई-सितंबर की तिमाही में जीडीपी में गिरावट 7.5% पर सीमित हो गई। आवागमन की सुगमता का असर क्षेत्रवार जीडीपी पर भी देखने को मिला।

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कृषि क्षेत्र के कामगारों के आवागमन पर न्यूनतम असर रहा। परिणामस्वरूप यह क्षेत्र सामान्यतः 3.4% की दर से विकास में सफल रहा। जिन क्षेत्रों में आवागमन अधिक प्रभावित रहा, उनका प्रदर्शन उतना ही खराब रहा: निर्माण क्षेत्र में 50.3%, व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार एवं प्रसारण से जुड़ी सेवाओं में 47%, उत्पादन के क्षेत्र में 39.3% और खनन में 23.3% की गिरावट रही।
जुलाई-सितंबर की तिमाही में भी क्षेत्रवार उत्पादन आवागमन की सुविधा के महत्व को दर्शाता है।

कृषि क्षेत्र में एक बार फिर 3.4% की वृद्धि हुई। लोगों के काम पर आने से अन्य क्षेत्रों में भी सुधार नजर आया। बिजली और अन्य उपयोगी सेवाओं में पहली तिमाही की 7% की गिरावट के मुकाबले दूसरी तिमाही में 4.4% की बढ़ोतरी हुई, औद्योगिक उत्पादन में भी मामूली 0.6% की वृद्धि हुई और निर्माण क्षेत्र की गिरावट भी 8.6% रह गई। यहां तक कि आवागमन पर रोक से सर्वाधिक प्रभावित व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट व संचार और प्रसारण सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी गिरावट कम होकर 15.6% ही रह गई।वायरस से निपटने के प्रति लोगों में बढ़ते आत्मविश्वास को ध्यान में रखते हुए सरकार आर्थिक प्रगति की दर को बढ़ाने के लिए चार कदम उठा सकती है।
पहला, अर्थव्यवस्था की धीमी गति के कारण हर सप्ताह जीडीपी में अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। इसलिए वैक्सीन लगाने में तेजी दिखानी चाहिए, ताकि लोगों का आवागमन, पहले की स्थिति में जल्द आ सके।
दूसरा, वायरस के खिलाफ लोगों का आत्मविश्वास बढ़ने से वित्तीय प्रोत्साहन के प्रभावी मांग और प्रभावी मांग के उत्पादन में बदलने की श्रेष्ठ संभावना है। यदि जीडीपी का 1-2% हिस्सा वित्तीय प्रोत्साहन में दें, तो कोरोना से पहले की स्थिति में अर्थव्यवस्था को आने और 7% से अधिक वृद्धि दर पाने में मदद मिलेगी। प्रोत्साहन के लिए सरकार जो वित्तीय कर्ज लेगी, उससे कहीं अधिक तीव्र आर्थिक प्रगति से वसूल कर सकेगी।
तीसरा, ये अवश्यंभावी है कि पिछली 3 तिमाही के दौरान राजस्व प्रवाह में आई कमी से कई उद्यमों को दिवालिया घोषित करना पड़ेगा। इससे बैंक लोन के डिफ़ॉल्ट व एनपीए बढ़ेंगे। याद रहे कि कोरोना से पहले भी सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण में देरी से उत्पन्न ऋण संकट से अर्थव्यवस्था को झटका लगा था। यह गलती दोहराना हानिकारक होगा।
चौथा, सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण का व्यापक कार्यक्रम शुरू करना चाहिए। इसके दो कारण हैं। पहला, राजस्व में कमी से 2020-21 में केंद्र व राज्यों के संयुक्त वित्तीय घाटे में जीडीपी के 12-13% बढ़ने की आशंका है। यानी कर्ज का जीडीपी में जो अनुपात 2019-20 के अंत में 72% था, वह 2020-21 के अंत में 84-85% हो जाएगा। इसे नियंत्रित करने में निजीकरण से मिला राजस्व प्रभावी तरीका हो सकता है। दूसरी वजह दक्षता है। बाजार का मूल सिद्धांत है कि सरकार को उन सभी लाभ कमाने वाली गतिविधियों को निजी क्षेत्र के लिए छोड़ देना चाहिए, जो कोई जनउद्देश्य पूरा नहीं करतीं।

बड़ी संख्या में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को रखना समाजवादी युग की प्रवृत्ति है और इसे सुधारने का यही समय है। अपने निजी क्षेत्र के समकक्षों की तुलना में इन सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का रिटर्न बहुत कम है। साक्ष्यों से पता चलता है कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में जिन सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण किया गया, वे समान रूप से फलफूल रहे हैं। अब समय है कि भारत खुद को समाजवाद के पंजे से मुक्त करे और वैसी संपन्नता हासिल करे, जैसी पूर्वी एशिया के कई देशों ने बहुत पहले की थी। (ये लेखक के अपने विचार हैं)



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अरविंद पानगड़िया, कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष


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UAE और सऊदी में कम हुई पाकिस्तान के लोगों की मांग, भारतीयों को फायदा

आतंकवाद को समर्थन देना और सुधारवादी रास्तों पर चलने से इनकार करना अब पाकिस्तान को भारी पड़ रहा है। एक जमाने में पाकिस्तान की मदद के लिए हमेशा खड़े रहने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश अब उससे दूरी बनाने लगे हैं।

इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिला है। इन दोनों इस्लामी देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत हुए हैं। द्विपक्षीय व्यापार भी कई गुना बढ़ा है। साथ ही वहां भारतीय नागरिकों को रोजगार के ज्यादा मौके भी मिल रहे हैं। यूएई ने नवंबर के आखिर में पाकिस्तान समेत 13 देशों के नागरिकों पर वीसा बैन लगाया था। इसमें पाकिस्तान भी शामिल है। इस बैन के कारण करीब 20 हजार पाकिस्तान यूएई में रोजगार गंवा चुके हैं। इनमें करीब 80 फीसदी जॉब भारतीयों को मिले हैं। यूएई ने कई बार कहा कि यह बैन कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए बनाया गया।

लेकिन, जब यूएई ने बैन लगाया था, तब भारत में पाकिस्तान की तुलना में प्रति 10 लाख लोगों की आबादी पर कोरोना के ज्यादा मामले आ रहे थे। इसके बावजूद यूएई ने भारत के लोगों पर वीसा बैन नहीं लगाया। विशेषज्ञों के मुताबिक खाड़ी देश अब अपनी छवि बदलने की कोशिश में लगे हैं। वे दुनिया को अब सिर्फ धर्म और तेल निर्यात नहीं करना चाहते। उनका ध्यान टूरिज्म, आईटी, इन्फ्रा जैसे सेक्टर पर भी है और इसके लिए भारत और इजरायल जैसे देशों के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं।

खतरे में पड़ सकती है 8 हजार करोड़ रुपए की मासिक मदद
यूएई और सऊदी अरब के साथ लंबे समय तल्खी कायम रखना पाकिस्तान के लिए संभव नजर नहीं आता है। पिछले साल नवंबर में इन दोनों देशों मे रहने वाले पाकिस्तानियों ने करीब 8.3 हजार करोड़ रुपए स्वदेश भेजे। हर समय आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक के आगे हाथ फैलाए रहने वाले पाकिस्तान के लिए यह राशि संजीवनी की तरह होती है। पूरी दुनिया से पाकिस्तानी जितनी रकम घर भेजते हैं उसका 65% खाड़ी देशों से आता है।

सऊदी ने कहा- उधार चुकाओ, तुर्की की पिछलग्गू बन रही इमरान खान की सरकार
भारत ने जब कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त किया तो पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सऊदी अरब और यूएई इसका विरोध करेंगे। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। तुर्की ने जरूर पाकिस्तान को समर्थन दिया। इमरान खान सरकार तब से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्की की पिछलग्गू बनी हुई है। इससे खाड़ी देश विशेषकर सऊदी अरब बेहद नाराज है। माना जा रहा है कि इसी वजह से तुर्की ने पाकिस्तान को जल्द से जल्द 300 करोड़ डॉलर का कर्ज वापस करने को कहा है।

बदलते समीकरण- इजरायल को मान्यता देने पर भी पाक से मतभेद
सऊदी अरब और यूएई अब इजरायल के साथ पूरानी दुश्मनी भुलाकर संबंध सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यूएई और इजरायल ने ऐतिहासिक अब्राहम समझौता भी कर लिया है। सऊदी और यूएई दोनों चाहते हैं कि पाकिस्तान भी अब इजरायल को मान्यता दे। लेकिन, तुर्की के प्रभाव में होने के कारण पाकिस्तान ऐसा नहीं कर रहा। हालांकि, खुद तुर्की ने इजरायल को काफी पहले से मान्यता दे रखी है और इजरायल में तुर्की का दूतावास भी है।

कोई और चारा नहीं- सऊदी में 26 और यूएई में 15 लाख पाकिस्तानी
पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब और यूएई का महत्व पाक सरकार द्वारा जारी किए आंकड़ों से भी पता चलता है। 2019 में जितने पाकिस्तान देश के बाहर रोजगार के लिए निकले, उनमें से 87 फीसदी सऊदी अरब या यूएई पहुंचे। इस वक्त भी सऊदी अरब में करीब 26 लाख और यूएई में करीब 15 लाख पाकिस्तानी काम करते हैं। यूएई में भारतीयों की संख्या पाकिस्तानियों की तुलना में ज्यादा है। वहां, इस समय करीब 26 लाख भारतीय काम कर रहे हैं।



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संबंध सुधारने की कोशिश में पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैसी दिसंबर में यूएई गए थे।


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कश्मीर घाटी में लगातार गिर रहे बर्फ के बीच होटल में लगी आग; पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया

कश्मीर घाटी के श्रीनगर में मंगलवार को बोलवर्ज रोड पर डल झील के पास स्थित वेलकम होटल में भीषण आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग के बाद होटल और आस-पास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया। कथित तौर पर शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी।

घटनास्थल पर बचाव कर्मियों ने सभी लोगों को होटल से सुरक्षित निकाल लिया। इस समय कश्मीर में बर्फबारी का मौसम चल रहा है। इस वजह से काफी पर्यटक यहां पहुंचे हुए हैं। रविवार को श्रीनगर में 3 से 4 इंच तक बर्फबारी हुई थी।

दहशत : पर्यटकों में मची अफरा-तफरी

आग की वजह से पूरे होटल से धुएं का गुबार उठने लगा। पर्यटकों में दहशत का माहौल बन गया। धुएं से कई पर्यटकों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी।

राहत : सभी को सुरक्षित निकाला गया

सूचना मिलते ही मौके पर फायर बिग्रेड और बचावकर्मी पहुंच गए। ऊपरी मंजिल पर फंसे लोगों को सीढ़ियों की मदद से निकाला गया। सभी सुरक्षित हैं।



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होटल में लगी आग, फोटो: आबिद भट


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माइनस 5 डिग्री में एंबुलेंस के लिए रास्ता बनाने को फार्मासिस्ट जयललिता ने उठाया बेलचा, 3 किलोमीटर तक बर्फ हटाते गए और आगे बढ़ते गए

108 एंबुलेंस केलांग से एक मरीज को लेकर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू अस्पताल गई थी। वापसी में बर्फबारी शुरू हो गई। जैसे ही वे लाहौल की तरफ नॉर्थ पोर्टल से थोड़ा आगे बढ़े, एंबुलेंस तीन फीट बर्फ के बीच में फंस गई। एंबुलेंस में ड्राइवर गोपाल बोध, फार्मासिस्ट जयललिता व एक अन्य कर्मचारी लक्ष्मी चंद था। तीनों ने पीछे जाने के बजाय आगे जाना बेहतर समझा और गाड़ी से बेलचा उठाकर बर्फ हटाने लगे।

माइनस 5 डिग्री में तीनों ठिठुर रहे थे, लेकिन बर्फ हटाते गए। पहले गोपाल, फिर लक्ष्मीचंद। दोनों थक गए तो फार्मासिस्ट जयललिता ने भी महिला शक्ति का परिचय देते हुए बेलचा उठा लिया। तीनों बारी-बारी बर्फ हटाते गए और गाड़ी आगे बढ़ती गई।

इस तरह उन्होंने करीब 4 किमी तक का सफर तय किया। इसमें उन्हें 2 घंटे से ज्यादा समय लग गया। इसके बाद उन्हें बीआरओ की मशीनरी मिल गई जो कटर से बर्फ हटा रही थी। तब जाकर कहीं उन्होंने राहत की सांस ली।

हिमाचल में भारी बर्फबारी से तीन एनएच समेत 377 सड़कें बंदहिमाचल में मंगलवार को भारी बर्फबारी व बारिश हुई। तीन नेशनल हाईवे समेत 377 सड़कों पर आवाजाही बंद हो गई। 110 बिजली ट्रांसफार्मर काे नुकसान पहुंचा है। पर्यटकों के सोलंगनाला से आगे जाने पर रोक लगा दी है। शिमला समेत मैदानी क्षेत्रों में बारिश से ठंड बढ़ गई है। शिमला में अधिकतम तापमान 8.5 डिग्री रहा जो सोमवार (16.1 डिग्री) के मुकाबले 7.6 डिग्री कम रहा।

किस शहर में कितना तापमान

शहर तापमान
केलांग -4.3 डिग्री
कल्पा 00 डिग्री
शिमला 6.6 डिग्री
धर्मशाला 05 डिग्री
मनाली 04 डिग्री
कुफरी 2.7 डिग्री

आगे क्या...

माैसम विभाग ने अगले 24 घंटाें में भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट दिया है। 7 जनवरी को मौसम के साफ होने का अनुमान है, जबकि 8 जनवरी को फिर बारिश व बर्फबारी हो सकती है।



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फार्मासिस्ट जयललिता ने दोनों कर्मचारियों के साथ मिलकर बर्फ हटाई।


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जब भारत की प्रधानमंत्री को उनके ही सिक्युरिटी गार्ड्स ने गोलियों से भून दिया था, 5 साल बाद हत्यारों को मिली थी फांसी

तारीख थी 31 अक्टूबर 1984 और समय था सुबह 9 बजकर 10 मिनट। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री कार्यालय से बाहर निकलीं। इंदिरा गांधी अधिकारियों से चर्चा कर रही थीं। तभी अचानक वहां तैनात सिक्युरिटी गार्ड बेअंत सिंह ने अपनी रिवॉल्वर निकाली और इंदिरा गांधी पर फायर किया। गोली उनके पेट पर लगी। इसके बाद बेअंत ने दो और फायर किए।

बेअंत सिंह से 5 फीट की दूरी पर ही खड़े थे सतवंत सिंह। तभी बेअंत ने उसे चिल्लाकर कहा- गोली चलाओ। सतवंत ने तुरंत अपनी ऑटोमैटिक कार्बाइन की सभी 25 गोलियां इंदिरा गांधी के ऊपर फायर कर दीं। दोनों ने इतनी गोलियां चलाईं कि इंदिरा गांधी का शरीर क्षत-विक्षत हो गया था। गोली मारे जाने के 4 घंटे बाद दोपहर 2 बजे इंदिरा गांधी को मृत घोषित कर दिया गया।

बेअंत सिंह को उसी वक्त वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने मार दिया। सतवंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरी साजिश में केहर सिंह भी थे। इंदिरा गांधी के हत्यारे उनसे ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेना चाहते थे। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में हजारों लोग मारे गए थे।

करीब 5 साल तक मामला अदालतों में चलने के बाद इंदिरा गांधी के बचे दो हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को 6 जनवरी 1989 को तिहाड़ जेल में फांसी की दे दी गई। सतवंत सिंह हिंसक प्रवृत्ति का था, जबकि केहर सिंह शांत रहता था। फांसी के बाद दोनों के शव परिवारवालों को भी नहीं दिए गए और जेल प्रशासन ने ही उनका अंतिम संस्कार किया।

जब दुनिया ने पहली बार देखी टेलीग्राफ तकनीक
आज ही के दिन 1838 में अमेरिका सैमुअल मोर्स ने दुनिया के सामने पहली बार टेलीग्राफ तकनीक को पेश किया था। मोर्स के टेलीग्राफ में डॉट और डैशेज के जरिए मैसेज को भेजा जाता है। डॉट अक्षरों को और डैश अंकों को बताता था। इसके लिए मोर्स ने मोर्स की (Morse Key) बनाई थी।

मोर्स का जन्म 27 अप्रैल 1791 को मैसाचुएट्स में हुआ था। 1832 में जब मोर्स समुद्री रास्ते से यूरोप से अमेरिका जा रहे थे, तो रास्ते में उन्होंने इलेक्ट्रोमैग्नेट के बारे में सुना। यहीं से उन्हें टेलीग्राफ का आइडिया आया।

मोर्स-की की चाबी को जब दबाकर तुरंत छोड़ दिया जाता, तो डॉट बन जाता था। दो बार डॉट बनाने से डैश बन जाता था।

1838 में टेलीग्राफ का पेटेंट लेने के बाद मोर्स ने बड़ी मुश्किल से अमेरिकी कांग्रेस को इस बात के लिए राजी कराया कि वो उनके इस आविष्कार में पैसे लगाए। इसके बाद वॉशिंगटन डीसी से बाल्टिमोर तक टेलीग्राफ केबल बिछाई गई। 24 मई 1844 को मोर्स ने वॉशिंगटन डीसी से बाल्टिमोर मैसेज भेजा, जिसमें था- "व्हाट हैथ गॉड रॉट' यानी "वाह रे ईश्वर, तेरी सृष्टि।'

भारत और दुनिया में 6 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाएं :

  • 2020ः पुरुषों के साथ बलात्कार करने वाले इंडोनेशियाई नागरिक रिनहार्ड सिनागा को ब्रिटेन की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
  • 2012: सीरिया की राजधानी दमिश्क में आत्मघाती हमले में 26 लोगों की मौत, 63 घायल हुए।
  • 2010: नई दिल्ली में यमुना बैंक-आनंद विहार सेक्शन की मेट्रो रेलों का परिचालन शुरू हुआ।
  • 2007: उत्तर प्रदेश का हिन्दी संस्थान की ओर से साहित्य के क्षेत्र में दिए जाने वाले वार्षिक पुरस्कारों के तहत 2007 के भारत भारती सम्मान केदारनाथ सिंह को प्रदान करने की घोषणा हुई।
  • 2003: रूस ने संयुक्त राष्ट्र से बिना अनुमति लिए इराक के खिलाफ सैनिक कार्रवाई पर अमेरिका को चेतावनी दी।
  • 2002: बांग्लादेश की मुद्रा से पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीब का चित्र हटाया गया।
  • 1983: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को पहली बार आंध्र प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।
  • 1980: सातवें लोक सभा चुनाव में इंदिरा गांधी की नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी को दो तिहाई बहुमत मिला।
  • 1976: चीन ने लोप नोर क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया।
  • 1950: ब्रिटेन ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता प्रदान की।
  • 1947: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी ने भारत का विभाजन स्वीकार किया।
  • 1929: मदर टेरेसा भारत में उपेक्षित और गरीब लोगों की सेवा करने के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) लौटीं।
  • 1664: छत्रपति शिवाजी महाराज ने सूरत पर हमला किया।


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Today History: Aaj Ka Itihas India World 6 January Update | Indira Gandhi Killers Hanged Samuel Morse Telegraph Interesting Facts


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वैक्सीन के ट्रायल और इफेक्ट पर उठने लगे सवाल, टीके को लेकर शुरू हुआ नया बवाल



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Bhaskar special aaj ka cartoon on vaccine triel and results


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नए कोरोना स्ट्रेन के चलते ब्रिटिश पीएम का भारत दौरा टला, MP में वैक्सीन ट्रायल बना लोगों के लिए बला

नमस्कार!
ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया है, उन्हें गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाया गया था। जॉनसन ने ब्रिटेन में फैले नए कोरोना स्ट्रेन के चलते ये फैसला लिया है। इधर, भारत में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के दौरान मध्य प्रदेश में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां भोपाल के एक अस्पताल में लोगों को पैसे देकर बुलाया गया, धोखे से टीका लगाया गया और जब ये लोग बीमार पड़ने लगे तो अस्पताल ने सुध ही नहीं ली। बहरहाल शुरू करते हैं न्यूज ब्रीफ।

सबसे पहले देखते हैं मार्केट क्या कह रहा है

  • BSE का मार्केट कैप 192.87 लाख करोड़ रुपए रहा, BSE पर करीब 55% कंपनियों के शेयरों में बढ़त रही।
  • 3,233 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। इसमें 1,781 कंपनियों के शेयर बढ़े और 1,288 कंपनियों के शेयर गिरे।

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर...

  • अमेरिकी संसद का जॉइंट सेशन होगा। इसमें बाइडेन की जीत पर औपचारिक, कानूनी और अंतिम मुहर लगेगी।
  • मोदी कैबिनेट की बैठक होगी।
  • अहमदाबाद में BJP-RSS की कोऑर्डिनेशन मीट का दूसरा दिन। संघ प्रमुख मोहन भागवत शामिल होंगे।

देश-विदेश
10 दिन के भीतर वैक्सीनेशन शुरू करने की तैयारी

भारत सरकार 10 दिन के भीतर देश में वैक्सीनेशन शुरू करने वाली है। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को बताया कि ड्राई रन से मिले डेटा के आधार पर सरकार ने तैयारी पूरी कर ली है। इस हिसाब से अगले हफ्ते देश में कोरोना वैक्सीनेशन शुरू हो सकता है। देश में भारत बायोटेक की स्वदेशी कोवैक्सिन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड के इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी मिल चुकी है।

सीरम और भारत बायोटेक की वैक्सीन वॉर खत्म
कोरोना वैक्सीन पर आमने-सामने हुई देश की दो कंपनियों सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक ने दो दिन के अंदर अपनी कड़वाहट भुला दी है। वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी हासिल कर चुकीं दोनों कंपनियों ने मंगलवार को जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया। इसमें सीरम के CEO अदार पूनावाला और भारत बायोटेक के चेयरमैन डॉ. कृष्णा ऐल्ला ने कहा कि हमारे सामने बड़ा और महत्वपूर्ण टास्क है- देश और दुनिया के लोगों की जान बचाना।

देश में 84 हजार से ज्यादा पक्षियों की मौत, बर्ड फ्लू ने दिक्कत बढ़ाई
कोरोना महामारी के बीच अब बर्ड फ्लू की दस्तक चिंता बढ़ा रही है। अब तक हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और केरल में 84 हजार 775 पक्षियों की मौत हुई है। इनमें से हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और केरल में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी है, हरियाणा और गुजरात के सैंपल की रिपोर्ट आना बाकी है।
एक ही लैबोरेटरी में इंसानों और पक्षियों के सैंपल का टेस्ट
भोपाल की हाई सिक्योरिटी एनिमल डिसीज लैबोरेटरी में पांच वैज्ञानिकों की टीम पक्षियों के सैम्पल जांचने में जुटी है। यहां कोरोना के सैम्पल भी जांचे जा रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब इस लैबोरेटरी में एक ही समय में इंसान और पक्षियों के सैम्पल टेस्ट किए जा रहे हैं।

मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट की सशर्त मंजूरी
नया संसद भवन और कॉमन सेंट्रल सेक्रेटरिएट बनाने के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2:1 से मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण मंजूरी सही तरीके से दी गई। लैंड यूज में बदलाव का नोटिफिकेशन भी वैध था। अदालत ने कहा कि कंस्ट्रक्शन शुरू करने से पहले हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की मंजूरी ली जाए। 20 हजार करोड़ रुपए की सेंट्रल विस्टा योजना मोदी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है।

तृणमूल में टूट जारी, ममता के खेल मंत्री का भी इस्तीफा
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से तृणमूल में टूट का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खास और पूर्व मंत्री शुभेंदु अधिकारी के भाजपा ज्वाइन करने के 16 दिन बाद खेल मंत्री और पूर्व क्रिकेटर लक्ष्मी रतन शुक्ला ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। शुभेंदु ने 19 दिसंबर को भाजपा का दामन थाम लिया था। उनके साथ सांसद सुनील मंडल, पूर्व सांसद दशरथ तिर्की और 10 MLA ने भी भाजपा ज्वाइन की थी। इनमें 5 विधायक तृणमूल कांग्रेस के ही थे।

पुर्तगाल में फाइजर की वैक्सीन लगने के बाद नर्स की मौत
पुर्तगाल में एक 41 वर्षीय नर्स की फाइजर का वैक्सीन लगने के दो दिन बाद मौत हो गई। पुर्तगाल के स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। जब वैक्सीन लगाई गई, तब नर्स पूरी तरह से स्वस्थ थी और उसे किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हुआ था। नर्स का नाम सोनिया एजेवेडो है, वो इंस्टीट्यूटो पोर्तुगीज डी ओंकोलोजिया (IPO) में सर्जिकल असिस्टेंट थीं।

भास्कर एक्सप्लेनर
कोरोना के दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट पर वैक्सीन का कैसा असर होगा?

जिस तरह कोरोनावायरस के नए-नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ती जा रही है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए वैरिएंट पर वैक्सीन फेल हो सकती है। इसने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या अब तक जो वैक्सीन बनी है, वह बेकार हो जाएगी? क्या इस वैक्सीन को जल्द ही अपडेट करने की नौबत आएगी?

सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर...

आज की पॉजिटिव खबर
कभी चाय की दुकान पर बर्तन धोए; अब एलोवेरा की खेती से लाखों की कमाई

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले अजय स्वामी पिछले 12 साल से एलोवेरा की खेती और प्रोसेसिंग कर रहे हैं। वो इससे 45 प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। उन्होंने एलोवेरा से बना लड्डू तैयार किया है, इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। हर महीने वो लाख रुपए कमा रहे हैं। हालांकि, उनका ये सफर मुश्किल था। बचपन में पिता की मौत के बाद उन्हें चाय की दुकान पर बर्तन धोने पड़े थे।

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सुर्खियों में और क्या है...

  • वित्त वर्ष 2021-22 का आम बजट 1 फरवरी 2021 को आएगा। बजट सत्र की शुरुआत 29 जनवरी से होगी।
  • कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने टीकरी बॉर्डर पर ईंट और गारे से स्थाई ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में हुई बारिश से टेंट बर्बाद होने के बाद ये फैसला लिया गया है।
  • देश में बीते 24 घंटे में सिर्फ 16 हजार 278 नए संक्रमितों की पहचान हुई। इस तरह एक्टिव केस यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 13 हजार 140 की कमी आई। 16 दिसंबर के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट है।
  • आगरा के ताजमहल में हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष और 3 युवकों ने भगवा झंडा लहराया और शिव चालीसा का पाठ किया। चारों को गिरफ्तार कर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का केस दर्ज किया गया है।


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Top News of 5 January 2021| British PM's visit to India postponed due to new corona strain, MP becomes vacant trial for people


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तीन साल में तीन बार मारने की कोशिश; चटनी में जहर दिया गया, सुरंग से घर में सांप छोड़े

इसरो के सीनियर एडवाइजर और शीर्ष वैज्ञानिक डॉ. तपन मिश्रा ने आरोप लगाया है कि उन्हें तीन साल में तीन बार जहर देकर मारने की कोशिश की जा चुकी है। 31 जनवरी 2021 को सेवानिवृत्त होने से पहले मंगलवार को साेशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में डॉ. मिश्रा ने खुलासा किया कि बाहरी लोग नहीं चाहते कि इसरो, इसके वैज्ञानिक आगे बढ़ें और कम लागत में टिकाऊ-सुलभ सिस्टम बनाएं।

उन्होंने इसे तंत्र की मदद से किया अंतरराष्ट्रीय जासूसी हमला बताया है। डॉ. विक्रम साराभाई की रहस्यमय मौत का हवाला देकर केंद्र सरकार से जांच की मांग की है। दिव्य भास्कर से बातचीत के अंश...

ऐसे हमले सैन्य महत्व के सिंथेटिक अपर्चर रडार बनाने वाले वैज्ञानिकों को रास्ते से हटाने के लिए किए जाते हैं

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, ‘बहुत दिन वे यह रहस्य छुपाए रहे। अंतत: उन्हें इसे सार्वजनिक करना पड़ रहा है। पहली बार 23 मई 2017 को बेंगलुरु मुख्यालय में प्रमोशन इंटरव्यू के दौरान ऑर्सेनिक ट्राइऑक्साइड दिया था। इसे संभवत: लंच के बाद डोसे की चटनी में मिलाया था, ताकि लंच के बाद मेरे भरे पेट में रहे। फिर शरीर में फैलकर ब्लड क्लॉटिंग का सबब बने और हार्ट अटैक से मौत हो जाए। लेकिन मुझे लंच नहीं भाया। इसलिए चटनी के साथ थोड़ा डोसा खाया। इस कारण केमिकल पेट में नहीं टिका। हालांकि इसके असर से दो वर्ष बहुत ब्लीडिंग हुई।

वैज्ञानिक डॉ. तपन मिश्रा के शरीर में रिएक्शन की तस्वीर।

दूसरा हमला चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के दो दिन पहले हुआ। 12 जुलाई 2019 को हाइड्रोजन सायनाइड से मारने का प्रयास हुआ। हालांकि एनएसजी अफसर की सजगता से जान बच पाई। मेरे उच्च सुरक्षा वाले घर में सुरंग बनाकर विषैले सांप छोड़े। तीसरी बार सितंबर 2020 में आर्सेनिक देकर मारने की कोशिश हुई। इसके बाद मुझे सांस की गंभीर बीमारी, फुंसियां, चमड़ी निकलना, न्यूरोलॉजिकल और फंगल इंफेक्शन समस्याएं होने लगीं।’

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, एम्स दिल्ली के डॉ. सुधीर गुप्ता ने तो कहा कि उनके करियर में आर्सेसिनेशन ग्रेड मॉलिक्यूलर ‘एएस203’ से बचने का यह पहला मामला है। जून 2017 में ही एक डायरेक्टर साथी और गृह मंत्रालय के अधिकारी ने जहर दिए जाने को लेकर आगाह किया था। डॉ. मिश्रा ने पूरे घटनाक्रम को तंत्र की मदद से किया अंतरराष्ट्रीय जासूसी हमला बताया है।

ऐसे हमलों का उद्देश्य सैन्य और कमर्शियल महत्व के सिंथेटिक अपर्चर राडार बनाने वाले वैज्ञानिकों को निशाना बनाना या रास्ते से हटाना होता है। उन्होंने पीड़ा सीनियर्स से कही। पूर्व चेयरमैन किरण कुमार ने सुना, जबकि डॉ. कस्तूरीरंगन और माधवन नायर ने नहीं। इसके बाद भी हत्या की कोशिशें जारी रहीं।

अहमदाबाद स्थित इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (सेक) में 3 मई 2018 को धमाका हुआ था, जिसमें मैं बच गया। धमाके में 100 करोड़ रुपए की लैब नष्ट हो गई। जुलाई 2019 में एक भारतीय अमेरिकी प्रोफेसर मेरे ऑफिस में आए। मुंह न खोलने के एवज में मेरे बेटे को अमेरिका की इंस्टीट्यूट में दाखिले का ऑफर किया। मैंने इंकार किया तो मुझे सेक डायरेक्टर के पद से हाथ धोना पड़ा।

वैज्ञानिक डॉ. तपन मिश्रा की रिपोर्ट में आर्सेनिक की पुष्टि।

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, दो वर्ष से घर में कोबरा, करैत जैसे जहरीले सांप मिल रहे हैं। इससे निपटने के लिए हर 10 फुट पर कार्बोलिक एसिड की सुरक्षा जाली है। इसके बावजूद सांप मिल रहे हैं। एक दिन घर में एल अक्षर के आकार की सुरंग मिली, जिससे सांप छोड़े जा रहे थे। ये लोग चाहते हैं कि मैं इससे पहले मर जाऊं-मारा जाऊं तो सभी रहस्य दफन हो जाएंगे। देश मुझे और मेरे परिवार को बचा ले।

(जैसा उन्होंने विशाल पाटडिया को बताया।)



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मंगलवार, 5 जनवरी 2021

बिना होमवर्क पहुंची सरकार ने और वक्त मांगा; किसान बोले- 8 बार चर्चा हो चुकी, कितना समय लेंगे

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का मंगलवार को 41वां दिन है। सोमवार को किसानों और केंद्र के बीच 8वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पूछा कि MSP पर क्या दिक्कतें हैं। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी बोले- सरकार सभी फसलों की MSP की गारंटी दे। कृषि मंत्री ने कहा- हम तैयार हैं, आप पॉइंट बताएं। हमें अपना होम वर्क करना पड़ेगा। इस पर किसान नेता बोले- 8 दौर की चर्चा हो चुकी और कितना समय चाहिए। मीटिंग खत्म होने के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि ताली दोनों हाथ से बजती है।

किसान बुधवार को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे
4 घंटे चली बैठक में सरकार कानूनों में बदलाव की बात दोहराती रही। किसान कानून वापसी पर अड़े रहे। अगली मीटिंग के लिए 8 जनवरी का दिन तय हुआ है। इससे पहले किसान संगठन 6 जनवरी को कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।

वाणिज्य राज्य मंत्री ने कुछ किसानों से अकेले में बात की
कृषि मंत्री के अलावा मीटिंग में रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश भी शामिल हुए थे। MSP पर चर्चा के बाद किसानों ने कानून रद्द करने की मांग उठाई। तोमर बोले- कमेटी बना लेते हैं। किसानों ने कहा- कोई कमेटी नहीं बनेगी, कानून रद्द करें। सोम प्रकाश कुछ नेताओं को किनारे ले गए और बात की। जिस पर दूसरे किसान नेता बोले, कानून रद्द करें। इसके बाद तोमर ने कहा कानून के समर्थन में भी काफी संगठन और किसान हैं। हम सिर्फ आपकी बात सुनकर इन्हें रद्द नहीं कर सकते।

इस बार खाना अपना-अपना...
बातचीत से पहले सरकार और किसान नेताओं ने जान गंवा चुके किसानों के लिए दो मिनट का मौन रखा, लेकिन यह सब यहीं तक सीमित था। आगे किसानों की मौत न हो और समाधान निकाला जाए इसके लिए कोई कोशिश नहीं दिखी। इस बार भी किसानों ने सरकारी खाना खाने से इनकार कर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा, आप अपना खाना खाएं, हम अपना खाएंगे। पिछली मीटिंग में 3 मंत्रियों ने किसानों के साथ लंगर का खाना ही खाया था, इससे माहौल काफी हल्का हो गया था। इस बार भी यही उम्मीद की जा रही थी।



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सोमवार को सरकार से मीटिंग के बाद विज्ञान भवन के बाहर किसान नेताओं ने अपनी मांगों पर एकजुटता दिखाई।


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मुश्किल में टीम को संभालते दिखे अश्विन-जडेजा, मौजूदा टीम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टॉप विकेट टेकर भी

कोरोना और कई तरह के विवादों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज जारी है। फिलहाल, यह 4 मैच की सीरीज 1-1 की बराबरी पर है। तीसरा मुकाबला 7 जनवरी को सिडनी और आखिरी मैच 15 को ब्रिस्बेन में खेला जाएगा। पिछला टेस्ट 8 विकेट से जीतने वाली टीम इंडिया के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

पहले चोटिल ईशांत शर्मा दौरे पर नहीं आए। इसके बाद मोहम्मद शमी और उमेश यादव चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए। ऐसे में गेंदबाजी का पूरा दारोमदार सीनियर स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा के साथ पेसर जसप्रीत बुमराह के कंधों पर आ गया है। हालांकि, अश्विन और जडेजा के रिकॉर्ड्स और सीरीज के पिछले दो मैच में प्रदर्शन को देखें तो उन्होंने टीम को बहुत अच्छे से संभाला है।

अश्विन और जडेजा पर दारोमदार
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यदि ओवरऑल विकेट टेकर भारतीय गेंदबाजों को देखें, तो उसमें मौजूदा टीम से अश्विन और जडेजा ही टॉप पर काबिज हैं। टॉप-10 लिस्ट में भी मौजूदा टीम से यह दो ही गेंदबाज हैं। हालांकि, तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा 25 टेस्ट में 59 विकेट के साथ 7वें नंबर पर काबिज हैं, लेकिन वे दौरे के लिए टीम में शामिल नहीं हैं।

डे-नाइट टेस्ट में पहली बार भारतीय स्पिनर ने विकेट लिए
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज का पहला टेस्ट डे-नाइट खेला गया था। यह भारत का विदेश में पहला और ओवरऑल दूसरा पिंक बॉल टेस्ट था। इसमें पहली बार किसी भारतीय स्पिनर ने विकेट लिए थे। इस एडिलेड टेस्ट में अश्विन ने पहली पारी में 4 और दूसरी पारी में एक विकेट लिया था। हालांकि, भारतीय टीम यह टेस्ट 8 विकेट से हार गई थी। जडेजा को इस मैच में मौका नहीं मिला था।

अश्विन ने स्मिथ को फंसाया
सीरीज की 4 पारियों में अश्विन ने दिग्गज स्टीव स्मिथ को 2 बार जाल में फंसाया। अश्विन ने ही स्मिथ को बॉक्सिंग-डे टेस्ट में पहली बार शून्य पर आउट किया। यह मैच का टर्निंग पॉइंट भी रहा। यहीं से भारत ने ऑस्ट्रेलिया पर शिकंजा कसा और उसके खिलाफ लगातार दूसरा बॉक्सिंग-डे टेस्ट भी जीता। अश्विन की फिरकी का जाल ही है कि सीमित ओवरों की सीरीज में फॉर्म में दिख रहे स्मिथ 2 टेस्ट की 4 पारियों में सिर्फ 10 रन ही बना सके।

पहले टेस्ट में शर्मसार भारतीय टीम को जडेजा ने संभाला
भारतीय टीम पहले टेस्ट की दूसरी पारी में टेस्ट इतिहास के अपने सबसे छोटा 36 रन के स्कोर पर सिमट गई थी। शमी भी चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए थे। इसके बाद दूसरे टेस्ट की पहली पारी में उमेश यादव भी चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए। ऐसे में दूसरे टेस्ट में जडेजा को मौका मिला और उन्होंने टीम को संभालते हुए शानदार जीत भी दिलाई।

जडेजा ने दूसरे टेस्ट में फिफ्टी लगाई और 3 विकेट भी झटके

इस ऑलराउंडर ने 3 अहम विकेट लिए। साथ ही 159 बॉल पर 57 रन की शानदार पारी भी खेली। जडेजा ने कप्तान अजिंक्य रहाणे के साथ पहली पारी में छठवें विकेट के लिए 121 रन की बड़ी और निर्णायक साझेदारी भी की। इस मैच में अश्विन ने भी 5 ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को पवेलियन भेजा था। दोनों ने शमी और उमेश की गैरमौजूदगी में टीम को शानदार तरीके से संभाला और ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर्स को फिरकी में उलझाए रखा।

सीरीज के टॉप-5 विकेट टेकर में अश्विन अकेले स्पिनर
मौजूदा बॉर्डर गावस्कर सीरीज के शुरुआती 2 मैच में ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज पैट कमिंस और अश्विन ने बराबर 10-10 विकेट लिए हैं। टॉप-5 विकेट टेकर्स में अश्विन अकेले स्पिनर हैं। भारतीयों में पेसर बुमराह 8 विकेट के साथ चौथे नंबर पर हैं। वहीं, जडेजा ने एक ही मैच खेला और 3 विकेट झटके हैं।



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India Vs Australia Top Wicket-takers; Ravichandran Ashwin And Ravindra Jadeja


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पढ़िए, दि इकोनॉमिस्ट की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

1. एक सर्वे के अनुसार न्यूयॉर्क में ज्यादा कमाने वाले आधे से अधिक लोग पूरी तरह घर से काम कर रहे हैं। 44% लोग शहर छोड़ने का विचार कर रहे हैं। घर से काम करने वाले लोगों को भी न्यूयॉर्क टैक्स चुकाना होता है। यदि छह अंकों में पैसा कमाने वाले 5% लोग न्यूयॉर्क छोड़ देंगे तो सालाना सात हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा। क्यों लोगों का नहीं जंच रहा न्यूयॉर्क, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

2. ई-कॉमर्स का भविष्य पश्चिमी देशों में नहीं बल्कि चीन में तय हो रहा है। चीन का ई-रिटेल बाजार अमेरिका और यूरोप के संयुक्त बाजार से बढ़कर 14.60 लाख करोड़ रुपए का हो गया है। अमेरिका में 2020 में 30 रिटेलर कारोबार समेट चुके हैं। आखिर कैसे ई-कॉमर्स में एकाधिकार कर पा रहा है चीन, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

3.चीन दावा कर रहा है कि देश के इतिहास में पहली बार कोई व्यक्ति निराश्रित नहीं बचा है। उसने दिसंबर में एलान किया था कि देश में घोर गरीबी खत्म हो चुकी है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार पिछले चार दशकों में 80 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी की रेखा से बाहर निकल चुके हैं। चीन के इस दावे में कितना दम है, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

4.हर देश अधिक पुल और बिजली ग्रिड बनाना चाहता है पर यह आसान नहीं। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के साथ समस्याओं का अंबार लगा है। अमेरिका, जर्मनी सहित यूरोपीय देशों में भी बुनियादी ढांचे के साथ समस्याएं आ रही हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर पर दुनियाभर के देश भारी-भरकम पैसा खर्च करना चाहते हैं, लेकिन समस्याएं भी जुड़ी हुई हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर पर क्या कहती है रिपोर्ट, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

5. कोरोना से संघर्षरत दुनिया को उम्मीदों के बीच नई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में वायरस की दो अलग किस्में तेजी से फैली हैं। परिवर्तनों के कारण वे अधिक संक्रामक हो गए हैं। अधिक फैलने वाले कोविड-19 से अस्पतालों पर अधिक बोझ पड़ सकता है। कैसे नया स्ट्रेन मुश्किलें बढ़ा सकता है, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

6. कोरोना महामारी पर कुछ किताबें बाजार में आई हैं। इनमें शामिल हैं निकोलस क्रिस्टाकिस की अपोलोज एरो, इवान क्रेस्टेव की इज इट टुमारो यट? फरीद जकारिया की टेन लैसंस फॉर अ पोस्ट पैनडेंमिक वर्ल्ड और स्कॉट गैलोवे की पोस्ट कोरोना। ऐसी ही रोचक किताबों के बारे में जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...



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हिमाचल में अटल टनल दो दिन के लिए बंद, राजस्थान में ओले गिरे तो MP में रुक-रुककर बारिश

नए साल के आगाज से ही प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। देश के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी जारी है। हिमाचल प्रदेश में अटल टनल को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है। राजस्थान में ओलावृष्टि हुई है तो मध्य प्रदेश में रुक रुककर बारिश का क्रम जारी है। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों बारिश भी हुई है। मौसम विभाग ने पांच जनवरी को भी भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी की है। मंगलवार को मैदानी और निचले इलाकों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट है।

हिमाचल में बर्फबारी का दौर जारी, अटल टनल 2 दिन बंद

भारी बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश पूरी तरह से शीत लहर की चपेट में आ गया है। बर्फबारी के कारण अटल टनल रोहतांग से 2 दिनों तक सामान्य वाहनों पर रोक लगा दी गई है। सिर्फ आपातकालीन वाहनों को ही टनल से जाने दिया जाएगा। जनजातीय जिला लाहौल स्पीति और कुल्लू प्रशासन ने मौसम के मिजाज को देखते हुए यह निर्णय लिया है।

बर्फबारी से हिमाचल की 164 सड़कें यातयात की आवाजाही के लिए पूरी तरह से बंद है। चंबा में 4, लाहौल स्पीति में 154, मंडी में 2, और शिमला में भी 2 सड़कों पर यातायात बाधित है। कुल्लू में 5 बिजली के खंभों के टूटने से क्षेत्र में लोगों को बिजली की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश में रुक-रुककर हुई बारिश, कोहरा भी छाया

राजस्थान में बने चक्रवात का असर मध्यप्रदेश में भी दिख रहा है। सोमवार के दिन कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हुई और कई जगहों पर कोहरा भी छाया रहा। भोपाल में 1.9 मिमी बारिश हुई। इस दौरान शहर में विजिबिलिटी 600 से 800 मीटर के बीच रही। इस वजह से मौसम में घुली ठंडक के कारण दिन के तापमान में 8.6 डिग्री की गिरावट हुई। बादलों के कारण रात का तापमान दूसरे दिन भी सामान्य से 6 डिग्री ज्यादा 16.7 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, प्रदेश में उज्जैन, ग्वालियर-चंबल संभागों के इलाकों में भी बारिश हुई।

71 का युद्ध जीतने के जश्न में देशभर में घुमाई जा रही मशाल भोपाल पहुंची, यहां बारिश की बूंदों ने मशाल का स्वागत किया।

पूरे राजस्थान में हल्की बारिश के साथ ओले भी गिरे

राजधानी जयपुर सहित पूरे राजस्थान में हल्की बारिश के साथ ओलावृष्टि हो रही है और लगातार कोहरा भी छा रहा है। सोमवार को जोधपुर में लगातार तीसरे दिन कोहरामय रहा। वहीं श्रीमाधोपुर में 15 एमएम बारिश दर्ज की गई।

चौबीस घंटे में जयपुर के अंदर 7.8 मिमी बारिश हुई। बीते दो दिन में 14.3 मिमी मावठ गिर चुकी है, जोकि पिछले 3 साल में जनवरी में सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले 2017 में जनवरी महीने में 21.8 मिमी बारिश रिकार्ड हुई थी।

झुंझुनूं में ओले गिरने से फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

दिल्ली में 7 जनवरी के बाद बढ़ेगी ठंड

पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी का असर मैदानी क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। दिल्ली में हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट होने के साथ ठंड बढ़ने का क्रम भी जारी है। मौसम विभाग के मुताबिक 7 जनवरी के बाद दिल्ली के तापमान में गिरावट आने के साथ ठंड बढ़ेगी।

दिल्ली में हुई बारिश के बाद सुबह कोहरे की चादर छा जाती है।

हरियाणा के कई जिलों में बारिश, भिवानी में गिरे ओले

लगातार तीसरे दिन हरियाणा में हल्की बारिश हुई। भिवानी में कहीं-कहीं ओले भी गिरे। रात का तापमान सामान्य से 6 डिग्री तक ऊपर चला गया है। रोहतक में यह 12.4 डिग्री रहा। वहीं, दिन का पारा अम्बाला में 24.1 डिग्री पर पहुंच गया। यह सामान्य से 3 डिग्री ज्यादा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अमूमन 1 जनवरी से 10 दिन तक काफी पाला जमता है।

भिवानी में शाम 4 बजे शुरू हुई बारिश, देर रात तक चलती रही।

इधर, चंडीगढ़ में 10 डिग्री बढ़ा तापमान

पिछले दो दिन से चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान में 10 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दो जनवरी को तापमान 15.7 डिग्री था, जो 4 जनवरी को बढ़कर 25.8 डिग्री हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने की वजह से धूप अच्छी निकली, जिस वजह से तापमान में इतना इजाफा हुआ है।



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अटल टनल को बहाल करने में बीआरओ दिन-रात लगा हुआ है।


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मां द्वारा बनाए गए भोजन का हमेशा सम्मान करें, क्योंकि इसी को खाने से मन को तृप्ति मिलती है

कहानी- एक बार कुबेर देव ने सोचा कि मेरे पास इतना धन है तो मुझे कुछ खास लोगों को भोजन पर आमंत्रित करना चाहिए। कुबेर शिवजी के पास पहुंचे और उन्हें सपरिवार अपने घर खाने पर बुलाया।

शिवजी ने कुबेर से कहा, 'आप हमें खाने पर बुला रहे हैं, इससे अच्छा तो ये है कि आप जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं।'

कुबेर बोले, 'भगवन्, मैं अन्य लोगों को तो खाना खिलाता रहता हूं। मेरे पास इतना धन है, तो मैं आपके परिवार को भी भोजन कराना चाहता हूं।'

शिवजी समझ गए कि कुबेर को अपने धन का घमंड हो गया है। वे बोले, 'मैं तो कहीं आता-जाता नहीं हूं, आप एक काम करें, गणेश को ले जाएं। उसे भोजन करा दें। लेकिन, ध्यान रखें गणेश की भूख अलग प्रकार की है।'

कुबेर ने कहा, 'मैं सभी को खाना खिला सकता हूं तो गणेशजी को भी खिला दूंगा।'

अगले दिन गणेशजी कुबेर देव के घर पहुंच गए। कुबेर ने उनके लिए बहुत सारा खाना बनवाया था। गणेशजी खाने के लिए बैठे तो पूरा खाना खत्म हो गया। उन्होंने और खाना मांगा। कुबेर ये देखकर घबरा गए। उन्होंने और खाना तुरंत बनवाया तो वह भी खत्म हो गया। गणेशजी बार-बार खाना मांग रहे थे।

कुबेर बोले, 'अब सारा खाना खत्म हो गया है।' गणेशजी ने कहा, 'मुझे अपने रसोईघर में ले चलो, मेरी भूख शांत नहीं हुई है।'

कुबेर गणेशजी को रसोईघर में ले गए तो वहां रखी खाने की सभी चीजें भी खत्म हो गईं, लेकिन गणेशजी अब भी भूखे ही थे। उन्होंने कहा, 'मुझे भंडार गृह में ले चलो, जहां खाने का कच्चा सामान रखा है। कुबेर भगवान को अपने भंडार गृह में ले गए तो गणेशजी ने वहां रखी खाने की सभी चीजें भी खा लीं।

अब कुबेर देव को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए, जिससे गणेशजी तृप्त हो जाएं।

कुबेर तुरंत ही शिवजी के पास पहुंचे। उन्होंने पूरी बात बता दी। शिवजी ने गणेशजी को देखा और कहा, 'जाओ, माता पार्वती को बुलाकर लाओ।'

मां पार्वती को देखकर गणेश ने कहा, 'मां, कुबेर देव के खाने से मेरी भूख शांत नहीं हुई है। मुझे खाने के लिए कुछ दीजिए।'

पार्वती अपने रसोईघर में गईं और खाना बनाकर ले आईं। उन्होंने जैसे ही अपने हाथ से खाना खिलाया तो गणेश को तृप्ति मिल गई। मां और खिलाने लगी तो गणेशजी ने कहा, मां मेरा पेट भर गया है। अब मैं नहीं खा सकता।'

माता ने फिर कहा, 'बेटा और खा लो।'

तब गणेश उठ गए और बोले, 'मां, मैं और खाऊंगा तो मेरा पेट ही फट जाएगा।' ये बोलकर गणेशजी वहां से चले गए।

सीख- इस कथा से हमें दो सीख मिलती है। पहली, हमें अपने धन पर घमंड नहीं करना चाहिए। दूसरी, मां द्वारा बनाए गए भोजन का हमेशा सम्मान करें। जो तृप्ति माता के हाथों से बने भोजन से मिलती है, वह बाहर के खाने से नहीं मिलती है।



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aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, story of kuberdev and lord ganesh, we should always respect the food made by the mother


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7वीं पास युवक की पहल,  5 साल तक की बच्चियों को जन्मदिन पर फ्री में केक देते हैं, हर साल 7 हजार किलो केक बांटते हैं

सुनील पालडिया। आज की पॉजिटिव स्टोरी में हम आपको ऐसे शख्स से मिलवाने जा रहे हैं, जिसने बेटी बचाओ अभियान को अलग ही तरीके से आगे बढ़ाने का काम किया है। सूरत के रहने वाले संजय चोडवडिया गरीब तबके की 5 साल की बच्चियों को उनके जन्मदिन पर फ्री में केक देते हैं। शहर में बेकरी चलाने वाले संजय अब तक हर साल 7 लाख रुपए की कीमत के 7 हजार से ज्यादा केक बांट रहे हैं। उनका यह अभियान पिछले 12 सालों से लगातार जारी है।

मूलत: अमरेली जिले के सावरकुंडला शहर के रहने वाले संजय चोडवडिया करीब 20 सालों से सूरत में रह रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते वे सिर्फ 7वीं कक्षा तक ही पढ़ सके और इसके बाद रोजगार की तलाश में सूरत आ गए थे। सूरत आने के बाद उन्होंने 8 सालों तक डायमंड फैक्ट्री में हीरे घिसने का काम किया। इसके बाद एम्ब्रायडरी के कारखाने में और फिर खुद की बेकरी शुरू की थी। वे पिछले 12 सालों से डभोली इलाके में घनश्याम बेकरी और केक नाम से दुकान चला रहे हैं। अब इसी नाम से 14 ब्रांच भी हैं।

संजय ने सरकारी अस्पताल से बच्चियों के जन्म की जानकारी लेकर उसके घर केक पहुंचाने से शुरूआत की थी।

मोरारी बापू के प्रवचन सुनकर शुरू किया अभियान

संजय बताते हैं ‘यह करीब 12 साल पुरानी बात है। कतारगाम इलाके में कथावाचक मोरारी बापू के प्रवचन हो रहे थे। बापू का यह प्रवचन बेटी बचाओ अभियान को लेकर था। बापू के इसी प्रवचन को सुनने के बाद मैंने अभियान में जुड़ने का फैसला कर लिया था और इसके लिए सबसे अलग तरीका अपनाया। मैंने गरीब तबके की बच्चियों के जन्मदिन पर केक देना शुरू किया और इसके लिए सरकारी अस्पताल से बच्चियों के जन्म की जानकारी लेकर उसके घर केक पहुंचाने से शुरूआत की थी। इसके बाद जन्म तारीख नोट कर बेटी के लगातार 5 साल के होने तक उसके घर केक पहुंचाने का सिलसिला जारी रहता है।’

कई सामाजिक संस्थाएं कर चुकीं सम्मानित

संजयभाई कहते हैं कि बेटियां आगे बढ़ेंगी तो ही सही मायने में देश आगे बढ़ेगा। इसके लिए सभी लोग सच्चे मन से प्रयत्न करें तो परिवर्तन ला सकते हैं। इसके लिए हमें किसी का इंतजार किए बगैर ही आगे बढ़ जाना चाहिए। संजय ने पहले साल 1 हजार किलो केक बांटकर इस अभियान की शुरुआत की थी। आज उनकी 14 ब्रांचों से हर साल 7 हजार किलो केक बेटियों के घर पहुंचाए जा रहे हैं। संजय की किसी भी ब्रांच से संपर्क कर परिवार फ्री में केक ले सकता है। संजय की इस अद्भुत पहल के लिए कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

इस अभियान को लिम्का बुक रिकार्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी भी चल रही है।

लिम्का बुक रिकार्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी

संजय की बेकरी की ओर से बच्चियों के लिए 100 रुपए की कीमत का 250 ग्राम केक फ्री में दिया जाता है। अब वे हर साल 7000 किलो केक मुफ्त में बांट रहे है, जिसकी कीमत 7 लाख रुपए होती है। संजय बताते हैं कि उनसे कई लोगों ने इसके बारे में पूछा कि केक देने से क्या होता है। इसके जवाब में संजय कहते हैं कि बर्थडे के दिन उस प्यारी सी बच्ची के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है बस। संजय के इस अभियान से जुड़े कुछ लोगों के बताए अनुसार इस अभियान को लिम्का बुक रिकार्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी चल रही है।



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संजय कहते हैं कि जन्मदिन पर केक देने के बाद बच्चियों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर उन्हें बेहद सुकून मिलता है।


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उस मुगल बादशाह का जन्म, जिसने दुनिया के लिए प्रेम का प्रतीक बनाया

पांच जनवरी 1592 को जुमेरात (गुरुवार) के दिन जहांगीर की बेगम ने एक बेटे को जन्म दिया। जहांगीर ने अपने पिता अकबर से उसके बेटे का नाम रखने की इच्छा जताई। अकबर ने उसे खुर्रम बुलाया। फारसी में खुर्रम का मतलब होता है खुशी। पैदाइश के छठवें दिन खुर्रम को अकबर की बेगम रुकैया के हवाले कर दिया गया। क्योंकि बेगम रुकैया की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसने खुर्रम को गोद ले लिया।

अकबर खुर्रम के दादा थे। खुद अनपढ़ थे, लेकिन उन्होंने खुर्रम को तालीम दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साथ ही बढ़िया उस्तादों से उसे जंग के सबक भी सिखवाए। अकबर का खुर्रम से इतना लगाव हो गया था कि वो जंग में खुर्रम को भी साथ ले जाने लगा। यहीं से सफर शुरू हुआ खुर्रम के 'शाहजहां' बनने का।

फिर तख्त पर आया शाहजहां
1627 में जहांगीर की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद 1628 में खुर्रम ने तख्त संभाला। तख्त संभालने के बाद खुर्रम का नाम शाहजहां हो गया। शाहजहां यानी दुनिया का राजा। शाहजहां ने उत्तर दिशा में कंधार तक अपना राज्य फैला दिया और दक्षिण भारत का ज्यादातर हिस्सा जीत लिया। शाहजहां ने 1658 तक राज किया और इन 30 सालों के राज में उसने काफी कुछ हासिल किया।

मुमताज से मोहब्बत
जहांगीर के दौर में वजीर थे एतमाउद्दौला। इन्हीं एतमाउद्दौला के बेटे थे अबु हसन आसफ खान। और इन्हीं अबु हसन आसफ खान की बेटी थीं अर्जुमंद बानो। अर्जुमंद बानो जिन्हें बाद में मुमताज के नाम से जाना गया। मुमताज शाहजहां की तीसरी पत्नी थी। उनसे पहले शाहजहां की दो और बेगम थीं।

अप्रैल 1607 में 14 साल की अर्जुमंद और 15 साल के खुर्रम की सगाई हुई। फिर 10 मई 1612 को सगाई के करीब 5 साल बाद दोनों का निकाह हुआ। अर्जुमंद से सगाई और निकाह के बीच खुर्रम ने दो और शादियां की थीं।

कहते हैं कि मुमताज और शाहजहां के बीच बहुत ज्यादा मोहब्बत थी। दोनों के 13 बच्चे हुए। निकाह से लेकर मौत तक मुमताज करीब हर साल गर्भवती रहीं। जून 1631 में 14वें बच्चे को जन्म देने के दौरान मुमताज की मौत हो गई। ऐसा बताया जाता है कि मुमताज की मौत के दो साल बाद तक शाहजहां ने भोग विलास के सारे सुख छोड़ दिए थे। उनके बाल-दाढ़ी बढ़ गए थे।

मुमताज की याद में बनाया ताजमहल
शाहजहां को वास्तुकार का राजा भी कहा जाता है। उसने अपने शासनकाल में बहुत सी इमारतें बनवाईं। इन्हीं इमारतों में से एक ताजमहल है। 1631 में जब मुमताज की मौत हो गई, तो शाहजहां ने उसके मकबरे के लिए ताजमहल बनवाया।

ताजमहल के चीफ आर्किटेक्ट थे उस्ताद ईशा खान, जो उस समय के मशहूर आर्किटेक्ट थे। ताजमहल बनाने में फारस और तुर्की के अलावा भारत के 20 हजार मजदूरों ने काम किया। एक हजार हाथी तो सिर्फ माल ढोने के लिए लगे थे।

ताजमहल को बनाने में 22 साल का वक्त लगा। 1631 में शुरू हुआ इसका निर्माण कार्य 1653 में पूरा हुआ। ताजमहल के पीछे शाहजहां काला ताज भी बनाना चाहते थे, लेकिन अपने बेटे औरंगजेब के साथ उनका टकराव शुरू हो गया। 22 जनवरी 1966 को आगरा में शाहजहां की मौत हो गई।

भारत और दुनिया में 5 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाएं :

  • 2014: भारतीय संचार उपग्रह जीसैट-14 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया।
  • 2009: नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
  • 2003: अल्जीरिया में विद्रोहियों के हमले में 43 सैनिक मरे।
  • 2000: अंतरराष्ट्रीय फुटबाल एवं सांख्यिकी महासंघ ने 'पेले' को शताब्दी का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया।
  • 1993: करीब 85,000 टन कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर शेटलैंड द्वीप के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
  • 1970: चीन के यून्नान प्रांत में रिक्टर पैमाने पर 7.7 तीव्रता वाले भूकंप से 15000 लोगों की मौत।
  • 1955: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कलकत्ता (अब कोलकाता) में जन्म।
  • 1941: क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी का भोपाल में जन्म।
  • 1934: भारतीय जनता पार्टी के नेता मुरली मनोहर जोशी का जन्म।
  • 1671: छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगलों से सल्हर क्षेत्र को अपने कब्जे में किया।
  • 1659: खाजवाह की लड़ाई में औरंगजेब ने शाह शुजा को हराया।


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