मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक हफ्ते भर पहले होने वाले 2+2 वार्ता के मायने

इस सप्ताह अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर भारत आ चुके हैं। इसमें खास क्या है? यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव और परिणाम से ठीक एक सप्ताह पहले हो रही है। महामारी के बीच अमेरिकी प्रशासन के दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण मंत्री क्या सिर्फ 2+2 वार्ता की अगली प्रक्रिया के लिए भारत आ रहे हैं?

इससे भी अहम यह है कि भारत इनसे इतने आत्मविश्वास से करीबी क्यों बढ़ा रहा है, जबकि किसी को नहीं पता कि हफ्तेभर में कौन जीतेगा? सामान्य हालात में भारत का रूढ़िवादी सिस्टम इंतजार करना उचित समझता। लेकिन, यह सामान्य समय नहीं है। केवल इसलिए नहीं कि चीन लद्दाख में छह माह अड़ा है।

बल्कि अमेरिका के लिए भारत शीर्ष विदेशी और सामरिक नीति प्राथमिकता नहीं है। लेकिन तस्वीर इससे बदलती है कि चीन अब अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जापान सहित सभी लोकतंत्रों के लिए चिंता का विषय है।

अरब भी चीन और ईरान के संबंधों को डर से देख रहे हैं और उनकी चीन-पाकिस्तान संबंधों पर भी नजर है। शी जिनपिंग के चीन ने उसके पूरब, पश्चिम और दक्षिण में एक घबराहट पैदा कर दी है। रूस अब चीन का असली शक्तिशाली सहयोगी है। पाकिस्तान को हम इससे बाहर कर रहे हैं, क्योंकि चीन से उसके सबंध सहयोग की बजाय निर्भरता वाले हैं।

रूस चीन को ईंधन की आपूर्ति करता है। रूस के पास तकनीक और औद्योगिक आधार है। चीन के पास सेना है, जिसे उसकी तकनीक की जरूरत है। इसी वजह से रूस के उद्योगों और चीनी सेना के बीच नया सैन्य-औद्योगिक गठबंधन उभरता दिख रहा है। यह एक जटिल और नई वास्तविकता है।

पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसी दो अप्रत्याशित नाभिकीय शक्तियों को चीन का पहले ही संरक्षण हासिल है। इस क्षेत्र में जापान और ऑस्ट्रेलिया ही दो संतुलन बनाने वाली शक्तियां हैं, लेकिन उन पर भी दबाव है, ताइवान को डराया गया है, हॉन्गकॉन्ग पहले ही चीन के पास है। दुनिया में उथल-पुथल वाले इस साल में चीन ही ऐसी अर्थव्यवस्था है, जो प्रगति करेगी। यही बात उसे अमेरिका में द्विपक्षीय रणनीतिक चिंता का विषय बनाती है।

गोस्वामी तुलसी दास ने रामचरितमानस में लिखा है कि भगवान राम ने सभी मनुष्यों और राष्ट्रों के लिए एक ही महत्वपूर्ण सिद्धांत दिया था कि ‘भय बिन होय न प्रीति’। लेकिन यह उल्टी तरह से भी काम करता है।

उदाहरण के लिए, कोई भी यह कहने से पीछे नहीं हटता कि भारत-अमेरिका संपर्कों की तेजी, क्वाड की जरूरत व मालाबार में नौसेना अभ्यास के लिए ऑस्ट्रेलिया की वापसी का चीन से कुछ लेना-देना नहीं है। लेकिन, एक सप्ताह पहले भारत यात्रा पर आए अमेरिका के विदेश उपमंत्री स्टीफन ई. बेगन यह कहने से नहीं हिचके कि चीन ही सबसे गंभीर समस्या है।

क्वाड को तो मैं चीन पीड़ित समाज भी कहता हूं। चीन ने इन देशों में हर सावधान राजनयिक की डेस्क पर हलचल मचा दी है। सी. राजा मोहन ने 25 अगस्त को द इंडियन एक्सप्रेस में लिखा कि कैसे कूटनीतिक स्वायत्तता की भारत की परिभाषा बदल गई है। वे कहते हैं कि 1990 में शीत युद्ध के बाद भारत के लिए कूटनीतिक स्वायत्तता का मतलब रणनीतिक हितों और राजनीतिक स्वतंत्रता को अमेरिका जैसी प्रभावी ताकत से मुक्त रखना था।

यह जरूरी था, क्योंकि क्लिंटन के लोग भारत-पाक को दुनिया में सबसे खतरनाक जगह समझते थे, जहां परमाणु युद्ध का खतरा था। इसीलिए भारत ने रूस संग पुराने संबंध जिंदा करने के साथ ही चीन की ओर कदम बढ़ाया। आज कूटनीतिक रणनीति की और तीखी परिभाषा हो गई है।

अब यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और चीन से कद को मिल रही चुनौती दूर करना है। मैंने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी का सिंगापुर में शंग्री-ला बैठक का भाषण भी पढ़ा है, जहां उन्होंने कूटनीतिक स्वायत्तता की एकदम अलग परिभाषा दी थी। उन्होंने कहा था कि भारत अपना रास्ता खुद बनाएगा और बड़ी शक्तियों को एक और प्रतिस्पर्धा से बचना चाहिए। लेकिन, आज शायद प्रधानमंत्री वह बात न दोहराएं।

जब एक शीत युद्ध चलता है या आज की तरह, नया शुरू होता है तो भारत कभी भी निरपेक्ष नहीं रह सकता। इससे इंदिरा या नेहरू के कई समर्थक नाराज हो सकते हैं। लेकिन, मैं इन दोनों की और भी प्रशंसा इसलिए करता हूं कि दिखावा चाहे जो रहा हो, उन्होंने एक पक्ष को चुनने में कभी शर्म नहीं की।

1962 में नेहरू ने अमेरिका को बहुत देर से चुना और उनकी बेटी ने सोवियत संघ को। कम से कम 1969-1977 और फिर 1980-1984 तक उनके शासन में भारत चाहे जो हो, निर्गुट था। ‌‌‌वे सोवियत संघ की सहयोगी सिर्फ इसलिए थीं कि वे राष्ट्रीय हित में काम कर रही थीं। आज भी वैसा ही चयन किया गया है।

भारत दो दशकों से इस दिशा में बढ़ रहा था और अमेरिका ने भी समान उत्साह दिखाया। भारत और अमेरिका ने चयन कर लिया है। यह पूर्ण आलिंगन है। दोनों देशों, खासकर अमेरिका में मामला द्विपक्षीय है। वहां हफ्तेभर में बदलाव देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के एक हफ्ते पहले भारत में यह 2+2 बैठक हो रही है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)



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शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’।


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पूरे देश के लिए बिहार जैसा वादा; चिराग को भाजपा का भरोसा और कंगना बोलीं- उद्धव ने मुझे गाली दी

नमस्कार!
जैसे-जैसे कोरोना के एक्टिव मामले रोज घटते जा रहे हैं, फ्री वैक्सीन के वादे बढ़ते जा रहे हैं। बिहार के बाद अब मोदी सरकार के एक मंत्री ने पूरे देश के लिए भी फ्री वैक्सीन का वादा कर दिया है। बहरहाल, शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...

सबसे पहले देखते हैं, बाजार क्या कह रहा है…

  • BSE का मार्केट कैप 158.60 लाख करोड़ रुपए रहा। 59% कंपनियों के शेयरों में गिरावट।
  • 2,860 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। 990 कंपनियों के शेयर बढ़े और 1,698 कंपनियों के गिरे।

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर

  • प्रधानमंत्री मोदी ‘स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि स्कीम’ के तहत उत्तर प्रदेश के स्ट्रीट वेंडर्स से बातचीत करेंगे। 3 लाख वेंडर्स को कर्ज दिया जाएगा।
  • IPL में हैदराबाद और दिल्ली के बीच शाम साढ़े सात बजे से मैच।
  • मोदी शाम 4:45 बजे नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन विजिलेंस एंड एंटी करप्शन को संबोधित करेंगे।
  • आर्मी कमांडर्स की कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संबोधित करेंगे।

देश-विदेश

  • पूरे देश के लिए बिहार जैसा वादा

केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी का कहना है कि देश के सभी लोगों को कोरोना की वैक्सीन फ्री दी जाएगी। सारंगी ने ओडिशा के बालासोर में चुनावी सभा के बाद यह बात कही। यहां 3 नवंबर को विधानसभा उपचुनाव हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री देश के सभी लोगों को फ्री वैक्सीन का ऐलान कर चुके हैं। हर आदमी पर करीब 500 रुपए का खर्च आएगा।

इस वादे के मायने: सरकार ने वैक्सीन के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का फंड रखने का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. हर्षवर्धन भी कह चुके हैं कि जुलाई 2021 तक 20-25 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी, लेकिन सारंगी जो दावा कर रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे तौर पर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। सारंगी के बयान पर सरकार भी चुप है।

  • मध्य प्रदेश में रैलियां हो सकेंगी

मध्य प्रदेश में उपचुनाव के दौरान 9 जिलों में रैलियां हो सकेंगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने पिछले दिनों राज्य में फिजिकल रैलियों पर रोक लगा दी थी और वर्चुअल रैली कराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आदेश पर सोमवार को स्टे लगा दिया। साथ ही रैलियों में भीड़ बढ़ने पर राजनीतिक दलों को फटकार भी लगाई कि आपको खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि इस हालात के लिए जिम्मेदार कौन है?

  • चिराग को बिहार में भाजपा पर भरोसा

कोरोना के बीच हो रहा बिहार चुनाव शायद इतना दिलचस्प नहीं होता, अगर चिराग पासवान एनडीए से अलग नहीं होते। भास्कर को दिए इंटरव्यू में चिराग कह रहे हैं कि बिहार में भाजपा-लोजपा की सरकार बनेगी और 100% बनेगी। भाजपा के सीएम को उनकी पार्टी सपोर्ट करेगी। तेजस्वी के बारे में चिराग ने कहा कि उन पर कभी वर्क ही नहीं किया तो उनके बारे में क्या बोलूं?

भाजपा के लिए उम्मीदों के चिराग: चिराग ने पहले खुद को मोदी का हनुमान बताया। अब कह रहे हैं कि वे भाजपा के साथ सरकार बना सकते हैं। यानी सीधे तौर पर मैसेज दे रहे हैं कि चुनाव के बाद अगर जदयू को सीटें कम मिलीं और नीतीश को छोड़कर भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में आ गई तो लोजपा उसका साथ देगी।

  • कंगना vs उद्धव

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने रविवार को दशहरा रैली के संबोधन में कंगना का नाम लिए बिना कहा था कि आप यहां रोजगार के लिए आते हैं और मुंबई को बदनाम करते हैं। इस पर कंगना ने कहा- उद्धव ठाकरे! तुमने कल अपने भाषण में मुझे गाली दी। मुझे नमक हराम कहा। नारी सशक्तीकरण के ठेकेदारों ने भी कुछ नहीं कहा। आपकी बातों से पता चलता है कि एक सेल्फ मेड सिंगल वुमन से आप कैसे बात करते हैं। मुख्यमंत्री, आप नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) के खराब प्रोडक्ट हैं।

  • US में रिकॉर्ड प्री-पोल वोटिंग

कोरोना ने अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाली वोटिंग का ट्रेंड भी बदल दिया है। वोटर भीड़ भरे पोलिंग बूथ पर जाने से बचना चाह रहे हैं। यही वजह है कि प्री-पोल वोटिंग ने इस बार नया रिकॉर्ड बना दिया है। चुनाव के 9 दिन पहले ही 5.9 करोड़ वोट डाले जा चुके हैं, जबकि 2016 में कुल प्री-पोल बैलट्स ही 5.7 करोड़ थे।

ओरिजिनल

  • पॉजिटिव खबर

दिल्ली की रहने वाली सुप्रिया दलाल सरकारी स्कूल में टीचर हैं। डेढ़ साल पहले उन्होंने ऑर्गेनिक सब्जियों की खेती शुरू की। अब 5 एकड़ जमीन पर 17 तरह की सब्जियां उगा रही हैं। 300 से ज्यादा कस्टमर्स हैं। हर महीने 3 लाख रुपए की आमदनी भी हो रही है।

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  • बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट

लखीसराय के नजदीक एक गांव है लाखोचक। यहां 1925 में दो समुदायों के बीच संघर्ष हुआ था। यह दो दिन तक चला था। गोलियां चली थीं। कोई कहता है कि इस संघर्ष में 8 लोग मारे गए, कोई कहता है कि 80 लोग मारे गए। माना जाता है कि इसी घटना ने बिहार के जातीय समीकरणों पर असर डाला।

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एक्सप्लेनर

  • US इलेक्शन में रूसी हैकर्स

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से दो हफ्ते पहले रूस पर हैकिंग और साइबर हमलों के आरोप लग रहे हैं। सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या वाकई में रूस हैकिंग के जरिए अमेरिकी चुनाव में छेड़छाड़ कर रहा है और कोई देश किसी दूसरे देश की चुनाव प्रक्रिया को कैसे प्रभावित कर सकता है?

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सुर्खियों में और क्या है...
1.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने लोकप्रियता बनाए रखने के लिए अब इस्लामोफोबिया का सहारा लिया है। उन्होंने इस्लाम के प्रति नफरत को मुद्दा बनाकर फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग को एक चिट्‌ठी लिखी है। इसमें उन्होंने इस्लामोफोबिया से जुड़ी पोस्ट हटाने की मांग की है।
2. पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे दूसरी शादी करने जा रहे हैं। वे जून में पहली पत्नी मीनाक्षी साल्वे से कानूनी रूप से अलग हो गए थे। 65 साल के साल्वे 56 साल की कैरोलिन ब्रोसार्ड से 28 अक्टूबर को शादी करेंगे। कैरोलिन लंदन में रहती हैं और आर्टिस्ट हैं।
3. बिजनेस टायकून कुमार मंगलम बिड़ला की बेटी और गायिका अनन्या बिड़ला अमेरिका में नस्लभेद का शिकार हुई हैं। अनन्या और उनके परिवार को वॉशिंगटन के स्कोपा इटैलियन रूट्स रेस्त्रां ने परिवार समेत बाहर निकाल दिया। रेस्त्रां के वेटर ने अनन्या और उनकी मां से बदसलूकी की।



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Narendra Modi: Coronavirus Vaccine India | Kangana Ranaut Uddhav Thackeray News | Chirag Paswan Nitish Kumar; Dainik Bhaskar Top News Morning Briefing Today


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रिपोर्टिंग शैली पर सीजेआई बोले- सार्वजनिक बहस का ऐसा स्तर कभी नहीं रहा, रिपाेर्टिंग में जिम्मेदारी निभानी हाेगी

टीवी कवरेज के दौरान साम्प्रदायिक घृणा फैलाने के आरोप का मामला सोमवार को सुप्रीम काेर्ट पहुंचा। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने रिपब्लिक टीवी के चीफ एडिटर अर्नब गाेस्वामी की रिपाेर्टिंग शैली पर तल्ख टिप्पणी की।

कहा- ‘आप अपनी रिपोर्टिंग के साथ थोड़े पुराने जमाने के हो सकते हैं। सच कहूं तो मैं इस स्तर की बहस को कभी स्वीकार नहीं कर सकता। बहस का स्तर सार्वजनिक रूप से ऐसा कभी नहीं रहा। कोर्ट प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व को मानती है, इसका मतलब यह नहीं है कि मीडिया के व्यक्ति से सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए।’

सुप्रीम काेर्ट महाराष्ट्र सरकार द्वारा बाॅम्बे हाई काेर्ट के 30 जून के आदेश के खिलाफ अर्नब के विरोध में दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अर्नब पर आरोप है कि उन्होंने पालघर लिंचिंग और अप्रैल में बांद्रा रेलवे स्टेशन पर प्रवासी श्रमिकों के इकट्‌ठा होने का जो कवरेज किया था, वह साम्प्रदायिक घृणा फैलाने वाला था।

सीजेआई बाेबडे ने अर्नब गाेस्वामी के वकील हरीश साल्वे से कहा- रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी निभानी होगी। कुछ क्षेत्रों में सावधानी के साथ चलना होता है। बतौर कोर्ट, हमारी सबसे महत्वपूर्ण चिंता शांति और सद्भाव है।’

सीजेआई ने कहा कि कोर्ट उनके मुवक्किल से जिम्मेदारी का आश्वासन चाहती है। जवाब में साल्वे ने कहा कि वे कोर्ट के विचारों से सहमत हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह एफआईआर सही नहीं है और इसे व्यक्ति विशेष के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। पिछले हफ्ते, रिपब्लिक टीवी की पूरी संपादकीय टीम के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट ने दो हफ्ते के लिए सुनवाई स्थगित करते हुए गोस्वामी को हलफनामा दायर करने को कहा है।

तंज कसा- कुछ लोगों को ऊपरी दबाव के साथ निशाना बनाया जाता है

इधर, सिंघवी ने जब कहा कि कुछ लोगों को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता है, तो सीजेआई ने तंज कसा- ‘कुछ लोगों को ऊपरी दबाव के साथ निशाना बनाया जाता है। यह इन दिनों की संस्कृति है। कुछ लोगों को उच्च सुरक्षा की जरूरत है।’

इधर, बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस उज्जल भुयान और रियाज चागला की बेंच ने ‘प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता’ कहने के बाद जांच को स्थगित कर दिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट के इस आदेश को महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।



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प्रेस की स्वतंत्रता का महत्व सही, हमारी चिंता शांति और सद्भाव है: सुप्रीम कोर्ट


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9 घंटे की पूछताछ के दौरान नरेंद्र मोदी ने चाय तक नहीं ली, पानी भी साथ लेकर आए थे

गुजरात में 2002 में हुए दंगों के बाद इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ था। एसआईटी ने नरेंद्र मोदी (तत्कालीन मुख्यमंत्री) से इस मामले में करीब नौ घंटे तक पूछताछ की थी। उस एसआईटी के प्रमुख रहे आरके राघवन ने अपनी आत्मकथा ‘अ रोड वेल ट्रैवेल्ड’ में लिखा है कि मोदी ने सभी 100 सवालों के जवाब दिए और नौ घंटे की पूछताछ के दौरान चाय तक नहीं पी।

राघवन ने अपनी किताब में लिखा है कि मोदी पूरी पूछताछ के दौरान सहज रहे। हालांकि, उन्होंने एसआईटी की ओर से पेश की गई चाय भी नहीं पी। यहां तक कि वे पानी भी अपना लेकर आए थे। राघवन ने अपनी किताब में यह भी लिखा है कि मोदी इस पूछताछ के लिए आसानी से तैयार हो गए थे। पूछताछ के बारे में विस्तार से बताते हुए राघवन ने लिखा है कि उन्होंने मोदी को संदेश भिजवाया कि उन्हें इसके लिए एसआईटी के दफ्तर आना होगा। किसी अन्य जगह पर पूछताछ का मतलब होता कि एसआईटी मोदी का समर्थन कर रही है।

राघवन बोफोर्स और मैच फिक्सिंग की जांच में भी रहे शामिल

राघवन उस एसआईटी की अगुवाई करने से पहले सीबीआई के प्रमुख भी रह चुके थे। वे बोफोर्स जांच, 200 क्रिकेट मैच फिक्सिंग जांच में भी शामिल रहे थे। राघवन ने यह भी बताया कि तब उन्होंने खुद मोदी से पूछताछ न कर एसआईटी के एक अन्य सदस्य अशोक मलहोत्रा को यह काम क्यों सौंपा था। उन्होंने लिखा है कि अगर मैं मोदी से पूछताछ करता तो मेरे ऊपर मिलीभगत का आरोप लगाया जाता।



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राघवन ने यह भी बताया कि तब उन्होंने खुद मोदी से पूछताछ न कर एसआईटी के एक अन्य सदस्य अशोक मलहोत्रा को यह काम क्यों सौंपा था। (फाइल फोटो)


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प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी की पटना रैली में ब्लास्ट; आर्मेनिया की संसद में घुसकर पीएम की हत्या

भाजपा ने सितंबर 2013 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद पटना के गांधी मैदान में 27 अक्टूबर को हुंकार रैली की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इसी दौरान 7 धमाके हुए। 2 ब्लास्ट रेलवे स्टेशन पर हुए और 5 गांधी मैदान पर। इसमें 6 लोगों की मौत हुई और करीब 66 लोग घायल हुए।

2014 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यह एक बड़ी रैली थी। बिहार में नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री थे और उन्होंने जून में NDA से बाहर होने का फैसला किया था। दरअसल, मोदी को BJP/NDA का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी और इसी बात को लेकर नीतीश नाराज चल रहे थे। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के बाद मोदी की यह पटना में पहली रैली थी। इस वजह से इस पर पूरे देश की नजरें थीं।

पिछले साल यानी ब्लास्ट के 6 साल बाद नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस बम ब्लास्ट के एक आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। हैदराबाद से पकड़े गए इस आतंकी का नाम अजहरुद्दीन उर्फ केमिकल अली है। इंडियन मुजाहिदीन (IM) के इस आतंकी को हैदराबाद एयरपोर्ट से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह विदेश जाने की कोशिश में था।

आर्मेनिया की संसद में गोलीबारी

आर्मेनिया की संसद पर हमले की साजिश रचने वाला मास्टरमाइंड नायरी हुनायन को 2003 में दोषी ठहराया गया और इस समय वह उम्रकैद की सजा काट रहा है।

कुछ हथियारबंद हमलावरों ने 1999 में आर्मेनिया की संसद में सांसदों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस हमले में आर्मेनिया के प्रधानमंत्री वाजगेन सर्ग्सयान और स्पीकर कारेन देमिरच्यान मारे गए थे। बागी हमलावरों का दावा था कि उनके निशाने पर प्रधानमंत्री थे। आर्मेनियाई सैनिकों ने संसद भवन को चारों ओर से घेर लिया था, तब जाकर हमलावरों ने सरेंडर किया था।

इतिहास में आज के दिन को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है:

  • 1605: मुगल साम्राज्य के तीसरे शासक अकबर का फतेहपुर सीकरी में निधन हुआ।
  • 1676: पोलैंड और तुर्की ने वारसा की संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • 1795ः अमेरिका और स्पेन ने सैन लोरेंजो की संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • 1811: सिलाई मशीन के आविष्कारक आइजैक मेरिट सिंगर का जन्म हुआ।
  • 1904ः स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी जितेंद्र नाथ दास उर्फ जतिन दास का कलकत्ता में जन्म हुआ।
  • 1905: नार्वे स्वीडन से अपना गठजोड़ समाप्त करके स्वतंत्र हो गया।
  • 1910: रूस और चीन के साथ कई वर्षों के युद्ध के बाद जापान को 1910 में इन दोनों देशों पर जीत मिली।
  • 1920: लीग ऑफ नेशन का मुख्यालय जिनेवा में स्थानांतरित किया गया।
  • 1924ः उज्बेक एसएसआर 1924 को सोवियत संघ में मिला।
  • 1952ः सिंगर अनुराधा पौडवाल का जन्‍म हुआ।
  • 1982ः चीन ने अपनी जनसंख्या एक अरब से ज्यादा होने का ऐलान किया।
  • 1991: तुर्कमेनिस्तान की उच्च परिषद ने सोवियत संघ से इस देश की स्वतंत्रता को मंजूरी दी गई।
  • 1995ः यूक्रेन में कीव स्थित चेर्नोबिल परमाणु संयुत्र सुरक्षा खामियों के कारण पूरी तरह बंद किया गया।
  • 2003ः चीन में भूकंप से 50,000 से अधिक लोग प्रभावित। बगदाद में बम धमाकों से 40 की मौत।
  • 2004ः चीन ने विशालकाय क्रेन का निर्माण किया।


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Today History for October 27th/ What Happened Today | Blast in Narendra Modi Rally In 2013 In Bihar At Gandhi Maidan | Shooting in Armenian Parliament


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रैलियों पर रोक हटी; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पार्टियां कोरोना प्रोटोकॉल मानतीं तो हाईकोर्ट दखल क्यों देता!

उपचुनाव से 8 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच द्वारा 21 अक्टूबर को दिए गए उस आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी, जिसमें हाईकोर्ट ने चुनावी रैलियों में जुट रही भीड़ और टूटते कोरोना प्रोटोकॉल को गंभीरता से लेते हुए राजनीतिक दलों को फिजिकल चुनावी रैलियां, सभाएं करने पर रोक लगा दी थी।

साथ ही कहा था कि इन कार्यक्रमों के लिए आयोजनकर्ता कलेक्टर से लिखित अनुमति लें। कलेक्टर को भी इसके लिए आयोग से अनुमति लेनी होगी। नेता वर्चुअल रैली करें। जस्टिस एएस खानविलकर की बेंच ने चुनाव आयोग, भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर, मुन्ना लाल गोयल की याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया।

वहीं कोरोना के मद्देनजर अब जरूरी कदम उठाने का फैसला चुनाव आयोग पर छोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद अब 9 जिलों अशोकनगर, गुना, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर व विदिशा में नेता फिर से चुनावी रैली कर सकेंगे।

आदेश पर रोक के मायने

  • नेताओं, दलों को रैली, सभाएं करने के लिए कलेक्टर की अनुमति नहीं लेनी होगी। प्रशासन को सूचना ही देनी होगी।
  • शासनिक व्यवस्था संभालता रहेगा, कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
  • सभाओं में मास्क-सैनिटाइजर की व्यवस्था प्रत्याशी को ही करनी होगी, प्रोटोकॉल का पालन आयोग कराएगा।

मुझे प्रचंड राजनीति करना है, इसलिए 2024 में चुनाव लडूंगी : उमा

रायसेन. पूर्व सीएम उमा भारती ने सोमवार को सांची विस के सांचेत में सक्रिय राजनीति में वापसी के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि मुझे प्रचंड राजनीति करना है इसलिए 2024 में चुनाव लड़ूंगी। तस्वीर में उमा के साथ दिख रहे बुजुर्ग कन्हैया लाल हैं। उमा ने आशीर्वाद स्वरूप इनका हाथ अपने सिर पर रखवाया।

पूर्व विधायक के पति ने कहा था- टिकट के लिए सिंधिया के पीए ने 1 करोड़ रुपए मांगे

दतिया. कांग्रेस ने सोमवार को एक वीडियो जारी किया। उसका दावा है कि वीडियो में पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ रहीं रक्षा सिरौनिया के पति संतराम ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सचिव पुरुषोत्तम पाराशर द्वारा टिकट के एवज में 1 करोड़ रुपए मांगने की बात कह रहे हैं। वीडियो 2018 के विधानसभा चुनाव का है।

वीडियो में बातचीत का ब्योरा

संतराम : आपके (सेंवढ़ा विधायक घनश्याम सिंह) और अन्य लोगों के सिंबल मिल गए थे। मेरा नहीं मिला था। पाराशर जी ने 1 करोड़ मांगे थे। कहा- महाराज ने कहा है पहले पैसा जमा कराओ। हमने कहा- एक करोड़ देंगे तो चुनाव कैसे लड़ेंगे। उन्होंने पूछा- कितने जमा करा सकते हो। हमने 25-30 लाख कहा। पाराशर ने बोले- तेरा टिकट कट जाएगा। बाहर कमलापत बैठा है। मैंने पैसे जमा कराए।

डॉ.गोविंद सिंह : कहां जमा कराए। पार्टी फंड या कहीं और?

संतराम : पाराशर के साले, इंदरगढ वाले अनूप दांतरे को, वहां जो भाजपा के मंडल अध्यक्ष हैं।

भाजपा का संकल्प पत्र 28 को

भोपाल. भाजपा प्रचार थमने के ठीक तीन दिन पहले यानी 28 अक्टूबर को उपचुनाव की सभी सीटों पर संकल्प-पत्र जारी करेगी। इस बार पार्टी मुख्यालय से सभी प्रत्याशियों को सॉफ्ट कॉपी भेजी गई है, ताकि वे चाहें तो नेता का फोटो लगा सकते हैं।

अशोकनगर कलेक्टर-एसपी हटे

भोपाल. अशोकनगर से कांग्रेस उम्मीदवार आशा दोहरे के अनशन पर बैठने के 24 घंटे बाद ही चुनाव आयोग ने कलेक्टर अभय वर्मा और एसपी रघुवंश सिंह को हटा दिया है। प्रियंका दास नई कलेक्टर और तरुण नायक एसपी होंगे।



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कोरोना प्रोटोकॉल पालन के कदम चुनाव आयोग उठाए: सुप्रीम कोर्ट


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सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

राजस्थान में शराब ठेकेदार ने सेल्समैन को 5 महीने से सैलरी नहीं दी, मांगी तो डीप फ्रीजर में डालकर जिंदा जलाया

राजस्थान के करौली में पुजारी को जिंदा जलाकर मार डालने के 18 दिन बाद अलवर में भी दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहां के कुमपुर गांव में शनिवार शाम पांच महीने से तनख्वाह मांग रहे शराब ठेके के सेल्समैन की जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई।

थाना प्रभारी दारा सिंह के मुताबिक, झाड़का निवासी रूप सिंह धानका ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि मेरा भाई कमल किशाेर (23) शराब ठेका संचालक राकेश यादव और सुभाषचंद के यहां काम करता था। यह ठेका कुमपुर-भगेरी माेड़ पर एक कंटेनर में चलाया जा रहा था। ठेकेदार ने कमल को 5 महीने से तनख्वाह नहीं दी थी।

‘तनख्वाह मांगने पर उससे मारपीट करते और धमकी देते थे। शनिवार शाम करीब 4 बजे ठेकेदार राकेश और सुभाष घर आए और उसे साथ ले गए। कमल पूरी रात घर नहीं आया तो हमने साेचा कि वह ठेकेदाराें के साथ कहीं गया हाेगा। रविवार सुबह पता चला कि कुमपुर शराब ठेके में आग लग गई है। परिवार के साथ मौके पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में लोहे के कंटेनर को खुलवाया। अंदर कमल का जला हुआ शव डीप फ्रीजर के अंदर बैठी हुई अवस्था में मिला।

राकेश और सुभाष ने ही कमल को पेट्राेल डालकर जिंदा जलाया, फिर कंटेनर में आग लगा दी। परिजनों की शिकायत पर सुभाष यादव निवासी भेड़टा श्योपुर और ठेकेदार राकेश यादव निवासी फतियाबाद के खिलाफ हत्या करने और एससीएसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।’

बड़ा सवाल- कंटेनरनुमा बक्से में कैसे चलाया जा रहा था शराब ठेका
डीएसपी ताराचंद ने बताया कि भगेरी माेड़ पर शराब के ठेकेदार राकेश यादव और सुभाष चंद के लोग इसे चलाते हैं। ठेके के कागजात मंगाए हैं। आरोपी ठेकेदार राकेश यादव की मां ग्राम पंचायत माछरौली की सरपंच हैं। ठेका आबकारी विभाग के निर्धारित मापदंडों के विपरीत सड़क पर रखे एक कंटेनरनुमा बक्से में चल रहा था। ऐसे में इस भयावह घटना के लिए विभाग भी जिम्मेदार है। नियमानुसार सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था।

न्यायिक जांच पर अड़े परिजन
घटना से नाराज परिजन न्यायिक जांच की मांग करते हुए पाेस्टमॉर्टम नहीं कराने पर अड़ गए। डीएसपी और थानाधिकारी की समझाइश के बाद रविवार को मेडिकल बाेर्ड ने पोस्टमॉर्टम किया। डीएसपी ताराचंद ने बताया कि मामला गंभीर और संदिग्ध है। फोरेंसिक की टीम भी घटनाक्रम और मौके की पड़ताल कर रही है।



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Salesmen asked for salary, put it in deep freezer and burnt it alive, again 18 days after the priest's murder.


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मोदी सरकार में मंत्री प्रताप सारंगी बोले- देश के सभी लोगों को वैक्सीन फ्री मिलेगी

भाजपा ने बिहार चुनाव में अपने घोषणा पत्र में कहा कि चुनाव जीते तो प्रदेश के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन फ्री दी जाएगी। विपक्ष इस पर हंगामा कर रहा है। उसका कहना है कि चुनाव वाले राज्य में फ्री वैक्सीन का वादा बाकी राज्यों से भेदभाव है। इस बीच केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी ने रविवार को दावा किया कि देश के सभी लोगों को वैक्सीन फ्री दी जाएगी।

हालांकि, सारंगी ने भी ये दावा एक चुनावी मीटिंग के बाद ही किया। ओडिशा के बालासोर में 3 नवंबर को उपचुनाव है। सारंगी रविवार को इसी सिलसिले में मीटिंग लेने वहां पहुंचे थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सभी लोगों को वैक्सीन फ्री उपलब्ध करवाने का ऐलान कर चुके हैं। हर आदमी के वैक्सिनेशन पर करीब 500 रुपए का खर्च आएगा।

ओडिशा के मंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों से सफाई मांगी थी
ओडिशा के फूड सप्लाई एंड कंज्यूमर वेलफेयर मिनिस्टर आरपी स्वैन के सवाल के जवाब में सारंगी ने देशभर में फ्री वैक्सीन की बात कही। स्वैन ने केंद्र में ओडिशा के दोनों मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान और प्रताप सारंगी से इस बात पर सफाई मांगी थी कि बिहार में फ्री वैक्सीन के वादे के बाद ओडिशा को लेकर भाजपा का क्या स्टैंड है?

कई राज्य सरकारें फ्री वैक्सीन का ऐलान कर चुकीं
तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, असम और पुडुचेरी पहले ही कह चुके हैं कि वे अपने लोगों को वैक्सीन फ्री देंगे। उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूरे देश के लिए फ्री वैक्सीन की मांग उठा चुके हैं।



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देश में 3 कंपनियां कोरोना वैक्सीन बना रही हैं। भारत बायोटेक को तीसरे फेज की ट्रायल की मंजूरी मिल चुकी है।- फाइल फोटो।


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विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी बोले- देश के सभी लोगों को वैक्सीन फ्री मिलेगी

भाजपा ने बिहार चुनाव में अपने घोषणा पत्र में कहा कि चुनाव जीते तो प्रदेश के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन फ्री लगाई जाएगी। विपक्ष इस पर हंगामा कर रहा है। इस बीच केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी ने रविवार को कहा कि देश के सभी लोगों को वैक्सीन फ्री दी जाएगी।

हालांकि, सारंगी ने भी ये दावा एक चुनावी मीटिंग के बाद ही किया। ओडिशा के बालासोर में 3 नवंबर को उपचुनाव है। सारंगी रविवार को इसी सिलसिले में मीटिंग लेने वहां पहुंचे थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सभी लोगों को वैक्सीन फ्री उपलब्ध करवाने का ऐलान कर चुके हैं। हर आदमी के वैक्सिनेशन पर करीब 500 रुपए का खर्च आएगा।

ओडिशा के मंत्री ने केंद्र से सफाई मांगी थी
ओडिशा के फूड सप्लाई एंड कंज्यूमर वेलफेयर मिनिस्टर आरपी स्वैन के सवाल के जवाब में सारंगी ने ऐसा कहा। स्वैन ने केंद्र में ओडिशा के दोनों मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान और प्रताप सारंगी से पहले इस बात पर सफाई मांगी थी कि बिहार में फ्री वैक्सीन के वादे के बाद ओडिशा को लेकर भाजपा का क्या स्टैंड है?

कई राज्य सरकारें फ्री वैक्सीन का ऐलान कर चुकीं
तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, असम और पुडुचेरी पहले ही कह चुके हैं कि वे अपने लोगों को वैक्सीन फ्री देंगे। उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यह मांग उठा चुके हैं कि देश के सभी लोगों को वैक्सीन फ्री मिलनी चाहिए।



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देश में 3 कंपनियां कोरोना वैक्सीन बना रही हैं। भारत बायोटेक को तीसरे फेज की ट्रायल की मंजूरी मिल चुकी है।- फाइल फोटो।


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106 दिन में मौत का आंकड़ा सबसे कम 460 रहा, 96 दिन में नए केस भी सबसे कम आए; अब तक 79 लाख संक्रमित

कोरोना के आंकड़े लगातार कम हो रहे हैं। रविवार को 45 हजार 65 नए केस आए यह 96 दिन में सबसे कम केस हैं। इससे कम 39 हजार 170 केस 21 जुलाई को आए थे। इसी तरह मौत का आंकड़ा भी बीते 24 घंटे में 460 रहा। यह बीते 106 दिन में सबसे कम है। इससे पहले 5 जुलाई को 421 केस आए थे।

रविवार को 58 हजार 180 मरीज ठीक हुए। इससे एक्टिव केस, यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 13 हजार 583 की कमी आई। अब कुल 6.54 लाख मरीजों का इलाज चल रहा है। अब तक 79.9 लाख केस आ चुके हैं। इनमें से 71.33 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.19 लाख संक्रमितों की मौत हो चुकी है।

14 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों में डेथ रेट 1% से भी कम

कोरोना अपडेट्स

  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट करके यह जानकारी दी
  • पिछले पांच दिनों में रिकवरी रेट में 2% का इजाफा हुआ है। 19 अक्टूबर को 87% रिकवरी रेट था, जो अब 89.74% हो गया है।
  • 16 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में एक्टिव केस पांच हजार से कम हो गए हैं। सबसे कम दादरा एवं नगर हवेली में 51, मिजोरम में 175, अंडमान-निकोबार में 204, सिक्किम में 242 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनके अलावा उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, पुड्‌डुचेरी, गोवा, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, लद्दाख और चंडीगढ़ में भी एक्टिव केस की संख्या कम है।
  • भारत बायोटेक को वैक्सीन के बड़े स्तर पर ट्रायल को मंजूरी मिल गई है। फर्म ने 12 से 14 राज्यों के 20 हजार वॉलंटियर्स पर ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी है।

पांच राज्यों का हाल
1. मध्यप्रदेश

राज्य में रविवार को 951 नए मरीज मिले, 1181 लोग ठीक हुए और 10 मरीजों की मौत हो गई। संक्रमितों का आंकड़ा अब 1 लाख 67 हजार 249 हो गया है। इनमें 11 हजार 237 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 1 लाख 53 हजार 127 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 2885 मरीजों की मौत हो चुकी है।

2. राजस्थान
राज्य में रविवार को 1821 लोग संक्रमित पाए गए। 2240 लोग रिकवर हुए और 13 मरीजों की मौत हो गई। 1 लाख 86 हजार 243 लोग अब तक संक्रमित पाए जा चुके हैं। इनमें 16 हजार 668 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 1 लाख 67 हजार 736 लोग ठीक हो चुके हैं।

3. बिहार
राज्य में कोरोना टेस्टिंग का आंकड़ा 1 करोड़ के पार हो गया। पिछले 24 घंटे में 1.4 लाख लोगों की जांच हुई। इनमें 749 लोग संक्रमित पाए गए। अब तक 2 लाख 12 हजार 192 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 10 हजार 222 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 2 लाख 920 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 1049 मरीजों की मौत हो चुकी है।

4. महाराष्ट्र
राज्य में पिछले 24 घंटे के अंदर 6059 नए मरीज मिले, 5648 लोग रिकवर हुए और 112 मरीजों की मौत हो गई। अब तक 16 लाख 45 हजार 20 लोग संक्रमित पाए जा चुके हैं। इनमें 1 लाख 40 हजार 486 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 14 लाख 60 हजार 755 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 43 हजार 264 मरीजों की मौत हो चुकी है।

5. उत्तरप्रदेश
राज्य में कोरोना के चलते जान गंवाने वालों की संख्या 6882 हो गई है। रविवार को 28 संक्रमितों की मौत हुई। 2032 नए मरीज मिले और 2368 लोग रिकवर हुए। अब तक 4 लाख 70 हजार 270 संक्रमितों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 27 हजार 317 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 4 लाख 36 हजार 71 लोग ठीक हो चुके हैं।



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106 दिन में मौत का आंकड़ा सबसे कम 460 रहा, 96 दिन में नए केस भी सबसे कम आए; अब तक 79 लाख संक्रमित

कोरोना के आंकड़े लगातार कम हो रहे हैं। रविवार को 45 हजार 65 नए केस आए यह 96 दिन में सबसे कम केस हैं। इससे कम 39 हजार 170 केस 21 जुलाई को आए थे। इसी तरह मौत का आंकड़ा भी बीते 24 घंटे में 460 रहा। यह बीते 106 दिन में सबसे कम है। इससे पहले 5 जुलाई को 421 केस आए थे।

रविवार को 58 हजार 180 मरीज ठीक हुए। इससे एक्टिव केस, यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 13 हजार 583 की कमी आई। अब कुल 6.54 लाख मरीजों का इलाज चल रहा है। अब तक 79.9 लाख केस आ चुके हैं। इनमें से 71.33 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.19 लाख संक्रमितों की मौत हो चुकी है।

14 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों में डेथ रेट 1% से भी कम

कोरोना अपडेट्स

  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट करके यह जानकारी दी
  • पिछले पांच दिनों में रिकवरी रेट में 2% का इजाफा हुआ है। 19 अक्टूबर को 87% रिकवरी रेट था, जो अब 89.74% हो गया है।
  • 16 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में एक्टिव केस पांच हजार से कम हो गए हैं। सबसे कम दादरा एवं नगर हवेली में 51, मिजोरम में 175, अंडमान-निकोबार में 204, सिक्किम में 242 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनके अलावा उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, पुड्‌डुचेरी, गोवा, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, लद्दाख और चंडीगढ़ में भी एक्टिव केस की संख्या कम है।
  • भारत बायोटेक को वैक्सीन के बड़े स्तर पर ट्रायल को मंजूरी मिल गई है। फर्म ने 12 से 14 राज्यों के 20 हजार वॉलंटियर्स पर ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी है।

पांच राज्यों का हाल
1. मध्यप्रदेश

राज्य में रविवार को 951 नए मरीज मिले, 1181 लोग ठीक हुए और 10 मरीजों की मौत हो गई। संक्रमितों का आंकड़ा अब 1 लाख 67 हजार 249 हो गया है। इनमें 11 हजार 237 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 1 लाख 53 हजार 127 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 2885 मरीजों की मौत हो चुकी है।

2. राजस्थान
राज्य में रविवार को 1821 लोग संक्रमित पाए गए। 2240 लोग रिकवर हुए और 13 मरीजों की मौत हो गई। 1 लाख 86 हजार 243 लोग अब तक संक्रमित पाए जा चुके हैं। इनमें 16 हजार 668 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 1 लाख 67 हजार 736 लोग ठीक हो चुके हैं।

3. बिहार
राज्य में कोरोना टेस्टिंग का आंकड़ा 1 करोड़ के पार हो गया। पिछले 24 घंटे में 1.4 लाख लोगों की जांच हुई। इनमें 749 लोग संक्रमित पाए गए। अब तक 2 लाख 12 हजार 192 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 10 हजार 222 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 2 लाख 920 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 1049 मरीजों की मौत हो चुकी है।

4. महाराष्ट्र
राज्य में पिछले 24 घंटे के अंदर 6059 नए मरीज मिले, 5648 लोग रिकवर हुए और 112 मरीजों की मौत हो गई। अब तक 16 लाख 45 हजार 20 लोग संक्रमित पाए जा चुके हैं। इनमें 1 लाख 40 हजार 486 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 14 लाख 60 हजार 755 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 43 हजार 264 मरीजों की मौत हो चुकी है।

5. उत्तरप्रदेश
राज्य में कोरोना के चलते जान गंवाने वालों की संख्या 6882 हो गई है। रविवार को 28 संक्रमितों की मौत हुई। 2032 नए मरीज मिले और 2368 लोग रिकवर हुए। अब तक 4 लाख 70 हजार 270 संक्रमितों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 27 हजार 317 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 4 लाख 36 हजार 71 लोग ठीक हो चुके हैं।



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बॉलीवुड ड्रग्स रैकेट में एक और गिरफ्तारी, बिहार चुनाव में तंत्र-मंत्र; देश में आज भी दशहरा

नमस्कार!

देश के चारधाम में से एक बद्रीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। 15 नवंबर को गंगोत्री, 16 नवंबर को यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट भी बंद हो जाएंगे। वहीं, देश में आज भी कुछ स्थानों पर दशहरा मनाया जाएगा। बहरहाल, शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर

  • IPL में पंजाब और कोलकाता के बीच शारजाह में शाम साढ़े सात बजे से मैच खेला जाएगा।
  • आज से दिल्ली में आर्मी कमांडर्स की कॉन्फ्रेंस शुरू होगी, जो 29 अक्टूबर तक चलेगी।
  • भारत और अमेरिका के बीच तीसरी 2+2 मिनिस्ट्रियल वार्ता। LAC पर चीन की आक्रामकता का मुद्दा उठेगा।
  • आर्मी कमांडर्स लद्दाख में चीन के साथ जारी तनाव के बीच हालात की समीक्षा करेंगे।

देश- विदेश

बॉलीवुड पर NCB का शिकंजा

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने टीवी एक्ट्रेस प्रीतिका चौहान समेत 5 लोगों को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया है। प्रीतिका कई टीवी सीरियल्स में काम कर चुकी हैं। प्रीतिका को 8 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अब तक ड्रग्स मामले में 23 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

DGCA की 12,983 घरेलू उड़ानों को मंजूरी

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने विंटर शेड्यूल के लिए एविएशन कंपनियों को 12,983 वीकली डोमेस्टिक फ्लाइट की मंजूरी दी है। यह शेड्यूल 25 अक्टूबर से अगले साल 27 मार्च तक चलेगा। पिछले साल विंटर सीजन के लिए 23,307 घरेलू उड़ानों को मंजूरी मिली थी।

बिहार चुनाव में अब तंत्र-मंत्र

डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी बोले कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने मुझे मारने के लिए 3 साल पहले तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था। लालू खुद को बचाने के लिए तंत्र-मंत्र और पशुबलि कराते रहे हैं। तेजस्वी ने कहा कि ऐसे अजीब बयान पर क्या बोलूं। उनको तो बेरोजगारी पर बोलना था।

मध्य प्रदेश कांग्रेस में फिर टूट

मध्य प्रदेश में उपचुनाव में वोटिंग से 8 दिन पहले दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल सिंह लोधी ने पार्टी छोड़ दी। और भाजपा में शामिल हो गए। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने बताया कि लोधी ने दो दिन पहले ही इस्तीफा दे दिया था। हमने उन्हें सोचने के लिए दो दिन का वक्त दिया था।

नेपाल के रुख में आई नरमी

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया पर विजयादशमी की बधाई दी। इस बधाई संदेश में उन्होंने नेपाल का पुराना नक्शा साझा किया, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा शामिल नहीं है। यह बदलाव RAW चीफ सामंत कुमार गोयल और ओली की मुलाकात के बाद दिखा।

ओरिजिनल

ऐसे मनता है मैसूर का दशहरा

दशहरा को कर्नाटक में स्‍टेट फेस्टिवल का दर्जा मिला है। यहां 10 दिन तक दशहरा मनाया जाता है। सबसे खास है जम्बो सवारी और टॉर्च लाइट परेड। इसमें 21 तोपों की सलामी के साथ महल से हाथियों का जुलूस निकलता है। एक हाथी पर देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा भी रखी जाती है।

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ऑनलाइन गिफ्ट स्टोर का टर्नओवर 2 करोड़ रु.

निशा ग्रेजुएट हैं और गुड्डी पांचवीं पास, लेकिन ये दोनों ऑनलाइन गिफ्टिंग प्लेटफॉर्म ‘गीक मंकी’ की डायरेक्टर हैं। दोनों की उम्र भले ही 50 प्लस है, लेकिन इनका जज्बा किसी यंग आंत्रप्रेन्योर से कम नहीं हैं।दोनों की कंपनी का सालाना टर्नओवर अब 2 करोड़ रुपए का हो चुका है।

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भास्कर एक्सप्लेनर

कोरोना से डरना जरूरी है, जानिए क्यों?

देश में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा 78.24 लाख को पार कर चुका है। करीब 90% लोग रिकवर हो चुके हैं। 19 अक्टूबर को 87% रिकवरी रेट था, जो 24 अक्टूबर तक 89.74% गया। तो क्या कोरोना का खतरा खत्म हो गया? नहीं, तो क्या है इसका कारण? क्या है दूसरी लहर?

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जरूरत की खबर

जानिए दूसरी बार कोरोना कैसे खतरनाक?

महाराष्ट्र में 4 डॉक्टर दूसरी बार संक्रमित हो गए। देश-दुनिया में ऐसे मामले रोज आ रहे हैं। एम्स दिल्ली में रुमेटोलॉजी डिपॉर्टमेंट की हेड डॉ. उमा कुमार कहती हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके 100 में से 20 लोगों में पोस्ट कोविड-19 सिंड्रोम देखने का मिल रहा है। री-इंफेक्शन्स के भी केस आ रहे हैं।

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बिहार चुनाव

कहानी लोजपा के ‘चिराग’ की

2015 के विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले पटना में अपने घर श्रीकृष्ण पुरी में बैठे रामविलास पासवान लोगों से मिल रहे थे। घर के दूसरे कमरे में बेटे चिराग लोजपा के कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग कर रहे थे। तब रामविलास ने बड़े गर्व से कहा था- ‘चिराग ने सब संभाल लिया है।’

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सुर्खियों में और क्या है...

1. विजयादशमी पर रविवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित मुख्यालय में कहा कि राम मंदिर पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का असंदिग्ध निर्णय आया। सारे देश ने उसे स्वीकार किया।

2. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दशहरे पर दार्जीलिंग के सुकना वॉर मेमोरियल में कहा कि भारत चाहता है कि चीन के साथ सीमा पर चल रहा तनाव खत्म हो। इस इलाके की शांति बनी रहे।

3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 70वीं बार 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिए देश को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में आगे भी कई त्योहार आने वाले हैं। हमें संयम से रहना है।



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Another arrest in Bollywood drugs racket, Tantra-mantra and sacrifice in Bihar election; Dussehra still in the country


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हरियाणा का गांव जहां नल से पानी भरने पर सवर्ण-दलितों की लड़ाई हुई, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

पिछले दिनों जब हाथरस में गैंगरेप की घटना सामने आई तो पीड़िता और दुष्कर्म से ज्यादा उसके दलित होने की चर्चा हुई। देश के कई इलाकों में आज भी दलित-सवर्ण के बीच छुआछूत और भेदभाव मौजूद है। उसे ही जानने पहली ग्राउंड रिपोर्ट - हरियाणा के हिसार में भाटला गांव से...

करीब दस हजार की आबादी के इस गांव के चारों कोनों पर चार बड़े तालाब हैं लेकिन पीने के पानी के लिए पूरे गांव में सिर्फ एक ही नल। इसी नल पर जून 2017 में पहले पानी भरने को लेकर दलित और सवर्ण युवकों के बीच लड़ाई हुई। मामला थाने पहुंचा तो गांव में पंचायत बैठ गई। बात ठन गई और बनते-बनते ऐसी बिगड़ी कि गांव में सवर्ण समाज ने दलितों का बहिष्कार कर दिया। 'दलितों के बहिष्कार' का ये विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में है।

गांव के ही एक तालाब के पास जल बोर्ड के खाली फ्लैटों में नई खुली पुलिस चौकी से वो नल दिखता है जहां पानी भरने को लेकर लड़ाई हुई थी। हर उम्र की लड़कियां छोटी-छोटी टुकड़ियों में पानी भरने आ-जा रही हैं। कुछ लड़के साइकिल-मोटरसाइकिलों से पानी ले जा रहे हैं। इनमें दलित भी हैं और सवर्ण भी।

गांव दो हिस्सों में बंटा है। सवर्ण और दलित। सवर्णों की आबादी दलितों से कुछ ज्यादा है। उनके पास जमीनें हैं और दलित सदियों से उनके खेतों पर मजदूरी करते रहे हैं।

मेरी नजर आठ माह की गर्भवती सुनीता पर ठहरती है जो अपनी एक सहेली के साथ मटका लिए तेज कदमों से नल की ओर बढ़ रही हैं। यहां जमीन के नीचे पानी खारा है और सरकारी सप्लाई पंद्रह दिन में सिर्फ एक बार होती है। जो पानी खरीद सकते हैं, खरीद रहे हैं। जो नहीं खरीद सकते, वो पानी भरने के लिए मजबूर हैं। मैंने नल का पानी पिया तो रेत दांतों में लगी।

मोटा-मोटी गांव दो हिस्सों में बंटा है। सवर्ण और दलित। सवर्णों की आबादी दलितों से कुछ ज्यादा है। उनके पास जमीनें हैं और दलित सदियों से उनके खेतों पर मजदूरी करते रहे हैं। बीते दो-तीन दशकों से दलितों ने गांव के बाहर निकलकर काम करना शुरू किया है। कुछ हांसी और हिसार जैसे शहरों में भी नौकरियां करते हैं। लेकिन अब भी अधिकतर दलित आबादी अपना पेट भरने के लिए गांव के जाटों और पंडितों के खेतों पर काम करने को मजबूर है।

गांव के आखिरी कोने में दलितों का बड़ा मोहल्ला है। अपने घर में खाली खूंटे दिखाते हुए बिमला कहती हैं, 'पहले चार भैंसे पालते थे। सैकड़ों भेड़-बकरियां थीं। सब बेचना पड़ गया। किसी के खेत में जाओ तो बाहर निकाल देते हैं। हमारे पास न जमीन है ना नौकरी। मेरी बहू को हांसी में काम करने जाना पड़ रहा है।' बिमला के बेटे अजय कुमार उन लोगों में शामिल हैं जिसने दलितों के बहिष्कार मामले में शिकायत दर्ज करवाई है। घर के बाहर जय भीम-जय भारत लिखा है और अंदर भीमराव आंबेडकर की बड़ी तस्वीर लगी है।

यहां जमीन के नीचे पानी खारा है और सरकारी सप्लाई पंद्रह दिन में सिर्फ एक बार होती है। जो पानी खरीद सकते हैं, खरीद रहे हैं। जो नहीं खरीद सकते, वो पानी भरने के लिए मजबूर हैं।

दलितों के इस मोहल्ले में जिससे भी बात करो, बंदी शब्द बार-बार सुनाई देता है। दरअसल साल 2017 में जब झगड़ा हुआ था तब गांव में मुनादी कराके दलितों का बहिष्कार कर दिया गया था। इस बहिष्कार को ही ये लोग बंदी कहते हैं। हालांकि सवर्ण समुदाय के लोगों का कहना है कि अब गांव में ऐसे हालात नहीं हैं और सभी का एक-दूसरे के यहां आना जाना है, किसी पर किसी तरह की रोकटोक नहीं है। सबके जवाब अलग-अलग हैं।

ओमप्रकाश गांव के बस स्टैंड पर फल की रेहड़ी लगाते हैं। वो कहते हैं, 'पहले पूरे गांव के लोग मुझसे सामान खरीदते थे। अब बस दलित समाज या सड़क पर आने-जाने वाले लोग ही खरीदते हैं। दूसरी जाति का कोई मेरी दुकान पर नहीं आता।' ओमप्रकाश कहते हैं, ‘उनकी घरवाली किसी दूसरे के खेत में चारा लेने या घास काटने जाती है तो उसे गाली देते हैं। सड़क पर जो घास थी उसमें भी जहरीली दवा छिड़क दी थी।'

यहीं अपने घर के बाहर दलित बुजुर्ग ज्ञानों उदास खड़ी हैं। उनके तीन बेटे थे, तीनों की मौत संदिग्ध हालत में हो गई। उनका सबसे बड़ा बेटा 19 साल का रहा होगा जब दो दशक पहले गांव के एक खेत में उसका शव मिला था। अजय कुमार बताते हैं कि उसकी हत्या हुई थी लेकिन परिवार थाने भी नहीं जा सका था। कुछ साल बाद एक और बेटे ने आत्महत्या कर ली थी। अभी दो महीने पहले तीसरे बेटे की लाश भी संदिग्ध हालत में खेत में मिली। उसके कत्ल के इल्जाम में जाट समुदाय के दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

हालांकि गांव के सवर्णों का कहना है कि असल में पीड़ित वो हैं, उन्हें कई बार गलत मुकदमे में फंसा दिया जाता है।

भाटला के दलितों का आरोप है कि ऊंची जाति के लोगों के दबाव में नाइयों ने उनके बाल काटने भी बंद कर दिए थे। नाई सुभाष की गांव में दो दुकानें हैं। दलित समाज के लोगों को बाल काटने से मना करने के आरोप में वो सवा तीन महीने की जेल काटकर लौटे हैं। वो कहते हैं, 'तब बंदी थी तो दबाव में मना कर दिया था। अब पछतावा है कि मना नहीं करना था। अब सबके बाल काट रहे हैं। गांव के ही एक किराना दुकानदार भी दलितों को सामान न बेचने के आरोप में जेल गए थे। अब उनकी दुकान पर भी सभी सामान खरीद रहे हैं।

गांव भाटला के मुख्य द्वार पर लगे गौरव-पट्ट के मुताबिक भाट नाम के पूर्वज ने 1448 ईस्वी में गांव को बसाया था। अभी यहां 13 जातियों के लोग रहते हैं। गांव की प्रधान सुदेश बेरवाल और उनके पति पुनीत बेरवाल मस्टर रोल दिखाते हुए कहते हैं, 'मनरेगा में अधिकतर दलित मजदूरी कर रहे हैं। अगर बहिष्कार होता तो क्या दलितों को रोजगार दिया जाता।' वो कहते हैं, 'पूरा गांव दलितों ने बनाया है, हम तो दलितों के साथ बैठकर दारू भी पीते हैं। आप कहो तो अभी पीकर दिखाएं।'

पुनीत आरोप लगाते हैं कि 'एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद जो मुआवजा मिलते है उसके लालच में गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि मुआवजा ना मिले तो आरोप भी लगने बंद हो जाएं।' वो कहते हैं, 'अगर बहिष्कार होता तो क्या लोग गांव में रहते। क्या तीन साल से बिना काम करे वो लोग यहां रह पाते। असल में पीड़ित हम हैं और गांव हमें छोड़ना पड़ सकता है।

इन झूठे मुकदमों और गांव की बदनामी की वजह से हमारे बच्चों के रिश्ते तक नहीं हो पा रहे हैं। अब तक दलित उत्पीड़न के एवज में 27 लाख रुपए से अधिक शिकायतकर्ताओं को मिल चुके हैं। दो करोड़ रुपए और मिलने हैं। ये पैसा ना मिलना हो तो मुकदमा भी इतना आगे ना बढ़े।



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There was a battle of upper-caste Dalits on filling the water from the tap here, the matter reached the Supreme Court


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नीतीश के अपने जिले में भी दिख रही एंटी इनकम्बेंसी, गैर कुर्मी और लोजपा वाले बिगाड़ रहे समीकरण

बिहार का नालंदा जिला। बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का घर। राजनीतिक लहजे में कहें तो नीतीश कुमार का चुनावी किला। विपक्षी पार्टियों के मुताबिक, पिछले 15 साल में सबसे ज्यादा विकास इसी जिले में हुआ। बिहार का अकेला ऐसा जिला भी, जहां नीतीश कुमार के स्वजातीय कुर्मियों का दबदबा है।

इसी वजह से नालंदा को बिहार में ‘कुर्मीस्तान’ भी कहा जाता है। यहां विधानसभा की 7 सीटें हैं। फिलहाल 5 सीट पर जदयू का कब्जा है। एक सीट भारतीय जनता पार्टी के पास है और एक राष्ट्रीय जनता दल के पास है। नालंदा की सभी सीटों पर 3 नवंबर को वोट डाले जाएंगे, लेकिन पूरे जिले में राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज हैं।

हर जगह इस बात की चर्चा है कि अबकी नालंदा में क्या होगा? क्या 15 साल बिहार पर शासन करने वाले नीतीश कुमार इस चुनाव में अपना चुनावी किला सुरक्षित रख पाएंगे? क्या उनकी पार्टी नालंदा जिले में अपने पिछले प्रदर्शन को दोहरा पाएगी या इस बार वो पहले से बेहतर करेंगे?

इन सवालों का जवाब जानने से पहले जरूरी है कि इस बार हुई राजनीतिक मोर्चे बंदी को जान लें। समझ लें कि पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2015 के चुनाव में जो साथ लड़े थे, वो अबकी कहां हैं और किससे लड़ रहे हैं।

नालंदा की 7 सीटों में से 5 पर जदयू का कब्जा है। एक सीट भाजपा के पास है और एक राजद के पास।

बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। नीतीश कुमार महागठबंधन का हिस्सा थे। नीतीश लालू की राजद और कांग्रेस के साथ चुनाव में उतरे थे। उधर, एनडीए में भाजपा के साथ लोकजन शक्ति पार्टी (लोजपा) थी। अब एनडीए में भारतीय जनता पार्टी, जेडीयू और लोजपा के साथ जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा भी है।

इस विधानसभा चुनाव में जदयू ने जिले के 7 विधानसभा सीट में से 6 पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। एक सीट पर भाजपा चुनाव लड़ रही है। महागठबंधन की तरफ से 4 सीटों पर राजद चुनाव लड़ रही है। 3 सीट पर कांग्रेस मैदान में हैं।

अब लौटते हैं उन सवालों पर, जिनका जिक्र शुरू में ही हुआ है। पटना से नालंदा की तरफ चलने पर सबसे पहले हिलसा विधानसभा पड़ता है। विनोद रविदास हिलसा बाजार के खाखी चौक पर ठेला लगा कर कपड़े बेचते हैं। वो राजनीतिक दाव-पेंच तो नहीं जानते, लेकिन इस बात को लेकर साफ हैं कि अबकी बदलाव होना चाहिए।

कहते हैं, “गरीबों के लिए कुछ नहीं हुआ। सड़क, बिजली से पेट नहीं भरता। राशन-ताशन बंद हो रहा है। काम-धंधा है नहीं। पानी, बिजली भी गरीब के टोले में सबसे आखिर में आता है। नीतीश कुमार नालंदा के हैं, लेकिन इस बार तो हम उनको वोट नहीं देंगे।"

विनोद बिहार के उन लाखों वोटर्स का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बिना कैमरे पर आए, बिना शोर मचाए अपनी बात कहते हैं। हजार कारणों की वजह से वो आज भी अपने ‘मन की बात’ खुलकर नहीं कह पाते।

नालंदा में कुशवाहा और अति पिछड़े समुदाय की बड़ी आबादी है।

इस चौक पर करीब आधा घंटा बिताने के बाद साफ-साफ अंदाजा हो जाता है कि अबकी राज्य के मुखिया को उनके घर में ही बड़ी चुनौती मिलने वाली है। प्रोफेसर अवधेश कुमार, इस्लामपुर विधानसभा के वोटर हैं और इनसे हमारी मुलाकात हिलसा कोर्ट में होती है। बकौल अवधेश कुमार इस बार के चुनाव में जदयू को नालंदा से बड़ा झटका लगने वाला है।

इनके मुताबिक पार्टी जीती हुई 5 सीटों में से 3 गंवाने जा रही है। अपने इस आकलन की वजह बताते हुए वो कहते हैं, “देखिए। नीतीश कुमार के शासन में नालंदा जिले का विकास नहीं हुआ है। केवल एक जाति विशेष का विकास हुआ है। उनकी जाति के लोगों को नौकरियां मिली हैं। इस वजह से नालंदा की बाकी जातियों के मतदाताओं में गुस्सा है। वो गुस्सा इस बार आपको वोटिंग में दिखेगा।”

2019 में हुए लोकसभा चुनाव के वक्त तक नालंदा जिले में कुर्मी मतदाताओं की संख्या चार लाख 12 हजार थी। यादवों का वोट करीब तीन लाख, जबकि मुसलमान वोटरों की संख्या एक लाख 60 हजार के करीब थी। जिले में कुशवाहा और अति पिछड़े समुदाय की बड़ी आबादी है।

इलाके के जानकार बताते हैं कि इस चुनाव में नीतीश की लहर नहीं है, वोटिंग तो कास्ट लाइन पर ही होगा। इस सब के बाद नीतीश सरकार को लेकर गैर कुर्मी मतदाताओं में गुस्सा है और इसका असर चुनाव नतीजों पर निश्चित पड़ेगा।

नालंदा जिले में कुर्मी मतदाताओं की संख्या चार लाख 12 हजार, यादवों का वोट तीन लाख। मुसलमान वोटरों की संख्या एक लाख 60 हजार के करीब है।

कल्याण बीघा नीतीश कुमार का पैतृक गांव है, जो हरनौत विधानसभा में आता है। इस बार नीतीश कुमार को अपने गांव के लिए वरदान मानने वाले लोग भी डरे हुए हैं। नाम ना बताने की शर्त पर कल्याण बीघा के एक ग्रामीण कहते हैं, “खूब असर पड़ेगा। देखिएगा ना। अबकी साहेब के खिलाफ मोर्चेबाजी है। उनकर नेतवा सब उनको लेकर डूबेगा। ऊ सब सही रिपोर्ट नहीं दे रहा है। ई बार नालंदा भी गड़बड़ा जाएगा।”

राज्य की बाकी विधानसभा सीटों की तरह ही नालंदा के हर विधानसभा सीट का समीकरण भी अलग है। मौजूद विधायक से नाराजगी। जातीय समीकरण और लोजपा उम्मीदवारों द्वारा काटे जाने वाले वोट की वजह से भी हर सीट पर जदयू के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। इस बार नालंदा में नीतीश कुमार वो चेहरा नहीं हैं, जो अपने दम पर चुनाव जितवा सकें। एक बात जो नीतीश के पक्ष में जा रही है, वो है लालू-राबड़ी का शासन काल।

बिहारशरीफ विधानसभा सीट में एक कुशवाहा बहुल गांव है। नाम है, सोहढ़ी। इस गांव का पूरे देश में ऑर्गेनिक खेती को लेकर नाम है। गांव के सामुदायिक भवन पर कुछ लोग बैठे हैं। जब हम उसने चुनाव का जिक्र करते हैं तो ताश खेल रहे एक बुजुर्ग कहते हैं, “ऐसा तो जीतेगा नतिशे। लालू-राबड़ी के पक्ष में वही बोल रहा है जो खाओ-पकाओ। बाजार में कोरोना के बाद खाना खिला रहे हैं। इसीलिए कह रहे हैं।”



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नालंदा सीएम नीतीश कुमार का गृह जिला है। यहां उनका हमेशा से दबदबा रहा है।


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पिता की किराना दुकान, बच्चों को पढ़ाने सड़क पर सामान बेचा, अब दोनों बेटे बनेंगे डॉक्टर

कश्मीर के लोगों को इस साल दोहरे लॉकडाउन की मार झेलनी पड़ी। एक पिछले साल आर्टिकल 370 के हटाने के बाद और फिर इस साल कोरोना के चलते। इस दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत स्टूडेंट्स को हुई है। लगभग एक साल तक घाटी में न तो ठीक से पढ़ाई हो पाई और न ही हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी मिल पाई। ऊपर से लॉकडाउन में काम-धंधे बंद होने के बाद आर्थिक तंगी की मार भी झेलनी पड़ी। इन मुश्किल चुनौतियों के बाद भी घाटी के कई छात्रों ने इस बार नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) की परीक्षा में अपना परचम लहराया है।

कुंजर के बटपोरा गांव के रहने वाले जुड़वां भाई गौहर बशीर और शाकिर बशीर ने इस बार नीट एग्जाम पास किया है। गौहर को 720 अंकों में से 657 और शाकिर को 651 मार्क्स मिले हैं। इनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। पिता किराने की दुकान चलाते हैं। लॉकडाउन में आमदनी भी बंद हो गई थी। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोनों बच्चों को भरपूर हौसला दिया। दोनों की सफलता से परिवार ही नहीं, घाटी के लोगों में भी खुशी है। रिश्तेदार बधाई देने के लिए इनके घर आ रहे हैं।

कुंजर के बटपोरा गांव के रहने वाले जुड़वां भाई गौहर बशीर और शाकिर बशीर ने इस बार नीट एग्जाम पास किया है।

गौहर कहते हैं कि उनके परिवार ने काफी सपोर्ट किया। किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी। शाकिर का कहना है कि उनके पेरेंट्स ने बचपन से ही हार्ड वर्क करने की सीख दी। वो बताते हैं कि हम एक मिडल क्लास परिवार से थे और कभी-कभी फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स होती थीं, लेकिन हमें हमेशा अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा गया और बाकी परेशानियों से हमें दूर रखा।

उनके पिता बशीर अहमद बेहद खुश हैं कि उनके दोनों बेटों को अच्छे नंबर मिले हैं। वो कहते हैं, 'हमारे पास बहुत कुछ नहीं है। फिर भी हम चाहते थे कि बच्चे पढ़ाई करें और कुछ बेहतर करें। मैं अपने स्टोर से मुश्किल से 4,000 से 5,000 रु महीने का कमाता हूं। साथ ही मैं और मेरी पत्नी सड़कों पर भी कुछ काम करते हैं, ताकि इनके पढ़ाई के लिए खर्च निकाल सकें। मुझे खुशी है कि मेरे बेटों ने इतना अच्छा परफॉर्म किया। उन्होंने न केवल अपने माता-पिता को गर्व कराया, बल्कि पूरी घाटी को का मान बढ़ाया है।'

कैब ड्राइवर के बेटे ने बिना कोचिंग के नीट क्लियर किया

वकास इकबाल हाजी के पिता कैब ड्राइवर हैं। वकास इंजीनियरिंग कर चुके हैं।

शोपियां के बोंगम के रहने वाले 24 साल के वकास इकबाल हाजी ने बिना किसी कोचिंग के नीट का एग्जाम क्लियर किया है। उन्होंने 720 अंकों में से 606 मार्क्स हासिल किए। वो एक कैब ड्राइवर के बेटे हैं। वकास के लिए ये आखिरी अटेंप्ट था, इसके बाद उनकी उम्र ज्यादा हो जाती। वकास सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुके हैं। अभी वो एमटेक कर रहे हैं। उन्होंने गेट भी क्वालिफाई कर लिया है। इसके बाद भी उन्होंने मेडिकल के लिए कोशिश की और वो सफल भी हो गए।

वो बताते हैं- मां चाहती थी कि मैं डॉक्टर बनूं। उन्होंने एक दिन कहा था कि काश आप डॉक्टर होते। वो बात मेरे दिमाग में थी। जैसे ही कश्मीर में लॉकडाउन लगा और लोग घरों में बंद हो गए, स्कूल-कॉलेज, इंटरनेट सब बंद हो गए। उसी दौरान मैंने सोचा कि क्यों न इसका फायदा उठाया जाए। इसके बाद मैंने नीट की पढ़ाई शुरू कर दी।

वकास दो भाई-बहन हैं। वो बताते हैं कि उनके पिता ने आर्थिक दिक्कतों के बाद भी उनकी पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं की।

शोपियां के बोंगम के रहने वाले 24 साल के वकास इकबाल हाजी ने बिना किसी कोचिंग के नीट का एग्जाम क्लियर किया है।

वो कहते हैं, पेरेंट्स के चेहरे पर स्माइल मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। उनके लिए जितना भी त्याग करूं, कम है। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें अपने फैसले पर पछतावा है, क्योंकि उन्होंने पहले ही अपना समय इंजीनियरिंग में लगाया था? इकबाल ने कहा, 'बिल्कुल नहीं।'

वो बताते हैं कि जो भी स्टूडेंट इसकी तैयारी कर रहे हैं, उन्हें रिजल्ट की चिंता नहीं करनी चाहिए। अपनी पढ़ाई पर फोकस करना चाहिए। जो लगातार मेहनत करेगा, उसे सफलता जरूर मिलेगी। इधर-उधर स्टडी मटेरियल के चक्कर में रहने से अच्छा है कि NCERT से तैयारी करें।

इकबाल बताते हैं कि कश्मीर में इंटरनेट बंद होने से मुझे पढ़ाई करने में काफी फायदा हुआ। मैंने इन पर वक्त जाया करने की बजाय पढ़ाई पर फोकस किया। वो कहते हैं कि 2011 से मैंने सोशल मीडिया यूज नहीं किया। अपडेट रहने के लिए मैं वॉट्सऐप का इस्तेमाल करता था।



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कश्मीर में दोहरे लॉकडाउन और आर्थिक दिक्कतों के बाद भी युवाओं ने नीट की परीक्षा में सफलता हासिल की है।


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घर बेचकर चुकाया था बिजनेस में हुआ नुकसान, अब डिजिटल होर्डिंग्स के काम से 20 करोड़ पहुंचा टर्नओवर

दिल्ली की रहने वाली दीप्ति अवस्थी शर्मा आउटडोर एडवर्टाइजिंग स्टार्टअप गोहोर्डिंग्स डॉट काॅम (Gohoardings.com) की फाउंडर हैं। साथ में एक सफल हाउस वाइफ और एक मां हैं। नोएडा स्थित यह स्टार्टअप देशभर में कहीं भी कभी भी ऑनलाइन होर्डिंग्स के लिए बुकिंग करने में मदद करता है। कंपनी ने हाल ही में आस्ट्रेलिया में कारोबार शुरू किया है। इस समय कंपनी का रेवेन्यू 20 करोड़ से ज्यादा है। कंपनी में पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा के इन्वेस्टमेंट की भी बात चल रही है।

24 साल की उम्र में शुरू किया इवेंट का कारोबार

दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद दीप्ति ने सीए की तैयारी शुरू की लेकिन पढ़ाई और जाॅब में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं होने के कारण सीए फाइनल ईयर ड्रॉप कर दिया और इवेंट का कारोबार शुरू किया। तब दीप्ति सिर्फ 24 साल की थीं। वो बताती हैं कि उन्होंने इवेंट का कारोबार पार्टनरशिप में शुरू किया था। कुछ स्पॉन्सरशिप भी मिली थी। वह कहती हैं, 2014 की 31 दिसंबर की रात दिल्ली में सबसे बड़े इवेंट का जिम्मा उनकी कंपनी को मिला था।

2016 में दीप्ति ने 50 हजार से डिजिटल होर्डिंग्स का कारोबार शुरू किया। अपनी मेहनत की बदौलत उन्होंने महज दो साल में ही 12 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर कर लिया।

उसमें कई सेलिब्रिटीज शिरकत करने वाले थे, लेकिन इवेंट से ठीक कुछ समय पहले स्पांसर्स ने हाथ खड़े कर दिए। स्पांसर्स के हटते ही इवेंट पार्टनर भी साथ छोड़कर चला गया। हालात यह हो गई कि उस इवेंट के टिकट ज्यादा नहीं बिके और मुझे करीब 40 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। वह कहती हैं, उस समय मेरे पास करो या मरो जैसे हालात हो गए थे। हालांकि, मैंने भागने की बजाय खुद का पैसा लगाकर कार्यक्रम का आयोजन किसी तरह संपन्न किया।

नुकसान की भरपाई घर बेच कर की

30 साल की दीप्ति बताती हैं, इवेंट के कारोबार में नुकसान की भरपाई के लिए हमें अपना घर बेचना पड़ा। हम कई सालों तक किराए के घर में रहे। पड़ोसी और संबंधियों ने ताने मारने शुरू कर दिए थे। लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि बेटी को सिर पर चढ़ाने का यह नतीजा है और बनाओ आत्मनिर्भर।

कारोबार में नुकसान, घर बेचने का दर्द और सगे संबंधियों के तानों ने मुझे इतना परेशान कर दिया कि मैं डिप्रेशन में चली गई थी। मैंने कई दिनों तक खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। हालांकि, मेरी मां और पिता ने कभी साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने पूरा सपोर्ट किया।

आज दीप्ति की कंपनी का टर्नओवर 20 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इस समय उनकी कंपनी में करीब 30-40 लोगों की एक टीम काम कर रही है।

दीप्ति कहती हैं, इस हादसे के करीब तीन माह बाद ही मैंने घर वालों के कहने पर शादी कर ली। एक तरह से अपने करियर और सपनों से समझौता कर लिया। हालांकि, इसे मेरी किस्मत कह सकते हैं कि मुझे सपोर्टिव पति के रूप में विकास शर्मा मिले। जब विकास को मेरे सपनों के बारे में पता चला, तब उन्होंने मुझे दोबारा बिजनेस के लिए प्रोत्साहित किया और फिर वहीं से जिंदगी में एक यूटर्न आया और शुरू हुआ डिजिटल होर्डिंग्स का कारोबार।

50 हजार लगाकर शुरू किया कारोबार

दीप्ति बताती हैं, मैंने 2016 में बहुत ही छोटी रकम 50 हजार से डिजिटल होर्डिंग्स का कारोबार शुरू किया। इसमें विकास का आइडिएशन से लेकर फाइनेंशियल तक काफी सपोर्ट मिला। डिजिटल होर्डिंग्स कारोबार को शुरू करने के पीछे वजह बताते हुए दीप्ति कहती हैं, हमने जब इस पर रिसर्च किया तो पाया कि यह फील्ड काफी अनऑर्गनाइज्ड तरीके से काम कर रहा है।

जहां कुछ भी क्लियर नहीं है। एक होर्डिंग लगवाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। तभी सोचा कि क्यों न खुद की कंपनी स्थापित की जाए जहां सिर्फ एक क्लिक में होर्डिंग्स लगवाने का काम हो जाए। दीप्ति कहती हैं, विकास दिल्ली के ही एक टेक कंपनी में काम करते हैं। कारोबार को शुरू करने में उनसे मुझे तकनीकी तौर पर काफी हेल्प मिली।

वहीं, मार्केटिंग और अकाउंट में मेरी नॉलेज अच्छी है। इसका मुझे यहां फायदा मिला। इस तरह हमने अपने दम पर कारोबार शुरू कर दिया। दीप्ति का यह आइडिया इतना सही था कि अपनी मेहनत की बदौलत उन्होंने महज दो साल में ही 12 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर कर लिया और यह साल दर साल बढ़ता ही चला गया।

दीप्ति की कंपनी ने हाल ही में आस्ट्रेलिया में कारोबार शुरू किया है, उन्हें कई अवार्ड्स भी मिल चुके हैं।

आज दीप्ति की कंपनी का टर्नओवर 20 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इस समय उनकी कंपनी में करीब 30-40 लोगों की एक टीम काम कर रही है। वह खुद भी सुबह 9 से रात के 11 बजे तक लगातार काम करती हैं। इसमें उसके पति भी पूरा सहयोग देते हैं।

जानिए, यह स्टार्टअप कैसे काम करता है ?

दीप्ति के मुताबिक, सबसे पहले हमारे वेबसाइट पर कस्टमर को लॉगइन करना होता है। इसके बाद वेबसाइट पर जाकर अपने लोकेशन (जहां उसे होर्डिंग लगवानी है) सर्च करके सिलेक्ट करना होता है। लोकेशन सिलेक्ट होने के बाद हमारे पास एक मेल आता है। उसके बाद कंपनी की तरफ से साइट और लोकेशन की उपलब्धता की कन्फर्मेशन भेजी जाती है। फिर कस्टमर की तरफ से आर्टवर्क और ऑर्डर आते हैं।

इसके बाद हम उन्हें लोकेशन साइट पर लाइव होने के लिए एक आईडी एंड पासवर्ड उपलब्ध कराते हैं, ताकि कस्टमर अपने काम का करंट स्टेटस लाइव ट्रैक कर सके। बता दें कि यह कंपनी एक होर्डिंग को एक माह की अवधि तक लगवाने के लिए लगभग 1 लाख रुपए लेती है। हालांकि, दीप्ति कहती हैं कि होर्डिंग की कीमत विभिन्न राज्यों और लोकेशन वाइज निर्भर करता है।

...और अंत में दीप्ति कहती हैं, किसी भी काम को शुरू करने के लिए उसका बैकग्राउंड जानना बहुत जरूरी है। उस पर बहुत ज्यादा रिसर्च करना चाहिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।



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How a CA dropout and a software engineer created an online portal for OOH advertising


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बॉडी क्लॉक बिगड़ने से हम सुबह जल्दी नहीं उठ पाते, इन 5 तरीकों से रूटीन सुधार सकते हैं

बहुत से लोग सुबह चाहकर भी जल्दी नहीं उठ पाते। ऑफिस जाने वालों की लिए तो यह और बड़ी समस्या है। कई बार हम सुबह जल्दी उठकर जिम या एक्सरसाइज का भी प्लान बनाते हैं, लेकिन प्लान को फॉलो नहीं कर पाते। यदि किसी एक दिन उठ भी जाते हैं तो उसे नियमित जारी नहीं रख पाते हैं।

सेहत और एक्टिव लाइफ के क्षेत्र में जर्नल निकालने वाली संस्था लाइफहैक के मुताबिक, इसकी दो वजह हैं। पहली सुबह की आलस और दूसरी रात में देर से सोने की आदत। सुबह कैसे जल्दी उठें? ताकि रोज नियमित रूप से जिम, एक्सरसाइज, योग और जॉगिंग कर सकें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हमें धीरे-धीरे अपनी पुरानी आदत छोड़नी होगी। इसके लिए रात में जल्दी सोने की आदत डालनी होगी।

इन 5तरीकों को अपनाकर आप सुबह जल्दी उठ सकते हैं-

1- रात में जल्दी सोएं

  • बेड पर जाने के बाद लोग घंटों फोन में लगे रहते हैं। धीरे-धीरे यह आदत लेटनाइट जगने की रूटीन में बदल जाती है। जिसके चलते सुबह उठने में काफी लेट हो जाता है। इस तरह की रूटीन को लगातार फॉलो करने से “बॉडी क्लॉक” बदल जाती है। हम सोने-जगने की जो रूटीन फॉलो करते हैं, धीरे-धीरे शरीर उसी हिसाब से ढल जाता है, इसे ही “बॉडी क्लॉक” कहते हैं।
  • बॉडी क्लॉक खराब होने की वजह से हमारा सुबह जल्दी उठना मुश्किल हो जाता है। फिर हम सुबह की एक्सरसाइज, जिम, योग या जॉगिंग से दूर हो जाते हैं। सुबह उठने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है रात में जल्दी सोना।
  • इस बात का ध्यान रखें कि सुबह जल्दी उठने की जद्दोजहद में नींद अधूरी न रह जाए। जब आप रात में जल्दी सोएंगे, तो इसकी नौबत ही नहीं आएगी। पर देर से सोकर जल्दी उठने की जिद नींद न आने की बीमारी में भी बदल सकती है।

2- उठकर हल्का वार्मअप करें

  • सुबह उठने के बाद कई बार हम आलस की वजह से दोबारा सो जाते हैं। यह हमारे लिए जल्दी उठने में दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए यह ध्यान रखना है कि आप दोबारा बेड पर न जाएं। सोकर उठने के बाद टेक भी न लगाएं।
  • सुबह हल्का वार्मअप करना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए पैर को सीधा रखें और दाएं-बाएं झुक कर हाथों से पैर के पंजों को छूने का प्रयास करें। फिर कमर को स्थिर रखते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को ट्विस्ट करें। शरीर को सीधा रखते हुए दो से तीन बार जम्प करें। ऐसा करने से आलस 70% तक कम हो जाएगा।

3- मानसिक तौर पर मजबूत रहें

  • सुबह उठने के लिए मानसिक तौर पर मजबूत होना होगा। अपनी विल-पावर इतनी मजबूत कर लें कि सुबह की आलस आपको रोक न पाए। कई बार हम सुबह जल्दी उठने की तो सोचते हैं, लेकिन उठ नहीं पाते। अलार्म बजता है और हम उसे बंद कर देते हैं। कोई जगाता है तो हम उसपर गुस्सा होने लगते हैं। विल-पावर मजबूत करके हम ऐसा करने से बच सकते हैं।

4- एक साथी ढूंढ़े

  • कई बार हम सुबह उठकर जिम, एक्सरसाइज, योग या जॉगिंग करने में अकेला महसूस करते हैं। जिसके चलते हमारी कन्टीन्यूटी ब्रेक हो जाती है। अगर आप भी ऐसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो एक साथी की तलाश करें। ऐसा होने पर न केवल आप एक-दूसरे का साथ देंगे, बल्कि एक-दूसरे से प्रेरित भी होंगे।

5- धैर्य रखें

  • कई बार कुछ लोगों को लगता है कि सुबह जल्दी उठना हमेशा मुश्किल ही होगा। सिर्फ इसी डर से कई लोग रूटीन को खराब कर लेते हैं। जबकि सुबह जल्दी उठना शुरू के कुछ दिनों तक ही मुश्किल होता है। 2 हफ्तों में हमारा बॉडी क्लॉक पूरी तरह से रिसेट हो जाता है। इसलिए शुरूआती दिनों में धैर्य रखें। खुद को समय दें। धीरे-धीरे आपकी जद्दोजहद आपकी आदत में बदल जाएगी।


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We are not able to get up early in the morning due to a deteriorating body clock; Learn five ways to get up early in the morning


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