रविवार, 12 जुलाई 2020

प्राइवेट बैंक में 15 लाख का पैकेज छोड़कर ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू की, आज 12 एकड़ पर खेती कर रहे हैं, हर एकड़ से डेढ़ लाख कमाई

पुणे से एमबीए की पढ़ाई करने के बाद भोपाल के रहनेवाले प्रतीक को एक प्राइवेट बैंक में प्रोडक्ट मैनेजर की नौकरी मिली थी। एनुअल पैकेज 15.5 लाख था। लेकिन उन्होंने चार साल पहले नौकरी छोड़ ऑर्गेनिक फार्मिंग करने का फैसला किया। आज प्रतीक 12 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं, इसमें 5.5 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक फार्मिंग करते हैं।

हर एकड़ से उन्हें हर साल 1.5 लाख रुपए मुनाफा हो रहा है। यही नहीं प्रतीक ने ऑर्गेनिक फार्मिंग का एक प्लेटफॉर्म बनाकर उससे छोटे-बड़े 125 किसानों को भी जोड़ा है। इसके जरिए वह 2 हजार कस्टमर्स तक सीधे पहुंचते हैं और ऑर्गेनिक सब्जियाें की होम डिलीवरी भी कर रहे हैं। उन्होंने अगले दाे सालों में ऑर्गेनिक फॉर्मिंग से 4 लाख रुपए प्रति एकड़ मुनाफे का टारगेट रखा है।

मुम्बई में एक प्राइवेट बैंक में थे प्रोडक्ट मैनेजर

प्रतीक बताते हैं कि शुरुआती पढ़ाई के बाद पुणे से एमबीए किया और साल 2006 में एक प्राइवेट बैंक में नौकरी लगी। काम बेहतर किया तो एक दिन मुम्बई हेड ऑफिस से कॉल आया और प्रमोट कर मुझे प्रोडक्ट मैनेजर बना दिया गया। एनुअल पैकेज करीब 15.5 लाख के आसपास था।

सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन बड़े शहर में रहकर इतना पैसा कमाने के बाद भी मुझे को छटपटाहट सी महसूस हो रही थी। 6- 7 साल नौकरी करने के बाद लगा कि अब मन भर गया है। फिर चंडीगढ़ ट्रांसफर ले लिया लेकिन वहां भी मन नहीं लगा। किसान परिवार से था, इसलिए सोचा कि क्यों न खेती को अजमाया जाए।

प्रतीक अभी12 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं, इसमें 5.5 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक फार्मिंग करते हैं। हर एकड़ से उन्हें साल में 1.5 लाख रुपए का मुनाफा होता है।

2015 में नौकरी के साथ-साथ पॉली हाउस फाॅर्मिंग में 50 लाख का इंवेस्टमेंट किया लेकिन इससे 5 लाख रुपए भी रिकवर नहीं हो पाए

प्रतीक ने बताया कि साल 2015 में नौकरी के साथ-साथ खेती की शुरुआत की, गांव में पैत‌ृक जमीन पर एक एकड़ में पॉली हाउस बनाया। 45 से 50 लाख रुपए खर्च किया। लेकिन साल भर बाद ही समझ में आ गया कि खेती में महंगी तकनीकें बेची तो जाती हैं, लेकिन किसान द्वारा खरीदी नहीं जाती है। इसका मतलब यह है कि हमें इसकी जरूरत नहीं है।

मेरा पॉली हाउस दिसम्बर 2015 में तैयार हुआ और अप्रैल 2016 में मुझे यह एहसास हो गया कि बहुत बड़ी गलती हो गई। तब समझ में आया कि हम केमिकल फार्मिंग नहीं कर सकते। क्योंकि इसमें लागत ज्यादा है और बाजार में कीमतें बिल्कुल नहीं मिल रही हैं। 50 लाख की लागत वाले पॉली हाउस में जब मैंने पहली बार टमाटर उगाया तो उसकी कॉस्ट मुझे 6 रुपए प्रति किलो पड़ी, लेकिन बाजार में मुझे उसकी कीमत महज डेढ़ रुपए प्रति किलो ही मिली।

खेती के बिजनेस में जब मात मिली तो अपनी मार्केटिंग स्किल का इस्तेमाल किया

इसके बाद मैंने खेती के बिजनेस में अपने प्रोडक्ट मैनेजर वाले मार्केटिंग स्किल का इस्तेमाल किया। क्योंकि मैं हमेशा सुनता था कि किसान को मार्केटिंग नहीं आती और मार्केटिंग वालों को खेती नहीं आती। तब समझ में आया कि हमें ऑर्गेनिक फार्मिंग करनी चाहिए, इससे हम स्वास्थ्य की तरफ तो आगे बढ़ेंगे ही, प्रोडक्शन कॉस्ट भी कम कर सकते हैं। क्योंकि इसमें खाद वगैरह तो हम खुद ही तैयार कर सकते हैं और इसके उत्पादों की बाजार में कीमत भी हम खुद तय कर सकते हैं।

हम जैविक उत्पाद सीधा उपभोक्ताओं तक लेकर जा सकते हैं इससे बिचौलिओं का कमीशन खत्म होगा और किसान को ज्यादा मुनाफा मिल सकेगा। इसके बाद मैंने साल 2016 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से ऑर्गेनिक फार्मिंग में उतर गया। मेरे घर और ससुराल वालों की ओर से प्रेशर आया कि नौकरी क्यों छोड़ रहे हो, लेकिन वो यह नहीं जानते थे कि हम किस सोच से खेती में आ रहे हैं।

प्रतीक नेअगले दाे सालों में ऑर्गेनिक फार्मिंग से 4 लाख रुपए प्रति एकड़ मुनाफे का टारगेट तय किया है।

हमारे लिए अवसर बनकर आया काेराेना

प्रतीक बताते हैं कि इस बीच कुछ तकलीफें भी आईं लेकिन उसके समाधान भी मिलते रहे। हमारे बिजनेस का सबसे अच्छा दौर इस कोरोना महामारी में आया। क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में लोगों को पता ही नहीं है कि जो सब्जी वे खा रहे हैं उस पर कल शाम को कौन सा केमिकल छिड़का गया था। जैविक उत्पादों की कोरोना काल में हमने होम डिलीवरी की, इस महामारी के दौर में हमारे पास इतनी डिमांड आई की हम सप्लाई तक नहीं कर पा रहे थे।

अगर आपको भी ऑर्गेनिक फार्मिंग के फील्ड में आना है तो इन बातों का ध्यान रखें
1- अगर आप जॉब में हैं और ऑर्गेनिक फार्मिंग में उतरना चाहते हैं तो सबसे पहले आप जॉब में रहते हुए करीब 6 महीने तक मार्केट रिसर्च कीजिए। ऑर्गेनिक फार्मिंग में उत्पादों की बहुत सारी वैराइटी हैं। आपको फलों का उत्पादन करना है या सब्जी का। क्योंकि पालक आपको एक महीने में रिजल्ट देगा और केले का पेड़ आपको 10 महीने में रिजल्ट देगा, जबकि आम 4 से 5 साल का वक्त लेगा। इसलिए पहले तय कीजिए कि आपको किस चीज का उत्पादन करना है।

2- इसके बाद दूसरा स्टेप आता है कि आप इन उत्पादों की मार्केटिंग कैसे करेंगे? क्या आप किसानों का एक संगठन बनाना चाहते हैं या खुद की एक कंपनी बनाना चाहते हैंं। या फिर आप उत्पादन नहीं सिर्फ ट्रेडिंग और प्रोसेसिंग करना चाहते हैं। यह तय कीजिए और जॉब में रहते हुए धीरे-धीरे ये सभी तैयारियां पूरी कर लीजिए।

3- इस बीच एक सवाल यह भी आता है कि क्या नौकरी और ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़ा स्टार्टअप एक साथ किया जा सकता है तो जवाब है- नहीं, क्योंकि ऑर्गेनिक फार्मिंग में आपको रोजाना आना पड़ सकता है। यहां एक पेस्ट्रीसाइट छिड़ककर 15 दिनों की छुट्‌टी नहीं मिल सकती है। आपको अपनी जमीन से जुड़ना पड़ेगा।

4- जरूरी नहीं कि हर कोई मेरी तरह किसान परिवार से हो और उसके पास 5-10 एकड़ खेत हो? अगर आप किसान परिवार से नहीं हैं या आपके पास जमीन नहीं हैं तो आप कुछ किसानों को प्रेरित कर उन्हें ऑर्गेनिक फार्मिंग की ओर आगे बढ़ा सकते हैं। आप उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि आप उनका उत्पाद बाजार में अच्छी कीमत पर बेचेंगे, ऐसी स्थिति में आपको एक मार्केटिंग कंपनी तैयार करें जो इन उत्पादों को बेचने का काम करें।

5- अगर आप ऑर्गेनिक फार्मिंग के उत्पादन में ही जाना चाहते हैं तो आप किसी भी गांव में या शहरों के आउटर में लॉन्ग टर्म 5 से 10 साल की लीज पर ले सकते हैं या पार्टनरशिप कर सकते हैं। इस तरह भी आप ऑर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत कर सकते हैं।

6.इस फील्ड में उतरने से पहले बेसिक होमवर्क जरूर करके आएं। इस बिजनेस को एक-दो साल का वक्त दें और इस अवधि में आपके ऊपर अर्निंग का प्रेशर ना हो। इस अवधि के लिए आपके पास फाइनेंशियल बैकअप होना चाहिए।

7- स्टार्टअप हर किसी के बस की बात नहीं है, क्योंकि इसका मतलब है एक व्यक्ति के अंदर सभी क्षमताएं होना। मैन मैनेजमेंट, फाइनेंस, बिजनेस, सेल्स और प्रोसेस डिवाइडेशन स्किल होना चाहिए। अगर आपके पास यह सभी स्किल नहीं हैं तो दो-तीन लोग मिलकर स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। इसके लिए आप किसानों से मिलें, इसके बिजनेस से जुड़े लोगों से मिलें, इसकी पढ़ाई करें और रिसर्च पर फोकस रखें तो आपके यह फीलड और भी आसान होगा।

प्रतीक बताते हैं कि अगर आप ऑर्गेनिक फार्मिंग करना चाहते हैं तो उसके लिए पहले मार्केट रिसर्च जरूरी है।

क्या अच्छी खासी नौकरी छोड़कर ऑर्गेनिक फॉर्मिंग में आएं ताे इस बात की गारंटी है कि अच्छा मुनाफा मिलेगा?

प्रतीक बताते हैं कि अगर आप इस सोच के साथ आएंगे कि नौकरी से ज्यादा यहां कमाई होगी तो आप गलती कर रहे हैं। क्योंकि शुरुआती 2-3 साल उतनी कमाई नहीं होने वाली। ऑर्गेनिक फार्मिंग में जैविक सोच होना बहुत जरूरी है। अगर आप प्रॉफिट के मूड से आएंगे तो आप चाहेंगे कि ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो। क्योंकि आपको पहले जमीन के स्वास्थ्य के बारे में सोचना होगा। क्योंकि जमीन को रासायनिक से जैविक में तब्दील होने में एक से डेढ़ साल का वक्त लगता है।

क्या साल भर में मुनाफा आपकी सैलरी से भी ज्यादा हो सकता है

प्रतीक कहते हैं इसका जवाब है-हां, क्योंकि अभी मैं अपने खेतों में सब्जियां उगाकर प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपए सालाना बचत कर पा रहा हूं। आगे की संभावनाएं भी है, मेढ़ पर आप फलों के वृक्ष लगा सकते हैं। मिक्स क्रॉपिंग या लेयर फॉर्मिंग के जरिए आप अगले तीन से चार सालों में प्रति एकड़ 4 लाख रुपए तक मुनाफा कमा सकते हैं। हां, बस इसके लिए आपको थोड़ा पेशेंस रखना होगा।

प्रतीक बताते हैं कोरोनाकाल में उन्हें फायदा हुआ। वे कहते हैं कि तब हमारे पास इतनी डिमांड आई की हम सप्लाई तक नहीं कर पा रहे थे।

मैं पूरी तैयारी और ऑर्गेनिक सोच के साथ इस फील्ड में आया था
प्रतीक कहते हैं कि मैं तो पूरी तैयारी के साथ इस फील्ड में आया था। जब आप ऑर्गेनिक सोच के साथ आते हैं तो आपके खर्चे अपने-आप ही कम हो जाते हैं। पहले मैं साल में दो बार शॉपिंग करता था अब चार साल में एक बार शॉपिंग करता हूं, क्याेंकि अब मेरी जरूरतें खुद ब खुद कम हो गई हैं।

मुझे साल 2016 में लिए निर्णय पर कभी मलाल नहीं होता बल्कि पहले से ज्यादा मानसिक शांति मिलती है। अब मैं अपने परिवार से साथ ज्यादा वक्त बिता पाता हूं। अब मेरे पास हफ्ते में 8 से 10 ऐसे कॉल आते हैं कि जिनमें नौकरीपेशा लाेगकहते हैं कि उन्हें भी ऑर्गेनिक फॉर्मिंग करनी है, मैं इसे एक अच्छा ट्रेंड मानता हूं क्योंकि गांवों में रिवर्स माइग्रेशन बहुत जरूरी है।

आज तक रिकवर नहीं हो पाई पॉलीहाउस की लागत, 34 लाख का लोन तो अपने पीएफ, ग्रेच्युटी के पैसों से भरा

प्रतीक बताते हैं कि खेती के शुरुआती दौर में मैंने पॉली हाउस में जो लागत लगाई थी वो आज तक रिकवर नहीं हो पाई है। पॉली हाउस की यूटिलिटी बस दो महीने के लिए होती है। साथ ही इसके उत्पादों का बाजार में अच्छा रेट भी नहीं मिलता। प्रतीक कहते हैं कि, इससे मुझे यह सबक मिला कि इसमें गलती खेती की नहीं बल्कि पॉलीहाउस की है।

प्रतीक बताते हैं कि मैंने पॉली हाउस का 47 लाख रुपए के लोन में से 34 लाख रुपए अपने पीएफ, ग्रेच्युटी के पैसों से भरा। अगर यही पैसा अगर अपने स्टार्टअप में यूज करता तो शायद जो हम आज अचीव कर रहे हैं वो एक साल पहले ही कर लेते।



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भोपाल के रहने वाले प्रतीक शर्मा बैंक की नौकरी छोड़कर 2016 में गांव लौट आए और अब ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं।


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विकास इतना जालिम था कि पेपर पर अंगूठा लगवाने के लिए बुजुर्ग का अंगूठा काट लिया था

‘जिनके पास सरकारी हथियार हैं, वे वापस कर दें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।’ लाउडस्पीकर पर यह ऐलान बिकरू गांव में किया जा रहा है। कानपुर शहर से 35 किमी दूर यह गांव पहले पुलिस वालों की हत्या और फिर गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर से चर्चा में है।

पुलिस की मुस्तैदी बढ़ गई है। डेढ़ सौ से ज्यादा जवान-अफसर तैनात हैं। आरआरएफ की भी एक टुकड़ी तैनात कर दी गई है। घटना में विकास और उसके साथियों ने पुलिस के हथियार लूट लिए थे। पुलिस इन्हें रिकवर करना चाह रही है। यूं तो गांव में घूमने पर हर जगह सन्नाटा ही दिख रहा है।

लेकिन कई-कई बार पूछने पर कुछ महिलाओं ने बताया कि डर के मारे घर के मर्द फरार हैं। अभी भी दो दर्जन से ज्यादा घरों पर ताला लटका है। उन घरों के मर्दों के साथ-साथ परिवार भी भाग गए हैं। पुलिस गांव में सबसे पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक गांव की आबादी 1400 है। विकास के साथियों की तलाश के लिए बिकरू और आसपास के 4-5 गांव के करीब 2500 मोबाइल नंबर सर्विलांस पर हैं।

गांव में ऐसा कोई नहीं जिससे तीन बार पूछताछ नहीं हुई

पुलिस गांव के हर घर की 3-4 बार तलाशी ले चुकी है। बच्चों को छोड़ दें तो गांव में संभवतः कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं बचा, जिससे पुलिस ने दो-दो, तीन-तीन बार पूछताछ नहीं की हो। शिबली न्याय पंचायत के पूर्व अध्यक्ष लल्लन बाजपई बताते हैं कि चौबेपुर, बिल्हौर, बिठूर, शिवराजपुर और शिबली सहित कानपुर के जो सीमावर्ती इलाके हैं, वहां अगर किसी को फैक्ट्री, फॉर्म हाउस या बड़ा बंगला बनाने के लिए जमीन लेनी होती थी तो विकास पंडित की अनुमति जरूरी होती थी। इसके बदले वह गुंडा टैक्स वसूलता था।

प्रॉपर्टी को विवादित बनाकर उसे खरीदना-बेचना विकास का काम था

यदि किसी ने गलती से बिना बताए या छिपाकर खरीद फरोख्त कर भी ली तो विकास का गैंग उस पर हमला कर देता था। शिबली के एक व्यापारी बताते हैं कि इलाके की जो बेहतरीन दाम देने वाली जमीन होती थी। भले ही वह किसी के नाम हो उस पर वह अपना बोर्ड लगा देता था। इसके बदले मालिक को डरा धमकाकर पैसे वसूलता था। प्रॉपर्टी को विवादित बनाकर उसे खरीदना-बेचना ही उसका प्रमुख काम था। सीनियर जर्नलिस्ट अनूप बाजपई बताते हैं कि विकास ने बिठूर पर नजर गड़ाई जिससे उसने खूब पैसे बनाए।

विकास ने 1994 में एक किसान की हत्या करवा दी थी

बिठूर ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से समृद्ध है। प्रदेश के बड़े बड़े लोग यहां बंगला, फॉर्म हाउस इत्यादि बनवाते हैं। ऐसे में विकास ने किसानों की जमीन कब्जाई और उन्हें ऊंचे दामों में बेचा। स्थानीय लोग बताते हैं कि विकास के अंदर दर्द नहीं था बस वह अपना फायदा चाहता था। गांव में एक बुजुर्ग झन्नू बाबा रहा करते थे। वह अकेले थे। उम्र हो गई थी। उनके पास जमीन भी अच्छी खासी थी।

बताते हैं उन्होंने कुछ जेवरात अपने खेत में ही दबा रखे थे। विकास बाबा के पीछे पड़ गया। उसने पेपर पर अंगूठा लगवाने केे लिए उनका अंगूठा काट लिया था। एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि 1994 में एक किसान विकास को जमीन देने को तैयार नहीं था। यह बात विकास को नागवार गुजरी और उसने उस किसान की हत्या कर दी।



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बिकरू गांव छावनी में तब्दील हो चुका है। गांव में बच्चों को छोड़कर ऐसा कोई नहीं जिससे पुलिस ने तीन बार पूछताछ न की हो।


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एक गांव जहां के सभी लोग काम करने जाते थे नेपाल, बॉर्डर सील हुआ तो सब हो गए बेरोजगार

बिहार के पूर्वी चम्पारण के रक्सौल में एक छोटा सा गांव पंटोका है। यह गांव भारत-नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। यहां से आधा किमी की दूरी पर नेपाल है। एक ओर कदम रखो तो भारत और दूसरी तरफ रखो तो नेपाल लग जाता है।

पंटोका के 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग कामकाज करने नेपाल के बीरगंज जाया करते थे। कोई वहां रिक्शा चलाता था। कोई मजदूरी करता था। किसी की दुकान थी तो कोई घर बनाने का काम करता था। नेपाल जाने के लिए इन लोगों से न कभी कोई कागजात मांगे गए और न ही कोई पूछताछ हुई।

यहां की बहन-बेटियां नेपाल में ब्याही हैं और नेपाल की कई बेटियों का ससुराल पंटोका है। सालों से इन लोगों को कभी यह महसूस ही नहीं हुआ कि भारत और नेपाल दो अलग-अलग देश हैं। ये मिनटों में पैदल चलकर भारत से नेपाल पहुंच जाया करते थे। आधे घंटे साइकिल चलाई तो बीरगंज में होते थे।

इन दिनोंं पंटोका में सभी पुरुष दिनभर घर में ही रहते हैं। किसी के पास कोई काम नहीं है।

लेकिन पिछले कुछ महीनों में सबकुछ बदल चुका है। अब ये लोग नेपाल जाते हैं तो वहां इन्हें पुलिस डंडे मारती है। एसएसबी के जवान सीमा से आगे बढ़ने ही नहीं देते। पिछले एक महीने में ही कई ग्रामीणों के साथ सुरक्षा बलों ने मारपीट की है।

ग्रामीणों को लगता था कि पहले लॉकडाउन के चलते ऐसा हो रहा था, लेकिन अब नेपाल में बाजार-दुकान-दफ्तर सब खुल गया है और भारत में भी अनलॉक शुरू हो चुका है, इसके बावजूद भारत-नेपाल सीमा नहीं खुली। पंटोका में रहने वाले भुनेसरा कहते हैं, ' कमाने-खाने बीरगंज जाते थे। चार महीने से नहीं जा पाए। घर में ही बैठे हैं। क्योंकि रक्सौल में करने के लिए कुछ है ही नहीं।'

सरजूराम कहते हैं, ‘नेपाल का आदमी तो बिना डर के भारत आ रहा है, लेकिन हम लोग नहीं जा पा रहे। वहां जाओ तो नेपाल फोर्स के जवान मारते हैं। अंदर नहीं घुसने देते। जबकि वहां के लोग हमारे यहां अंदर तक घुस आते हैं।'

सरजूराम के मुताबिक, पंटोका का कोई आदमी नेपाल में ट्रांसपोर्ट का काम करता था। कोई दिहाड़ी पर जाता था। कोई रिक्शा चलाता था। सबके पास करने के लिए कुछ न कुछ था। कई लोग फैक्ट्री में काम करते थे। लॉकडाउन लगने के बाद से सब बंद है। अब दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है तो क्या पता पहले की तरह बॉर्डर कब खुलेगी।

अब नेपाल के लोग नहीं चाहते, हम उनके साथ काम करें

बच्चासा पिछले तीन महीनों से अपनी दुकान नहीं खोल पाए हैं। कहते हैं अब तो सामान भी खराब हो गया होगा।

पंटोका के ही बच्चासा ने बताया कि, ‘मेरी नेपाल में किराने की दुकान है। पंटोका से महज आधा किमी दूर है। लेकिन चार महीने से दुकान भी नहीं खोल पाया। उसमें रखा बहुत सा सामान खराब हो गया होगा। इमरजेंसी में भी हमें कोई वहां घुसने नहीं दे रहा। जबकि उनके लोग चोरी-छुपे आ रहे हैं और कपड़ा-किराना यहां से लेकर जा रहे हैं।'

बच्चासा कहते हैं कि, भारत और नेपाल दो अलग-अलग देश हैं ऐसा हमें कभी लगा ही नहीं। न कभी कोई जांच हुई, न पड़ताल। कोई कागज कभी नहीं लगा। बस साइकिल उठाई और पहुंच गए नेपाल। अपनी जिंदगी में पहली दफा ऐसा देख रहे हैं कि बॉर्डर सील है और यहां-वहां से आने-जाने पर रोक है। संतोषी देवी कहती हैं कि, पहले दिन में एक भी आदमी गांव में नहीं होता था लेकिन अब सब दिनभर सड़क पर घूमते रहते हैं।

दुर्गाप्रसाद कहते हैं, हमारे नेपाल न जाने से वहां के कारीगर खुश हैं। उनकी डिमांड बढ़ गई।

दुर्गाप्रसाद कुशवाह के मुताबिक,अब नेपाल के लोग भी नहीं चाहते कि हम उनके साथ काम करें। क्योंकि हमारे नहीं जाने से उन्हें ज्यादा मजदूरी मिलने लगी है। दुर्गाप्रसाद कहते हैं, बिहारी सबसे अच्छे कारीगर होते हैं। बीरगंज में नेपाली हमारे हेल्पर होते थे और हम कारीगर। हमें आठ सौ रुपया रोज मिलता था और उन्हें चार सौ रुपया।

अब हम नहीं जा रहे तो उनकी डिमांड बढ़ गई। उन्हें छ सौ रुपया मिलने लगा। हेल्पर थे तो थोड़ा बहुत काम सीख गए थे। इसलिए अब वो लोग भी नहीं चाहते कि हम वहां जाएं। वो लोग चाहते हैं कि दोनों देशों में लड़ाई और बढ़े और सरकार हमें नेपाल में न घुसने दे।

आठ साल का बेटा नेपाल में फंसा है, ला नहीं पा रहे

रामबाबू ने अपने बच्चे को लाने के लिए कई जतन कर लिए लेकिन अब तक ला नहीं पाए।

पंटोका के रामबाबू की परेशानी थोड़ी अलग है। उनका आठ साल का बच्चा पिछले चार महीने से नेपाल में फंसा है, लेकिन वो उसे पंटोका नहीं ला पा रहे। रामबाबू कहते हैं, मेरी नेपाल में ससुराल की तरफ की रिश्तेदारी है, वहीं बच्चा गया था। फिरलॉकडाउन लग गया तो वो वहीं फंसा रह गया।

अब जब नेपाल और भारत दोनों में ही लॉकडाउन खुल रहा है तब भी मैं अपने बच्चे को नहीं ला पा रहा क्योंकि बॉर्डर सील है। एक बार लेने निकला भी था लेकिन सीमा पर तैनात जवानों ने डंडा मारकर भगा दिया। रामबाबू के मुताबिक, नेपाल के लोग हर रोज सब्जी-किराना खरीदने भारत आ जाते हैं। लेकिन हम लोग यहां से नहीं जा पाते।

वे कहते हैं नेपाली या तो खेत से आते हैं या फिर सुरक्षा जवानों को पैसे देकर अंदर घुस जाते हैं। हमारे पास जवानों को देने के लिए पैसे नहीं हैं इसलिए हम उधर नहीं जा पा रहे। अब रामबाबू को बॉर्डर खुलने का इंतजार है, ताकि वो अपने आठ साल के बच्चे को अपने गांव ला सकें।

शादी करने लड़की अकेली आई, परिवार को आने नहीं दिया

पंटोकाके लवकुश की नेपाल की संगीता से अप्रैल में शादी होना तय थी। फिर लॉकडाउन लग गया और बॉर्डर सील हो गई। लवकुश ने बताया कि जून में लॉकडाउन खुलने के बाद हमने शादी की तारीख तय की लेकिन नेपाल से लड़की के किसी भी रिश्तेदार को भारत नहीं आने दिया गया। पूरे परिवार को छोड़कर लड़की अकेली ही रक्सौल आ गई।

फिर ग्रामीणों ने दोनों की शादी करवा दी। इसमें लड़के का तो पूरा परिवार था लेकिन लड़की तरफ से कोई नहीं था। शादी के बाद से अभी तक लड़की नेपाल नहीं जा सकी है और उसके परिवार का भी कोई भारत नहीं आया है। दोनों को ही बॉर्डर खुलने का इंतजार है, ताकि पहले की तरह ये वहां जा सकें और वो लोग यहां आ सकें।

पत्नी का आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख सके

देवशरण अपनी पत्नी का आखिरी दफा चेहरा भी नहीं देख पाए। उनकी पत्नी और बच्चा दोनों ही नहीं रहे।

देवशरण की पत्नी नेपाली की थीं। डिलीवरी होने वाली थी तो देवशरण पत्नी को उसके मां-बाप के पास ही छोड़ आए थे। डिलीवरी के दौरान ही उसकी तबीयत बिगड़ गई। शरीर में खून की कमी हो गई। डॉक्टर्स ने कहा कि, इसको बचा पाना मुश्किल है। उसके परिवार ने तुरंत देवशरण को इस बारे में बताया और नेपाल बुलाया। तमाम कोशिशों के बाद भी देवशरण को बॉर्डर से एंट्री नहीं मिल पाई।

उसने बताया कि मेरी पत्नी जिंदगी-मौत के बीच झूल रही है तो जवानों ने कहा कि अभी नेपाल के साथ टेंशन चल रही है, तुम वहां नहीं जा सकते। पत्नी ने बच्चे को जन्म तो दिया लेकिन न मां जिंदा बची और न ही बच्चा। परिवार ने दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया। देवशरण पत्नी का आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख पाया। कहता है, मैंने कभी नहीं सोचा था कि भारत और नेपाल के बीच ऐसे हालात बनेंगे।



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India Nepal Border Dispute News Updates; Resident Speaks To Bhaskar On Employment


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भीड़ वाले इनडोर स्पेस में भी मास्क पहनें, हमेशा दुकान-दफ्तर के खिड़की-दरवाजे खोलकर बैठेंं

वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं कि कोरोना वायरस हवा में भी फैल सकता है। यह एक कमरे की औसत लंबाई के बराबर स्थान तक फैलकर करीब तीन घंटे हवा में रह सकता है। इससे सर्वाधिक खतरा ऐसी बंद जगहों पर है, जहां भीड़ ज्यादा हो और वेंटिलेशन की समस्या हो। गौरतलब है कि 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ से कहा है कि कोरोना वायरस हवा के जरिए भी फैलता है। डब्ल्यूएचओ ने भी कहा है कि इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

अमेरिका की रिसर्च यूनिवर्सिटी वर्जीनिया टेक की एयरोसॉल विशेषज्ञ डॉ. लिंसे मर उन शोधकर्ताओं में शामिल हैं, जिन्होंने दावा किया है कि यह वायरस हवा में फैल सकता है। डॉ. लिंसे कहती हैं कि ‘अभी स्पष्ट नहीं है कि हवा में ये छोटे कण या एयरोसॉल छींक या खांसी से निकलने वालेे ड्रॉपलेट्स की तुलना में किस तरह और कितना वायरस फैलाते हैं।’ वे बताती हैं कि ‘एयरोसॉल तब भी रिलीज होता है, जब कोई बिना लक्षण वाला व्यक्ति सांस लेता है, बात करता है।

एयरबोर्न वायरस होने से चिंतित हैं तो ये बचाव करें

  • भीड़-भाड़ वाली बंद जगहों पर कम समय बिताएं। वेंटिलेशन वाली जगहों पर ज्यादा रहें।
  • किसी बंद जगह पर जा रहे हैं तो कोशिश करें कि इनडोर स्पेस में भी मास्क लगाकर रखें। दुकान और दफ्तर आदि मेंं खिड़की-दरवाजे खोलकर रखें।
  • कपड़े से बने मास्क भी एयरबोर्न वायरस के खतरे को कम कर सकते हैं लेकिन तब जब अधिक से अधिक लोग इसका इस्तेमाल करें। वैसे कोशिश करें कि अच्छी क्वालिटी का मास्क लगाएं।
  • घर, कार या दफ्तर के एसी में फिल्टर को अपग्रेड करें। भीड़ हो तो एसी की सेटिंग को आउटडोर एयर पर सेट करें, रिसर्कुलेटेड एयर की सेटिंग बंद कर दें।
  • दफ्तर और बड़ी बिल्डिंग्स में अच्छी गुणवत्ता के एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल बढ़ाएं।
  • इनडोर स्पेस में अल्ट्रावॉयलेट लाइट्स का इस्तेमाल करें ताकि वायरस को खत्म किया जा सके।
  • भीड़ वाली जगह पर मास्क के साथ फेस शील्ड का भी इस्तेमाल करें। इससे सुरक्षा बढ़ेगी।

इस स्थिति में बिना लक्षण वाले मरीज ज्यादा खतरनाक
बाहर निकलें तो चश्मा लगा लें। जहां सेंट्रलाइज्ड एसी चल रहा हो और भीड़ हो, वहां हवा में वायरस होने की आशंका ज्यादा है। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता-छींकता है और वहां हवा चल रही है तो आसपास के व्यक्ति के संक्रमण का खतरा हो सकता है। ऐसे में मास्क जरूर पहनें। बिना लक्षण वाले मरीज इन परिस्थितियों में ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।

- प्रो.अरुण शर्मा, कम्यूनिटी मेडिसिन, यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज।

- न्यूयॉर्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत



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विशेषज्ञ कहते हैं कि बाहर निकलें तो चश्मा लगा लें। जहां सेंट्रलाइज्ड एसी चल रहा हो और भीड़ हो, वहां हवा में वायरस होने की आशंका ज्यादा है। - प्रतीकात्मक फोटो


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कोरोना मरीजों का तनाव और स्टाफ की थकान दूर करने के लिए नर्स सिल्वा बजाती हैं वॉयलिन, कहा- मैं उम्मीदें बांट रही हूं

शाम को 6 बजे ही वॉयलिन का सुरीला संगीत कोरोना मरीजों में कानों तक पहुंचताऔर उनका तनाव दूर हो जाता है। कुछ समय के लिए ही सही मरीज अपनी बीमारी और स्टाफ थकान को भूलकर राहत महसूस करते हैं। यह नजारा चिली की राजधानी सेंटियागो के एल-पिनो हॉस्पिटल में हफ्ते में दो बार दिखता है।

26 साल की नर्स डमारिस सिल्वा अपनी ड्यूटी खत्म होने के बाद क्रिटिकल केयर यूनिट में वॉयलिन लेकर पहुंचती हैं। तार छेड़ते ही गैलरी में मधुर संगीत गूंजने में लगता है।

मैं लोगों मेंउम्मीदें बांट रही हूं
डमारिस सिल्वा कहती हैं कि कोरोनाकाल में मैं लोगों मेंस्नेह, विश्वास और उम्मीदें बांट रही हूं। मेरे वॉयलिन से निकला संगीत सिर्फ एक गाना नहीं है, यह उससे बढ़कर है क्योंकि जब भी मैं इसे बजाती हूं तो यह आवाज सीधे मेरे दिल से निकलती है।

वह बताती हैं कि जैसे ही मरीज को गाने सुनाई पड़ते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

कई घंटों तक बजाती हैं वॉयलिन
सिल्वा हफ्ते में दो बार कोरोना मरीजों के बीच पहुंचती हैं और घंटों वॉयलिन बजाती हैं। इसके साथ वह मरीजों के लिए लेटिन सॉन्ग भी गाती हैं। वह बताती हैं कि जैसे ही मरीज को गाने सुनाई पड़ते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वह अंदर से खुशहो जाते हैं। सिल्वा की कलीग नर्स जोज लुइस कहती हैं कि वह मरीजों के लिए जो कुछ भी कर रही हैं, यह बेहद खूबसूरत है।

वह सही मायने में इंसानियत का अद्भुत उदाहरण हैं।

तालियां बजाते हैं मरीज और स्टाफ
हॉस्पिटल में काम करने वाली एक अन्य नर्स के मुताबिक, जब सिल्वा गैलरी में आती हैं तो मरीज उनका गाना सुनकर तालियां बजाते हैं। इनकी यह पहल मरीजों और स्टाफ दोनों के लिए काफी सुखद है और जोश भरने वाली है। वह सही मायने में इंसानियत का अद्भुत उदाहरण हैं।

नर्सइलाज के साथ मरीजों के लिए मॉरल सपोर्ट का भी काम कर रही हैं।

नर्सों के पास दोहरी जिम्मेदारी
हॉस्पिटल में नर्स दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। ये इलाज के साथ मरीजों के लिए मॉरल सपोर्ट का भी काम कर रही हैं। नर्स मिशेल वॉघान रिचमॉन्ड के सेंट मैरी हॉस्पिटल में काम करती है। मिशेल और उनकी कलीग मरीजों के लिए स्पेशल टैडी वियर बनाती हैं। इसके अलावा उनके परिजनसे ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड कर मरीजों को सुनाती हैं ताकि उनका तनाव कम हो।

सिल्वा की कलीग नर्स जोज लुइस कहती हैं कि वह मरीजों के लिए जो कुछ भी कर रही हैं, यह बेहद खूबसूरत है।

कोरोना के मामलों में छठवें नम्बर पर चिली
कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों से चिली छठे नंबर पर है, जहां संक्रमण के 3 लाख से अधिक मामले पाए गए हैं। यहां 2 लाख 71 हजार लोग कोरोनावायरस से रिकवर हो चुके हैं।



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Chile Coronavirus News Updates: 26-year-old Damaris Silva, Nurse Plays Violin For Covid Patients In El Pino Hospital


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बैंककर्मी के बेटे ने खोल ली स्टेट बैंक की फर्जी ब्रांच, तीन माह से चला रहा था; फर्नीचर से स्टेशनरी तक सब वैसा ही

आपने अब तक फर्जी बैंक खाता खाेलने के बारे में ही सुना हाेगा, लेकिन तमिलनाडु में एक युवा ने बैंक की फर्जी ब्रांच खाेलकर देश की सबसे बड़ी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया काे ही चुनाैती दे डाली। करीब 80 हजार की आबादी वाले कस्बे में यह ब्रांच तीन महीने से चल रही थी। एक ग्राहक की शिकायत पर इसका भंडाफाेड़ हुआ। पुलिस ने 19 वर्षीय युवा समेत तीन लाेगाें काे गिरफ्तार किया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी व्यक्ति ने धाेखाधड़ी की शिकायत नहीं की है।

घटना तमिलनाडु के कडलाेर जिले के पनरुत्ती कस्बे की है। यहां स्टेट बैंक की दाे ब्रांच हैं। कुछ दिन पहले एक ब्रांच में ग्राहक पहुंचा और मैनेजर से पूछा, ‘आपने बताया नहीं, शहर में तीसरी ब्रांच खुल गई है?’ यह सुनकर मैनेजर हैरान रह गए। ग्राहक ने कथित ब्रांच से मिली पर्ची दिखाई ताे मैनेजर का माथा ठनका। उन्हाेंने जाेनल ऑफिस में तहकीकात की ताे पता चला काेई ब्रांच नहीं खाेली गई है। इसके बाद वे ‘तीसरी ब्रांच’ पहुंचे ताे सन्न रह गए। वहां फर्नीचर से स्टेशनरी तक असल ब्रांच जैसा था। कैश डिपाॅजिट चालान, रबर स्टैंप, फाइल पर बैंक का नाम प्रिंट था। वहां करेंसी काउंटर मशीन, डेस्कटाॅप कंप्यूटर, प्रिटर औरदर्जनाें फाइलें भी माैजूद थीं।
मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने मास्टरमाइंड कमल (19), रबर स्टैंप वेंडर मणिकम (52) औरप्रिंटिंग प्रेस संचालक कुमार (42) काे दबाेचा। इन्हाेंने अप्रैल में ही ब्रांच खाेली थी। यही नहीं, पनरुत्ती बाजार ब्रांच की वेबसाइट भी बनाई गई थी। आरोपी कमल ने बताया कि उसने मां और चाची के अकाउंट के बीच ट्रांजैक्शन किए हैं।

बोला- खुद की बैंक खोलना चाहता था, धोखाधड़ी नहीं की

पूछताछ में कमल ने बताया कि उसके माता-पिता बैंक में नौकरी करते थे। उनके पास बैंक जाने के दाैरान उसे बैंकिंग की जानकारी हाे गई थी। कुछ साल पहले पिता की मौत हाे गई। मां रिटायर हाे गई। अनुकंपा नौकरी के लिए अावेदन किया। इसमें देरी हुई तो ब्रांच खोल ली। वह खुद की बैंक खाेलना चाहता था। हालांकि किसी से धोखाधड़ी नहीं की।



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The banker's son opened a fake branch of the State Bank, operating for three months; Everything from furniture to stationery


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क्या पीएम मोदी ने ‘रीवा’ का नाम नर्मदा नदी से जोड़कर तथ्यातमक गलती की? पड़ताल में सामने आया पूरा सच

क्या वायरल : दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने रीवा शहर का नाम नर्मदा नदी से जोड़कर तथ्यात्मक गलती की है। और रीवा की गलत पहचान देश को बताई है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से मध्यप्रदेश के रीवा में बने अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा प्लांट का लोकार्पण किया।

  • लोकार्पण के दौरान उन्होंने कहा - आज रीवा ने वाकई इतिहास रच दिया है। रीवा की पहचान मां नर्मदा के नाम से और सफेद बाघ से रही है। अब इसमें एशिया के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्रोजेक्ट का नाम भी जुड़ गया है।

  • मोदी के भाषण के इस हिस्से को उनके ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया।

  • प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल से भी यही बयान हिंदी में ट्वीट किया गया। जिसके जवाब में राहुल गांधी ने लिखा - असत्याग्रही।

  • राहुल गांधी के ट्वीट के बाद ऐसी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई जिसमें पीएम मोदी की ‘रीवा की पहचान नर्मदा से’ होने वाली बात को तथ्यात्मक गलत बताया जाने लगा।
  • मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया दी।

अन्य ट्विटर यूजर, जिन्होंने रीवा से नर्मदा नदी के कनेक्शन को गलत बताया

फैक्ट चेक पड़ताल​​​​​​

  • पीएम मोदी के ट्वीट के जवाब में आई अधिकतर प्रतिक्रियाओं में यह कहा जा रहा है - कि नर्मदा नदी तो रीवा में बहती ही नहीं। इसलिए नर्मदा का रीवा से कोई संबंध नहीं।
  • पीएम के भाषण को सुनने पर पता चलता है कि उन्होंनेऐसा कहा ही नहीं कि नर्मदा नदी रीवा में बहती है। उन्होंने कहा - कि रीवा की पहचान अब तक नर्मदा नदी और सफेद शेरों से थी। लेकिन, अब इसे एशिया के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाएगा। यानी सारा विवाद रीवा के नर्मदा कनेक्शन को लेकर है।
  • रीवा शहर का नर्मदा से कोई कनेक्शन है या नहीं। ये जानने के लिए हमने रीवा शहर के प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट चेक की। यहां रीवा के इतिहास से जुड़ी जानकारी भी दी गई है।
  • रीवा की आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट लिखा है कि, नर्मदा नदी का पौराणिक नाम रेवा माना जाता है। रीवा का नाम इसी नदी के नाम पर है।
  • वेबसाइट पर दी गई जानकारी के प्रमुख हिस्से का हिंदी अनुवाद है :यह बघेल वंश के शासकों की राजधानी होने के साथ-साथ विंध्य प्रदेश की राजधानी भी रही है। ऐतिहासिक क्षेत्र रीवा को दुनिया में सफेद शेरों की भूमि के रूप में जाना जाता है। रीवा का नाम रेवा नदी के नाम पर रखा गया था, जिसे नर्मदा नदी का पौराणिक नाम कहा जाता है।
  • रीवा के इतिहास से जुड़ी अधिकृत जानकारी से ये स्पष्ट होता है कि ‘ नर्मदा नदी से रीवा का कनेक्शन जोड़ा जाना’ गलत नहीं है।

निष्कर्ष : पीएम मोदी ने नर्मदा को रीवा की पहचान बताकर तथ्यात्मक गलती नहीं की है। नर्मदा नदी का दूसरा नाम रेवा है। इसी नदी के नाम पर रीवा शहर का नाम है।



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Fact Check : Did PM Modi make a factual mistake by linking the name of 'Rewa' to the Narmada River?


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योगी सरकार में अखिलेश सरकार से 7 गुना ज्यादा एनकाउंटर हुए, देश में 45% फेक एनकाउंटर भी उत्तर प्रदेश में होते हैं

कानपुर में 8 पुलिसवालों की हत्या करने वाला गैंगस्टर विकास दुबे हत्याकांड के आठ दिन बाद शुक्रवार को पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद पुलिस एनकाउंटर की संख्या बढ़ी है। योगी सरकार के तीन साल में एनकाउंटर में 112 मौतें हुईं। इन एनकाउंटर्स में होने वाली मौतों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। पिछले पांच साल की बात करें तो देश मेंं 2015 में सबसे ज्यादा 140 एनकाउंटर ऐसे थे, जिनके फेक होने के मामले दर्ज हुए।

देश में पुलिस एनकाउंटर में कितनी मौतें होती हैं, किन राज्यों में पुलिस एनकाउंटर में सबसे ज्यादा लोग मारे जाते हैं, हर साल कितने फेक एनकाउंटर के केस सामने आते हैं? पुलिस हिरासत में कितनी मौत होती है? पुलिस हिरासत में हुई मौत में शामिल कितने पुलिसवालों को सजा हो पाती है? इस रिपोर्ट में हम इन सवालों का जवाब तलाशेंगे।

यूपी का हाल: योगी के तीन साल में अखिलेश के मुकाबले 7 गुना एनकाउंटर
उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्राइम कंट्रोल के लिए पुलिस को एनकाउंटर की खुली छूट दी। इसका असर भी दिखा और विवाद भी हुए। असर ये कि जमानत पर छूटे अपराधी अपनी जमानत कैंसिल करा कर जेल जाने लगे। विवाद वही पुराने जो अधिकतर एनकाउंटर के साथ होते हैं।

जैसे वह एनकाउंटर फर्जी था या फिर उसएनकाउंटर में अपराधी नहीं निर्दोषमारा गया।बात आंकड़ों की करें तो योगी सरकार के तीन साल में एनकाउंटर में 112 मौतें हुईं। वहीं, अखिलेश सरकार के अंतिम तीन साल में किसी भी साल एनकाउंटर का आंकड़ा दहाई में भी नहीं पहुंचा।

देश का हाल: यूपी में बढ़े पर देश में घटे एनकाउंटर

यूपी में जहां पुलिस एनकाउंटर में मौत के मामले बढ़े हैं। वहीं, पूरे देश की बात करें तो एनकाउंटर में मौत के मामले घट रहे हैं। 2013 से 2018 के बीच के पांच सालों में सबसे ज्यादा मामले 2014-2015 में आए।

2018 में 77% फेक एनकाउंटर यूपी में हुए
6 जनवरी 2019 को गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने राज्यसभा में बताया कि 2018 में भारत में 22 फेक एनकाउंटर हुए। इनमें 17 यानी 77% से भी ज्यादा उत्तरप्रदेश में हुए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक आरटीआई के जवाब में बताया था कि भारत में 2000 से 2018 के बीच 18 साल में 1804 फेक एनकाउंटर हुए। इनमें 811 फेक एनकाउंटर यानी 45% अकेले उत्तरप्रदेश में हुए।

फेक एनकाउंटर के कारण सरकारों को पांच साल में 28 करोड़ 77 लाख रुपए मुआवजा देना पड़ा
पुलिस एनकाउंटर के फेक साबित होने पर सरकार को विक्टिम के परिवार को मुआवजा देना पड़ता है। मानवाधिकार आयोग ही मुआवजे की रकम तय करता है। 2012 से लेकर 2017 के बीच, उत्तर प्रदेश सरकार को सबसे ज्यादा 13 करोड़ 23 लाख रुपए मुआवजा देना पड़ा।

योगी सरकार आने से पहले एनकाउंटर में असम-छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा मौतें
योगी सरकार आने के पहले देश में सबसे ज्यादा एनकाउंटर असम, मेघालय, छत्तीसगढ़ और झारखंड में होते थे। छत्तीसगढ़ और झारखंड नक्सल प्रभावित हैं। वहीं, असम और मेघालय भी उग्रवाद प्रभावित रहे हैं। योगी सरकार आने के बाद यूपी में इन राज्यों से भी अधिक एनकाउंटर होने लगे।

पिछले पांच साल में पुलिस हिरासत में मौत के मामले में एक भी पुलिसवाले को सजा नहीं हुई

पिछले पांच साल में पुलिस हिरासत में मौत होने पर पुलिसवालों पर 192 केस हुए। 2017 में सबसे ज्यादा 62 केस हुए। केस तो दर्ज होते हैं लेकिन चार्जशीट केवल 61% मामलों में दर्ज हुई। इनमें से एक भी मामले में किसी पुलिसवाले को सजा नहीं हुई है। ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ पांच साल के दौरान का ट्रेंड है। 2000 से 2018 तक की बात करें तो इन 18 सालों में 810 पुलिसवालों पर केस हुआ। 334 चार्जशीट हुई और सिर्फ 26 को सजा हुई।



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Yogi government has 9 times more encounters than Akhilesh, 45% fake encounters in the country are also in Uttar Pradesh


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एनकाउंटर से पहले तक विकास दुबे को जेल और बेल के खेल का भरोसा था; राजस्थान के सीएम को बकरा मंडी जैसी राजनीति से ऐतराज

1. विकास दुबे के आखिरी 12 घंटे
गांव का गुंडा गैंगस्टर बन जाए और खादी-खाकी उसे हवा दे दे तो वह तीन साल में 10 देशों की यात्राएं भी कर सकता है। ...तो खबर ये कि बिकरू गांव के गैंगस्टर विकास दुबे की पहुंच बैंकॉक और दुबई तक थी। उसने वहां भी करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट कर रखा था। ...और ये सिर्फ अटकलें नहीं हैं, बल्कि इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट का लखनऊ जोन इसकी जांच में भी जुट गया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला भी दर्ज हो सकता है। शायद 60 से ज्यादा मामलों में अपराधी रहे विकास पर इसी एक्ट के तहत केस लगना बाकी था।

अब कुछ बातें जो हमारे रिपोर्टर्स ने बताईं...
पहली
- जब यूपी पुलिस विकास को कानपुर ले जा रही थी, तो वह रातभर जागता रहा। पूछताछ में उसने कई बड़े नाम कबूले। ऐसे नाम, जिन्हें सुनकर पुलिसवाले एकदूसरे का चेहरा देखने लगे। नाम क्या थे, ये नहीं पता चला। वह बार-बार पुलिस वालों से पूछता रहा कि जेल ही भेजोगे न? फिर बोला- कुछ महीने या सालभर में मुझे बेल मिल जाएगी। मुस्कराते हुए कहता कि रहा कि गुस्से में मुझसे बिकरू में कांड हो गया।

दूसरी- बिकरू गांव में शनिवार को जब भास्कर टीम पहुंची, तो 150 पुलिसवालों के साथ आरएएफ की बटालियन तैनात मिली। गांव के लोगों के चेहरों पर खौफ है। गांव और आसपास के इलाकों के 500 से ज्यादा लोगों के माेबाइल फोन सर्विलांस पर हैं।

2. राजस्थान की राजनीति में नया एंगल
बहुत हुआ विकास (दुबे), चर्चा अब राजनीति की भी है। बात हो रही है राजस्थान की। यहां सत्ता में कांग्रेस है। कॉम्बिनेशन वैसा ही है, जैसा मध्यप्रदेश में था। यानी एमपी में कमलनाथ और सिंधिया, तो राजस्थान में गहलोत और पायलट। फर्क यही कि सिंधिया सरकार में नहीं थे, जबकि पायलट डिप्टी सीएम हैं। खबर यह है कि राजस्थान में सर्विलांस पर रखे गए दो फोन नंबर के जरिए गहलोत सरकार गिराने की साजिश का खुलासा हुआ है।

माना जा रहा है कि जिस तरह सिंधिया को मध्यप्रदेश में ताकत मिली और कांग्रेस का तख्ता पलटकर उन्होंने शिवराज की सरकार बनवा दी, उससे कुछ लोगों को राजस्थान में प्रेरणा मिल गई। राजस्थान सरकार के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के मुताबिक, जो लोग विधायकों को खरीदने की कोशिश में थे, उन्होंने तो नई सरकार भी बना दी थी और इससे वे दो हजार करोड़ रुपए तक कमाने की सोच रहे थे। ...और तो और, वे ये भी कह रहे थे कि सीएम और डिप्टी सीएम झगड़ रहे हैं, इससे सरकार गिराने में आसानी रहेगी।

सर्विलांस पर लिए गए फोन नंबर तो अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले लोगों के थे, लेकिन 3 निर्दलीय विधायकों के खिलाफ शिकायत दर्ज हो गई और 2 भाजपा नेता हिरासत में ले लिए गए। शुक्रवार देर रात कांग्रेस के 24 विधायकों ने जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर इसे भाजपा की साजिश बताया। वहीं, भाजपा कहने लगी कि नहीं, ये साजिश तो हमारे खिलाफ हुई है।

उधर, सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को प्रेस कॉन्फेंस की और गोवा, मणिपुर, मध्यप्रदेश के उदाहरण गिनाते हुए बोले- बकरा मंडी में जिस तरह से बकरे बिकते हैं, ये उस तरह की राजनीति हो रही है।

3. स्वामी के आरोप
भाजपा के एक नेता हैं सुब्रमण्यम स्वामी। अपने दावों और आरोपों से चौंकाते हैं। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस की सीबीआई जांच की मांग की है। स्वामी ने एक ट्वीट में बॉलीवुड के तीन खानों सलमान, शाहरुख और आमिर को थ्री मस्केटियर्स बताते हुए उनसे पूछा है कि सुशांत के मामले में वे तीनों चुप क्यों हैं?

हालांकि, खबर उन्होंने दूसरे ट्वीट में दी है। उन्होंने कहा है कि तीनों खान की भारत और विदेशों, खासकर दुबई में मौजूद संपत्ति की जांच की जानी चाहिए। किसने उन्हें बंगले गिफ्ट किए? कैसे उन्होंने यह संपत्ति खरीदी? जांच किसे करनी चाहिए, ये भी उन्होंने बताया है। इसके लिए उन्होंने ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई के नाम लिए हैं।

4. आज रविवार है, करियर की सोचिए
करियर की बात इसलिए क्योंकि टैरोकार्ड्स कह रहे हैं कि 12 में से 9 राशियों के लिए रविवार का दिन करियर के लिहाज से बेहतरीन रहेगा। आप नए जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। पुराने इन्वेस्टमेंट का फायदा भी मिल सकता है।

अब ज्योतिष की बात करते हैं। इसके मुताबिक, रविवार को मीन राशि में मौजूद चंद्रमा पर शनि की टेढ़ी नजर पड़ रही है। इससे मेष, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों को दिनभर संभलकर रहना होगा।

5. आपके लिए 3 खबरें और... शायद आप इन्हें पढ़ना चाहें

  • पाकिस्तान में हिंदू-सिखों का हाल

पिछले महीने ही पाकिस्तान की इमरान सरकार ने राजधानी इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाने की मंजूरी दी थी। ये इस्लामाबाद का पहला मंदिर होता, लेकिन इस मंदिर की दीवार बन ही रही थी कि कट्टरपंथियों ने इसे तोड़ डाला। पाकिस्तान में हिंदू-सिखों के धार्मिक स्थलों का ऐसा ही हाल है। बंटवारे के समय पाकिस्तान में 428 मंदिर थे। उनमें से 408 दुकान या दफ्तर बन गए। पाकिस्तान में हर साल हजार से ज्यादा लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन...

  • यूपी के 5 बड़े एनकाउंट

यूपी का श्रीप्रकाश शुक्‍ला शार्प शूटर और सुपारी किलर नाम से फेमस था। कहा जाता है कि श्रीप्रकाश ने एक बार मुख्यमंत्री की हत्या की सुपारी ली थी। गर्लफ्रेंड के मोबाइल के सर्विलांस पर होने की वजह से पुलिस उस तक पहुंची और एनकाउंटर कर दिया। रमेश कालिया भी एक समय बड़ा गैंगस्टर था। पुलिस की टीम बाराती बनकर तीन अलग-अलग गाड़ियों में बैठकर उस तक पहुंची थी। इसी तरह घनश्याम केवट यूपी का कुख्यात डकैत था। उसके एनकाउंटर का लाइव टेलिकास्ट हुआ था। पांच बड़े एनकाउंटर की कहानी...

  • बोल्ट वापसी करेंगे?

...और जाते-जाते बात 11 बार के वर्ल्ड चैम्पियन जमैका के उसैन बोल्ट की। महज 9.58 सेकंड में 100 मीटर दौड़ लेने का रिकॉर्ड रखने वाले 33 साल के बोल्ट रिटायरमेंट का फैसला बदल सकते हैं। उन्होंने 2017 में रिटायरमेंट लिया था। 3 ओलिंपिक में 8 गोल्ड उनके नाम हैं। वे कहते हैं कि उनके पूर्व कोच ग्लैन मिल्स कहेंगे, तो वे ट्रैक पर वापसी करेंगे। 200 मीटर रेस में 19.19 सेकंड का रिकॉर्ड...



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Vikas Dubey | News Brief/Dainik Bhaskar Morning Latest [Updates]; Gangster Vikas Dubey Updates, Rajasthan snooping congress government


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हांगकांग पर चीन के थोपे कानून से क्यों डर रही है गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसी कंपनियां?

चीन ने गुपचुप तरीके से हांगकांग के लिए नया सुरक्षा कानून (न्यू सिक्योरिटी लॉ) लागू कर दिया। इसे इतना गुप्त रखा गया कि हांगकांग की चीफ एक्जीक्यूटिव तक को ड्राफ्ट पढ़ने को नहीं मिला। यह कानून एक जुलाई से लागू भी हो गया। हांगकांग के लोकतंत्र कार्यकर्ता और दुनियाभर के विशेषज्ञ इसे चीनी तानाशाही और हांगकांग के अस्तित्व पर संकट बता रहे हैं।

टिकटॉक ने कहा कि वह हांगकांग का मार्केट छोड़ देगा। वहीं, फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने यूजर डेटा के संबंध में सरकारी रिक्वेस्ट का रिव्यू रोक दिया है। बीजिंग के नए सुरक्षा कानून को लेकर कंपनियां फ्री स्पीच और बिजनेस अवसरों में बैलेंस बनाने में लगी हैं। टेक्नोलॉजी कंपनियों का इस संबंध में रुख ही हांगकांग की पहचान का भविष्य तय करने वाला है। जानते हैं कि क्या है यह नया कानून और हांगकांग के लिए इसके क्या मायने हैं?

सबसे पहले, क्या है पूरा मामला?

  1. ब्रिटेन ने एक जुलाई 1997 को हांगकांग को चीन को सौंपा था। उस समय दोनों के बीच बहुत ही खास एग्रीमेंट हुआ था। इसमें तय हुआ था कि हांगकांग का एक मिनी संविधान होगा यानी बेसिक लॉ। वहीं, यह भी कहा गया था कि "वन कंट्री, टू सिस्टम" चलता रहेगा।
  2. एग्रीमेंट के तहत चीन को हांगकांग की आजादी को कायम रखना था। असेंबली और स्पीच की आजादी, स्वतंत्र ज्युडिशियरी और डेमोक्रेटिक राइट्स भी हांगकांग को देने थे। यह कुछ ऐसी बातें हैं जो आज भी चीन के मेनलैंड में लोगों के पास नहीं है।
  3. इसी एग्रीमेंट के तहत हांगकांग को अपना नेशनल सिक्योरिटी लॉ भी बनाना था। बेसिक लॉ के आर्टिकल 23 में इसे स्पष्ट किया गया था। लेकिन, हांगकांग कभी अपना कानून ही नहीं बना सका।
  4. इसके बाद पिछले साल एक्स्ट्रेडिशन लॉ बनाया तो इस पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। यह आगे चलकर चीन-विरोधी और लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन बन गया। चीन ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहता, इसलिए उसने सिक्योरिटी लॉ बनाकर लागू कर दिया है।

क्या है हांगकांग का नया कानून?
हांगकांग के नए नेशनल सिक्योरिटी लॉ में 66 आर्टिकल है। सात हजार से ज्यादा शब्द। सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के सभी उपाय किए गए हैं। प्रदर्शन करने वालों पर सख्ती से दंड करने का प्रावधान रखा गया है। नए कानून के तहत सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाना देश तोड़ने की साजिश माना जाएगा। ट्रांसपोर्ट रोकने को आतंकी गतिविधि माना जाएगा।

यदि इसकी वजह से सरकारी या प्राइवेट संपत्ति को या लोगों को नुकसान पहुंचता है तो उम्रकैद की सजा होगी। जो भी दोषी पाए जाएंगे उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। यदि कानून के तहत कंपनियां दोषी ठहराई गई तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।

हांगकांग के नए कानून में चार गतिविधियों को अपराध बताया गया हैः

  1. सीसेशन यानी अलगावः देश से अलग करने की साजिश।
  2. सबवर्जन या तोड़फोड़ः सत्ता या केंद्र सरकार के अधिकारों का उल्लंघन।
  3. टेररिज्म या आतंकवादः लोगों के खिलाफ हिंसा या नुकसान पहुंचाना।
  4. कोलुजन या मेलजोलः विदेशी ताकतों से किसी भी तरह का मेलजोल।

हांगकांग के लिए इस कानून के क्या मायने हैं?

  1. ब्रिटिशर्स से आजाद होकर 22 साल पहले एक जुलाई को ही यह शहर चीन के अधीन आया था। इस हैंडओवर की 23वीं वर्षगांठ से एक घंटा पहले यानी 30 जून को रात 11 बजे यह नया कानून लागू हुआ।
  2. इससे हांगकांग की जिंदगी पूरी तरह बीजिंग के हाथ में आ गई। आलोचकों का कहना है कि यह कानून प्रभावी तरीके से प्रदर्शनों और फ्रीडम ऑफ स्पीच पर रोक लगाएगा। हालांकि, चीन के मुताबिक यह हांगकांग में स्थिरता लाएगा।
  3. बीजिंग हांगकांग में नया सिक्योरिटी ऑफिस खोलेगा। लॉ एनफोर्समेंट के अधिकारी उसके होंगे। लोकल अथॉरिटी की उन पर नहीं चलेगी। यह ऑफिस कुछ केस ट्रायल के लिए चीन भेजेगा।
  4. हांगकांग को बीजिंग के एडवाइजर को साथ लेकर कानून लागू करने के लिए नेशनल सिक्योरिटी कमीशन बनाना होगा। हांगकांग के चीफ एक्जीक्यूटिव को नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े केस की सुनवाई के लिए जज अपॉइंट करने होंगे। इससे ज्युडिशियल स्वतंत्रता खत्म होने का डर रहेगा।
  5. सबसे महत्वपूर्ण, बीजिंग को यह अधिकार होगा कि इस कानून को कैसे स्पष्ट किया जाए। हांगकांग की कोई भी ज्युडिशियल या पुलिस बॉडी ऐसा नहीं कर सकेंगी। हांगकांग के कानून से कॉन्फ्लिक्ट होता है तो बीजिंग का कानून प्रभावी होगा।
  6. कुछ सुनवाई बंद कमरे में हो सकेंगी। जिन लोगों पर कानून तोड़ने का संदेह होगा, उनकी जासूसी की जा सकेगी। विदेशी गैर-सरकारी संगठनों और न्यूज एजेंसियों का मैनेजमेंट मजबूत किया जाएगा। यह कानून हांगकांग के अस्थायी नागरिकों के साथ-साथ बाहरी लोगों पर भी लागू होगा।

हांगकांग के लोग क्यों डरे हुए हैं?

  1. बीजिंग ने कहा है कि हांगकांग को नेशनल सिक्योरिटी कायम रखते हुए अपने अधिकारों और आजादी का सम्मान करना होगा।लेकिन, कई लोगों को डर है कि इस कानून की वजह से हांगकांग में आजादी छीन जाएगी।
  2. यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के लीगल स्कॉलर प्रोफेसर जोहानस चान ने बीबीसी से कहा, "यह स्पष्ट है कि नया कानून हांगकांग के लोगों की व्यक्तिगत सुरक्षा को नहीं लेकिन फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को बुरी तरह प्रभावित करेगा। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के क्रिमिनल सिस्टम को हांगकांग के कॉमन लॉ सिस्टम पर थोपा जा रहा है।"
  3. यह भी रिपोर्ट आ रही हैं कि लोग फेसबुक पर अपने पोस्ट डिलीट कर रहे हैं। उन्हें इस बात का डर है कि नेशनल सिक्योरिटी लॉ का विरोध करने पर उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाएगा।
  4. जोशुआ वांग जैसे कुछ लोकतंत्र-समर्थक कार्यकर्ता विदेशी सरकारों के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। इस तरह के अभियान भविष्य में अपराध हो जाएंगे। उन्होंने अब डेमोसिस्टो पार्टी छोड़ दी है।
  5. लोगों को यह भी चिंता है कि नए कानून की वजह से हांगकांग की पहचान खो गई तो प्रमुख ग्लोबल बिजनेस हब और इकोनॉमिक पावरहाउस के तौर पर उसका आकर्षण भी प्रभावित हो सकता है।

क्या चीन नए कानून से हांगकांग के आंदोलनों को रोक लेगा?
हैंडओवर एग्रीमेंट में हांगकांग को आजादी की गारंटी दी गई थी, तो चीन वहां आंदोलनों को कैसे रोक लेगा? कई लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठ सकता है। बेसिक लॉ कहता है कि चीनी कानून हांगकांग में लागू नहीं होंगे। लेकिन, यदि एनेक्शचर-III में वह हैंतो उन्हें हांगकांग में लागू किया जा सकता है। इनमें ज्यादातर कानून ऐसे हैं, जो विदेश नीति से जुड़े हैं या विवादित नहीं हैं।

इन कानूनों को डिक्री के जरिये लागू किया जा सकता है। यानी शहर की संसद से पास किए बिना। आलोचकों का कहना है कि इस तरह कानून लागू करना "वन कंट्री, टू सिस्टम" प्रिंसिपल का उल्लंघन है। यह हांगकांग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन टेक्निकली यह संभव है।

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के लॉ प्रोफेसर जेरोम ए. कोहेन ने कहा कि यह कानून हांगकांग को नए युग में लेकर जाएगा, जहां सिविल लिबर्टी पर लगाम कसी रहेगी और कम्युनिस्ट पार्टी की वफादारी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा।

गूगल, फेसबुक जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों को किस बात का डर है?
नए कानून की वजह से टेक्नोलॉजी के सामने दो ऑप्शन हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के थोपे नए डेटा-शेयरिंग और सेंसरशिप को स्वीकार करें या देश छोड़कर निकल जाएं। उनका फैसला हांगकांग के भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बिजनेस हब बनने और डिजिटल फ्री स्पीच में निर्णायक होगा।

फेसबुक, ट्विटर, गूगल, टेलीग्राम, जूम और माइक्रोसॉफ्ट ने हांगकांग सरकार की ओर से आने वाली सभी डेटा रिक्वेस्ट पर जवाब देना बंद कर दिया है। वह अभी नए कानून का रिव्यू कर रहे हैं। ऐपल अब भी कानून का विश्लेषण कर रही है। फेसबुक के पास वॉट्सएप के साथ-साथ इंस्टाग्राम भी है और वह ह्यूमन राइट्स का विश्लेषण कर रहा है।

टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस चाइनीज है। लेकिन टिकटॉक चीन में नहीं है। उसने अपने आपको हांगकांग से पूरी तरह बाहर खींच लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि टेक्नोलॉजी कंपनियां अपने ऑपरेशंस को ताईवान ले जा सकती है या अन्य एशियाई लोकेशंस पर ले जा सकती हैं।

इससे पहले टेक्नोलॉजी कंपनियों ने चीन को कैसे दिया था जवाब?
ऐपल की बात करें तो वह चीन में सक्रिय रही है। सही मायनों में सिलिकन वैली की दिग्गज कंपनियों में वह अकेली है, जिसे चीन में ब्लॉक नहीं किया गया है। उसका मैन्यूफेक्चरिंग बेस चीन में है और बड़ी संख्या में ग्राहक भी। हाल ही में उसने हांगकांग सरकार के कहने पर प्रदर्शनकारियों के इस्तेमाल में आ रहे ऐप को हटाने में भी जल्दबाजी दिखाई थी। इतना ही नहीं पिछले साल ताईवान के झंडे को हांगकांग में इमोजी से बाहर निकाल फेंका था।



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Why are companies like Google, Facebook, Twitter afraid of China's imposition of law on Hong Kong?


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एनकाउंटर से पहले तक विकास दुबे को जेल और बेल के खेल का भरोसा था; राजस्थान के सीएम को बकरा मंडी जैसी राजनीति से ऐतराज

1. विकास दुबे के आखिरी 12 घंटे
गांव का गुंडा गैंगस्टर बन जाए और खादी-खाकी उसे हवा दे दे तो वह तीन साल में 10 देशों की यात्राएं भी कर सकता है। ...तो खबर ये कि बिकरू गांव के गैंगस्टर विकास दुबे की पहुंच बैंकॉक और दुबई तक थी। उसने वहां भी करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट कर रखा था। ...और ये सिर्फ अटकलें नहीं हैं, बल्कि इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट का लखनऊ जोन इसकी जांच में भी जुट गया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला भी दर्ज हो सकता है। शायद 60 से ज्यादा मामलों में अपराधी रहे विकास पर इसी एक्ट के तहत केस लगना बाकी था।

अब कुछ बातें जो हमारे रिपोर्टर्स ने बताईं...
पहली
- जब यूपी पुलिस विकास को कानपुर ले जा रही थी, तो वह रातभर जागता रहा। पूछताछ में उसने कई बड़े नाम कबूले। ऐसे नाम, जिन्हें सुनकर पुलिसवाले एकदूसरे का चेहरा देखने लगे। नाम क्या थे, ये नहीं पता चला। वह बार-बार पुलिस वालों से पूछता रहा कि जेल ही भेजोगे न? फिर बोला- कुछ महीने या सालभर में मुझे बेल मिल जाएगी। मुस्कराते हुए कहता कि रहा कि गुस्से में मुझसे बिकरू में कांड हो गया।

दूसरी- बिकरू गांव में शनिवार को जब भास्कर टीम पहुंची, तो 150 पुलिसवालों के साथ आरएएफ की बटालियन तैनात मिली। गांव के लोगों के चेहरों पर खौफ है। गांव और आसपास के इलाकों के 500 से ज्यादा लोगों के माेबाइल फोन सर्विलांस पर हैं।

2. राजस्थान की राजनीति में नया एंगल
बहुत हुआ विकास (दुबे), चर्चा अब राजनीति की भी है। बात हो रही है राजस्थान की। यहां सत्ता में कांग्रेस है। कॉम्बिनेशन वैसा ही है, जैसा मध्यप्रदेश में था। यानी एमपी में कमलनाथ और सिंधिया, तो राजस्थान में गहलोत और पायलट। फर्क यही कि सिंधिया सरकार में नहीं थे, जबकि पायलट डिप्टी सीएम हैं। खबर यह है कि राजस्थान में सर्विलांस पर रखे गए दो फोन नंबर के जरिए गहलोत सरकार गिराने की साजिश का खुलासा हुआ है।

माना जा रहा है कि जिस तरह सिंधिया को मध्यप्रदेश में ताकत मिली और कांग्रेस का तख्ता पलटकर उन्होंने शिवराज की सरकार बनवा दी, उससे कुछ लोगों को राजस्थान में प्रेरणा मिल गई। राजस्थान सरकार के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के मुताबिक, जो लोग विधायकों को खरीदने की कोशिश में थे, उन्होंने तो नई सरकार भी बना दी थी और इससे वे दो हजार करोड़ रुपए तक कमाने की सोच रहे थे। ...और तो और, वे ये भी कह रहे थे कि सीएम और डिप्टी सीएम झगड़ रहे हैं, इससे सरकार गिराने में आसानी रहेगी।

सर्विलांस पर लिए गए फोन नंबर तो अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले लोगों के थे, लेकिन 3 निर्दलीय विधायकों के खिलाफ शिकायत दर्ज हो गई और 2 भाजपा नेता हिरासत में ले लिए गए। शुक्रवार देर रात कांग्रेस के 24 विधायकों ने जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर इसे भाजपा की साजिश बताया। वहीं, भाजपा कहने लगी कि नहीं, ये साजिश तो हमारे खिलाफ हुई है।

उधर, सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को प्रेस कॉन्फेंस की और गोवा, मणिपुर, मध्यप्रदेश के उदाहरण गिनाते हुए बोले- बकरा मंडी में जिस तरह से बकरे बिकते हैं, ये उस तरह की राजनीति हो रही है।

3. स्वामी के आरोप
भाजपा के एक नेता हैं सुब्रमण्यम स्वामी। अपने दावों और आरोपों से चौंकाते हैं। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस की सीबीआई जांच की मांग की है। स्वामी ने एक ट्वीट में बॉलीवुड के तीन खानों सलमान, शाहरुख और आमिर को थ्री मस्केटियर्स बताते हुए उनसे पूछा है कि सुशांत के मामले में वे तीनों चुप क्यों हैं?

हालांकि, खबर उन्होंने दूसरे ट्वीट में दी है। उन्होंने कहा है कि तीनों खान की भारत और विदेशों, खासकर दुबई में मौजूद संपत्ति की जांच की जानी चाहिए। किसने उन्हें बंगले गिफ्ट किए? कैसे उन्होंने यह संपत्ति खरीदी? जांच किसे करनी चाहिए, ये भी उन्होंने बताया है। इसके लिए उन्होंने ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई के नाम लिए हैं।

4. आज रविवार है, करियर की सोचिए
करियर की बात इसलिए क्योंकि टैरोकार्ड्स कह रहे हैं कि 12 में से 9 राशियों के लिए रविवार का दिन करियर के लिहाज से बेहतरीन रहेगा। आप नए जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। पुराने इन्वेस्टमेंट का फायदा भी मिल सकता है।

अब ज्योतिष की बात करते हैं। इसके मुताबिक, रविवार को मीन राशि में मौजूद चंद्रमा पर शनि की टेढ़ी नजर पड़ रही है। इससे मेष, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों को दिनभर संभलकर रहना होगा।

5. आपके लिए 3 खबरें और... शायद आप इन्हें पढ़ना चाहें

  • पाकिस्तान में हिंदू-सिखों का हाल

पिछले महीने ही पाकिस्तान की इमरान सरकार ने राजधानी इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाने की मंजूरी दी थी। ये इस्लामाबाद का पहला मंदिर होता, लेकिन इस मंदिर की दीवार बन ही रही थी कि कट्टरपंथियों ने इसे तोड़ डाला। पाकिस्तान में हिंदू-सिखों के धार्मिक स्थलों का ऐसा ही हाल है। बंटवारे के समय पाकिस्तान में 428 मंदिर थे। उनमें से 408 दुकान या दफ्तर बन गए। पाकिस्तान में हर साल हजार से ज्यादा लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन...

  • यूपी के 5 बड़े एनकाउंट

यूपी का श्रीप्रकाश शुक्‍ला शार्प शूटर और सुपारी किलर नाम से फेमस था। कहा जाता है कि श्रीप्रकाश ने एक बार मुख्यमंत्री की हत्या की सुपारी ली थी। गर्लफ्रेंड के मोबाइल के सर्विलांस पर होने की वजह से पुलिस उस तक पहुंची और एनकाउंटर कर दिया। रमेश कालिया भी एक समय बड़ा गैंगस्टर था। पुलिस की टीम बाराती बनकर तीन अलग-अलग गाड़ियों में बैठकर उस तक पहुंची थी। इसी तरह घनश्याम केवट यूपी का कुख्यात डकैत था। उसके एनकाउंटर का लाइव टेलिकास्ट हुआ था। पांच बड़े एनकाउंटर की कहानी...

  • बोल्ट वापसी करेंगे?

...और जाते-जाते बात 11 बार के वर्ल्ड चैम्पियन जमैका के उसैन बोल्ट की। महज 9.58 सेकंड में 100 मीटर दौड़ लेने का रिकॉर्ड रखने वाले 33 साल के बोल्ट रिटायरमेंट का फैसला बदल सकते हैं। उन्होंने 2017 में रिटायरमेंट लिया था। 3 ओलिंपिक में 8 गोल्ड उनके नाम हैं। वे कहते हैं कि उनके पूर्व कोच ग्लैन मिल्स कहेंगे, तो वे ट्रैक पर वापसी करेंगे। 200 मीटर रेस में 19.19 सेकंड का रिकॉर्ड...



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शनिवार, 11 जुलाई 2020

झुग्गियों की बजाय पॉश इलाकों में पैर पसार रहा कोरोना: बोरीवली में 16 दिन और धारावी में 76 दिन में दोगुना हो रहे कोरोना के केस

मुंबई में 23 जून को कोरोना के 824 नए मामले आए थे। यह संख्या 40 दिन में सबसे कम रही। यहां कोरोना फैलने का एक नया ट्रेंड सामने आया है। अब कोरोना का कहर झुग्गी बस्तियों में कम हो रहा है, लेकिनपॉश इलाकों और हाउसिंग सोसाइटियों में पैर पसार रहा है।

संक्रमण फैलने की सबसे ज्यादा स्पीड बोरीवली के पॉश इलाकों में देखने को मिली। यहांं हर 16 दिन में मामले दोगुना होरहे हैं, जबकि कभी सबसे ज्यादा प्रभावित रहे धारावी में अब 76 दिनों में मामले दोगुनाहो रहे हैं। कोरोना टॉस्क फोर्स के प्रमुख डॉ. संजय ओक खुद कोरोना संक्रमित हो चुकेहैं। वे बताते हैं कि मुंबई में अब 13 दिन की जगह 37 दिन में मामले दोगुनाहो रहे हैं। हालांकि, पहले 7 दिनों में 5% की दर से पॉजिटिव केस बढ़ रहे थे। अब यह कम होकर 1.88% हो गया है। हालांकि, संजय मानते हैं कि अभी आईसीयू की मांग बढ़ रही है।

कोरोना से लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन पहल कर रहा है। मास्क पहनी हुई यह मूर्ति उसी पहल का हिस्सा है, जिसे बच्चा ध्यान से देख रहा है।

मुंबई मेंआईसीयू और वेंटिलेटर्स करीब-करीबफुल
मुंबई में 1219 आईसीयू हैं, जिसमें से सिर्फ 72 खाली हैं। वहीं वेंटिलेटर 701 है, जिसमें से सिर्फ 23 खाली हैं। मुंबई में अब तक 46 पुलिसकर्मी और नगर निगम के 70 कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। बीएमसी ने कंटेंनमेंट जोन की संख्या बढ़ाकर 770 कर दी है। 5932 से अधिक रिहायशी इमारतें और चॉल सील की गई हैं।

कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए प्रशासन ने बोरीवली, कांदीवली, मलाड और दहीसर इलाकों में लॉकडाउन लगाने का प्रस्ताव दिया है। इन इलाकों की आबादी लगभग 23 लाख है। बोरीवली रेड जोन में है। इसके पास कादहिसर ऑरेंज जाेन में है। श्री विश्वकर्मा चेरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से इन इलाकों में राहत सामग्री बांट रहे समाज सेवक रामा विश्वकर्मा कहते हैं कि बोरीवली में 7 दिन में 454 और दहिसर में 289 कोरोना संक्रमित मरीज बढ़े हैं। बोरीवली में 16 और दहिसर में 21 दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही है।

बाेरीवली के राकांपा नेता मनीष दुबे कहते हैं कि लोगों की लापरवाही की वजह से यह इलाका रेड जोन में आ गया है।लॉकडाउन खुलते ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए। वहीं भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया आरोप लगाते हैं कि कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच नहीं की जा रही है। मरीजों को बेड के लिए इधर-उधरभटकना पड़ रहा है। रोजाना 5-10 लोगों की मौत घरों में हो रही है क्योंकि उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ही नहीं मिल रहे हैं।

मुंबई में 1219 आईसीयू हैं, जिसमें से सिर्फ 72 खाली हैं। वहीं वेंटिलेटर 701 है, जिसमें से सिर्फ 23 खाली हैं।

पूर्वी उपनगर में युवा ब्रिगेड एसोसिएशन के सलाहकार डॉ. बाबूलाल सिंह बताते हैं कि मुलुंड के इंद्रानगर और रामगढ़ जैसे स्लम इलाकों में 95% संक्रमित ठीक होकर घर आ गए हैं। मगर संक्रमण अब मुलुंड के पॉश इलाकों की बिल्डिंग में फैल रहा है। वजह शायद यह गलतफहमी है किकोरोना सिर्फ स्लम में रहने वालों को होगा। लोग चोरी-छिपे सोसायटी के ग्राउंड फ्लोर पर इकट्‌ठा होते रहे और मौका मिलने पर इधर-उधर घूमने निकलने लगे।

नतीजा यह हुआकि मुलुंड में जहां अप्रैल में सिर्फ 13 संक्रमित थे वहीं 13 जून कोसंख्या 1,454 तक जा पहुंची और अब 1870 केस हो गए हैं। यानी पिछले सात दिन में ही 416 नए संक्रमित मिले हैं। दूसरी तरफ मलाड में हालात कुछ सुधरे हैं। भाजपा नेता योगेश वर्मा बताते हैं कि मलाड कुछ दिन पहले तक रेड जोन में था। अभी-अभी ऑरेंज जोन में आया है। यहां की घनी आबादी वाले झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में कुरार गांव, अप्पा पाड़ा, संतोषनगर, तानाजी नगर और सोमवारी बाजार में लॉकडाउन का सख्ती से पालन न होने की वजह सेमरीजों की संख्या बढ़कर 3720 हो गई है, जबकि अप्रैल में यहां सिर्फ 59 संक्रमित थे।

मुंबई में मिशन जीरो, घर-घर स्क्रीनिंग
मुंबई नगर पालिका के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने कर्मचारियों को ‘मिशन जीरो’ लक्ष्य दिया है। इसके तहत घर-घर स्क्रीनिंग की जाएगी। इस मिशन के तहत डॉक्टर, नर्स और दवाइयों के साथ 50 मोबाइल डिस्पेंसरी वैन मुलुंड, भांडुप, अंधेरी, मलाड, बोरीवली, दहिसर और कांदिवली में जाकर लोगों की जांच करेंगे। चहल ने भास्कर को बताया कि पिछले सप्ताह मुंबई जिले में कोरोनाकी ग्रोथ रेट 1.88% रही है। जबकि रिकवरी रेट 50% है। यही वजह है कि अब ‘मिशन जीरो’ के तहत मुंबई को कोरोना मुक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।हालांकि वे बताते हैं कि मानसून की वजह से चुनौतियां बढ़ गई हैं।

मुंबई में अभी लोकल ट्रेनें 340 फेरे लगा रही हैं। इनसे रोजाना करीब 1 लाख 20 हजार लोग यात्रा कर रहे हैं।

लाइफलाइन के पहिए थमे, लेकिन 2786 बसें दौड़ रहीं
कोरोना ने मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों पर भी असर डाला है। मध्य रेलवे में कोरोना महामारी से पहले लोकल ट्रेनें तकरीबन 1774 फेरे लगाती थीं, जिनसे रोजाना 43 लाख यात्री सफर करते थे। लेकिन फिलहाल ये लोकल ट्रेनें सिर्फ 200 फेरे लगा रही हैं, जिनमें लगभग 70-80 हजार लोग सफर कर रहे हैं।

इसी तरह पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों के 1300 फेरे लगते थे, जिससे करीब 35 लाख लोग सफर करते थे। लेकिन इन दिनों 140 फेरे ही लगा रही हैं। इनमें 40-45 हजार लोग रोजाना सफर कर रहे हैं।

पहले जहां 1200 यात्री क्षमता वाले एक डिब्बे में 2000 लोग सफर करते थे, वहीं अब सोशलडिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सिर्फ 700 को ही सफर की इजाजत दी जा रही है। हालांकि, लोकल बसों पर अब कम असर देखने मिल रहाहै। मुंबई मनपा के बेडे में यूं तो साढ़े तीन हजार से अधिक बसें हैं। इनमें से 2786 बसें चल रही हैं। इनमें रोजाना लगभग ढ़ाई लाख लोग सफर कर रहे हैं। 9 जून से अब तक बेस्ट की बसों से कुल 7.78 लाख लोगों ने सफर किया हैजबकि मेट्रो अभी शुरू नहीं की गई है।

मुंबई की लोकल ट्रेनों में यात्री सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए यात्रा कर रहे हैं।

दुकानें, मॉल और सिनेमा हॉलको रोजाना 500 करोड़ का नुकसान
फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के विरेन शाह के मुताबिक, लॉकडाउन से अब तक मुंबई की दुकानें, मॉल और सिनेमा हॉलके बंद होने से रोजाना 500 करोड़ रुपए से ज्यादाका नुकसान होने का अनुमान है। जहां तक दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के खुलने का मामला हैतो शाह के मुताबिक, मुंबई की कुल साढ़े तीन लाख दुकानों में से महज 30% ही रोजाना खुल रही हैं। इन प्रतिष्ठानों में सोशल डिस्टेंसिंग का सख्त पालन हो रहा है।

मुंबई के झवेरी बाजार में कुल तीन हजार के करीब ज्वेलरी की दुकानें हैं, इनमें से इन दिनों एक हजार दुकानें ही खुल रही हैं। सरकारी ऑफिसों की बात करें, 25 से 50%कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि प्राइवेट दफ्तरों में यह संख्या 10-15% है।

मुंबई की कुल साढ़े तीन लाख दुकानों में से महज 30% ही रोजाना खुल रही हैं।

मायानगरी में बड़ी फिल्मों की शूटिंग नहीं
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) और सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा)के मुताबिक मायानगरी में इन दिनों बड़ी फिल्मों की शूटिंग नहीं हो रही। लॉकडाउन के दौरान एसोसिएशन ने 50 लाख काबीमा कवर, 8 घंटे की शिफ्ट और कर्मचारियों का भुगतान शूटिंग खत्म होते ही उसी दिन करने जैसी मांगें रखी थीं, जो अब तक पूरी नहीं हुई है। इसलिए दोनों एसोसिएशन मांगें पूरी होने तक शूटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे।

12 लाख प्रवासी घर गए, अब 15 हजार रोजाना लौट रहे हैं
महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिककोरोना और लॉकडाउन की वजह से मुंबई से करीब 12 लाख से अधिक लोगों ने पलायन किया था। इन दिनों मुंबई में रोजाना करीब 11 से 15 हजार प्रवासी मजदूरों की वापसी हो रही है। इसमें राज्य के अलग-अलग जिलों के मजदूरों के अलावा यूपी-बिहार के लोग भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार का अनुमान था कि मुंबई में मई के आखिरी सप्ताह में 75 हजार तक कोरोना के केस होंगे लेकिन मई में यह आंकड़ा 39 हजार 500 रहा और 22 जून को 67 हजार पार कर गया है। यानी मामले उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं। इसलिए अब मुंबई के अस्पतालों में पहले की तरह भीड़ नहीं दिख रही है।

इन दिनों मुंबई में रोजाना करीब 11 से 15 हजार प्रवासी मजदूरों की वापसी हो रही है।

मुंबई का मनपा अस्पताल जबरन कोरोना मरीजों को प्राइवेट अस्पताल भेज रहाहै। क्योंकि, प्राइवेट अस्पतालों में एक हजार नए बेड उपलब्ध होने की बात उन्हें दिखानी है। इन प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होने वाले सामान्य मरीजों से मनमाना बिल वसूला जा रहा है। इसके पीछे वजह है यह है किप्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ बेड चार्ज ही सरकार ने तय किया है। बड़े अस्पताल मनमाने ढंग से दूसरे चार्ज लगाकर औसतन एक मरीज का बिल 5 लाख रुपए तक रहे हैं। यहां 26 अस्पतालों के खिलाफ 134 शिकायतें आई हैं।



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