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2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का आज 89वां जन्मदिन है। देश के महान अर्थशास्त्रियों में से एक के रूप में पहचान रखने वाले मनमोहन सिंह का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के एक गांव में हुआ था।
डॉ. सिंह ने 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई ब्रिटेन के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से की। 1962 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डी.फिल किया। पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाया।
डॉ. सिंह ने वित्त मंत्रालय के सचिव; योजना आयोग के उपाध्यक्ष; भारतीय रिजर्व बैंक के अध्यक्ष; प्रधानमंत्री के सलाहकार; विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। 1991 से 1996 तक वित्तमंत्री रहे और उन्होंने आर्थिक सुधारों के लिए व्यापक स्तर पर नीति बनाई। 1987 में उन्हें भारत का दूसरा सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।
डॉ. सिंह 2004 से 2014 तक 10 साल 4 दिन प्रधानमंत्री रहे। देश में जवाहरलाल नेहरू (करीब 17 साल) और इंदिरा गांधी (करीब 11 साल) के बाद सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहे। नरेंद्र मोदी पिछले छह साल से इस पद पर हैं और इस समय वे सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहे नेताओं में सिंह के बाद चौथे नंबर पर आते हैं।
इतिहास में आज को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है...
1087: विलियम द्वितीय इंग्लैंड के सम्राट बने।
1777: अमेरिकी क्रांति: ब्रिटिश सैनिकों का फिलाडेल्फिया पर कब्जा।
1820: प्रसिद्ध भारतीय समाज सुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर का जन्म।
1872: न्यूयाॅर्क सिटी में पहला मंदिर बना।
1923: हिंदी फिल्म अभिनेता देवानंद का जन्म।
1932: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्म।
1950: संयुक्त राष्ट्र सैनिकों ने उत्तर कोरिया के सैनिकों से सोल को अपने कब्जे में लिया।
1950: इंडोनेशिया ने संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता ग्रहण की।
1959: जापान के इतिहास में सबसे शक्तिशाली तूफान ‘वेरा’ से 4580 लोगों की मौत और 16 लाख लोग बेघर हुए।
1960: अमेरिका में राष्ट्रपति पद के दो उम्मीदवारों जॉन एफ केनेडी और रिचर्ड निक्सन के बीच बहस का पहली बार टेलीविजन पर प्रसारण।
1984: ब्रिटेन, हांगकांग को चीन के हवाले करने के लिए सहमत हुआ।
1998: सचिन तेंदुलकर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ एकदिवसीय क्रिकेट मैच में 18वां शतक लगाकर डेसमंड हेन्स का विश्व रिकार्ड तोड़ा।
2009: फिलीपींस, चीन, वियतनाम, कंबोडिया, ला ओस और थाईलैंड में कैट्साना तूफान से 700 लोगों की मौत।
2014: मेक्सिको के इगुआला में 43 छात्रों का सामूहिक अपहरण।
2018: सुप्रीम कोर्ट ने 12 अंकों वाले आधार नंबर की वैधता को कायम रखा। लेकिन कहा कि बैंक अकाउंट्स, सेलफोन कनेक्शन और स्कूल एडमिशन के लिए इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
बिहार में चुनाव की तारीखें आ गई हैं। कोरोना की वजह से इस बार बड़ी-बड़ी रैलियां, रोड शो नहीं होंगे। ज्यादातर प्रचार वर्चुअल होगा। कोरोनाकाल में होने जा रहे इस चुनाव में सबसे खास बात भी यही है।राजनीतिक पार्टियों ने भी इस वर्चुअल प्रचार के लिए पूरी तरह तैयारी कर ली है।
2013 से भाजपा का चेहरा मोदी ही बन गए हैं और उनकी रैलियों में भीड़ भी बहुत आती थी। इतना ही नहीं, मोदी की रैलियों में आने वाली भीड़ वोटों में भी तब्दील होती थी। इस बार कोरोनावायरस की वजह से बड़ी-बड़ी रैलियां नहीं होंगी, इसलिए भाजपा ने वर्चुअल प्रचार की सबसे ज्यादा तैयारी की है। वर्चुअल प्रचार के लिए 70 हजार से ज्यादा एलईडी टीवी की भी व्यवस्था की गई है। हालांकि, भाजपा का कहना है कि ज्यादातर टीवी पार्टी के कार्यकर्ताओं के घर से आएंगी।
इस स्टोरी में समझते हैं कि वर्चुअल प्रचार में किस पार्टी की क्या है तैयारियां?
1. भाजपा : वॉट्सऐप ग्रुप बनाए, 60 हजार कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी
सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा और सहज इस्तेमाल भाजपा ही करती है। कहा भी जाता है कि 2014 का चुनाव भाजपा ने सोशल मीडिया पर लड़ा। बिहार में होने जा रहे इस चुनाव में भी भाजपा वर्चुअल प्रचार में फिलहाल तो सबसे आगे दिख रही है।
भाजपा ने पूरे बिहार में 150 प्रचार रथों को रवाना भी कर दिया है, जिनका काम गली, चौक-चौराहों पर नेताओं के भाषणों को सीधे लोगों तक पहुंचाना है।
भाजपा अब तक डेढ़ लाख वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए 4 करोड़ लोगों से सीधे जुड़ चुकी है। बूथ लेवल से लेकर शक्ति केंद्र, मंडल और स्टेट लेवल तक पार्टी ने 9.5 हजार आईटी प्रभारियों को काम पर लगा रखा है। इतना ही नहीं बूथ लेवल के 60 हजार कार्यकर्ताओं को वर्चुअल कैंपेन की ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है।
भाजपा आईटी सेल की मानें तो वर्चुअल मीटिंग में एक बार में 10 हजार कार्यकर्ताओं को साथ जोड़ा जा सकता है। इस मीटिंग में एक-दूसरे से दोतरफा बातचीत हो सकती है।
वर्चुअल ही नहीं, घर-घर जाकर भी हो रहा प्रचार
भाजपा सिर्फ वर्चुअल प्रचार ही नहीं, बल्कि घर-घर जाकर भी प्रचार कर रही है। पार्टी अब तक सभी 243 विधानसभा सीटों के प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ मीटिंग कर चुकी है।
बिहार में भाजपा कार्यकर्ता लगभग हर घर तक पहुंच चुके हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जनता से आशीर्वाद मांग रहे हैं। इस अभियान के तहत कार्यकर्ताओं को सभी विधानसभा सीटों में कम से कम 5 हजार घरों तक जाना था, जो लगभग पूरा हो चुका है।
भाजपा ने इस बार एक नई रणनीति भी बनाई है। इसके तहत पार्टी के हर कार्यकर्ता को विरोधी पार्टी के एक कार्यकर्ता को भाजपा में शामिल कराने का टारगेट दिया गया है।
2. जदयू : वॉट्सऐप से 31 लाख लोगों को जोड़ा, जदयू लाइव ऐप बनाई
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7 सितंबर को बिहार में वर्चुअल रैली कर चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी। जदयू ने वर्चुअल रैली से लोगों को जोड़ने के लिए जदयू लाइव ऐप भी बनाया है।
इसके साथ ही पार्टी ने अब तक 31 लाख लोगों को वॉट्सऐप पर जोड़ रखा है। हर रविवार को 'बिहार के नाम, नीतीश के काम' नाम से न्यूजलेटर भी वॉट्सऐप पर जारी होता है। पार्टी के मुताबिक, ऐप के जरिए भी 10 लाख लोगों को ऑनलाइन जोड़ा जा सकता है।
जदयू का दावा है कि हर विधानसभा में अब तक करीब 10 हजार कार्यकर्ताओं के मोबाइल नंबर का डेटा तैयार हो चुका है। इसके अलावा हर ब्लॉक में वर्चुअल सेंटर भी तैयार किए गए हैं, जहां से पार्टी के नेता वर्चुअल तरीके से लोगों से बात करेंगे।
पार्टी ने अपने तीन मंत्रियों अशोक चौधरी, संजय झा और नीरज कुमार को इस काम में लगाया है कि सोशल मीडिया पर लोगों को कैसे जोड़ा जाए? इन मंत्रियों को तीन-तीन प्रमंडल की जिम्मेदारी दी गई है। इनके पास फेसबुक, जूम और वॉट्सऐप ग्रुप बनाने का भी काम है।
3. राजदः वॉर रूम बनाया, जहां से नेता कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे
10 सर्कुलर रोड पर राजद ने अपना वॉर रूम बनाया है, जहां से तेजस्वी-तेजप्रताप से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी लगातार ट्विटर और फेसबुक के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे हैं।
फेसबुक लाइव के जरिए तेजस्वी लगातार बात कर रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, कार्यकर्ताओं को डिजिटल तकनीक की ट्रेनिंग भी दी गई है।
इसके अलावा प्रखंड, जिला और प्रदेश स्तर पर अलग-अलग वॉट्सऐप ग्रुप बनाए जा चुके हैं। इनके जरिए बिहार के 25 लाख वोटरों से जुड़ने का टारगेट रखा गया है।
4. कांग्रेसःडिजिटल मेंबरशिप से 5 लाख लोगों को जोड़ा
प्रदेश कांग्रेस की तरफ से भी वर्चुअल प्रचार की खासी तैयारियां हैं। पार्टी अब तक वर्चुअल तरीके से करीब 40 मीटिंग कर चुकी है, जिसे राष्ट्रीय नेताओं ने संबोधित किया है।
कांग्रेस 7 से लेकर 15 सितंबर के बीच बिहार की 88 विधानसभा सीटों पर महासम्मेलन भी कर चुकी है। साथ ही डिजिटल मेंबरशिप के जरिए करीब 5 लाख लोगों को जोड़ा गया है।
बाकी पार्टियांः किसी ने वॉट्सऐप ग्रुप बनाए, किसी ने आईटी टीम बैठाई
पिछले चुनाव में तीन सीटें जीतने वाली भाकपा (माले) ने भी करीब 50 हजार वॉट्सऐप ग्रुप बनाए हैं और इनके जरिए वोटरों तक अपनी बात पहुंचाने में लगी है।
वहीं, जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने तो दिल्ली की आईटी प्रोफेशनल टीम को वर्चुअल प्रचार के काम में लगा रखा है।
मोदी 6 वर्चुअल रैलियां कर चुके, तीन दर्जन और होंगी
7 जून को गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के 72 हजार बूथ कार्यकर्ताओं को वर्चुअल रैली के जरिए संबोधित किया था। 7 सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहली वर्चुअल रैली 'निश्चय संवाद' नाम से की थी। इसी दिन कांग्रेस ने भी एक रैली की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने 10 सितंबर को पहली वर्चुअल रैली कर बिहार को पूरी तरह से चुनावी मोड में ला दिया है। चुनाव तारीखों के ऐलान के पहले ही मोदी योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन के बहाने 6 वर्चुअल रैलियां कर चुके हैं।
माना जा रहा है कि इस चुनाव में मोदी करीब तीन दर्जन वर्चुअल रैलियां कर सकते हैं। वहीं, अमित शाह भी बड़ी संख्या में वर्चुअल रैलियों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा पार्टी ने हर विधानसभा के बड़े नेताओं को करीब 10 वर्चुअल रैलियां करने का टारगेट दिया है।
पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी ने 40 और अमित शाह ने 75 से ज्यादा रैलियां की थीं। वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बिहार में मोदी ने 9 और अमित शाह ने 18 रैलियों को संबोधित किया था।
धारावी...। यह नाम सुनते ही दिमाग में झुग्गी-झोपड़ियों की तस्वीर बनने लगती है। एशिया के सबसे बड़े इस स्लम में महज 2.5 स्क्वायर किलोमीटर में 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। अप्रैल में यहां कोरोना का ब्लास्ट हुआ था। लेकिन जून तक वायरस पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया था। इसलिए धारावी मॉडल की बहुत चर्चा हुई थी। अब एक बार फिर यहां कोरोना की दूसरी लहर आती दिख रही है। धारावी में कोरोना के मामले 3 हजार को क्रॉस कर चुके हैं। पिछले दस दिनों से तो हर दिन दो अंकों में मामले बढ़ रहे हैं। अभी 180 से ज्यादा एक्टिव केस हैं। ऐसे में हम धारावी पहुंचे और जाना कि कोरोना को रोकने वाला धारावी मॉडल क्या था, अब क्या हालात हैं और लोग कैसे अपना गुजर-बसर कर रहे हैं।
धारावी में पक्की झोपड़ियां हैं, जो ऊंचाई से ऐसी नजर आती हैं।
संकरी गलियां, छोटे-छोटे कमरे। कमरे में ही किचन और वहीं बर्तन साफ करने की एक जगह भी। एक घर में रहने वाले औसत पांच से सात लोग। कुछ-कुछ में बारह से पंद्रह। यहां सोशल डिस्टेंसिंग की बात करना बेमानी है, क्योंकि जगह इतनी कम है कि एक-दूसरे से दूरी बनाना मुमकिन ही नहीं। अधिकतर घरों में एक-एक कमरे ही हैं। साइज दस बाय दस फीट होगा। हालांकि, यहां की झुग्गियां कच्ची नहीं, पक्की हैं। गुरुवार सुबह 10 बजे जब हम यहां पहुंचे तो धारावी पहले की तरह नजर आई। बाजार खुले थे। लोग काम धंधे पर निकल रहे थे। मास्क गिने चुने चेहरों पर ही दिख रहा था। हैंड सैनिटाइजर जैसी चीज यहां शायद ही कोई इस्तेमाल करता हो। हां, लेकिन धारावी की गलियां साफ-सुथरी नजर आईं। यहां के लोगों में अब कोरोना का बिल्कुल डर नहीं है, क्योंकि बात पेट पर आ गई है। वे कहते हैं, कोरोना से नहीं मरेंगे तो मौत से मर जाएंगे इसलिए काम पर तो निकलना पड़ेगा। पिछले करीब एक हफ्ते से यहां हर रोज कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए जा रहे हैं।
कोई भाड़ा नहीं भर पा रहा तो किसी पर हजारों का कर्जा हो गया
खैर, धारावी की जमीनी हकीकत जानने के लिए हम अंदर गलियों में घुसे। पहली गली में घुसते ही सारोदेवी नजर आईं। एक छोटे से कमरे में वो भजिया तल रहीं थीं। इतने सारे समोसे, वड़ा, भजिया किसके लिए बना रही हैं? पूछने पर बोलीं, मेरा बेटा सायन हॉस्पिटल के बाहर बेचता है। पांच माह से काम बंद था। पंद्रह दिन पहले ही शुरू हुआ है। लॉकडाउन में गुजर बसर कैसे किया? इस पर बोलीं, फ्री वाला राशन बंटता था, वो ले लेते थे। कुछ राशन सरकार से भी मिला। कुछ सामान हमारे पास था। यह सब मिलाकर जैसे-तैसे दिन काटे हैं। धंधा बंद था इसलिए न भाड़ा दे पाए और न ही बिजली का किराया भरा। 25 हजार रुपए का कर्जा भी हो गया। अब काम शुरू हुआ है तो थोड़ा-थोड़ा करके चुकाएंगे। सारोदेवी के घर की अगली गली में अनीता मिलीं। उनका एक पैर काम नहीं करता। पति भी दिव्यांग हैं। दो बच्चे हैं, जिसमें से एक को मां-बाप वाली कमी आ गई। दूसरा बेटा ठीक है। दस बाय दस के कमरे में अनीता का पूरा परिवार रहता है। पति मिट्टी के बर्तन बनाने जाते हैं। उनका बेटा चिराग कहता है, पापा का माल बिकता है, तब ही घर में पैसा आता है। कमरे का भाड़ा तीन हजार रुपए महीना है, लेकिन चार-पांच महीने से भरा नहीं। मकान मालिक ने बोला है कि, जल्दी भाड़ा भरो नहीं तो कमरा खाली करना पड़ेगा।
ये सारो देवी हैं। कहती हैं-- लॉकडाउन में खाने-पीने के लाले पड़े गए थे। समोसा, भजिया, वड़ा बेचकर परिवार को पाल रही हैं।
धारावी के अधिकतर घरों में महिलाएं खाने पीने की चीजें तैयार करती हैं और उनके बेटे या पति ये सामान बाहर बेचते हैं। कीमत काफी कम होती है, इसलिए माल बिक जाता है। 10 रुपए में पांच इडली बेचने वाली मारिया ने सिर पर बड़ी तपेली रखती जाती दिखीं। हाथ में एक थैला था, जिसमें तीन डिब्बे रखे थे। वो इडली और वड़ा सांभर बेचने के लिए निकली थीं। हमने रोका तो मुस्कुराते हुए कहने लगीं कि मैंने लॉकडाउन में भी चोरी-छुपे इडली-वडा बेचे क्योंकि घर में कुछ खाने को था ही नहीं। पैसों की बहुत जरूरत थी इसलिए प्लास्टिक की थैलियों में इडली-वड़ा भरकर ले जाती थी और धारावी की गलियों में ही बेच आती थी।
मारिया महीने का 25 से 30 हजार रुपए कमा लेती हैं। इस पैसे से उन्हें सिर्फ घर ही नहीं चलाना होता बल्कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी करवानी होती है। धारावी में बड़ी संख्या में दक्षिण भारतीय भी रहते हैं जो इटली-सांभर और वड़ा-सांभर घर में तैयार कर बाहर बेचते हैं। इन्हीं संकरी गलियों में ढेरों स्मॉल स्केल बिजनेस भी चलते हैं। जैसे कोई परिवार मिट्टी के बर्तन बनाता है तो कोई जूते, बैग सिलता है। कपड़ों की छोटी-छोटी फैक्ट्रियां भी यहां हैं। जो पूरी तरह से मार्केट के खुलने पर ही डिपेंड हैं। वर्क फ्रॉम होम का इन लोगों के पास कोई आप्शन नहीं। जिंदगी का गुजर-बसर करने के लिए जरूरी है कि या तो इन लोगों के पास ग्राहक आएं या फिर ये लोग ग्राहकों तक जाएं। पिछले पंद्रह-बीस दिनों में सभी ने अपने धंधे शुरू कर दिए लेकिन पहले की तरह ग्राहक नहीं आ रहे।
मारिया केरल की रहने वाली हैं। इस तरह हर रोज सुबह 10 बजे काम पर निकल जाती हैं, घर आते-आते शाम हो जाती है।
आखिर धारावी का वो मॉडल क्या था, जिससे कोरोना कंट्रोल हुआ था? यह सवाल हमने धारावी में ही 26 साल से क्लीनिक चलाने वाले और कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. मनोज जैन से पूछा। वे बोले, धारावी में 1 अप्रैल को पहला केस आया था। इसके बाद यहां लोग कोरोना से कम और हार्ट अटैक से ज्यादा मर रहे थे क्योंकि बहुत घबरा गए थे। 7 अप्रैल से हमारी दस डॉक्टर्स की टीम ने काम शुरू किया। हमने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग शुरू की। जिन्हें भी फीवर आया, उन्हें बीएमसी के हवाले किया। बाद में डॉक्टर्स की संख्या बढ़कर 25 हो गई। फीवर क्लीनिक भी शुरू कर दिए गए। रोजाना हजारों लोगों की स्क्रीनिंग करते थे। जिन लोगों में लक्षण पाए जाते थे, उन्हें अलग कर इलाज के लिए भेजते थे। इनके सबके साथ में मास्क, हैंड सैनिटाइजर, सफाई और सोशल डिस्टैंसिंग के लिए भी लोगों को अवेयर किया। इसी का नतीजा हुआ था कि यहां कोरोना कंट्रोल में आ गया था। इसकी एक वजह बड़ी संख्या में लोगों का पलायन भी रही थी। यूपी, बिहार, केरल, मप्र के लोग यहां से अपने घर चले गए थे, इसलिए भीड़ कम हो गई थी।
नजमुन्निसा भी धारावी में रहती हैं। कहती हैं, पहले बच्चे एक-एक बिस्किट का पैकेट खाते थे, अब एक पैकेट में से ही तीन बच्चे खाते हैं। लॉकडाउन के पहले कुछ काम मिल जाया करता था, जो अब नहीं मिल पा रहा।
अब अचानक केस बढ़ने क्यों लगे? इस पर वे कहते हैं, जिन लोगों ने पलायन किया था, वो लौट रहे हैं। लोगों में कोरोना का डर भी कम हो गया। इसी कारण कोई नियमों को फॉलो नहीं कर रहा। स्क्रीनिंग भी अभी बंद है। धारावी में हर घर में वॉशरूम नहीं है। लोग सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। यह भी कोरोना फैलने की बड़ी वजह है। कम जगह में ज्यादा लोगों के रहने के चलते ही यहां के लोगों में स्किन डिजीज कॉमन हैं। वे साफ-सफाई से नहीं रहते। अब यदि समय रहते कोरोना रोकने के लिए यहां कदम नहीं उठाए गए तो फिर पहले जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। धारावी वॉर्ड 188 के वार्ड अध्यक्ष विल्सन नंदेपाल कहते हैं, यहां के बहुत सारे लोग दूसरे क्षेत्रों में मजदूरी करने जाते हैं, लेकिन लोकल बंद होने के चलते वे जा नहीं पा रहे। आवक-जावक पूरी तरह बंद है। यदि जल्द ही सरकार ने मदद नहीं की तो हालात बेकाबू हो जाएंगे।
मर्द की एक बार फिर हार हुई है। औरत एक बार फिर निशाने पर है। विराट कोहली ने आईपीएल के मैदान में किंग्स इलेवन पंजाब के हाथों मार खाई है। एक रन बनाकर आउट हो गए हैं। लेकिन इस हार का ठीकरा एक बार फिर फूटा है उनकी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के सिर पर। वैसे ही जैसे पहले भी होता रहा है। जब-जब विराट का खेल खराब हुआ, ट्रोलर्स ने अनुष्का का खेल खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
हालांकि इसका उल्टा भी कभी हुआ हो याद नहीं आता कि विराट की जीत का सेहरा किसी ने अनुष्का के सिर बांधा हो। ये कहानी शुरू से शुरू करते हैं, वहां से नहीं, जहां ट्रोल्स और सुनील गावस्कर की कहानी खत्म होती है, वहां से जहां से उनकी शुरू ही नहीं होती।
नवंबर, 2014. इंडिया-श्रीलंका वन डे इंटरनेशनल
विराट कोहली का तीसरा वन डे इंटरनेशनल मैच था श्रीलंका के खिलाफ। इस मैच में पूरा हुआ उनका 32वां अर्द्धशतक और वन डे इंटरनेशनल में 6000 रनों का विश्व रिकॉर्ड। इसके पहले ये रिकॉर्ड हाशिम अमला के नाम था। कोहली के अर्द्ध शतक से भारत को मैच में जीत हासिल हुई। अनुष्का शर्मा उस दिन मैच के दौरान वहीं मौजूद थीं। ट्रोलर्स चुप थे, कमेंटेटर बोल रहे थे, लेकिन अनुष्का के बारे में नहीं।
कोहली ने 2008 में अपने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शुरुआत की और 2011 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। वनडे में 43 और टेस्ट में 27 शतक लगा चुके हैं।
दिसंबर, 2014. इंडिया-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट मैच, मेलबर्न
विराट कोहली ने अपने इस तीसरे टेस्ट मैच में नौवीं सेंचुरी पूरी की और नाबाद 169 रनों का रिकॉर्ड बनाया। ये उनका अब तक का सबसे ज्यादा रनों का रिकॉर्ड है। अनुष्का शर्मा उस दिन भी क्रिकेट स्टेडियम में मौजूद थीं। ट्रोलर्स चुप थे, कमेंटेटर बोल रहे थे, लेकिन अनुष्का के बारे में नहीं।
अप्रैल, 2015. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर-सनराइज हैदराबाद का मैच, बैंगलोर
विराट कोहली ने 37 गेंदों पर 41 रन सोंटे, चार चौके, छह छक्के। हर छक्के पर स्टेडियम में शोर, कमेंटेटर की वाह-वाह। अनुष्का शर्मा एक बार फिर स्टेडियम में मौजूद, ट्रोलर खामोश।
क्या ये अनायास है। महज एक संयोग। जितनी बार विराट कोहली के बल्ले से लगी गेंद उछलकर आसमान तक चली जाती है, आसमान से रनों और रिकॉर्डों की बरसात होती है, क्रिकेट का दीवाना देश जीत के उत्साह में डूबा होता है, अनुष्का का ट्विटर पर कोई नाम भी नहीं लेता। न स्टेडियम में कमेंट्री करने वाले अनुष्का का नाम लेते सुने जाते हैं।
लेकिन इस गुजरे गुरुवार को तो मानो इंतहा ही हो गई। इस बार अनुष्का पर निशाना साधने वाले ट्रोलर्स नहीं थे। महान क्रिकेट सुनील गावस्कर थे। मैच चल रहा था, वो माइक हाथों में लिए कमेंट्री कर रहे थे। विराट की बल्लेबाजी का जादू चला नहीं तो हिंदी में बोले, "इन्होंने लॉकडाउन में सिर्फ अनुष्का की गेंदों पर प्रैक्टिस की है।"
सुनील गावस्कर के लिए लाइव कमेंट्री का ये कोई पहला मौका नहीं था। न पहली बार उन्होंने किसी के खेल को तीखी नजर से देखा था। लेकिन उस दिन ये पहली ही बार हुआ कि किसी के खेल को कमजोर बताने के लिए वो उसकी पत्नी को बीच में खींच लाए। इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी के निजी जीवन, निजी रिश्ते को, उसकी पत्नी को भरे मैदान में जिम्मेदार ठहराया गया हो उसके खराब प्रदर्शन के लिए।
अनुष्का ने भी पलटकर जवाब दिया है, जैसा कि वो हमेशा करती हैं। जैसा हर उस स्त्री को करना चाहिए, जिसके पास अपना दिमाग है, अपनी सोच है, अपना काम है, उस काम के प्रति अपनी जिम्मेदारी है। वो कहती हैं, "ये तो सच है कि आपका कमेंट अच्छा नहीं था, लेकिन मैं जानना चाहूंगी कि आपके दिमाग में किसी के खराब के प्रदर्शन का दोष उसकी पत्नी के सिर मढ़ने का ख्याल कैसे आया। निश्चित ही इतने सालों से आपने हर खिलाड़ी के खेल पर टिप्पणी करते हुए उसके निजी जीवन का सम्मान किया है।
आपको नहीं लगता है कि उतना ही सम्मान मुझे और हमें भी मिलना चाहिए। निश्चित ही आपके पास और बहुत से शब्द और वाक्य रहे होंगे मेरे पति के खेल पर टिप्पणी करने के लिए या आपके शब्द तभी प्रासंगिक होंगे जब उसमें मेरा नाम आए। ये साल 2020 है और अब भी मेरे लिए चीजें बदली नहीं हैं। कब आप लोग क्रिकेट में मेरा नाम घसीटना और मुझ पर जहर बुझी टिप्पणियां करना बंद करेंगे। आप लीजेंड हैं, मैं आपका बहुत सम्मान करती हूं। मैं बस वो कहना चाहती थी जो आपकी बात सुनकर मुझे महसूस हुआ। "
क्या ये पढ़कर आपको भी महसूस हो रहा है कि जो कहा गया, वो ठीक नहीं था, वो अनायास भी नहीं था। वो इसलिए था कि मर्द स्त्रियों से द्वेष रखते हैं और ऐसा वो सोच-समझकर नहीं करते। वो करते हैं क्योंकि वो ऐसे ही हैं। उनके अवचेतन में कहीं बैठा है ये विश्वास कि वो श्रेष्ठ हैं। वो सब सही करते हैं जो भी अच्छा है, सब उनका है और जो भी गलत है, जो भी खराब, वो किसी औरत की वजह से है।
मर्द ये हमेशा से करते रहे हैं. 2020 में भी कर रहे हैं. औरतें हमेशा से जवाब नहीं देती थीं. 2020 में दे रही हैं.
अनुष्का पर भी ये हमला कोई पहली बार नहीं हुआ है। जब से हिंदुस्तानियों पर यह राज खुला कि अनुष्का और विराट के बीच कुछ है, विराट की हर नाकामी, हर असफलता का ठीकरा अनुष्का के सिर फोड़ा जाने लगा। विराट एक मैच हारते तो ट्विटर पर ट्रोल्स की बाढ़ आ जाती, कोई कहता अनुष्का मनहूस है, कोई कहता उसकी काली नजर लग गई, कोई क्रिकेट बोर्ड से गुजारिश करता कि अनुष्का की स्टेडियम में इंट्री बैन कर दो, कोई भगवान से खैर मनाता कि इस डायन से विराट का पीछा छूटे। बीच में एक बार ऐसा हुआ भी।
खबरें आईं कि दोनों का ब्रेकअप हो गया है, उसी समय विराट ने मैदान में धुंआधार रनों की पारी खेल डाली। ट्विटर फिर बौरा गया और लगा इस जीत का सेहरा उनके ब्रेकअप के सिर बांधने। ये पहली बार था कि क्रिकेट का दीवाना बौराया देश किसी सेलिब्रिटी के ब्रेकअप का सोशल मीडिया पर ऐसे जश्न मना रहा था। वरना तो ये लोग उनके दिल टूटने पर भी अपना दिल थामकर बैठ जाया करते थे।
सुनील गावस्कर ने बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा पर एक टिप्पणी की थी। गावस्कर ने कहा था, लगता है कि जैसे कोहली ने लॉकडाइन में बस अनुष्का की गेंदों का ही सामना किया है।
लेकिन आपने कभी सोचा है कि इस सारी आलोचना की वजह सिर्फ अनुष्का का स्त्री होना है या एक ऐसी स्त्री होना, जिसकी पहचान सिर्फ इतनी नहीं है कि वो "मिसेज विराट कोहली" है क्योंकि ऐसा तो कभी नहीं हुआ कि महेंद्र सिंह धोनी हारा हो और गालियां उनकी पत्नी साक्षी को पड़ी हों। ये गालियां अनुष्का को ही क्यों दी जा रही हैं?
क्योंकि उसकी पहचान सिर्फ मिसेज विराट कोहली की नहीं है, उसने अपने काम से, अपने अभिनय से, अपनी मेहनत से दुनिया में अपनी जगह बनाई है। और सिर्फ अभिनय ही नहीं, बतौर प्रोड्यूसर भी यह साबित किया है कि उसे सिनेमा की समझ है, वो अच्छी कहानी को पहचानना जानती है। नई प्रतिभाओं को मौका दे सकती है, उन्हें सहेज सकती है। पाताल लोक, बुलबुल, एनएच10 जैसी कहानियों के साथ जिसका नाम जुड़ा हो, वो स्त्री सिर्फ शरीर नहीं है. वो दिमाग, तर्क, बुद्धि, समझ, संवेदना भी है।
और मर्दों को दिक्कत इसी बात से है। उन्हें स्त्री से दिक्कत नहीं है, उन्हें बोलती हुई, सोचती हुई, समझती हुई, काम करती हुई, लड़ती हुई, जीतती हुई, आगे बढ़ती हुई स्त्री से दिक्कत है। अनुष्का सिर्फ मिसेज कोहली होतीं तो लोग बस उसकी सुंदर तस्वीरों को देखकर आहें भरते। उसका मजाक नहीं उड़ाते, न उस पर जहरबुझी टिप्पणियां करते।
और क्या अनुष्का अकेली ऐसी स्त्री है, जो हर वक्त इसलिए निशाने पर है कि उसके पास दिमाग है?
याद है हिलेरी क्लिंटन, जब सिर्फ बिल क्लिंटन की पत्नी थीं तो बेचारी भी थी, दुखियारी भी। लोगों की संवेदना भी रही उनके साथ जब पति का किसी और के साथ अफेयर हुआ। लेकिन जब उनकी पहचान सिर्फ मिसेज क्लिंटन की नहीं रही, वो ओबामा की सरकार में सीनेट में रहीं, राष्ट्रपति पद की दावेदार हुईं तो विपक्ष, मीडिया और सोशल मीडिया ने बिल क्लिंटन की सारी कारस्तानियां उनके सिर मढ़ दीं, जो औरत पति को न संभाल सकी, वो देश क्या संभालेगी।
अभिनेत्री गुल पनाग के पति ने कश्मीर पर टिप्पणी की तो ट्रोलर्स लगे गुल पनाग ऐसी-तैसी करने। गुल की छवि भी तो बोलने वाली औरत की है। हालांकि मर्द कभी निशाने पर नहीं होते, चाहे बोलने वाले हों या न बोलने वाले।
कभी सुना ऐसा कि अनुष्का की फिल्म पिट गई हो और ट्विटर पर विराट कोहली गाली खा रहे हों। हिलेरी चुनाव हार गई हों और जनता ने बिल क्लिंटन का बायकॉट कर दिया हो। अभी जब ड्रग्स मामले में दीपिका पादुकोण निशाने पर हैं तो रणवीर का कहीं नाम नहीं। लोगों को अनुराग कश्यप से चिढ़ है तो नफरत उनकी बेटी आलिया पर निकालते हैं, इसका उल्टा नहीं होता।
दोनों ही बातें नहीं होतीं।
विराट जीते तो क्रेडिट अनुष्का को नहीं मिलता। अनुष्का हारे तो जिम्मेदारी विराट की नहीं होती औरत हर बुरे के लिए जिम्मेदार है। अच्छा कुछ भी उसके हिस्से में नहीं, मर्द हर अच्छे का हकदार खुद है, बुरा कुछ भी उसकी जिम्मेदारी नहीं और औरतें भी सब नहीं। सिर्फ वो जो दुनिया में अपने नाम से जानी जाती हैं और मुंह में जबान रखती हैं।
क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार ने आखिरकार कोरोना काल में सभी नागरिकों को 7500 रुपए की राहत राशि देने का ऐलान कर दिया है। मैसेज का साथ एक लिंक भी है। दावा है कि इस पर क्लिक करके ही इस राशि का लाभ लिया जा सकता है।
@PMOIndia@aajtak@LambaAlka@ndtvindia *The Government* has finally approved and have started giving out free _Rs.7,500_ Relief Funds to each citizen😍
Below is how to claim and get yours credit Instantly as I have just did nowhttps://t.co/MjhDBE2egU
आमतौर पर सरकारी वेबसाइट के यूआरएल के आखिर में gov.in लिखा होता है। लेकिन, वायरल हो रही लिंक में ऐसा नहीं है। इसी से लिंक की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है।
अलग-अलग कीवर्ड सर्च करने से भी इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली। जिससे पुष्टि होती हो कि भारत सरकार ने 7500 रुपए हर नागरिक को देने की घोषणा की है।
वायरल हो रही लिंक पर क्लिक करने से ये पेज खुलता है। जहां से यूजर से उसकी नागरिकता के बारे में पूछा जाता है। इस सवाल का जवाब देने के बाद एक के बाद एक कई पेज खुलेंगे, जहां आपको सवालों के जवाबों पर क्लिक करना होगा। ये सवाल आपके खान - पान, हॉबी, जरूरतों से जुड़े होंगे।
कुछ सवालों के जवाब देने के बाद वेबसाइट पर ये पेज खुलेगा और आपसे कहा जाएगा कि इस लिंक को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। यकीन मानिए शेयर करने के बाद भी आपके खाते में कोई राशि नहीं आएगी। क्योंकि फैक्ट चेक टीम ने पाठकों तक सच पहुंचाने के लिए ये पूरा प्रोसेस फॉलो किया है।
तीन महीने पहले केंद्र सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ही इस दावे को फेक बताया जा चुका है।
Claim- A whatsapp viral message claims to offer free Rs 7500 relief fund to each citizen.#PIBFactcheck: #Fake. The fraud link given is a Clickbait. Beware of such Fraudulent websites and whatsapp forwards. pic.twitter.com/qvaeDODsWk
वायरल हो रही लिंक कहां से आई है और इसे क्यों फॉरवर्ड किया जा रहा है ? इसका पता लगाने के लिए हमने साइबर एक्सपर्ट अविनाश जैन को यह मैसेज फॉरवर्ड किया। एक्सपर्ट की पड़ताल में सामने आया कि, वायरल हो रही लिंक फिशिंग डोमेन है। ये डोमेन रूस के सर्वर पर रजिस्टर्ड है। जो सवाल पूछे जा रहे हैं, उसके जरिए रूस का ये सर्वर हिंदुस्तान के यूजर्स का डेटा कलेक्ट कर रहा है।
from Dainik Bhaskar /no-fake-news/news/is-the-modi-government-going-to-give-a-relief-fund-of-7500-rupees-to-all-citizens-in-the-corona-era-3-month-old-fake-message-is-going-viral-again-127752385.html
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यूएई में चल रहे आईपीएल और बॉलीवुड में चल रहे विवादों के बीच शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया। चलिए शुरू करते हैं आज का मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...
आज इन 5 इवेंट्स पर नजर रहेगी 1. ड्रग्स केस में दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर और सारा अली खान से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पूछताछ करेगा। 2. IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच अबु धाबी में मुकाबला होगा। टॉस शाम 7 बजे होगा। मैच साढ़े सात बजे से शुरू होगा। 3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधित करेंगे। 4. मोदी और श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के बीच वर्चुअल बाइलैटरल समिट हाेगी। 5. मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान किसान कल्याण योजना की शुरुआत करेंगे।
अब कल की 6 महत्वपूर्ण खबरें
1. बिहार में 3 फेज में चुनाव
बिहार की 243 सीटों पर तीन फेज में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को वोटिंग होगी। मंगलवार 10 नवंबर को नतीजे आएंगे। इस बार बिहार में 7.29 करोड़ वोटर हैं। वोटिंग सुबह 7 से शाम 5 की बजाय शाम 6 बजे तक होगी। कोरोना की वजह से चुनाव में 46 लाख मास्क, 7.6 लाख फेस शील्ड, 23 लाख जोड़े हैंड ग्लव्स और 6 लाख पीपीई किट्स का इस्तेमाल होगा। मध्यप्रदेश की 28 विधानसभा सीटों समेत 56 सीटों पर उपचुनाव का फैसला 29 सितंबर को हो सकता है। -पढ़ें पूरी खबर
2. बालासुब्रमण्यम नहीं रहे
गायक एसपी बालासुब्रमण्यम का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 74 साल के थे और कोरोना से जूझ रहे थे। वे 5 अगस्त को हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे। बीते 48 घंटों से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित बालासुब्रमण्यम ने 6 भाषाओं में 40 हजार से ज्यादा गाने गाए। सागर, एक-दूजे के लिए, साजन, मैंने प्यार किया और हम आपके हैं जैसी फिल्मों में उनके गाए गाने हिट हुए। -पढ़ें पूरी खबर
3. देशभर में किसानों का प्रदर्शन
हाल ही में संसद से पास हुए किसान बिल के विरोध में देशभर में शुक्रवार को किसानों ने प्रदर्शन किया। पंजाब और हरियाणा में बंद का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। किसान सुबह से सड़कों और रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। जगह-जगह चक्काजाम किया। दिल्ली बॉर्डर और पश्चिमी यूपी में किसान प्रदर्शन के लिए सड़कों पर तो निकले लेकिन बंद का मिलाजुला असर रहा। -पढ़ें पूरी खबर
4. ट्रोल हुए गावस्कर
लॉकडाउन के दौरान विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का एक वीडियो सामने आया था। इसमें अनुष्का बॉलिंग कर रही थीं और विराट बैटिंग कर रहे थे। गुरुवार रात IPL मैच में कमेंट्री के दौरान सुनील गावस्कर ने इसी बारे में एक टिप्पणी की और फिर सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हुए। अनुष्का का भी कमेंट आया कि क्या इसमें मेरा नाम जोड़ना जरूरी था? ये घटिया बयानबाजी कब बंद होगी। -पढ़ें पूरी खबर
5. वोडाफोन ने 20 हजार करोड़ का केस जीता
टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन ने 20 हजार करोड़ रुपए के टैक्स विवाद के मामले में सरकार से केस जीत लिया है। कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि उसे सिंगापुर स्थित एक इंटरनेशनल कोर्ट में 12 हजार करोड़ रुपए के बकाए और 7,900 करोड़ रुपए के जुर्माने के मामले में भारत सरकार के खिलाफ जीत मिली है। यह विवाद लाइसेंस फीस और एयरवेव्स के इस्तेमाल पर रेट्रोएक्टिव टैक्स क्लेम को लेकर शुरू हुआ था। -पढ़ें पूरी खबर
6. जिस ग्रुप में ड्रग्स चैट हुई, उसकी एडमिन निकलीं दीपिका
2017 के जिस वॉट्सऐप ग्रुप में दीपिका पादुकोण ने ‘हैश’ (हशीश) और ‘माल है क्या?’ जैसी लाइन लिखी थी, उस ग्रुप की वह खुद एडमिन थीं। भास्कर को सूत्रों ने बताया कि दीपिका के अलावा उनकी मैनेजर करिश्मा प्रकाश और रिया चक्रवर्ती की मैनेजर रहीं जया साहा भी इसकी एडमिन थीं। कुछ महीने पहले ही यह ग्रुप डिलीट किया गया। -पढ़ें पूरी खबर
अब 26 सितंबर का इतिहास...
1820: समाज सुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर का जन्म।
1888: अंग्रेजी के साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार सम्मानित टीएस इलियट का जन्म।
1923: अभिनेता देवानंद का जन्म।
2018: सुप्रीम कोर्ट ने 12 अंकों वाले आधार नंबर की वैधता को कायम रखा।
...और आखिर में जिक्र नेहरू-इंदिरा के बाद सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का, जिनका 1932 में आज ही के दिन जन्म हुआ। वे आज 88 साल के हो गए।
from Dainik Bhaskar /national/news/deepika-sara-shradha-questioned-today-in-a-drugs-case-pm-modi-address-unga-today-election-in-bihar-before-diwali-127754662.html
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2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का आज 89वां जन्मदिन है। देश के महान अर्थशास्त्रियों में से एक के रूप में पहचान रखने वाले मनमोहन सिंह का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के एक गांव में हुआ था।
डॉ. सिंह ने 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई ब्रिटेन के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से की। 1962 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डी.फिल किया। पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाया।
डॉ. सिंह ने वित्त मंत्रालय के सचिव; योजना आयोग के उपाध्यक्ष; भारतीय रिजर्व बैंक के अध्यक्ष; प्रधानमंत्री के सलाहकार; विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। 1991 से 1996 तक वित्तमंत्री रहे और उन्होंने आर्थिक सुधारों के लिए व्यापक स्तर पर नीति बनाई। 1987 में उन्हें भारत का दूसरा सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।
डॉ. सिंह 2004 से 2014 तक 10 साल 4 दिन प्रधानमंत्री रहे। देश में जवाहरलाल नेहरू (करीब 17 साल) और इंदिरा गांधी (करीब 11 साल) के बाद सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहे। नरेंद्र मोदी पिछले छह साल से इस पद पर हैं और इस समय वे सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहे नेताओं में सिंह के बाद चौथे नंबर पर आते हैं।
इतिहास में आज को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है...
1087: विलियम द्वितीय इंग्लैंड के सम्राट बने।
1777: अमेरिकी क्रांति: ब्रिटिश सैनिकों का फिलाडेल्फिया पर कब्जा।
1820: प्रसिद्ध भारतीय समाज सुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर का जन्म।
1872: न्यूयाॅर्क सिटी में पहला मंदिर बना।
1923: हिंदी फिल्म अभिनेता देवानंद का जन्म।
1932: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्म।
1950: संयुक्त राष्ट्र सैनिकों ने उत्तर कोरिया के सैनिकों से सोल को अपने कब्जे में लिया।
1950: इंडोनेशिया ने संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता ग्रहण की।
1959: जापान के इतिहास में सबसे शक्तिशाली तूफान ‘वेरा’ से 4580 लोगों की मौत और 16 लाख लोग बेघर हुए।
1960: अमेरिका में राष्ट्रपति पद के दो उम्मीदवारों जॉन एफ केनेडी और रिचर्ड निक्सन के बीच बहस का पहली बार टेलीविजन पर प्रसारण।
1984: ब्रिटेन, हांगकांग को चीन के हवाले करने के लिए सहमत हुआ।
1998: सचिन तेंदुलकर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ एकदिवसीय क्रिकेट मैच में 18वां शतक लगाकर डेसमंड हेन्स का विश्व रिकार्ड तोड़ा।
2009: फिलीपींस, चीन, वियतनाम, कंबोडिया, ला ओस और थाईलैंड में कैट्साना तूफान से 700 लोगों की मौत।
2014: मेक्सिको के इगुआला में 43 छात्रों का सामूहिक अपहरण।
2018: सुप्रीम कोर्ट ने 12 अंकों वाले आधार नंबर की वैधता को कायम रखा। लेकिन कहा कि बैंक अकाउंट्स, सेलफोन कनेक्शन और स्कूल एडमिशन के लिए इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
from Dainik Bhaskar /national/news/today-history-september-26th-manmohan-singh-birthday-sachin-tendulkar-equals-desmond-haynes-17-odi-centuries-devanand-birthday-127754661.html
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जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग जिले के सिरहामा में गुरुवार सुबह दो आतंकी मारे गए। दोनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। यहां उनकी सुरक्षाबलों के साथ बुधवार से एनकाउंटर चल रही है। उनके पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार बरामद किए गए हैं। इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
एक दिन पहले पुलवामा में एक आतंकी मारा गया था
इससे पहले गुरुवार को पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया था। मुठभेड़ त्राल क्षेत्र के मगहमा में हुई थी। उधर, बडगाम जिले में सीआरपीएफ पार्टी पर आतंकी हमले में एक जवान शहीद हुआ था।
अगस्त और में कश्मीर में मुठभेड़ में मारे गए दहशतगर्द
17 सितंबर को श्रीनगर के बटमालू में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 3 आतंकी मारे गए थे।
29 अगस्त को पुलवामा के जदूरा इलाके में सुरक्षाबलों ने शनिवार तड़के तीन आतंकियों को मार गिराया। सेना का एक जवान शहीद हो गया।
28 अगस्त को शोपियां के किलूरा इलाके में सुरक्षाबलों ने चार आतंकियों को मार गिराया। एक को गिरफ्तार किया गया। ये अल बद्र आतंकी संगठन से जुड़े थे।
19 अगस्त को दक्षिण कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच दो मुठभेड़ हुई थीं। इस दौरान एक आतंकवादी मारा गया था। इसी दिन हंदवाड़ा के गनीपोरा में दो आतंकी मारे गए थे।
17 और 18 अगस्त को बारामूला के करीरी इलाके में मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान 3 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था। इनमें लश्कर के दो कमांडर सज्जाद उर्फ हैदर और उस्मान शामिल थे। हैदर बांदीपोरा हत्याओं का मुख्य साजिशकर्ता था। वह युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती करता था। विदेशी आतंकी उस्मान ने भाजपा नेता वसीम बारी, उसके पिता और भाई की हत्या की थी।
‘सरकार किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाना चाहती है और बिचौलियों को खत्म करने के लिए ही नए कानून बनाए गए हैं।’ अखबार में छपी इन पंक्तियों को पढ़ते हुए राकेश कुमार गुस्से से भर जाते हैं और अखबार एक तरफ पटक देते हैं। उन्हें गुस्सा इसलिए आया, क्योंकि जिन बिचौलियों को खत्म करने की बात अखबार में लिखी गई है, वे उन्हीं कथित बिचौलियों में से एक हैं।’
60 साल के राकेश कुमार एक आढ़ती हैं और यही उनका पुश्तैनी काम है। पंजाब के मानसा जिले की पुरानी मंडी में करीब 70 साल पहले उनके दादा ने आढ़त का काम शुरू किया था। आज उनके आप-पास के करीब 300 किसान जुड़े हुए हैं जिनका पूरा बही-खाता उनके पास दर्ज है।
राकेश कहते हैं, ‘किसानों और आढ़तियों का रिश्ता दशकों पुराना है। उनके बिना हमारा गुजारा नहीं हो सकता और हमारे बिना उनका गुजारा नहीं है। दोनों दीया और बाती की तरह हैं जो एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। ये भाजपा सरकार आज हमें बिचौलिया बताकर खत्म करने की बात कर रही है, लेकिन यही लोग जब विपक्ष में थे तो इनकी बड़ी नेता सुषमा स्वराज ने संसद में हमारे और किसानों के रिश्ते की जम कर तारीफ की थी।’
भारत में 86 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से भी कम जमीन है। ऐसे में छोटे किसानों को चिंता है कि आढ़ती कमजोर होंगे तो वह पूरी व्यवस्था कमजोर हो जाएगी जिससे उनका काम पीढ़ियों से चला आ रहा है।
दिवंगत भाजपा नेता सुषमा स्वराज के जिस बयान की बात राकेश कर रहे हैं, वह इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। 2012 में विदेशी पूंजी निवेश का विरोध करते हुए सुषमा स्वराज ने लोक सभा में कहा था, ‘ग्रामीण अर्थव्यवस्था कहती है कि बैंकों के एटीएम तो आज आए हैं, आढ़ती किसान का पारंपरिक एटीएम है।
किसान को बेटी की शादी करनी हो, बुआ का भात भरना हो, बहन का छुछक देना हो, बच्चे की पढ़ाई करानी हो, बाप की दवाई करानी हो, किसान सिर पे साफा बांधता है और सीधा मंडी में आढ़ती के यहां जाकर खड़ा हो जाता है। मैं पूछना चाहती हूं क्या वॉलमार्ट और टेस्को उसे (किसान को) उधार देगा? क्या उसे संवेदना होगी बेटी की शादी या बहन का भात भरने की?
उसे तो धोती और साफे वाले किसान से बदबू आएगी। कौन किसान से सीधा खरीदेगा? अरे नई एजेंसियां खड़ी होंगी, नए बिचौलिये खड़े हो जाएंगे। इसलिए ये कहना कि बिचौलिये को आप समाप्त कर देंगे, ये बात सिरे से गलत है।’ सुषमा स्वराज की कही यही बातें आज उन भाजपा नेताओं के लिए मुश्किल खड़ी कर रही हैं जो दावा कर रहे हैं कि नए कानून लागू होने से बिचौलिये खत्म हो जाएंगे।
मानसा आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनीश बब्बू दानेवालिया कहते हैं, ‘सबसे पहले तो हमें बिचौलिया शब्द से ही आपत्ति है। अगर हम बिचौलिये हैं तो ये तमाम पेट्रोल पंप वाले क्या हैं जो कमिशन पर काम करते हैं। ये सभी गैस एजेंसी वाले क्या बिचौलिये नहीं हैं? इनकी ही तरह हमारा काम भी कमिशन एजेंट का है। बल्कि आढ़त का काम तो इनसे कहीं ज्यादा पुराना और पारंपरिक है।’
आढ़त की व्यवस्था देश के कई राज्यों में है, लेकिन इसका सबसे मजबूत स्वरूप हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में देखा जा सकता है। इन राज्यों में किसान लगभग पूरी तरह से ही आढ़तियों पर निर्भर होते हैं। यहां किसानों की सारी उपज आढ़तियों से होकर ही बिकती है और किसानों का सारा खर्च भी आढ़तियों से लिए गए पैसे से चलता है।
किसान की जमीन के आधार पर आढ़ती उन्हें पैसा देते हैं। पंजाब की बात करें तो यहां औसतन एक किले (एकड़) जमीन पर किसान को आढ़ती से पचास हजार तक की रकम मिलती है। इसी रकम से फिर किसान खेती की लागत में पैसा लगाता है और अपने बाकी खर्चे चलाता है। छह महीने बाद जब फसल तैयार होती है तो किसान फसल लेकर आढ़ती के पास आता है जिसे बेचकर आढ़ती अपना पैसा वसूलता है और फिर अगली फसल के लिए किसान को पैसा देता है।
यही कारण है कि अनाज की सारी बिक्री आढ़तियों के जरिए ही होती है। अनाज मंडियों में आढ़तियों की दुकान होती हैं जहां से कोई भी सरकारी या गैर-सरकारी एजेंसी फसल खरीदती हैं। इस खरीद पर एजेंसियों को टैक्स भी चुकाना होता है। ये टैक्स हर राज्य में अलग-अलग है। पंजाब में यह टैक्स साढ़े आठ फीसदी है, जिसमें से तीन फीसदी रुरल डेवलपमेंट टैक्स है, तीन फीसदी मार्केट सेस और ढाई फीसदी आढ़तियों का कमीशन।
अनाज मंडियों में आढ़तियों की दुकान होती हैं जहां से कोई भी सरकारी या गैर-सरकारी एजेंसी फसल खरीदती है। इस खरीद पर एजेंसियों को टैक्स भी चुकाना होता है। ये टैक्स हर राज्य में अलग-अलग है।
इसी पूरे कमीशन को खत्म करने की बात अब नए कानून में कही जा रही है। नई व्यवस्था में प्रावधान है कि आगे से फसल की खरीद मंडी से बाहर भी की जा सकेगी और बाहर होने वाली खरीद पर खरीददार को कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। ऐसे में आढ़तियों का डर वाजिब है कि अगर मंडी से बाहर बिना किसी टैक्स के खरीद का विकल्प होगा तो कोई भी व्यक्ति मंडी में टैक्स चुकाकर क्यों खरीदने आएगा। लिहाजा मंडी व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी और इसके साथ ही आढ़ती और उनसे जुड़े लाखों लोगों का काम-धंधा हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।
ये डर सिर्फ आढ़तियों को ही नहीं बल्कि किसानों को भी है। मानसा के किसान बीरबल सिंह कहते हैं, ‘आढ़तियों के बिना हमारा गुजारा भी नहीं है। एक बार तो हम अपनी फसल बेच कर पैसा खा लेंगे लेकिन फिर आगे का क्या होगा। अभी तो हमें रात-बेरात कभी भी कोई जरूरत आ पड़ती है तो हम आढ़ती से पैसा ले लेते हैं। क्या प्राइवेट कंपनियां हमें ऐसे पैसा देंगी? किसानों के लिए आढ़ती उनकी जड़ के जैसे हैं। अगर जड़ ही उखड़ जाएगी तो हम कैसे पनप सकेंगे।’
बीरबल सिंह ये इसलिए कह रहे हैं क्योंकि किसानों की खेती की प्रक्रिया आढ़ती से उधार लेने से ही शुरू होती है। वह इसलिए क्योंकि किसानों के पास जमीन तो हैं लेकिन पैसा नहीं है। ऐसे में किसान को न सिर्फ खेती के लिए पैसे की जरूरत होती है बल्कि फसल पकने और बिक जाने तक के सारे खर्चों के लिए उसे आढ़ती पर निर्भर रहना पड़ता है। कुछ बड़े किसानों को छोड़ दें तो लगभग यही स्थिति सभी किसानों की है।
भारत में 86 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से भी कम जमीन है। ऐसे में छोटे किसानों को चिंता है कि आढ़ती कमजोर होंगे तो वह पूरी व्यवस्था कमजोर हो जाएगी, जिससे उनका काम पीढ़ियों से चला आ रहा है। इसलिए किसान आंदोलन में शामिल तमाम किसान सिर्फ अपने एमएसपी की लड़ाई नहीं लड़ रहे बल्कि आढ़तियों को बचाने की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। लेकिन इससे इतर ये भी सच है कि आढ़त व्यवस्था अपने-आप में किसानों के लिए किसी दुष्चक्र में फंसे रहने से कम नहीं है।
किसानों के पास जमीन तो है लेकिन पैसा नहीं है। ऐसे में किसान को न सिर्फ खेती के लिए पैसे की जरूरत होती है बल्कि फसल पकने और बिक जाने तक के सारे खर्चों के लिए उसे आढ़ती पर निर्भर रहना पड़ता है।
आढ़ती किसानों को जो पैसा देते हैं उस पर ब्याज वसूला जाता है। यह ब्याज अमूमन 12 फीसदी से लेकर 18 फीसदी तक होता है। खेती के अलावा अन्य जरूरतों के लिए भी किसान आढ़ती से पैसा लेता है। जैसा कि दिवंगत सुषमा स्वराज ने कहा था, बेटी की शादी से लेकर बच्चे की पढ़ाई करानी हो और बाप की दवाई तक हर चीज के लिए किसान आढ़ती के पास जाता है।
आढ़ती ये पैसा किसान को देता भी है लेकिन ये सब ब्याज पर दिया जाता है। फिर किसान की जब फसल बिकती है तो आढ़ती पहले अपना पैसा और ब्याज वसूलते हैं, जो अमूमन किसान द्वारा लिए गए कर्ज से कम ही रह जाता है। लिहाजा किसान फिर से अगली फसल के लिए आढ़ती से कर्ज लेने को मजबूर होता है।
पंजाब किसान यूनियन के राज्य कमिटी सदस्य सुखदर्शन नत्त कहते हैं, ‘पहले तो आढ़तियों की ये व्यवस्था और भी बुरी थी। आढ़ती तीस फीसदी से लेकर 48 फीसदी तक ब्याज किसानों से वसूला करते थे। किसान यूनियनों ने लंबी लड़ाई लड़ी तब जाकर ये ब्याज कम हुआ है।’
वे आगे बताते हैं कि हैं कि इस तरह से ब्याज पर पैसा देना गैर-कानूनी है लेकिन दोनों पक्ष सहमत रहते हैं इसलिए यह व्यवस्था चलती रहती है। इस व्यवस्था को तोड़ने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के कुछ विकल्प पहले भी तलाशे गए लेकिन ये कामयाब नहीं हो सके।
छोटे किसानों को बैंकों से तीन लाख रुपए तक का लोन सिर्फ चार फीसदी ब्याज पर देने की व्यवस्था बनी ताकि किसान आढ़ती पर निर्भर न रहे। लेकिन सिर्फ इतने से किसान का काम नहीं चलता। कोई न कोई खर्च ऐसा आ ही जाता है कि उसे वापस आढ़ती के पास जाना पड़ता है लिहाजा ये व्यवस्था बनी रहती है।
आढ़तियों को डर है कि अगर मंडी से बाहर बिना किसी टैक्स के खरीद का विकल्प होगा तो कोई भी व्यक्ति मंडी में टैक्स चुकाकर क्यों खरीदने आएगा।
किसानों को मजबूत करने के लिए ये भी व्यवस्था बनी कि अनाज की बिक्री का पैसा आढ़ती की बजाय सीधे किसान के खाते में डाला जाए। लेकिन ऐसा होने पर आढ़तियों ने किसानों की चेक बुक ही अपने पास रखना शुरू कर दिया, लिहाजा ये तरीका भी विफल रहा। हालांकि पहले के मुकाबले किसानों की आढ़तियों पर निर्भरता कम जरूर हुई है।
सुखदर्शन नत्त बताते हैं, ‘आज से लगभग बीस साल पहले की अगर बात करें तो उस वक्त पंजाब में करीब 70 फीसदी किसानों पर आढ़तियों का कर्ज होता था और सिर्फ 30 फीसदी किसानों पर बैंक का। लेकिन आज ये आंकड़ा बिलकुल उलट चुका है। हालांकि अब भी आढ़त व्यवस्था में कई तरह की खामियां हैं, लेकिन उनसे निपटने का तरीका ये तो बिलकुल नहीं है जो मोदी सरकार इन कानूनों को लागू करके कर रही है।
हमारी लड़ाई इस बात की नहीं है कि आढ़ती ही खत्म कर दिए जाएं। हमारी लड़ाई है कि किसान मजबूत हो। लेकिन सरकार के इस फैसले से तो दोनों ही मारे जाएंगे इसीलिए इस आंदोलन में किसान और आढ़ती सब साथ खड़े हैं। बल्कि ये आंदोलन सिर्फ किसान या आढ़तियों का नहीं तमाम जानता का कॉरपोरेट के खिलाफ आंदोलन है। इस व्यवस्था से तो किसान की जमीन ही नहीं बचेगी तो क्या किसान रह जाएगा और क्या आढ़ती।’
लगभग यही डर उन तमाम लोगों को भी है जो आढ़तियों के साथ मुनीम या अन्य तरह का काम करते हैं और उनको भी जो मंडियों में मजदूरी का काम कर रहे हैं। मूल रूप से हरदोई के रहने वाले दिनेश कुमार कहते हैं, ‘मैं बीते 28 साल से पंजाब में एक आढ़ती के पास मुनीम का काम कर रहा हूं। मेरी ही तरह लगभग हर आढ़ती के पास दो-तीन मुनीम काम करते हैं। हमसे कहीं गुना ज्यादा संख्या उन मजदूरों की है जो आढ़तियों से जुड़े हैं या जो मंडियों में मजदूरी करते हैं। मंडियां कमजोर होंगी तो सिर्फ आढ़तियों को फर्क नहीं पड़ेगा, हम जैसे लाखों लोगों के पेट पर लात पड़ जाएगी।’
शिप्रा शांडिल्य...90 के दशक में फैशन इंडस्ट्री में ये एक चमकता नाम था, लेकिन 19 साल तक फैशन इंडस्ट्री में काम करने के बाद अचानक एक दिन उस चमचमाती दुनिया को छोड़कर गांव का रुख किया। पिछले सात सालों से वे ग्रामीण इलाकों में ही रहकर यहां के लोगों के साथ ही काम कर रही हैं। शिप्रा ने बनारस और आसपास के गांव की महिलाओं को जोड़कर एक फर्म बनाई, जिसका नाम रखा प्रभूति एंटरप्राइजेज। अब वे इसके जरिए करीब 12 तरह के अलग-अलग फूड प्रोडक्ट्स तैयार करती हैं। शुरुआत गाय के शुद्ध देसी घी से की थी और फिर रागी, बाजरा जैसे मोटे अनाजों के नॉन प्रिजर्वेटिव कुकीज भी बनाने लगीं।
अपनी बेकरी में गांव की 15 महिलाओं को रोजगार देकर शिप्रा उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं, साथ ही 450 से अधिक छोटे किसानों से भी सीधे संपर्क में हैं, जो उन्हें हर महीने 30 हजार लीटर गाय का दूध उपलब्ध कराते हैं। जल्द ही आसपास के जिलों के 700 किसानों को भी जोड़ने की प्लानिंग है।
शिप्रा बताती हैं कि ‘इसमें करीब 10 लाख रुपए का इंवेस्टमेंट हुआ, जिसमें आठ लाख रुपए मुद्रा योजना के तहत लोन लिया। पिछले फाइनेंशियल ईयर में 24 लाख रुपए का टर्नओवर रहा, जिसे अगले साल में चार गुना करने का प्लान है।’
अपनी बेकरी में गांव की 15 महिलाओं को रोजगार देकर शिप्रा उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं, साथ ही 450 से अधिक छोटे किसानों से भी सीधे संपर्क में हैं, जो उन्हें हर महीने 30 हजार लीटर गाय का दूध उपलब्ध कराते हैं।
आध्यात्म की ओर रुझान हुआ तो अहसास हुआ कि फैशन इंडस्ट्री में बहुत गंदगी है
अपने शुरुआती दिनों के बारे में शिप्रा बताती हैं, ‘मेरे पिताजी बीएसएफ में थे, उस समय हम नोएडा में रहते थे। मैंने 12वीं तक की पढ़ाई के बाद डिस्टेंस से पढ़ाई की। मैंने हमेशा किताबों में पढ़ा और सक्सेसफुल लोगों से सुना था कि पैशन को ही प्रोफेशन बनाना बेहतर रहता है। तो मैंने 12वीं के बाद पत्राचार से फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा कोर्स किया। कोर्स के बाद मेरे पास जॉब ऑफर भी था, लेकिन मुझे अपना काम करना था तो गैराज में ही अपना एक छोटा सा स्टोर बनाकर शुरुआत की।
शिप्रा ने 1992 में फैशन डिजाइनिंग की फील्ड में काम शुरू किया। कुछ ही सालों में वे कामयाब फैशन डिजाइनर बन गईं। कम समय में ही शिप्रा को पैसा और शोहरत दोनों मिल गए। डिजाइनिंग के बाद शिप्रा ने कई सालों तक डाई के सेक्टर में भी काम किया। इसके लिए वह अलग-अलग शहरों में रहीं और वहां काम सीखा भी और सिखाया भी।
इस बीच शिप्रा का रुझान आध्यात्म की ओर भी हुआ और उन्हें अहसास होने लगा कि फैशन इंडस्ट्री दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित इंडस्ट्री में से एक है। साथ ही यहां बड़े पैमाने पर कारीगरों का शोषण होता है, उन्हें उनके काम का सही दाम तक नहीं मिलता है। फिर एक वक्त आया जब शिप्रा को लगा कि अब उन्हें कुछ और करने की जरूरत है। 19 साल बाद 2011 में वे नाेएडा का अपना जमा जमाया बिजनेस छोड़कर बनारस आ गईं। शिप्रा बताती हैं, ‘जब मैं गांव आई तो सब मुझे पागल ही समझते थे।’
साल 2019 में शिप्रा ने प्रभूति एंटरप्राइजेज की शुरुआत की। ‘इसमें करीब 10 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट हुआ, जिसमें आठ लाख रुपए मुद्रा योजना के तहत लोन लिया। पिछले फाइनेंशियल ईयर में 24 लाख रुपए का टर्नओवर रहा।
बनारस आकर तय किया कि ऐसा बिजनेस करूंगी जिससे लोगों को खुशी मिले
शिप्रा बताती हैं कि ‘जब मैं बनारस आई तो सोचा कि यहां कोई ऐसा काम करूंगी जिसमें पर्यावरण का नुकसान न हो और न ही किसी का शोषण हो। मैं नहीं चाहती थी कि बिजनेस से आने वाले पैसे लाेगों के मानसिक और पर्यावरणीय प्रदूषण से नहीं, बल्कि उनकी खुशियों से आएं।
2013 में यहां महिलाओं के हुनर को देखा कि वे कैसे जपमाला और कई तरह-तरह की माला तैयार करती हैं। शिप्रा ने सोचा कि जिस माला से लोग भगवान का ध्यान करते हैं वो माला सड़क किनारे मिलती है। इसके बाद उन्होंने ‘माला इंडिया’ के नाम से एक बिजनेस शुरू किया। इस बिजनेस में शिप्रा ने करीब 100 महिलाओं को जोड़ा। इन प्रोडक्ट्स को भारत समेत विदेशों तक भी पहुंचाया। लेकिन कस्टम के नियमों में बदलाव के बाद एक्सपोर्ट का खर्च बढ़ गया तो शिप्रा ने महसूस किया कि इस बिजनेस में ज्यादा फायदा नहीं हो सकेगा।
गाय के देसी घी की इतनी डिमांड आई कि सप्लाई कम पड़ने लगी
शिप्रा ने तय किया कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे गांव में रहने वाले हर एक परिवार को जोड़ा जा सके और वे लोग बिना लागत के ही काम शुरू कर सकें। इसी सोच के साथ 2019 में शिप्रा ने प्रभूति एंटरप्राइजेज की शुरुआत की। शिप्रा कहती हैं कि ‘ मैंने सोचा कि ऐसी क्या चीज़ है जो हर ग्रामीण घर में होती है? पता चला कि ज्यादातर किसान परिवार गाय-भैंस तो रखते ही हैं। तो मैंने घर पर बने शुद्ध घी को मार्केट तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
इसके लिए शिप्रा ने 55 हजार की लागत से दूध से क्रीम निकालने वाली एक मशीन खरीदी, जहां किसान दूध से क्रीम निकाल लेते और फिर इस क्रीम से पारम्परिक तरीके से शुद्ध देसी घी तैयार करना शुरु किया। इसमें बीएचयू के केमिकल इंजीनियर डिपार्टमेंट ने भी सपोर्ट किया। शुरुआत में जान-पहचान के लोगों से इस घी का फीडबैक लिया फिर इसे काशी घृत नाम देकर बाजार में उतारा। बाजार में ऑर्गेनिक शॉप्स पर इस घी को अच्छा रिस्पांस मिला।
शिप्रा हर महीने करीब 100 किलो देसी घी तैयार करती हैं लेकिन इसकी डिमांड बहुत ज्यादा है। अब वे आस-पास के जिलों के किसानों को भी जोड़ रही हैं ताकि उन्हें ज्यादा मात्रा में गाय का दूध मिल सके, जिससे वे घी तैयार कर मार्केट में सप्लाई कर सकें। 30 लीटर दूध की क्रीम से एक किलो घी तैयार होता है। फिलहाल शिप्रा, तीन तरह के घी (सामान्य देसी घी, ब्राह्मी घी, शतावरी घी) बना रही हैं। इस घी की कीमत 1450 रुपए से लेकर 2460 रुपए प्रति किलो तक है।
घी के अलावा वो नारियल, ओट्स, रागी, हल्दी आदि के कुकीज भी बना रही हैं। इन कुकीज में किसी भी तरह के एडिटिव, प्रिजर्वेटिव और ग्लूटन का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
किसानों को उनकी उपज से ही काम देकर तैयार कराती हैं मल्टीग्रेन कुकीज
बनारस से सटे गांवों के किसान रागी, ज्वार भी उगाते हैं। शिप्रा ने सोचा कि क्यों न इन किसानों को उनकी अपनी उपज से ही कुछ काम दिया जाए। इस तरह घी के बाद इन अनाजों के कुकीज बनाने का आइडिया आया। घी के अलावा वे नारियल, ओट्स, रागी, हल्दी आदि के कुकीज भी बना रही हैं। इन कुकीज में किसी भी तरह के एडिटिव, प्रिजर्वेटिव और ग्लूटन का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
इनमें छह तरह के कुकीज वीगन डाइट वालों के लिए भी बनाए गए हैं। हर महीने करीब 50 किलाे कुकीज तैयार की जाती है, इन कुकीज की कीमत 1300 रुपए से लेकर 1500 रुपए प्रति किलो तक है। घी और कुकीज की पैकिंग के लिए कांच के एयरटाइट जार का इस्तेमाल किया जाता है।
मार्केट डिमांड देखकर ही बिजनेस प्लान पर काम करें
शिप्रा कहती हैं कि कोई भी बिजनेस शुरू करने से पहले यही देखा जाए कि मार्केट में किस चीज की डिमांड है, उसी हिसाब से अपने बिजनेस प्लान पर काम करें। शिप्रा की योजना है कि उनके प्रोडक्ट्स पूरे देश में पहुंचें और वे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दे सकें।
शिप्रा कहती हैं, जरूरी नहीं है कि आपके पास पैसे हों तभी आप बिजनेस शुरू कर सकते हैं। सरकार की तमाम योजनाएं हैं, बस इसे सही तरीके से समझकर इसके लिए आवेदन करने की जरूरत है। शिप्रा कहती हैं कि ‘अगर कोई भी व्यक्ति अपने बिजनेस की शुरुआत करना चाहता है तो हम उसकी हर तरह से नि:शुल्क मदद करते हैं।’
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में ड्रग्स की जांच कर रहा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) आज एक्ट्रेस रकुलप्रीत सिंह से पूछताछ करेगा। रकुलप्रीत गुरुवार को बेंगलुरु से मुंबई लौट आईं। NCB ने आज दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश और करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन के डायरेक्टर क्षितिज रवि प्रसाद को भी बुलाया है। उधर, NCB ने मुंबई में 3 जगहों पर छापे मारे हैं। इस बारे में ज्यादा डिटेल नहीं मिल पाई है।
3 एक्ट्रेस से कल पूछताछ होगी
दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से कल पूछताछ होगी। तीनों पर ड्रग्स लेने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि ड्रग्स केस में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती ने पूछताछ में कई एक्ट्रेस के नाम लिए हैं। दीपिका और उनकी मैनेजर के वॉट्सऐप चैट में भी ड्रग्स की बातचीत सामने आई है। उधर, दीपिका और सारा गुरुवार को गोवा से मुंबई लौट आईं। सूत्रों के मुताबिक, दीपिका के पति रणवीर ने NCB से अपील की है कि पूछताछ के दौरान वे दीपिका के साथ रहना चाहते हैं। रणवीर ने कहा है कि दीपिका को कभी-कभी घबराहट होती है। इसलिए पूछताछ के वक्त उनके साथ रहने की परमिशन दी जाए।
राखी सावंत का दावा- स्लिम दिखने के लिए कई एक्टर्स ड्रग्स लेते हैं
राखी ने दावा किया है कि कई एक्टर्स ऐसे ड्रग्स लेते हैं, जिनसे उन्हें भूख न लगे। राखी ने बताया, ‘मैंने देखा है कि कई एक्टर खुद को स्लिम और जवान बनाए रखने के लिए ड्रग्स लेते हैं। ज्यादातर वीड (गांजा) इस्तेमाल करते हैं। कई बड़े एक्टर चरस भी पीते हैं।
from Dainik Bhaskar /national/news/narcotics-control-bureau-summon-to-rakul-preet-singh-in-drugs-case-today-deepika-padukone-will-join-tomorrow-127752089.html
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चुनाव आयोग आज दोपहर 12.30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है। इसमें बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो सकता है। साथ ही मध्य प्रदेश में 27 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा भी हो सकती है।
देश में गुरुवार को कोरोना संक्रमण के 82214 मामले आए। 77488 लोग ठीक हुए और 1144 लोगों की मौत हुई। छह दिन के बाद संक्रमितों की संख्या ठीक हुए मरीजों से ज्यादा रही। हालांकि, राहत की बात रही कि यह लगातार पांचवां दिन था, जब संक्रमितों की संख्या 90 हजार से कम रही।
देश में अब तक 58 लाख 16 हजार 103 केस आ चुके हैं। इनमें से 47 लाख 52 हजार 991 मरीज ठीक हो चुके हैं। मरने वालों की संख्या अब 92 हजार 270 हो गई है। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।
कोरोना अपडेट्स
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को डेंगू हो गया है। उन्हें एलएनजेपी हॉस्पिटल से मैक्स अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। 14 सितंबर को उन्होंने कोरोना से संक्रमित होने की पुष्टि की थी। इससे पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी संक्रमित हो चुके हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली कोरोना की दूसरी लहर के पीक से गुजर चुकी है। सितंबर में 4000 केस आना महामारी की दूसरी लहर का संकेत है।
ऑक्सीजन लेवल कम होने के बाद असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। 85 साल के गोगोई 25 अगस्त को कोरोना संक्रमित पाए गए थे।
कर्नाटक के कांग्रेस विधायक बी नारायण (61) राव की गुरुवार को कोरोना से मौत हो गई। वे बीदर जिले के बसवकल्याण से विधायक थे।
पांच राज्यों का हाल
1. मध्यप्रदेश
राज्य में गुरुवार को 2304 नए संक्रमित मिले, जबकि 2327 ठीक हुए। वहीं, 45 मरीजों ने दम तोड़ दिया। यहां अब तक 1 लाख 15 हजार 361 केस मिल चुके हैं। नए संक्रमितों में मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, हरदीप सिंह डंग और भीकनगांव से कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी भी शामिल हैं। इन्हें मिलाकर अब तक सरकार के 13 मंत्री और पक्ष-विपक्ष के 44 विधायक संक्रमित हो चुके हैं।
2. राजस्थान
राज्य में गुरुवार को संक्रमण के 1981 मामले मिले और 1965 लोग ठीक हुए। 27 जिले ऐसे हैं, जिनमें एक हजार से ज्यादा रोगी मिल चुके हैं। बाकी छह जिले- हनुमानगढ़ में 773, प्रतापगढ़ में 746, करौली में 799, सवाई माधोपुर में 820 और दौसा में 895 केस हैं। जयपुर में सबसे ज्यादा 19 हजार पॉजिटिव मिल चुके हैं।
3. बिहार
बिहार में गुरुवार को 1203 संक्रमित मिले। वहीं, 1154 लोग ठीक हुए। राज्य में अब तक कोरोना के 1 लाख 74 हजार 266 केस आए हैं, 1 लाख 59 हजार 700 मरीज ठीक हो चुके हैं। 28 सितंबर से 9 से 12 तक के स्टूडेंट्स शिक्षकों से मार्गदर्शन के लिए स्कूल जा सकेंगे। इसके लिए पैरेंट्स की अनुमति जरूरी है। इस दौरान प्रार्थना सत्र, खेलकूद और अन्य गतिविधि नहीं होगी। स्कूल स्टाफ की संख्या 50% से ज्यादा नहीं होगी।
4. महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में गुरुवार को 19 हजार 164 संक्रमित मिले और 17 हजार 184 लोग रिकवर हुए। वहीं, 459 लोगों की मौत हुई। अब तक 12 लाख 82 हजार 963 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 9 लाख 73 हजार 214 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 2 लाख 74 हजार 993 का इलाज चल रहा है।
5. उत्तरप्रदेश
राज्य में गुरुवार को 4591 नए केस सामने आए, 4922 मरीज ठीक हो गए, जबकि 67 संक्रमितों की मौत हो गई। प्रदेश में अब तक 3 लाख 74 हजार 277 केस आ चुके हैं। इनमें 3 लाख 7 हजार 611 ठीक हो चुके हैं, 61 हजार 300 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं, 5366 मरीजों की मौत हो चुकी है।
सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच अगले राउंड की बातचीत जल्द हो सकती है। इससे पहले विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि डिसएंगेजमेंट एक मुश्किल (कॉम्प्लेक्स) प्रोसेस है, इसके लिए दोनों तरफ से सहमति के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होगी। मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि अब इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि एलएसी पर मौजूदा स्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश नहीं हो पाए।
भारतीय सीमा से 1150 किमी दूर चीन ने हथियार तैनात किए
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनाव को कम करने के लिए आर्मी और डिप्लोमेटिक लेवल पर बातचीत चल रही हो, पर पीठ पीछे चीन चाल चलने से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने भूटान से लगे डोकलाम के पास अपने एच-6 परमाणु बॉम्बर और क्रूज मिसाइल को तैनात किया है। चीन इन हथियारों की तैनाती अपने गोलमुड एयरबेस पर कर रहा है, जो भारतीय सीमा से सिर्फ 1150 किलोमीटर दूर है।
सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत-चीन के कॉर्प्स कमांडर अब तक 6 बार मीटिंग कर चुके हैं। कोर कमांडरों की बैठक के बाद भले ही दोनों पक्ष एलएसी पर मौजूदा स्थिति को बनाए रखने की कोशिश में हैं, पर भारत सतर्क है। भारतीय सेना ने तय किया है चीन के पीछे हटने के साफ संकेत मिलने तक पैंगॉन्ग की ऊंची पहाड़ियों पर हमारे जवान डटे रहेंगे।
दूसरी तरफ विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि भारत और चीन एक अजीब (अन्प्रेसिडेन्टिड) स्थिति में हैं। इस बीच सीमा विवाद एक बड़ा मुद्दा है। यह बात अहम है कि दोनों देश एक-दूसरे की जरूरतों को भी समझते हैं। भारत-चीन को मिलकर समाधान तलाशना चाहिए। विदेश मंत्री ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में ये बात कही।
अमेरिका ने फिर मदद का ऑफर दिया, नोबेल पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा, मैं जानता हूं कि भारत और चीन सीमा विवाद को लेकर मुश्किल में हैं, लेकिन उम्मीद है कि वे विवाद सुलझा लेंगे। इसमें हम कोई मदद कर सकें तो अच्छा लगेगा।
कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रम्प की नजर शांति के नोबेल प्राइज पर है। इसलिए, वे भारत-चीन के मामले में दखल का ऑफर एक बार रिजेक्ट होने के बाद फिर से दोहरा रहे हैं। नॉर्वे की संसद के एक सदस्य ने ट्रम्प को नोबेल के लिए नॉमिनेट किया है। यूएई और इजरायल के बीच डिप्लोमेटिक रिश्तों में मदद करने की वजह से ट्रम्प के नाम का प्रपोजल रखा गया है।
from Dainik Bhaskar /national/news/necessary-to-ensure-stability-on-ground-mea-on-sino-india-border-standoff-in-eastern-ladakh-127752048.html
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