शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

राज्यसभा में विरोध के बावजूद पास हुआ था नागरिकता बिल, इसके बाद भड़के दंगों में 50 से ज्यादा की जान गई

11 दिसंबर 2019 को यानी आज से एक साल पहले राज्यसभा में एक बिल के पक्ष में 125 और खिलाफ में 99 वोट पड़े थे। यह बिल था नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizen Amendement Act)। अगले दिन 12 दिसंबर 2019 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। देशभर में भारी विरोध के बीच बिल दोनों सदनों से पास होने के बाद कानून की शक्ल ले चुका था। इसे गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया था।

2016 में नागरिकता कानून में बदलाव के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 (CAA) पेश किया गया। इसमें 1955 कानून में कुछ बदलाव किया जाना था। बदलाव थे, भारत के तीन मुस्लिम पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए अवैध गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देना। 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा। कमेटी ने 7 जनवरी 2019 को रिपोर्ट सौंपी। 8 जनवरी 2019 को विधेयक पास हुआ। उस समय राज्यसभा में यह विधेयक पेश नहीं हो पाया।

संसदीय प्रक्रिया का एक नियम है कि अगर कोई विधेयक लोकसभा में पास हो जाता है और राज्यसभा में पास नहीं होता है और इसी बीच अगर लोकसभा कार्यकाल खत्म हो जाता है तो विधेयक प्रभाव में नहीं रहता है। इसे फिर से दोनों सदनों में पास कराना जरूरी होता है। इस वजह से इस कानून को 2019 में फिर से लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना पड़ा।

नए कानून में क्या है?
पिछले साल जब देश में CAA कानून बना तो देशभर में विरोध भी जोर पकड़ गया। दिल्ली का शाहीन बाग इस कानून के विरोध से जुड़े आंदोलन का केंद्र बिंदु था। कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के प्रवासियों के लिए नागरिकता कानून के नियम आसान बनाए गए। इससे पहले नागरिकता के लिए 11 साल भारत में रहना जरूरी था, इस अवधि को घटाकर 1 से 6 साल कर दिया गया।

फरवरी 2020 में दिल्ली में CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी। इसमें मुदस्सिर खान की भी मौत हुई। फोटो मुदस्सिर के शव के पास बैठे उनके बेटे की है।

कानून के विरोध में भड़के दंगों में 50 से ज्यादा की जान गई
लोकसभा में आने से पहले ही ये बिल विवाद में था। लेकिन जब ये कानून बन गया, तो उसके बाद इसका विरोध और तेज हो गया। दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। 23 फरवरी 2020 की रात जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर भीड़ के इकट्ठा होने के बाद भड़की हिंसा, दंगों में तब्दील हो गई। दिल्ली के करीब 15 इलाकों में दंगे भड़के। कई लोग जिंदा जला दिए गए, तो कई लोगों को चाकू-तलवार जैसे धारदार हथियारों से हमला कर मार दिया गया। इन दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। सैकड़ों घायल हुए।

देश के मशहूर कवि प्रदीप का निधन हुआ था

6 फरवरी 1915 को मध्यप्रदेश के उज्जैन के बड़नगर कस्बे में एक शख्स का जन्म हुआ था। इसी के 48 साल बाद 27 जनवरी 1963 में दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी में लता मंगेशकर ने एक गीत गया। जिसके बोल थे 'ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंखों में भर लो पानी'। गीत खत्म होते ही स्टेडियम में मौजूद नेहरू समेत सभी लोगों की आंखें नम थीं।

यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की याद में लिखा गया था। गीत लिखने वाले थे कवि प्रदीप। वैसे इनका मूल नाम रामचंद्र नारायण द्विवेदी था। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें उपनाम प्रदीप दिया था। उन्हें 1997-1998 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके लेखन के स्तर को इस बात से भी समझा जा सकता है कि उन्होंने हर तरह के गीत लिखे। उनके प्रमुख गीतों मे थे- ऐ मेरे वतन के लोगो, आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं, दे दी हमें आजादी, हम लाए हैं तूफान से, मैं तो आरती उतारूं, पिंजरे के पंछी रे, तेरे द्वार खड़ा भगवान, दूर हटो ऐ दुनिया वालों। 11 दिसंबर 1998 में मुंबई में उनका निधन हो गया।

भारत और दुनिया में 11 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 1687: ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास में नगर निगम बनाया था।
  • 1882: तमिल कवि और पत्रकार सुब्रह्मण्यम भारती का जन्म हुआ था।
  • 1935: भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जन्म हुआ था।
  • 1922: भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता दिलीप कुमार का जन्म हुआ था।
  • 1931: ओशो रजनीश का जन्म हुआ था।
  • 1941: वर्ल्ड वॉर II में जर्मनी और इटली ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था।
  • 1946: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
  • 1946: यूरोपीय देश स्पेन को संयुक्त राष्ट्र से निलंबित किया गया।
  • 1964: संयुक्त राष्ट्र के यूनिसेफ की स्थापना हुई।
  • 1969: भारत शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद का जन्म।
  • 1983: जनरल एचएम इरशाद ने खुद को बांग्लादेश का राष्ट्रपति घोषित किया।
  • 2001: चीन को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में एंट्री मिली।
  • 2002: 11 दिसंबर को इंटरनेशनल माउंटेन डे घोषित किया। इस दिन यूएन जनरल असेंबली ने रिजोल्यूशन 57/245 अपनाया।
  • 2012: भारत रत्न सम्मानित प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर का निधन।


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Today History: Aaj Ka Itihas India World December 11 Update | Citizenship Bill Passed Date, Lyricist Kavi Pradeep Death


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मोदी सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी किसानों के समर्थन में आए? जानें सच

क्या हो रहा है वायरल: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह किसानों के समर्थन में भाषण देते दिख रहे हैं।

दावा किया जा रहा है कि वीडियो हाल में चल रहे किसान आंदोलन का है और राजनाथ सिंह जिस सरकार में मंत्री हैं, उसी सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में उतर आए हैं। वीडियो में राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री की भी आलोचना करते दिख रहे हैं।

और सच क्या है?

  • वीडियो को की-फ्रेम्स में बांटकर हमने गूगल पर रिवर्स सर्च किया। हमें वह पूरा वीडियो बीजेपी के एक सोशल मीडिया हैंडल पर मिला, जिसका एक हिस्सा इस समय वायरल हो रहा है।

  • बीजेपी के सोशल मीडिया चैनल पर ये वीडियो 20 मई, 2013 को अपलोड किया गया है। जाहिर है 7 साल पुराने इस वीडियो का हाल में चल रहे किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है।
  • द हिंदू वेबसाइट पर हमें 19 मार्च, 2013 की एक रिपोर्ट भी मिली। जिससे पुष्टि होती है कि देश भर के किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी में प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में विपक्ष के नेता भी शामिल हुए थे।
  • साफ है कि 7 साल पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। हाल में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नहीं पहुंचे हैं।


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Defense Minister Rajnath Singh also came in support of farmers in Modi government? Learn the truth


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पढ़िए, मैगजीन अहा! जिंदगी के दिसंबर एडिशन की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

1. विद्युत जामवाल की देह भी अपने आप में ऐसी ही एक भाषा है, जिसे पढ़ते हुए हम जान पाते हैं कि- संकल्प दृढ़ हों, समर्पण भाव बना रहे, अटूट लगन के साथ यदि खुद को साधें तो कठिन से कठिन चुनौती से भी टकरा सकते हैं। इस बार अहा! अतिथि में पढ़िए विद्युत से सवाल-सिलसिला...

बड़े परदे के एक्शन हीरो विद्युत जामवाल असल जीवन में हैं बेहद संजीदा, इस बार विद्युत हमारे अहा! अतिथि हैं

2. चश्मे ने अनेक रूप-रंग बदले हैं। और अब तो बाजार में इतनी तरह के फ्रेम भी उपलब्ध हैं, कि बहुतों के लिए, यह चुनना कठिन हो जाता है कि किसे चुनें, किसे छोड़ें। पढ़िए इस बार पलछिन में ऐनक पर केंद्रित एक दिलचस्प लेख...

ऐनक की कथा भी कम दिलचस्प नहीं है, अनेक रंग रूपाें में उपलब्ध यह चश्मा तो बहुतों के शरीर का अंग बन चुका है

3. महिला और पुरुष एक ही मानव प्रजाति के होने के बावजूद सोच और व्यवहार में दो अलग ग्रहों के वासी होते हैं। मदद मांगने और देने के मामले में भी उनका यह अंतर स्पष्ट होता है। पढ़िए पुस्तक ‘मेन आर फ्रॉम मार्स, वीमन आर फ्रॉम वीनस’ से यह एक उपयोगी अंश...

स्त्रियां मदद क्यों नहीं मांगती और पुरुष मदद क्यों नहीं करते !

4. स्टैंडअप कॉमेडियन की खूबी यह होती है कि वो जितनी तैयारी से मंच पर अपने आइटम पेश करता है, उससे कहीं तेजी से वो सामने बैठे दर्शकों और आसपास के माहौल के बीच से चुटकुले गढ़ने का कौशल रखता है। इस बार पढ़िए स्टैंडअप कॉमेडी पर यह रोचक लेख...

130 साल पुराना इतिहास है स्टैंडअप कॉमेडी का, चार्ले केज ने किया था पहला स्टैंडअप

5. सोहन और नव्या को आपस में प्रेम था। किंतु, परिवार को भला यह कब मंजूर था। पढ़िए किस प्रकार सोहन ने अपने संस्कारों के बूते अपने प्रेम को सफल बनाने का प्रयास किया, कहानी नव्या में...

नए समय के प्रेम और पूर्वजों के संस्कारों के बंधन में बंधी कहानी नव्या

6. इस बार कुछ ऐसे ही पर्वतों की सैर पर चलते हैं जो कि खूबसूरती के मामले में अपना कोई दूसरा सानी नहीं रखते हैं। ऐसे ही खूबसूरत पर्वत और उनसे जुड़े रोचक तथ्य को जानने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें...

विश्व के वे ख़ूबसूरत पर्वत जो दुनिया के हर कोने से प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींच लाते हैं

7. क्या इश्क को नाप पाना सम्भव है? क्या यह भी कोई नापजोख की वस्तु है। आखिर इसका पैमाना क्या होगा। प्रेम, इश्क की यही वक्रोक्ति पाठकों को रुचिकर मालूम होगी...

प्रेम का पैमाना क्या होता है, क्या प्रेम की नापजोख सम्भव है !

8. चाय अब महज एक पेय पदार्थ से आगे बढ़कर एक अहसास बन चुकी है। चाय का प्याला एक खयाल की सूरत है। पढ़िए चाय पर केंद्रित एक दिलचस्प लेख जिसमें कई प्रकार की चाय की मिठास है...

चाय का प्याला किसी दरख़्त से कम नहीं, जिस पर पीठ टेककर हम थोड़ी देर ठहरते हैं

​​​​​​9. कश्मीर की तरह ही खूबसूरत और मिठास से भरी है यहां की चाय जिसे कहवा कहते हैं। केसर, दालचीनी, शहद, लवंग और सूखे मेवे आदि जिस पेय में मौजूद हों भला उससे मोहब्बत किए बिना कैसा रहा जाए। इस बार अहा! जिंदगी में पढ़िए इसी कहवे का किस्सा...

रोमकूपों तक को महक और ऊष्मा से भर देने वाली चाय है कहवा



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Aha! Read selected articles of life at one click here 11 december 2020


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आधुनिक दुनिया में भारत कुछ ऐसे लोकतंत्र में से है, जहां राष्ट्रीय चुनावों में अनुपस्थित मतदाताओं की परंपरा विकसित नहीं की गई

मेरा बेटा ईशान जो कि थोड़ा मलयाली, कुछ बंगाली और कुछ कश्मीरी भी है, वह सिंगापुर में पैदा हुआ और 6 साल की उम्र से ही अमेरिका में पला-बढ़ा। अमेरिका में जन्मी महिला से वहीं शादी की और अपना पूरा वयस्क जीवन अमेरिका के प्रमुख मीडिया हाउस में काम करते हुए बिताया।

जब उसने 2020 में यह घोषणा की कि उसने अमेरिकी नागरिकता ले ली है, तो एक पिता होने के नाते जिसने उससे बिल्कुल उलट अपने पूर्वजों की धरती पर वापस लौटने का फैसला किया था, मुझे उसके फैसले से गहरी आपत्ति थी। अपने भारतीय पासपोर्ट को त्यागने का फैसला एक तरह से धोखा था।

इसके बाद भी मेरे मन में विचार आया और अहसास हुआ कि ईशान की पीढ़ी के लोगों के लिए यह कितनी हास्यास्पद बात है, जो भले ही दिल से अपने पूर्वजों की धरती से जुड़े हुए हों, पर वे अपने लिए सही हालात या परिस्थितियों को पहचानने के प्रति ज्यादा सजग होते हैं, जहां वे सफल हो सकें।

मेरे ज़ाहिर गुस्से पर ईशान ने कहा कि उसे भारतीय पासपोर्ट रखने में भी खुशी होगी, पर अगर भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति दे तब। पर अमेरिका के विपरीत भारत ऐसा नहीं करता है, यहां राष्ट्रीय निष्ठा अविभाज्य है।
प्रवासी भारतीय (एनआरआई) लंबे समय से इस बात पर तर्क कर रहे हैं कि यह बिल्कुल अन्यायपूर्ण फैसला है, क्योंकि दूसरे देशों की नागरिकता उनके लिए कई बार सुविधा का मामला बन जाता है और कई बार जरूरत भी, लेकिन इसके कारण भारतीय नागरिकता छूट जाना उनके देश के प्रति विश्वास और गर्व पर गहरी चोट करता है।

पर भारत अपने अप्रवासी नागरिकों को एक प्रमाण पत्र प्रदान करता है, कपटभरा यह प्रमाण पत्र ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ इंडिया कहलाता है, जो कि नागरिकता बिल्कुल नहीं है। यह सिर्फ आजीवन वीजा मात्र है, जो कि दूसरे अन्य वीजा की तरह ही निलंबित या निरस्त किया जा सकता है, जैसे कि अभी 2020 में कोरोना महामारी के चलते हुआ है।

प्रवासी रहवासियों (डायस्पोरा) में कई लोग तर्क देते हैं कि व्यापक और नियमित रूप से हो रहे पलायन वाली आज की दुनिया में उस व्यक्ति का पासपोर्ट किसी की मौलिक समानताओं या देशभक्ति का सुबूत नहीं है। हालांकि हर किसी का मकसद पूरी तरह आदर्शवादी भी नहीं, अधिकांश प्रवासी भारतीय जो कि दोहरी नागरिकता की पैरवी करते हैं, वे व्यावहारिक लाभ लेने के बजाय अपनी भावनात्मक पहचान के लिए ऐसा करते हैं।

असल में देखा जाए तो प्रवासी रहवासियों के प्रति भारतीय नीति अच्छा इरादा नहीं रखती। उन्हें ऐसी अपमानजनक स्थिति में खड़ा कर देती है कि या तो वे अपना भारतीय पासपोर्ट दोबारा हासिल करें, इससे लगता है कि वे अपने मेजबान देश के साथ अन्याय कर रहे हैं या दूसरा पासपोर्ट चुनने की स्थिति में अपनी मातृभूमि से खुद को वंचित रखें।

जहां तक इस दिशा में किए अपने प्रयासों को मैं जानता हूं, कह सकता हूं कि प्रवासी रहवासियों को दोहरी नागरिकता देने के विचार के प्रति भी भारतीय सरकार में कोई इच्छा नहीं दिखती। ऐसे में इतने सारे लोग, जो कि भारतीय बने रहना पसंद करेंगे, दूसरे मुल्कों की राष्ट्रीयता और वहां की प्रतिबद्धताओं को बचाए रखने के लिए अपने ज़ाहिर और देशभक्ति से भरे पहले विकल्प को छोड़ने के अलावा उनके पास और कोई रास्ता नहीं बचेगा।

इस दुविधा के बारे में मैंने अपनी नई किताब ‘द बैटल ऑफ बिलॉन्गिंग’ में लिखा है। प्रवासी रहवासियों में जिन्होंने अपना भारतीय पासपोर्ट नहीं छोड़ा है, वे कुछ और भी चाहते हैं। मताधिकार की मांग तेजी से मुखर हो रही है।विदेशों में काम कर रहे पूरी तरह भारतीय नागरिकों, एनआरआई ने यह बात उठाई है कि जब उन्हें देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है, तो मतदाता होने के नाते उन्हें देश की नीति निर्धारण को प्रभावित करने में किसी भी तरह की भूमिका निभाने की अनुमति क्यों नहीं है।

आधुनिक दुनिया में भारत कुछ ऐसे लोकतंत्र में से है, जहां राष्ट्रीय चुनावों में अनुपस्थित मतदाताओं की परंपरा विकसित नहीं की गई है, परिणामस्वरूप विदेशों में रह रहे नागरिक इस प्रक्रिया से बेदखल हो जाते हैं। 1991 में केरल हाईकाेर्ट ने भारतीय चुनाव कानूनों को चुनौती देती हुई एक याचिका स्वीकार की थी, पर केस आगे नहीं बढ़ा।

सिर्फ वही एनआरआई वोट डाल सकते हैं, जो अपने गृहनगर में बने निर्वाचन क्षेत्र तक यात्रा करके आएं, अधिकांश लोगों के लिए यह विशेषाधिकार पहुंच से बाहर है। अगर एनआरआई नागरिकों को विदेशों से ही वोट डालने का अधिकार मिल जाए, तो कम से कम केरल जैसे राज्य की राजनीति नाटकीय रूप से बदल जाएगी, जहां लाखों मलयाली विदेशों में काम कर रहे हैं और जहां के चुनाव चंद हजार वोटर्स या उससे भी कम से तय होते हैं। लेकिन यह भारतीय नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक मताधिकार का प्रयोग करने के अधिकार से वंचित करने का कोई कारण नहीं है। दोहरी नागरिकता तब अगला कदम हो सकता है। (यह लेखक के अपने विचार हैं)



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शशि थरूर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद।


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युवा सार्वजनिक योजनाओं पर निगाह रखें, चुनौती का समाधान टेक्नोलॉजी से निकालने के लिए तत्पर रहें

गांधीवादी दादा धर्माधिकारी (सर्वोदय दार्शनिक) ने मार्क्स को एक संदर्भ में मसीहा कहा। सर्वोदयी दादा ने 1974 में हम युवाओं को बताया कि मार्क्स पहले दाशर्निक थे, जिन्होंने कहा गरीबी भाग्य की देन नहीं। इससे पहले किसी संत, महापुरुष या दार्शनिक ने ऐसा नहीं माना। मोबाइल, इंटरनेट, नई तकनीक आई, तो दादा का कथन याद आया।

नई तकनीक का विस्तार मार्क्स के विचारों से भी अधिक हुआ है। दुनिया के कोने-कोने में यह पहुंची। संस्कृतियों-भाषाओं की सरहद पार कर। इस कालखंड में सिलिकॉन वैली दुनिया का नया विचार केंद्र बना। भारत का बेंगलुरु इसी का देशज संस्करण है।

आज दुनिया में टेक्नोलॉजी आविष्कार करने वाले शहर नए प्रकाश स्तंभ हैं। यह ज्ञान युग है। ज्ञान युग में ही संभव है कि कोई नारायण मूर्ति अपनी प्रतिभा के बल धरातल से निकलकर दुनिया का यशस्वी उद्योगपति बन जाए। पुरानी धारणा थी कि उद्योगपति नसीब और नियति से वैसे घराने में जन्मते हैं। अब स्टार्टअप, नई टेक्नोलॉजी से यह उपलब्धि एक प्रतिभाशाली गरीब युवक के लिए भी संभव है।

नई टेक्नोलॉजी से भारत में कितने लोग जुड़े हैं? 102 करोड़ (आबादी का 78%) के पास मोबाइल है। 50 फीसदी के पास इंटरनेट है। 40 करोड़ सोशल मीडिया यूजर्स हैं। ताजा सूचना के अनुसार, गांवों में इंटरनेट प्रयोग करने वाले शहरों की अपेक्षा बढ़े हैं। इतनी बड़ी आबादी- युवा, नई टेक्नोलॉजी से जुड़े हैं।

क्या वे आसपास की दुनिया खूबसूरत बनाना चाहते हैं? युवा बदलाव के प्रतीक हैं। पर आज भारत के युवा सामाजिक दायित्व से प्रेरित हैं या भौतिक सुख व बगैर परिश्रम धन की चाहत उनकी प्रेरणा है? बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा था कि एक युवक के जीवन में अंधकारमय पल होता है, जब वह बिना परिश्रम अकूत धन चाहता है। तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, पर कैसे?

दुनिया में पोर्नोग्राफी देखने वाले देशों में भारत तीसरे स्थान पर है। टेक्नोलॉजी से जुड़े युवाओं की प्राथमिकता थोड़ी बदल जाए, तो देश बदल जाएगा। जो टेक्नोलॉजी प्रेमी हैं, वे रामसेवक शर्मा की पुस्तक ‘द मेकिंग ऑफ आधार: वर्ल्ड लार्जेस्ट आईडेंटिटी प्लेटफार्म’ जरूर पढ़ें। आईआईटी कानपुर से वह पढ़े। आईएएस बने। अमेरिका से पढ़ाई की। सिलिकन वैली का आकर्षक प्रस्ताव छोड़ा। मुल्क लौटे। अनेक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद संभाला।

समृद्ध अनुभव के बाद आधार के लिए चुने गए। नंदन नीलेकणि के साथ इस प्रोजेक्ट को मुकाम तक पहुंचाया। 1983 से प्रशासन में उन्होंने कंप्यूटर का इस्तेमाल किया। बड़े पैमाने पर होने वाले विभागीय स्थानांतरण में। भूमि रिकॉर्ड अपडेट करने में। चुनावों से लेकर खोए और मिले हथियारों के डाटा बेस निजी कंप्यूटर पर तैयार कर। अपराध के अनेक अनसुलझे गुत्थी सुलझाकर।

प्रशासन में ऐसे अनेक ‘इनोवेटिव प्रयोग’ 1985 में किए। जिला अधिकारी के रूप में आरएस शर्मा और आईआईटी कानपुर के उनके मित्र अरविंद वर्मा (उस जिले के पुलिस अधीक्षक), दोनों ने मिलकर 1985 में ‘कंप्यूटर इन डिस्ट्रिक एडमिनिस्ट्रेशन’ बुकलेट लिखी। बाद में चलकर यह ई-गवर्नेंस का मुख्य थीम बना। याद रखिए ये प्रयोग 1985 के आसपास हो रहे थे।

शायद दुनिया को तब इसकी आहट नहीं थी। हम भारतीय नए प्रयोग के प्रति संजीदा होते, तो दुनिया में गवर्नेंस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी से बदलाव के अगुआ होते। हमारी राजनीति या विधायिका इन प्रयोगों के प्रति सजग होती, तो क्या भारत में आज ‘डिजिटल इंडिया’ का अभियान चलाना पड़ता?

आईटी इंडस्ट्री में हमारा डंका दुनिया में बजा। यह प्राइवेट सेक्टर का उद्यम-प्रयास था। यह सब जानना ‘आई ओपनर’ है। पर सारे प्रयास निजी थे। इन चीजों को संस्थागत मदद मिलती, सरकार के स्तर पर इन्हें अपनाया जाता, तो आज भारत टेक्नोलॉजी के बल गवर्नेंस के क्षेत्र में कहां पहुंचा होता?

आधार से डीबीटी (डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर) का जन्म। लीकेज का बंद होना। रेल, सरकारी प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अपराध नियंत्रण में तकनीक का इस्तेमाल, जैसे न जाने कितने क्षेत्रों में कंप्यूटर प्रयोग, डाटा एनालिसिस, आईसीटी का उपयोग आज जीवन का हिस्सा है। यह सब दशकों पहले मुमकिन था।

हमारी व्यवस्था में ऐसे प्रयोगों को बढ़ावा देने, अपनाने, उत्साहित करने का माहौल नहीं था। खासतौर से नौकरशाही, तो पटरी-लीक से उतरना नहीं चाहती। आधार प्रोजेक्ट के विवरण से भी स्पष्ट है कि जो ऐसे नये प्रयोग करते हैं, वह चाहे प्रशासन हो या व्यवस्था, अकेले होते हैं। उनके निजी मनोबल, संकल्प से ऐसी चीजें संभव होती हैं।

पुस्तक से यह निष्कर्ष साफ है कि हम ऐसे अधिक से अधिक टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट बनाएं, तो हमारे देश के गवर्नेंस और देशवासियों के जीवन पर चमत्कारी असर होगा। महज युवा एक संकल्प कर लें कि वे सोशल मीडिया पर जो रोज लगभग 2.30 घंटे गुजारते हैं, उसका एक हिस्सा अपने आसपास के जीवन को बेहतर बनाने में लगाएं।

सार्वजनिक योजनाओं पर निगाह रखें। हर चुनौती का समाधान टेक्नोलॉजी से निकालने के लिए तत्पर हों, तो हालात बदल जाएंगे। (ये लेखक के अपने विचार हैं)



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हरिवंश, राज्यसभा के उपसभापति।


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पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश के आसार; पटना में अभी कोहरे से राहत नहीं

मंगलवार से पश्चिमी विक्षोभ के चलते उत्तरी हवाएं मैदानी इलाकों की ओर आगे बढ़ेंगी। इससे इससे राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार में शुक्रवार और शनिवार को बारिश के आसार हैं। राजस्थान में 15 दिसंबर के बाद से पारा 4 डिग्री तक गिरेगा। मध्यप्रदेश में अरब सागर से आ रही नमी के कारण भोपाल, इंदौर समेत कई इलाकों में बूंदाबांदी हो सकती है। बिहार में भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण 15-16 को बारिश के आसार हैं। इससे ठंड सकती है। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार अभी कोहरे से राहत नहीं मिलती दिख रही है।
राजस्थान में नहीं लुढ़क रहा दिन-रात का पारा
दिसंबर के दस दिन गुजर गए लेकिन दिन-रात का पारा लुढ़कने का नाम ही नहीं ले रहा। ऐसे में कड़ाके की सर्दी तो दूर हल्की ठंड भी नहीं महसूस हो रही। इससे पहले मौसम विशेषज्ञों ने दावा किया था कि ला-नीना के प्रभाव के चलते इस बार जोरदार सर्दी पड़ेगी लेकिन एंटी साइक्लोन सिस्टम उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं को आगे बढ़ने से रोक रहा है। ऐसे में पश्चिमी विक्षोभ भी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पा रहे। मौसम वैज्ञानिक डीपी दुबे ने बताया कि अरब सागर से आने वाली हवाएं जिन्हें दक्षिणी हवाएं भी कहते है, इनका प्रभाव बना है। ऐसे में दिन का पारा सामान्य से अधिक है।
भोपाल, इंदौर में गुरुवार से ही बादल
अरब सागर से आ रही नमी के कारण गुरुवार सुबह से ही बादल छा गए थे। इसके कारण ज्यादा तीखी धूप नहीं चटक सकी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बादल 3000 मीटर ऊंचाई के थे। ये मीडियम क्लाउड कहलाते हैं। मौसम विज्ञान में इन बादलों को अल्टरो कुंबलस बादल कहा जाता है। शुक्रवार को भोपाल, इंदौर में बूंदाबांदी हो सकती है।
पंजाब में दो दिन बारिश के आसार, फिर शीतलहर
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के चलते सूबे के कई जिलों में शुक्रवार और शनिवार को बारिश होने की संभावना है। आईएमडी के मुताबिक वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर में बारिश हो सकती है। 13 और 14 दिसंबर को घनी धुंध व शीत लहर की शुरूआत हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में न्यूनतम पारा औसत से 5 पॉइंट्स तक ऊपर चल रहा है। सूबे का औसतन न्यूनतम तापमान 12 डिग्री तक रिकॉर्ड हुआ। बदलाव खाड़ी की हवाओं में नमी की वजह से है।
हरियाणा में भी हल्की बरसात की उम्मीद
पहाड़ों पर जारी बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर शनिवार से दिखने लगेगा। अगले दो दिन यानी 11 और 12 दिसंबर को प्रदेश के कई इलाकों में हल्की बरसात की उम्मीद है। बरसात के ठीक बाद पहाड़ों से ठंडक मैदानों की ओर तेजी से बढ़ेगी। 13 और 14 दिसंबर को कई इलाकों में गहरी से गहरी धुंध पड़ सकती है। जबकि 17 के बाद कड़ाके की ठंडक का दौर शुरू हो सकता है। इस अवधि में पारा तेजी से कम होने की उम्मीद बनेगी।
बिहार में पश्चिमी विक्षोभ के कारण 15-16 को बारिश के आसार, बढ़ेगी ठंड
बिहार में अभी कोहरे से राहत नहीं मिलने वाली। खासकर सुबह 10 बजे तक अधिकांश जिलों में घना कोहरा छाएगा। 15-16 दिसंबर को पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव हो रहा है, जिसके कारण हल्की बारिश के आसार हैं। इसके बाद ही आसमान साफ होगा और रात के तापमान में कमी आएगी। इसके बाद ठंड में बढ़ोतरी होगी। मौसम विज्ञान केंद्र पटना की वैज्ञानिक आरती गुप्ता ने बताया कि गुरुवार को गया में दृश्यता 100 मीटर तक पहुंच गई। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच अंतर में कमी बरकरार है, जिससे ठंड महसूस हो रही है।



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इंदौरः नमी की वजह से गुरुवार सुबह से ही बादल छा गए थे। तस्वीर सुबह 7 बजे एयरपोर्ट रोड की है।


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राज्यसभा में विरोध के बावजूद पास हुआ था नागरिकता बिल, इसके बाद भड़के दंगों में 50 से ज्यादा की जान गई

11 दिसंबर 2019 को यानी आज से एक साल पहले राज्यसभा में एक बिल के पक्ष में 125 और खिलाफ में 99 वोट पड़े थे। यह बिल था नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizen Amendement Act)। अगले दिन 12 दिसंबर 2019 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। देशभर में भारी विरोध के बीच बिल दोनों सदनों से पास होने के बाद कानून की शक्ल ले चुका था। इसे गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया था।

2016 में नागरिकता कानून में बदलाव के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 (CAA) पेश किया गया। इसमें 1955 कानून में कुछ बदलाव किया जाना था। बदलाव थे, भारत के तीन मुस्लिम पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए अवैध गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देना। 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा। कमेटी ने 7 जनवरी 2019 को रिपोर्ट सौंपी। 8 जनवरी 2019 को विधेयक पास हुआ। उस समय राज्यसभा में यह विधेयक पेश नहीं हो पाया।

संसदीय प्रक्रिया का एक नियम है कि अगर कोई विधेयक लोकसभा में पास हो जाता है और राज्यसभा में पास नहीं होता है और इसी बीच अगर लोकसभा कार्यकाल खत्म हो जाता है तो विधेयक प्रभाव में नहीं रहता है। इसे फिर से दोनों सदनों में पास कराना जरूरी होता है। इस वजह से इस कानून को 2019 में फिर से लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना पड़ा।

नए कानून में क्या है?
पिछले साल जब देश में CAA कानून बना तो देशभर में विरोध भी जोर पकड़ गया। दिल्ली का शाहीन बाग इस कानून के विरोध से जुड़े आंदोलन का केंद्र बिंदु था। कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के प्रवासियों के लिए नागरिकता कानून के नियम आसान बनाए गए। इससे पहले नागरिकता के लिए 11 साल भारत में रहना जरूरी था, इस अवधि को घटाकर 1 से 6 साल कर दिया गया।

फरवरी 2020 में दिल्ली में CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी। इसमें मुदस्सिर खान की भी मौत हुई। फोटो मुदस्सिर के शव के पास बैठे उनके बेटे की है।

कानून के विरोध में भड़के दंगों में 50 से ज्यादा की जान गई
लोकसभा में आने से पहले ही ये बिल विवाद में था। लेकिन जब ये कानून बन गया, तो उसके बाद इसका विरोध और तेज हो गया। दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। 23 फरवरी 2020 की रात जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर भीड़ के इकट्ठा होने के बाद भड़की हिंसा, दंगों में तब्दील हो गई। दिल्ली के करीब 15 इलाकों में दंगे भड़के। कई लोग जिंदा जला दिए गए, तो कई लोगों को चाकू-तलवार जैसे धारदार हथियारों से हमला कर मार दिया गया। इन दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। सैकड़ों घायल हुए।

देश के मशहूर कवि प्रदीप का निधन हुआ था

6 फरवरी 1915 को मध्यप्रदेश के उज्जैन के बड़नगर कस्बे में एक शख्स का जन्म हुआ था। इसी के 48 साल बाद 27 जनवरी 1963 में दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी में लता मंगेशकर ने एक गीत गया। जिसके बोल थे 'ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंखों में भर लो पानी'। गीत खत्म होते ही स्टेडियम में मौजूद नेहरू समेत सभी लोगों की आंखें नम थीं।

यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की याद में लिखा गया था। गीत लिखने वाले थे कवि प्रदीप। वैसे इनका मूल नाम रामचंद्र नारायण द्विवेदी था। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें उपनाम प्रदीप दिया था। उन्हें 1997-1998 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके लेखन के स्तर को इस बात से भी समझा जा सकता है कि उन्होंने हर तरह के गीत लिखे। उनके प्रमुख गीतों मे थे- ऐ मेरे वतन के लोगो, आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं, दे दी हमें आजादी, हम लाए हैं तूफान से, मैं तो आरती उतारूं, पिंजरे के पंछी रे, तेरे द्वार खड़ा भगवान, दूर हटो ऐ दुनिया वालों। 11 दिसंबर 1998 में मुंबई में उनका निधन हो गया।

भारत और दुनिया में 11 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 1687: ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास में नगर निगम बनाया था।
  • 1882: तमिल कवि और पत्रकार सुब्रह्मण्यम भारती का जन्म हुआ था।
  • 1935: भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जन्म हुआ था।
  • 1922: भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता दिलीप कुमार का जन्म हुआ था।
  • 1931: ओशो रजनीश का जन्म हुआ था।
  • 1941: वर्ल्ड वॉर II में जर्मनी और इटली ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था।
  • 1946: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
  • 1946: यूरोपीय देश स्पेन को संयुक्त राष्ट्र से निलंबित किया गया।
  • 1964: संयुक्त राष्ट्र के यूनिसेफ की स्थापना हुई।
  • 1969: भारत शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद का जन्म।
  • 1983: जनरल एचएम इरशाद ने खुद को बांग्लादेश का राष्ट्रपति घोषित किया।
  • 2001: चीन को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में एंट्री मिली।
  • 2002: 11 दिसंबर को इंटरनेशनल माउंटेन डे घोषित किया। इस दिन यूएन जनरल असेंबली ने रिजोल्यूशन 57/245 अपनाया।
  • 2012: भारत रत्न सम्मानित प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर का निधन।


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Today History: Aaj Ka Itihas India World December 11 Update | Citizenship Bill Passed Date, Lyricist Kavi Pradeep Death


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किसान मचाए शोर, दौड़ लगाए डीजल-पेट्रोल



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Farmers made noise, ran diesel-petrol


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किसानों और सरकार के बीच फिर ठनी; चीफ जस्टिस की मां से ठगी; नई संसद का शिलान्यास

नमस्कार!

किसानों ने कहा कि सरकार उनके आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उधर, सरकार का कहना है कि हमने किसानों के सभी सवालों के जवाब दिए। किसान फैसला नहीं कर पा रहे हैं, यह चिंता की बात है। बहरहाल, शुरू करते हैं न्यूज ब्रीफ।

सबसे पहले देखते हैं, बाजार क्या कह रहा है

  • BSE का मार्केट कैप 182.20 लाख करोड़ रुपए रहा। करीब 54% कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही।
  • 3,071 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। इसमें 1,241 कंपनियों के शेयर बढ़े और 1,665 कंपनियों के शेयर गिरे।

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर

  • चारा घोटाले मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई होगी।
  • आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी की भी इजाजत देने के फैसले के खिलाफ देशभर में डॉक्टरों की हड़ताल।
  • अमेरिका में कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत हो सकती है।

देश-विदेश

चीफ जस्टिस की मां से ढाई करोड़ रुपए की ठगी

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की मां के साथ ढाई करोड़ रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया। आरोपी मैरिज गार्डन का काम देखता था, जो CJI की मां की संपत्ति है। आरोपी ने फर्जी रसीदें बनाकर ठगी की।

पीएम मोदी ने किया नई संसद का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में नए संसद भवन का शिलान्यास किया। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के मुताबिक, नया भवन 2 साल में बनकर तैयार हो जाएगा। 2022 में आजादी को 75 साल पूरे हो जाएंगे। दोनों सदन नए भवन से शुरू होंगे।

दिसंबर में गर्मी का 9 साल का रिकॉर्ड टूटा

राजस्थान के कोटा में बुधवार को अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इससे यहां दिसंबर में गर्मी का 9 साल का रिकॉर्ड टूट गया। वहीं, उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान सामान्य से कम रहा।

कोरोना टेस्टिंग का आंकड़ा 15 करोड़ के पार

देश में कोरोना टेस्टिंग का आंकड़ा 15 करोड़ के पार हो चुका है। वहीं, पॉजिटिविटी रेट घटकर 6.47% हो गया है। इसमें हर दिन गिरावट आ रही है। इस बीच, संक्रमितों का आंकड़ा 98 लाख के करीब पहुंच चुका है।

दहशत में पाकिस्तान, परेशान सेना हाई अलर्ट पर

पाकिस्तान में दहशत का माहौल है। वहां की सेना परेशान है। वजह है भारतीय सेना के मिलिट्री ऑपरेशन की खबर। इसके बाद से ही पाकिस्तानी सेना अलर्ट मोड पर है। यह खुलासा द न्यूज की रिपोर्ट में हुआ है।

एक्सप्लेनर

क्या आज इलाज नहीं होगा? कोरोना मरीजों का क्या होगा?

आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने के खिलाफ एलोपैथिक डॉक्टर आज हड़ताल पर रहेंगे। ये हड़ताल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA ने बुलाई है। सुबह 6 से शाम 6 बजे तक डॉक्टर काम नहीं करेंगे। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि डॉक्टर हड़ताल क्यों कर रहे हैं?

-पढ़ें पूरी खबर

पॉजिटिव खबर

नौकरी नहीं मिली तो शुरू किया शॉप ऑन व्हील

यह कहानी है जम्मू के रहने वाले 26 वर्षीय अताउल्लाह बुखारी की। उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पढ़ाई की। नौकरी नहीं मिली तो सब्जी और फल बेचने का काम शुरू किया। नए और हाईटेक तरीके के चलते कम समय में ही अताउल्लाह का स्टार्टअप शॉप ऑन व्हील चर्चित हो गया।

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सुर्खियों में और क्या है

  • अंबानी के घर खुशियां आईं। मुकेश-नीता अंबानी दादा-दादी बन गए। बड़े बेटे आकाश और श्लोका के घर बेटे का जन्म हुआ।
  • राजस्थान के एन्टी करप्शन ब्यूरो के डीएसपी बी. मीणा 80 हजार रु. रिश्वत लेते पकड़े गए। जबकि एक दिन पहले ही एन्टी करप्शन डे था।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पॉलिसी ऑन स्कूल बैग 2020 जारी की। इसके तहत, स्कूलों में दूसरी क्लास तक के बच्चों को होम वर्क न देने का प्रस्ताव है।
  • ब्रिटेन पहला देश बना, जिसने पहली स्वीकृत कोरोना वैक्सीन लॉन्च की। वॉलेंटियर्स को डोज दिए गए। इनमें से 2 की तबियत बिगड़ गई।


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Farmers news Updates| CJI News | Dainik Bhaskar Top News Morning Briefing Today


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गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

कोहरे की चादर में लिपटा बिहार, अलर्ट जारी, राजस्थान के कोटा में दिसंबर का 9 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

उत्तर भारत के कई हिस्सों में बुधवार का न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रहा। बिहार घने कोहरे की चपेट में है। पटना के न्यूनतम तापमान में 6.8 डिग्री सेल्सियस की कमी आई। राजस्थान के कोटा में दिसंबर में अधिकतम तापमान का 9 साल का रिकाॅर्ड टूट गया। यहां अधिकतम तापमान 32.5 रिकाॅर्ड किया गया। वहीं इंदौर सहित मध्य प्रदेश के तापमान में फिर बढ़ोतरी हुई है। मौसम वैज्ञानिक इसकी वजह बंगाल की खाड़ी से आई नमी बता रहे हैं।

घने कोहरे की चपेट में बिहार

बिहार में अगले दो दिनों तक काेहरे की चादर बिछी रहेगी। खासकर दिन के 10 बजे तक कोहरा ज्यादा घना होगा। इससे दृश्यता भी प्रभावित होगी। कोहरे के चलते विमानों व ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित हो रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने कोहरे से संबंधित अलर्ट भी जारी किया है। इधर, दो दिनों में दिन के तापमान में 6.8 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है, जिससे राजधानी में ठंड बढ़ गई है।

वैज्ञानिक सुधांशु कुमार का कहना है कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर लगातार घटता जा रहा है, जिससे ठंड में बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार को पटना के अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच मात्र 5.4 डिग्री सेल्सियस का अंतर रह गया।

कोटा में 9 साल का रिकाॅर्ड टूटा, अधिकतम पारा 32.5 डिग्री

बुधवार काे राजस्थान के कोटा में दिसंबर में अधिकतम तापमान का 9 साल का रिकाॅर्ड टूट गया। बुधवार काे शहर का अधिकतम तापमान 32.5 और न्यूनतम 13.3 डिग्री रिकाॅर्ड किया गया। इससे पहले दिसंबर 2011 में अधिकतम पारा 32.8 डिग्री दर्ज किया गया था। विजिबिलिटी 1500 मीटर रही। सुबह धुंध बनी रही। वहीं सुबह 8:30 बजे का पारा 18.2, सुबह 11:30 बजे 29.2, दाेपहर 2:30 बजे 31.8 और शाम 5:30 बजे गिरकर 28.4 डिग्री रिकाॅर्ड किया गया।

इंदौर में रात में ठंडक, लेकिन न्यूनतम पारा सामान्य से 3 डिग्री ज्यादा

बंगाल की खाड़ी से नमी आने की वजह से इंदौर सहित मध्य प्रदेश में तापमान में फिर बढ़ोतरी हुई है। इसका असर लगभग छह दिन रहेगा। बादलों की वजह से दिन के तापमान में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन रात का पारा औसत से एकाध डिग्री अधिक ही रहेगा।

ठंड के लिहाज से दिसंबर सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस महीने और सीजन में पारा केवल 11.2 डिग्री के ही न्यूनतम स्तर तक गया है। कड़ाके की ठंड के लिए अभी इंतजार ही करना होगा। 20 दिसंबर के बाद ही मौसम सर्द होने के आसार हैं। प्रदेश के प्रमुख शहर भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में भी अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री के बीच ही रिकॉर्ड हुआ।



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बिहार में कोहरे के चलते विमानों व ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित हो रहा है।


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किसानों ने फिर लगाया देशभर में आंदोलन का दांव, राजस्थान में कांग्रेस के हाथ से फिसले गांव

नमस्कार!
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोरोना के मरीजों और होम क्वारैंटाइन किए गए संदिग्धों के घर के बाहर क्वारैंटाइन के पोस्टर नहीं लगाए जाने चाहिए। इसके लिए नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत अधिकारी का आदेश जरूरी है। कोर्ट ने कहा था कि घर के बाहर पोस्टर लगने के बाद मरीजों से अछूतों जैसा बर्ताव होता है।
बहरहाल, शुरू करते हैं न्यूज ब्रीफ।

सबसे पहले देखते हैं, बाजार क्या कह रहा है

  • BSE का मार्केट कैप 182.81 लाख करोड़ रुपए रहा। इसमें 55% कंपनियों के शेयरों में बढ़त रही।
  • 3,147 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। इसमें 1,753 कंपनियों के शेयर बढ़े और 1,225 कंपनियों के शेयर गिरे।

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर एक बजे दिल्ली में संसद भवन की नई बिल्डिंग का भूमि पूजन करेंगे।
  • जम्मू-कश्मीर में DDC चुनाव के लिए आज 5वें चरण की वोटिंग होगी। यहां 8 चरणों में चुनाव होने हैं, जो 28 नवंबर से 19 दिसंबर तक चलेंगे।

कृषि कानून सुधारों पर केंद्र और किसानों में बिगड़ी बात

कृषि कानूनों में सुधारों का केंद्र का प्रस्ताव किसानों ने बुधवार को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार नया प्रपोजल भेजती है, तो विचार किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि देश में आंदोलन तेज किया जाएगा। अंबानी और अडानी के प्रोडक्ट, भाजपा नेताओं का बायकॉट होगा। 12 दिसंबर को देशभर में टोल प्लाजा फ्री किए जाएंगे और दिल्ली-जयपुर हाईवे को ब्लॉक किया जाएगा। इस ऐलान के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने गृह मंत्री अमित शाह के साथ 2 घंटे बैठक की।

राजस्थान में गांवों की परीक्षा में कांग्रेस फेल

राजस्थान की 636 जिला परिषद सीटों और 222 पंचायत समितियों के लिए 4371 सदस्यों के चुनाव के नतीजे बुधवार को आए। राज्य में कांग्रेस की सरकार और किसान आंदोलन के बावजूद इन चुनाव में भाजपा को बढ़त मिली। जिला परिषद की 353 और पंचायत समिति की 1989 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव आज, उप जिला प्रमुख और उप प्रधान का चुनाव 11 दिसंबर को होगा।

गांवों को वाई-फाई से जोड़ेगी सरकार

केंद्र सरकार ने इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को तीन बड़ी योजनाओं की घोषणा की। इनमें एक पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क एक्सेस स्कीम 'पीएम वाणी' है। इसका मकसद गांव-गांव तक वाई-फाई नेटवर्क पहुंचाना है। दूसरी योजना अरुणाचल प्रदेश में 4जी नेटवर्क और लक्षद्वीप में फाइबर केबल पहुंचाना है। इसके साथ ही आत्मनिर्भर रोजगार योजना को भी मंजूरी दी गई है।

सोनू सूद ने जरूरतमंदों के लिए प्रॉपर्टी गिरवी रखीं

एक्टर सोनू सूद ने 10 करोड़ रुपए का लोन लेने के लिए अपनी 8 प्रॉपर्टी गिरवी रख दी हैं। सोनू का मकसद लोन की रकम से जरूरतमंदों की मदद करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनू ने मुंबई के जुहू इलाके में दो दुकानें और छह फ्लैट्स गिरवी रखकर लोन के लिए अप्लाई किया है। सोनू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि वे बुजुर्गों के घुटनों की सर्जरी करवाना चाहते हैं।

पार्थिव पटेल ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया

सबसे कम उम्र में बतौर विकेटकीपर टेस्ट डेब्यू करने वाले पार्थिव पटेल (35) ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। क्रिकेट में उनका 18 साल का करियर रहा। उन्होंने 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट से डेब्यू किया था। तब पार्थिव की उम्र 17 साल 153 दिन थी। उन्होंने आखिरी टेस्ट जनवरी 2018 और आखिरी वनडे 8 साल पहले 2012 में खेला था।

US का दावा- चीन में हिंदू लड़कियों की मार्केटिंग करता है पाकिस्तान

एक अमेरिकी डिप्लोमैट के मुताबिक, पाकिस्तान हिंदू और ईसाई लड़कियों को चीन में दासी बताकर उनकी मार्केटिंग करता है। यह आरोप सैमुअल ब्राउनबैक ने लगाया है। वे यूएस एडमिनिस्ट्रेशन में रिलीजियस फ्रीडम डिपार्टमेंट के बड़े अफसर हैं। सैमुअल के मुताबिक, अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को चीन के लोगों से शादी के लिए मजबूर किया जाता है।

आज की पॉजिटिव खबर
15 साल नेगेटिविटी में रहने के बाद चॉकलेट बिजनेस से पॉजिटिविटी फैला रहीं

मुंबई की शालिनी गुप्ता जब 9 साल की थीं, तो उनकी स्किन पर सफेद दाग नजर आने लगे। उन्हें ल्यूकोडर्मा था। यह पता चलते ही फैमिली का व्यवहार बदल गया। 15 साल तक शालिनी घुट-घुटकर जीती रहीं। फरवरी 2019 में उन्होंने सेल्फ डेवलपमेंट की ट्रेनिंग ली। इसके बाद चॉकलेट पसंद करने वालीं शालिनी ने तय किया कि वे ऐसा काम करेंगी, जिसमें चॉकलेट भी हो और पॉजिटिविटी भी।

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भास्कर एक्सप्लेनर
वैक्सीनेशन के बाद भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत क्यों?

दुनिया अब कोरोना की वैक्सीन की ओर बढ़ रही है। ब्रिटेन में मंगलवार को इसकी शुरुआत भी हो गई। लेकिन वैक्सीन लगने के बाद होगा क्या? वैक्सीन कितनी इफेक्टिव होगी? इससे किस तरह से लोग प्रोटेक्ट होंगे? क्या वैक्सीन लगने के बाद हमारी पुरानी लाइफ लौट आएगी, जिसमें न मास्क होगा, न सैनेटाइजर और न सोशल डिस्टेंसिंग? जानिए इन सवालों के जवाब।

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सुर्खियों में और क्या

  • इंडियन नेवी ने इजराइल से स्मैश 2000 प्लस फायर कंट्रोल सिस्टम खरीदने के सौदे को मंजूरी दे दी है। इसे राइफल पर फिट किया जा सकेगा। इससे छोटे ड्रोन्स को निशाना बनाया जा सकता है।
  • जम्मू-कश्मीर में पुलवामा के टिकेन इलाके में बुधवार तड़के सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 3 आतंकी मारे गए। बताया जा रहा है कि ये सभी आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़े थे।
  • मध्यप्रदेश में छतरपुर के पुरवा गांव में बारातियों से भरी कार कुएं में गिर गई। इसमें ड्राइवर समेत छह लोगों की मौत हो गई। सड़क किनारे खुदे कुएं में बाउंड्री नहीं थी।
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में चीनी वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। इसकी इफेक्टिवनेस 86% आई है। ट्रॉयल के शुरुआती डेटा के आधार पर यह दावा किया गया है।


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विरोध के लिए हाइवे चाहिए, इसकी 4 लेन और बढ़वाइए



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बचपन में ल्यूकोडर्मा हुआ, 15 साल नेगेटिविटी में रहीं; अब चॉकलेट बिजनेस से फैला रहीं पॉजिटिविटी

आज की कहानी मुंबई की 26 साल की शालिनी गुप्ता की है। शालिनी 9 साल की थीं तो उनकी स्किन पर सफेद दाग नजर आने लगे। माता-पिता को लगा कि ये कोई बीमारी है। वे शालिनी को डॉक्टर के पास ले गए। वहां पता चला कि शालिनी को कोई बीमारी नहीं बल्कि ल्यूकोडर्मा है। यह एक तरह की स्किन कंडीशन है।

इसके बाद शालिनी की जिंदगी ही बदल गई। उन्हें लेकर परिवार का बर्ताव भी बदल गया। करीब 15 साल तक शालिनी ने घुट-घुटकर जीती रहीं। पिछले साल फरवरी में शालिनी ने सेल्फ डेवलपमेंट की ट्रेनिंग ली। उन्होंने तय किया वे जिसे समाज कमी मानता है वे उसे ही अपनी ताकत बनाएंगी। शालिनी ने फैसला लिया कि वे ऐसा काम करेंगी, जिसमें पॉजिटिविटी हो।

आखिरकार शालिनी ने 2019 में अपने बिजनेस ‘पॉजिटिव चॉकलेट बाय शालिनी’ की शुरुआत की। शालिनी के मुताबिक, मेरी कोशिश है कि मैं लोगों को खुद से प्यार करना सिखाऊं। मेरे इस बिजनेस का मकसद है- स्प्रेड लव विथ चॉकलेट। मैं डार्क चॉकलेट बनाती हूं। यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है।

मेरी ख्वाहिश है कि मैं लोगों में पॉजिटिविटी ला सकूं इसलिए हर चॉकलेट पीस के साथ एक पेपर स्लिप पर अपने हाथों से पॉजिटिव मैसेज लिखकर देती हूं।’

ल्यूकोडर्मा के कारण बचपन में शालिनी के शरीर पर सफेद दाग हो गए थे।

अपने शुरुआती जीवन के बारे में शालिनी ने बताया कि मुझे ल्यूकोडर्मा हुआ, उस वक्त मैं नानी के घर रहती थी। डॉक्टर के पास से नानी के घर पहुंची तो परिवार का बर्ताव पूरी तरह बदला नजर आया।

घर में नानी बैठी हुई थीं। उन्होंने आवाज देकर पानी मांगा। वहां कोई नहीं था तो मैं उठकर गई और नानी को पानी का गिलास देने लगी। उन्होंने कहा कि मैं तेरे हाथ से पानी नहीं पीयूंगी। तब मुझे बहुत धक्का लगा। आखिर इसमें मेरी क्या गलती है जो मुझसे ऐसे भेदभाव किया जा रहा है। कल तक जो नानी मुझसे प्यार करती थीं, वहीं आज मेरे हाथ का पानी पीने से मना कर रही हैं।

शालिनी बताती हैं कि ल्यूकोडर्मा की पहचान होने के बाद उनके मम्मी-पापा ने भी उन्हें शादियों और किसी पब्लिक प्रोग्राम में ले जाना बंद कर दिया। उन्हें लगता था कि लोग क्या सोचेंगे।

वह कहती हैं कि ल्यूकोडर्मा का पता चलने के बाद से मेरा डॉक्टर्स के यहां आना-जाना शुरू ​हो गया था। एलोपैथी से लेकर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक डॉक्टर्स के पास जाना लगा रहा। आए दिन मैं किसी न किसी डॉक्टर के क्लीनिक के बाहर लाइन में बैठकर अपने नंबर का इंतजार करती थी। मुझे सिर्फ इस बात का इंतजार रहता था कि कब डॉक्टर मुझे चेक करे और मैं अपनी जान छुड़ाकर वहां से भागूं।

एक वक्त में 24 गोलियां लेनी पड़ती थीं

शालिनी कहती हैं कि मैं छठवीं क्लास में पढ़ती थी तो एक ही वक्त पर 24 गोलियां लेनी होती थी। मुझे दवाइयां खाना पसंद नहीं था लेकिन पैरेंट्स के दबाव में वह सब करना पड़ता था। इन दवाइयों के साथ बहुत सारे रेस्ट्रेक्शन लगने लगे। पैरेंट्स कहते थे कि चॉकलेट नहीं खाना, टमाटर नहीं खाना, दही नहीं खाना, नॉनवेज नहीं खाना है।

उस वक्त मुझे बहुत से परहेज करने होते थे। मुझे सबसे ज्यादा दुख चॉकलेट नहीं खाने का था। चॉकलेट ऐसी चीज होती है जो बचपन में हर बच्चे की फेवरेट होती है। किसी बच्चे से अगर चॉकलेट छीन लो तो उस पर क्या बीतती है यह कोई बच्चा ही जान सकता है।

पैरेंट्स रोकते थे, इसलिए छिपकर खाईं चॉकलेट

शालिनी ने बताया कि उस वक्त मुझे पांच रुपए पॉकेटमनी मिलती थी, ताकि स्कूल ब्रेक के दौरान भूख लगे तो कुछ खा सकूं। घर आकर मम्मी पूछती थीं कि क्या खाया तो मैं झूठ बोल देती थी कि वड़ा पाव खाया या जूस पी लिया। मैं पैसे बचाकर चॉकलेट खाती थी। कभी अपनी फैमिली के सामने चॉकलेट नहीं खा पाई।

शालिनी कहती हैं कि लोग क्या सोचेंगे, इसकी वजह से मुझे काफी परेशानियां झेलनी पड़ीं। मुझे कई साल तक घर में ही बंद रहना पड़ा।आखिरकार एक वक्त आया जब मैंने घर में कैद रहने का विरोध जताना शुरू किया। मैंने कहा कि मुझे भी बाहर जाना है और खुलकर अपनी लाइफ जीनी है।

तब मेरे पैरेंट्स को भी समझ आया कि ये कोई बीमारी नहीं बल्कि एक स्किन कंडीशन है। धीरे-धीरे मैं बाहर निकलने लगी, पैरेंट्स भी साथ लेकर जाने लगे।

शालिनी कहती हैं- मैं सिर्फ चॉकलेट का बिजनेस नहीं करना चाहती थी, इसके साथ-साथ मुझे पॉजिटिविटी भी फैलानी थी।

वह कहती हैं कि मम्मी हमेशा से चाहती थीं कि मैं चार्टर्ड अकाउंटेंसी करूं। इसलिए मैंने सीए की पढ़ाई शुरू कर दी। दो साल पहले मैंने महसूस किया कि मैं सीए तो अपनी मम्मी की वजह से कर रही हूं। ये मुझे कभी करना ही नहीं था। मैंने कोई और विकल्प भी एक्सप्लोर ही नहीं किया था।

इसलिए मैंने अपनी पर्सनैलिटी पर काम करना शुरू किया और समझा कि आखिर मैं क्या करना चाहती हूं। तब मुझे समझ आया कि मेरा सबसे बड़ा पैशन चॉकलेट है।

चॉकलेट बिजनेस शुरू करने के बारे में शालिनी कहती हैं कि जो चीज मेरी सबसे फेवरेट थी, उसे कई साल तक मुझसे दूर रखा गया। मैंने सोचा क्यों न मैं उसी को लेकर कुछ करूं। मैं सिर्फ चॉकलेट का बिजनेस नहीं करना चाहती थी, इसके साथ-साथ मुझे पॉजिटिविटी भी फैलानी थी।

शालिनी कहती हैं कि कुछ लोग तो सफेद दाग को अभी भी छुआछूत की बीमारी मानते हैं। वह कहती हैं ‘ अगर आपको कोई चीज पसंद है तो उसे पीछे मत छोड़िए, उसे लेकर आगे बढ़िए, बिना ये सोचे कि लोग क्या कहेंगे और क्या सोचेंगे।’



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In childhood, leukoderma occurred for 15 years in negativity; Now Positivity is spreading from its chocolate business


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अपनी तारीफ खुद न करें, हमारे अच्छे काम कोई दूसरा बताएगा तो कामयाबी बड़ी हो जाएगी

कहानी- श्रीरामचरित मानस में हनुमानजी माता सीता का पता लगाने के लिए लंका पहुंचे। वहां विभीषण को श्रीराम के पक्ष में किया, सीता को श्रीराम का संदेश दिया, लंका दहन किया, रावण को अपना पराक्रम दिखाया। इतने बड़े काम करने के बाद हनुमानजी सकुशल श्रीराम के पास लौट आए।

इतनी बड़ी सफलता के बाद भी वे श्रीराम के सामने मौन खड़े थे। वे जानते थे कि अपनी तारीफ खुद नहीं करनी चाहिए। उस समय जामवंत और सुग्रीव ने उनकी तारीफ की और श्रीराम को वह सब बताया, जो हनुमानजी ने लंका में किया था।

पूरी बात सुनने के बाद श्रीराम ने भी हनुमानजी की प्रशंसा की, तो उन्होंने भगवान के चरण पकड़ लिए कहा, 'प्रभु ऐसा न करें, आप तो मेरी रक्षा करें।' हनुमानजी ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि प्रशंसा सुनने पर कहीं अहंकार न आ जाए।

उस समय किसी ने हनुमानजी से पूछा, 'जब श्रीराम प्रशंसा कर रहे थे, तो आपने उनके पैर क्यों पकड़ लिए थे?'

तब हनुमानजी ने समझाया, 'जब भी कोई आपकी तारीफ करे, आपकी लोकप्रियता बढ़े तो भगवान, माता-पिता, गुरू, राष्ट्र के साथ ही जिन्होंने हमारी मदद की है, उनके चरणों में हमारी सफलता को अर्पित करना चाहिए।'

सीख- हमें जब भी कोई बड़ी सफलता मिले और लोग हमारी प्रशंसा करते हैं, तो हमें विनम्रता से उसे स्वीकार करना चाहिए। जिन लोगों ने हमारी मदद की है, उनका आभार जरूर मानें। अपनी तारीफ खुद करने से बचें, वरना हमारे स्वभाव में अहंकार बढ़ने लगेगा। ये काम दूसरों को करने देना चाहिए।



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लोगों की जान बचाने के लिए प्रेग्नेंसी में भी डटी रहीं हेल्थ वर्कर्स, अब इन्हें हटाने की तैयारी में सरकार

बात अप्रैल-मई की है। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सरकार कॉन्ट्रैक्ट पर हेल्थ वर्कर्स को अपॉइन्ट कर रही थी। 11 मई को रीवा जिले में मेरी ज्वॉइनिंग हुई। मेरा काम अलग-अलग इलाकों में जाकर सैंपलिंग करना था। इसमें हर रोज दो से तीन कोरोना पॉजिटिव आते थे। मेरे घरवाले परेशान थे। उनका कहना था कि इन हालातों में ड्यूटी करने की जरूरत क्या है? लेकिन मैंने सोचा था कि कोरोना में ड्यूटी कर रही हूं, तो हो सकता है कि सरकार आगे हमारे लिए कुछ करे। यह कहना है जयश्री मिश्रा का।

जयश्री 27 नवंबर को संक्रमित हो गईं। 26 नवंबर तक उन्होंने सैंपलिंग का काम किया था। ड्यूटी के दौरान ही उन्हें फीवर आया। बहुत थकान होने लगी। सुबह जांच करवाई, तो पॉजिटिव आईं। हालत ज्यादा खराब थी, इसलिए वो दस दिनों तक आईसीयू में रहीं। अब हॉस्पिटल से उनकी छुट्टी हो चुकी है। जिस दिन बुखार आया था, उसके अगले दिन 28 नवंबर को उन्हें पता चला कि अब सरकार उनकी सेवाएं नहीं लेना चाहती। उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया है।

जयश्री का दर्द ये है कि जब हमने कोरोना मरीजों को बचाने में अपनी जान तक दांव पर लगा दी, तो सरकार एकदम से हमारा साथ क्यों छोड़ रही है। अभी तो हमारे पास दूसरी नौकरी भी नहीं है। जहां काम करते थे, वो भी क्या पता अब रखेंगे या नहीं।

जयश्री की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें दस दिनों तक आईसीयू में रहना पड़ा।

मप्र में 6213 हेल्थ वर्कर्स हुए थे अपॉइन्ट
देशभर में राज्य सरकारों ने कोविड-19 के चलते हेल्थ वर्कर्स को कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया था। मप्र में यह नियुक्तियां अप्रैल-मई में की गई थीं। तब 6213 हेल्थ वर्कर्स को कॉन्ट्रैक्ट पर अपॉइन्ट किया गया था। शुरुआत में इनके साथ 3 महीने का करार हुआ था। यही हेल्थ वर्कर्स थे, जो अलग-अलग अस्पतालों में सेवाएं दे रहे थे। सैंपलिंग कर रहे थे। लैब में काम कर रहे थे। मरीजों को चेक कर रहे थे।

आयुष डॉक्टर्स को सरकार 25 हजार, स्टाफ नर्स को 20 हजार, एएनएम को 12 हजार, फार्मासिस्ट को 15 हजार और लैब टेक्नीशियन को 15 हजार रुपए सैलरी दे रही थी। तीन महीने की अवधि के बाद सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ा दिया। जो बढ़ते-बढ़ते अक्टूबर तक आ गया। अब 50% स्टाफ का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया है और बाकी का 31 दिसंबर तक खत्म किया जा सकता है। 4 दिसंबर को हेल्थ वर्कर्स ने राजधानी में प्रदर्शन भी किया था और मांग की थी कि स्थाई नियुक्ति दी जाए या संविदा पर रखा जाए। सरकार का कहना है कि अभी नियुक्ति के लिए बजट नहीं है।

तीन महीने की प्रेग्नेंसी थी, तब ज्वॉइन किया
कोरोना के दौर में कई हेल्थ वर्कर्स ऐसी भी थीं, जो प्रेग्नेंट थीं। फिर भी उन्होंने कोरोना वार्ड में नौकरी के लिए हामी भरी, क्योंकि हर किसी को उम्मीद थी कि सरकार आगे उन्हें संविदा नियुक्ति दे सकती है या कॉन्ट्रैक्ट बढ़ा सकती है। ऐसी ही एक स्टाफ नर्स प्रियंका पटेल हैं। प्रियंका ने 4 अप्रैल को सीधी जिले के कोविड सेंटर में ज्वॉइन किया था। इसके बाद कोविड केयर सेंटर में इनकी नियुक्ति हुई। ज्वॉइनिंग के वक्त प्रियंका को 3 महीने की प्रेग्नेंसी थी।

हमने पूछा कि प्रेग्नेंसी के बावजूद आप कोरोना में ड्यूटी के लिए तैयार हो गईं? तो बोलीं, 'परिवार ने तो मना किया था। मुझे लगा कि जब लोगों की जान खतरे में है, तो उन्हें बचाने के लिए हम जो कर सकते हैं, वह हमें करना चाहिए।'

2 अक्टूबर तक प्रियंका की ड्यूटी चली और 3 अक्टूबर को डिलेवरी हुई। कोविड के पहले प्रियंका नर्सिंग कॉलेज में पढ़ा रहीं थीं। कहती हैं कि ड्यूटी के दौरान कई बार मेरा बीपी लो हुआ। सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत होती थी। तीसरे फ्लोर तक चढ़ना पड़ता था। पति प्राइवेट जॉब में हैं, इसलिए नौकरी करना मेरे लिए जरूरी है। प्रियंका का कॉन्ट्रैक्ट अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन 31 दिसंबर तक खत्म हो सकता है।

मप्र में कई हेल्थ वर्कर्स का कॉन्ट्रैक्ट 30 नवंबर को खत्म कर दिया गया है। बाकी का 31 दिसंबर तक खत्म किया जा सकता है।

जब पद खाली पड़े हैं, तो नियुक्तियां क्यों नहीं
रीवा जिले में आयुष मेडिकल ऑफिसर शशांक शर्मा की भी कांट्रेक्चुअल नियुक्ति हुई है। वे कहते हैं कि 30 नवंबर को सरकार ने एएनएम कैडर खत्म कर दिया। अब जिले में एक और संभाग में दो फार्मासिस्ट रखे जा रहे हैं। बाकी सभी को निकाल दिया।

उन्होंने बताया कि कोरोना में जब कोई काम के लिए आगे नहीं आ रहा था, तब हम लोग आए। अब सरकार अचानक बाहर फेंक रही है। भोपाल गए, तो वहां हम पर लाठियां बरसाई गईं। शर्मा की चिंता ये भी है कि प्रदेश में जब स्वास्थ्य विभाग में हजारों पद खाली पड़े हैं, तो कोरोना वॉरियर्स को नियुक्ति देकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत क्यों नहीं किया जा रहा। हालांकि सरकार की तरफ से इन लोगों को यही कहा गया है कि अभी नियुक्ति के लिए बजट नहीं है।

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What was the compulsion that even pregnant women got ready for duty in Corona?


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मैकेनाइजेशन और मोटिवेशन; इनसे आंदोलन फसल नहीं, नस्ल बचाने की लड़ाई बन गया

बड़े व्यावसायिक घराने व्यवसाय की प्रगति के लिए ‘M-2’ रणनीतियां लागू करते हैं। मैनेजमेंट की इन्हीं रणनीतियों से सबक लेकर सिंघु बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों ने भी अपनी ‘M-2’ रणनीति बना ली है। किसानों के लिए ‘M-2’ का अर्थ है मैकेनाइजेशन और मोटिवेशन (मशीनीकरण और प्रेरणा)। इससे इनके आंदोलन को लंबी उम्र मिलती है। आंदोलन के केंद्र में मशीनों का इस्तेमाल खाना पकाने, हेल्थ, सैनिटाइजेशन के मैनेजमेंट और बिजली के लिए किया जा रहा है।

सिंघु बॉर्डर पर हजारों किसान जमा हैं। हाथ से रोटी बनाकर सभी का पेट एकसाथ भर पाना मुश्किल काम है। ऐसे में रोटियों के लिए मशीनें लगा दी गई हैं।

M-2 स्ट्रैटजी को 00 प्वाइंट में समझिए

1. खाना

अभी तक भोजन, खासतौर पर रोटी वॉलंटियर हाथों से पकाते थे। लेकिन, दो दिन से यहां रोटी बनाने की ढेरों मशीनें आ गई हैंं। बस सूखा आटा मशीन के मुंह में डालो और पकी हुई रोटी आपको मिल जाती है। इन मशीनों की क्षमता हर घंटे कम से कम 6,000 रोटियां तैयार करने की है और ये दिनभर काम कर रही हैं।

2. स्वास्थ्य-सफाई

धरना दे रहीं महिलाएं पीरियड्स के दौरान परेशान न हों, इसके लिए उन्हें ब्रांडेड सेनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सैकड़ों वॉलंटियर्स पीठ पर मच्छर मारने की फॉगिंग मशीन लादे एनएच-44 पर 300 से 500 मीटर की दूरी पर मौजूद हैं। सुबह के समय, सोनीपत जिले के नगरीय निकाय के कर्मचारियों के साथ वॉलंटियर्स के दल सड़कों से कचरा साफ करने में जुट जाते हैं। व्यक्तिगत साफ-सफाई को देखते हुए हाईवे पर अलग-अलग जगह वाॅशिंग मशीनें लगी हुई हैं, जहां कुछ ही घंटों में प्रदर्शनकारियों के कपड़े धोकर और प्रेस करके देने के लिए वॉलंटियर मुस्तैद हैं।

मोबाइल मौजूदा दौर की सबसे जरूरी चीज है। आंदोलन में कम्युनिकेशन का तार न टूटे इसकी भी पूरी व्यस्था है। जगह-जगह चार्जिंग प्वाइंट लगाए गए हैं।

3. पावर सप्लाई

ट्यूब वाॅटर पंप का संचालन करने वाली मोबाइल सोलर वैन को मोबाइल फोन चार्ज करने और बैटरी बैंक के रूप में तब्दील कर दिया गया है और वे हाईवे पर जगह-जगह सुबह से शाम तक तैनात हैं। लंगरों, खाना पकाने के स्थानों और दूसरी जगहों पर रात में रोशनी करने के लिए बैटरियों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें ट्रैक्टरों से चार्ज किया जाता है। मैनेजमेंट के सिद्धांतों को लागू करने से प्रदर्शनकारियों को बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिली है, ताकि वे अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन जारी रख सकें। वर्तमान परिस्थितियों में ये बात तर्कसंगत लगती है, लेकिन पर्याप्त मोटिवेशन यानी प्रेरणा के बगैर ये काम नहीं हो सकता। किसान किसी भी मैनेजमेंट गुरु से ज्यादा बेहतर ये बात जानते हैं।

आंदोलन का जोश ठंडा न पड़े, इसके लिए जोशीले गीत गाए जाते हैं। डीजे का इंतजाम किया गया है और युवाओं में जोश भरा जा रहा है।

4. देखकर प्रेरणा

जब युवा ट्रैक्टरों पर लगे डीजे पर ‘हल छड के पालेया जे असीं हथ हथियारां नू...’ (यदि किसान ने हल छोड़कर हथियार उठा लिए...) या ‘फसलां दे फैसले किसान करुगा’ (फसलों के फैसले किसान करेगा) जैसे प्रेरक गीतों को सुनते हैं, तो अचानक युवा प्रदर्शनकारियों की बॉडी लैंग्वेज में बदलाव देखा जा सकता है। ऐसे सैकड़ों गीत युवाओं को प्रेरणा देने के लिए सुनाए जा रहे हैं।

भगत सिह की किताबें, कवि सुरजीत पातर की तस्वीरें। टी-शर्ट पर जोश दिलाने वाले स्लोगन। हर तरह से आंदोलन को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

5. देखकर प्रेरणा

क्वालिटी पेपर पर छपी क्रांतिकारी भगत सिंह, लाल सिंह दिल, कवि सुरजीत पातर जैसे हस्तियों की तस्वीरें बांटी जा रही हैं। लोगों ने टी-शर्ट पर तस्वीरें छपवा रखी हैं। तो इनकी तस्वीरों वाली ताश की गड्डियां भी बांटी जा रही हैं। हाइवे के किनारे की दीवारों पर भी युवा प्रेरक पेंटिंग उकेर रहे हैं। हर शाम को ऐतिहासिक फिल्में दिखाई जा रही हैं।

6. भौतिक प्रेरणा

सूर्योदय होते ही 10वें गुरु गोबिंद सिंह की प्रिय- निहंग सेना के सैनिक ऊंचे घोड़ों पर सवार होकर एनएच-44 पर गश्त करते हैं, तो युवाओं में प्रेरणा की लहर दौड़ जाती है और वे रजाई छोड़ बाहर आ जाते हैं। दोपहर में 3 बजे यही समूह पारंपरिक हथियारों के साथ सिखों के मार्शल आर्ट ‘गतका’ का प्रदर्शन करता है। लोग बड़ी संख्या में इनके करतब देखने के लिए जमा होते हैं और युवा खुद को ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करते हैं। इस प्रदर्शन के दौरान युद्ध कहानियों की कमेंट्री भी होती रहती है, जिनमें इन हथियारों का उपयोग किया गया था।

यही वो तरीके हैं, जिनके जरिए हरियाणा के 75 वर्षीय सुक्खा सिंह जैसे किसान हफ्तों से धरने पर डटे हुए हैं। सुक्खा सिंह कहते हैं ‘ये फसलों की नहीं, नस्लों को बचाने की लड़ाई है।’

(मनीषा भल्ला और राहुल कोटियाल के इनपुट के साथ)



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किसानों का आंदोलन लंबा चले और जोश भी न ठंडा पड़े, इसके लिए स्ट्रैटजी है। मैकेनाइजेशन से सुविधाएं सुलभ करवाना और मोटिवेशन से जोश भरना। सिंघु बॉर्डर पर ये स्ट्रैटजी साफ दिखती है।


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पेट्रोल पंप मालिक प्रदर्शनकारियों को डीजल-पेट्रोल मुफ्त दे रहे हैं, कमरे-वॉशरूम भी खोल दिए

किसी भी काम में सफलता केवल तभी मिलती है, जब आपके आसपास के लोकल यानी स्थानीय लोग आपके व्यवसाय या गतिविधि को समर्थन देते हैं। निश्चित रूप से स्थानीय लोग आपके व्यवसाय को समर्थन तभी देते हैं, जब आप उनके लिए आजीविका के अवसर खोलते हैं। लेकिन, दिलचस्प रूप से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए लोकल लोग वोकल बन गए हैं, यानी उन्हें समर्थन दे रहे हैं, बावजूद इसके कि उनकी रोजमर्रा की कमाई में भारी नुकसान हो रहा है।

एनएच-44 के किनारे-किनारे बनीं सैकड़ों दुकानों और मॉल के दुकानदारों के लिए दिल्ली से चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के बीच यात्रा करने वाले ‘हाइवे कस्टमर’ हैं, जो अक्सर उनकी दुकानों पर शॉपिंग के लिए रुकते हैं।

यह एक बहुत ही गुलजार अर्थव्यवस्था थी, जो 14 दिनों से शांत है और इन दुकानों में तब से एक भी ग्राहक नहीं आया है। इन दिनों दुकानदारों ने जो ग्राहक देखे हैं, वे इन्हीं प्रदर्शनकारियों में से हैं, जो कभी कपड़े या जूते खरीदने आ जाते हैं।

स्थानीय लोगों ने खाना-पीना ही नहीं, जरूरत की चीजों का भी जिम्मा संभाला है। उनका कहना है कि आंदोलन में सभी का फायदा है।

उदाहरण के लिए हाइवे से लगे खत्री मार्केट को ही ले लीजिए, जो धरनास्थल के नजदीक है। इस मार्केट में तमाम ब्रांडेड प्रोडक्ट्स के फैक्ट्री आउटलेट हैं। हर शोरूम में रोजाना 30 से 70 हजार का बिजनेस हो जाता था। यही नहीं, रोजाना 7 हजार रुपए तक कमाने वाले टायर पंक्चर और ट्रक रिपेयर मैकेनिक मोहम्मद शफीकुर और ढाबा चलाने वाले सतपाल जैसे लोगों के गल्ले में पिछले दो दिनों से एक पैसा भी नहीं आया है। लेकिन, वे प्रदर्शनकारियों के साथ हैं और कहते हैं, ‘हम सबके साथ हैं, क्योंकि इसमें सभी का फायदा है।’

मल्टी-ब्रांडेड शोरूम मालिक कप्तान सिंह की रोजाना की औसत बिक्री 50 हजार रु.थी, लेकिन अब लगभग बंद है। इनमें से अधिकांश लोगों के मन में प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति है, क्योंकि इनके परिवार का कोई न कोई सदस्य खेती से जुड़ा हुआ है और इनके मन में भी वही चिंताएं हैं। दिलचस्प बात ये है कि पेट्रोल पंप के मालिक भी न केवल कुछ किसानों को मुफ्त में डीजल और पेट्रोल दे रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपने पंप पर बने कमरे और वॉशरूम प्रदर्शनकारियों, खासतौर पर महिलाओं के लिए 24 घंटे खुले रखे हैं।

बीमारों के लिए एंबुलेंस की व्यस्था भी लोकल लोगों ने की है। ढाबों ने पार्किंग में आंदोलनकारियों के आराम के लिए पंडाल लगाए हैं।

ढाबे वालों ने अपने पार्किंग एरिया में बड़े-बड़े पंडाल लगा रखे हैं ताकि प्रदर्शनकारी रात में आराम कर सकें। हाइवे के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों ने भी अपने घरों के एक-दो कमरे बुजुर्गों और महिलाओं-बच्चों के लिए खोल रखे हैं। इसके बावजूद कि हाइवे की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है, सिंघु बॉर्डर के लोकल लोग प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन के लिए वोकल बने हुए हैं।

(मनीषा भल्ला और राहुल कोटियाल के इनपुट के साथ)



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ये सिंघु के एक पेट्रोल पंप की फोटो है। किसानों के ठहरने की व्यवस्था शेड के नीचे की गई है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखा जा रहा है।


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