सोमवार, 27 जुलाई 2020

मोबाइल-कम्प्यूटर एडिक्शन के मरीज 4 गुनातक बढ़े, 8वीं से छोटी क्लास के बच्चों में भी आ रही समस्याः सर्वे

लॉकडाउन में लोगों का डिजिटल एक्सपोजर बढ़ा है। कंप्यूटर-मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स, वेब सीरीज, मूवी, टीवी शो, ई-स्पोर्ट्स आदि में लोग खासा समय लगा रहे हैं। नतीजा रहा कि छात्रों व युवाओं में मोबाइल-इंटरनेट एडिक्शन बढ़ा है। ऐसे मरीज 4 गुना तक बढ़ गए हैं।

मुंबई, दिल्ली, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू जैसे बड़े शहरों के अलावा औरंगाबाद, आगरा, मेहसाणा, सिक्किम और मध्य प्रदेश, राजस्थान व हरियाणा के छोटे शहरों में भी मरीज बढ़ रहे हैं। यह बात केंद्र सरकार के दो शीर्ष एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर के आकलन में सामने आई है। पहले 10वीं या इससे बड़ी क्लास के छात्रों में ये लत ज्यादा थीं, अब 8वीं या इससे छोटी क्लास के बच्चे एडिक्ट होने लगे हैं।

पॉर्न कंटेंट देखने की लत भी बढ़ी

22-35 वर्ष के युवाओं में तो अश्लील कंटेंट देखने की लत भी बढ़ गई। ब्रिंज वॉचिंग यानी 120 मिनट से अधिक लगातार टीवी देखना बढ़ा है। डिजिटल बर्न आउट (थकान), डूम सर्फिंग (कोरोना सर्चिंग) जैसी समस्याएं भी आ रही हैं।

बेंगलुरू के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (निम्हांस) परिसर के शट (सर्विसेस फॉर हेल्दी यूज ऑफ टेक्नोलॉजी) क्लिनिक में वर्ष 2014 से कार्य कर रहे क्लीनिक प्रमुख और प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार कहते हैं कि लॉकडाउन के पहले रोज 1-2 मरीज आते थे। अब 3-4 मरीज संपर्क कर रहे हैं।

वहीं, दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) के बिहेवियरल एडिक्शन्स क्लीनिक के कंसल्टेंट इंचार्ज डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा कहते हैं कि पहले हम रोज 2-3 ऐसे मरीज देखते थे, अब यह आंकड़ा 10 से 12 हो गया।

हाल ही में कॉलेज छात्रों पर कराए हमारे एक सर्वे में 51% छात्रों ने माना कि लॉकडाउन के बाद से उनकी गेमिंग हैबिट बढ़ी हैं। छात्र सुबह आठ से दोपहर तक लैपटॉप या मोबाइल पर होते हैं। इतने समय वे पढ़ाई ही कर रहे हैं, जरूरी नहीं।

बल्हारा कहते हैं कि महिलाएं भी सोशल मीडिया और वेब सीरीज या मूवी के लिए अधिक समय स्क्रीन पर बिताती हैं। 40 से अधिक उम्र के वयस्क पुरुष गेम, पोर्न और वेब सीरीज अधिक देख रहे हैं। लोग मोबाइल-कंप्यूटर पर ज्यादा वक्त तक एक्टिव रहते हैं।

3 बातों से समझें- आप डिजिटल एडिक्शन के शिकार तो नहीं हो रहे

  • लगातार तलब लगी रहे।
  • एक बार प्रयोग के बाद फिर आपके रुकने में समस्या आए और फिर आप मोबाइल उठा लें।
  • पता होते हुए भी कि जीवन प्रभावित हो रहा है, खेलने, सोने, खाने या कहीं आने-जाने में देरी हो रही फिर भी मोबाइल या स्क्रीन न छोड़ पाएं।

सावधानी:

  • 30 मिनट से ज्यादा न हो स्क्रीन एक्सपोजर।
  • एक बार में 30 मिनट से अधिक स्क्रीन पर न रहें।
  • अगर ज्यादा देर तक रहना है, तो हर 30 मिनट बाद 10 बार पलकें झपकाएं।
  • 10 बार सिर को लेफ्ट-राइट और अप-डाउन करें। कलाइयों को क्लॉक वाइस और एंटी क्लॉक वाइस घुमाएं।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
22-35 वर्ष के युवाओं में तो अश्लील कंटेंट देखने की लत भी बढ़ गई। ब्रिंज वॉचिंग यानी 120 मिनट से अधिक लगातार टीवी देखना बढ़ा है। (प्रतीकात्मक फोटो)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2ZZGgCR
https://ift.tt/30O5p2L

एयर प्यूरीफायर में लगने वाले फिल्टर से बने फेस मास्क सबसे सुरक्षित; घर में तीन लेयर वाले मास्क ही बनाएं

दुनियाभर में इस समय मास्क की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की कोशिश है। ताकि इसे लगाने वाला शख्स कोरोना से तो बचा ही रहे साथ ही उसे आराम भी लगे। अमेरिका में कई वैज्ञानिकों ने तकिए के कपड़े से लेकर एयर फिल्टर में लगने वाले हाई एफिशिएंसी पर्टिकुलेट एयर फिल्टर (एचईपीए) तक को मास्क के लिए जांचा है।

इनमें देखा गया है कि अति सूक्ष्म कणों को रोकने के लिए कौन सा फैब्रिक सबसे उपयोगी है। हालिया शोध में पता चला है कि एचईपीए फिल्टर कोरोना को रोकने के लिए सबसे बेहतर पाए गए हैं। इस शोध में गले में पहने जाने वाले स्कार्व्स, रुमाल, कॉफी फिल्टर, सर्दियों में पहने जाने वाले पायजामे आदि के फैब्रिक पर भी अध्ययन किया गया है।

स्कार्व्स और पायजामे जैसी चीजों के फैब्रिक सुरक्षित नहीं

स्कार्व्स और पायजामे जैसी चीजों के फैब्रिक सूक्ष्म कणों को रोकते तो हैं लेकिन इन्हें बहुत सुरक्षित नहीं माना गया है। इनके स्कोर सबसे कम आए हैं। एरोसॉल संबंधी रिसर्च के लिए अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड जीत चुके मिसौरी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. यैंग वैंग कहते हैं कि आपको एक ऐसा फैब्रिक चाहिए होता है जो सूक्ष्म कणों को फिल्टर भी करे और आप मास्क लगाने के बाद आसानी से सांस भी ले सकें।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल बताते हैं- हमारे लिए 3 लेयर वाले मास्क उपयुक्त हैं। इसमें पहली लेयर बाहर से आने वाले पानी और दूसरी तरह की तरल चीजों को रोकती है। दूसरी लेयर बैक्टीरिया और वायरस को रोकती है। जबकि तीसरी लेयर मास्क में मॉश्चर नहीं होने देती है।

सुरक्षित फेस मास्क के बारे में तीन अहम सवाल

  • एन-95 कितने सुरक्षित?

विशेषज्ञ एन-95 को अच्छा मेडिकल मास्क मानते हैं। यह 0.3 माइक्रॉन तक के छोटे कणों को 95% तक फिल्टर कर देता है। जबकि साधारण सर्जिकल मास्क जो फैब्रिक को दोहरा करके बनाया जाता है, वो ऐसे कणों को 60 से 80% तक फिल्टर कर देता है।

  • किस कपड़े से मास्क बनाएं?

घर में बने मास्क में क्विल्टिंग फैब्रिक से बने मास्क सबसे सुरक्षित हैं। ये 79% तक सूक्ष्म कणों को फिल्टर कर देते हैं। क्विल्टिंग कॉटन सामान्य कॉटन से थोड़े कड़े होते हैं। इनमें धागे ज्यादा होते हैं। कॉटन के कपड़े को 3 लेयर में फोल्ड करने को भी क्विल्टिंग कहते हैं।

  • मास्क को जांचने का तरीका?

वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट हेल्थ के डॉ. स्कॉट सीगल ने बताया कि मास्क को चमकीली रोशनी के सामने उठाइए। यदि मास्क के फाइबर में से रोशनी छन कर आए तो कपड़ा ठीक नहीं है। अगर बुनाई अच्छी है तो रोशनी नहीं छनेगी, ऐसे मास्क सुरक्षित माने जाते हैं।

-न्यूयॉर्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
हाल ही में अमेरिका की रेडक्लिफ मेडिकल डिवाइस कंपनी ने लीफ नाम के मास्क बनाए हैं। इन्हें एचईपीए फिल्टर सेे बनाया गया है। (प्रतीकात्मक फोटो)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2D4Kyjo
https://ift.tt/2D5zFxU

दिवंगत बेटे से प्रेरणा लेकर दंपती ने की पहल; कोरोना के कारण बेरोजगार हुए और जरूरतमंदों को मुफ्त साइकिल दे रहे

दुनियाभर की तरह फिलीपींस में भी कोरोना और लॉकडाउन के कारण हजारों लोगों की नौकरी गई। इनमें से ही एक रोनाल्डो रोजेरियो भी है। रोनाल्डो स्थानीय फूड चेन से जुड़ा था। दो माह के बच्चे और पत्नी की देखभाल के लिए उसने किराए से साइकिल लेकर राइस केक बेचने का काम शुरू कर दिया। पर कमाई का बड़ा हिस्सा साइकिल के किराए और उसकी मरम्मत में खर्च हो जाता था।

ऐसे में उसे करेज टू बी काइंड फाउंडेशन से एक नई साइकिल मिली। इस फाउंडेशन ने वन बाइक एट ए टाइम पहल के तहत अब तक रोनाल्डो जैसे 50 से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद की है। इस पहल के पीछे दंपती ग्लैंडा और जॉर्ज कैनलस हैं।

कैनलस दंपती ने फाउंडेशन के जरिए साइकिल देना शुरू किया

उनके 17 साल के बेटे बेंजामिन की सालभर पहले मौत हो गई थी। उसने कई बार साइकिल चलाने वालों की मदद की थी। इसी प्रेरणा से कैनलस दंपती ने फाउंडेशन के जरिए साइकिल देना शुरू किया। इसमें यह जरूरी था कि कोई परिचित नामित करे ताकि जरूरत के बारे में पता चल सके।

स्थिति यह है कि नामांकन बंद होने के बाद भी रजिस्ट्रेशन की कतार है

लॉकडाउन के दौरान नौकरी गंवाने वालों, फूड और पार्सल डिलीवरी के काम से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी गई। क्योंकि धूप, बारिश या ठंड हो, हर मौसम में उन्हें तकलीफ होती है। इस पहल की खासी चर्चा है, स्थिति यह है कि नामांकन बंद होने के बाद भी रजिस्ट्रेशन की कतार है।

यह व्यवस्था भी है कि काम के लिए बाइक ले जाएं और बाद में रख सकते हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद और कोई व्यवस्था न होने पर जरूरतमंदों को इससे बड़ी मदद मिली है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
मनीला के करेज टू बी काइंड फाउंडेशन में पहुंचे जरूरतमंद।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2CJ96yK
https://ift.tt/30Qjahm

मोबाइल-कम्प्यूटर एडिक्शन के मरीज 4 गुनातक बढ़े, 8वीं से छोटी क्लास के बच्चों में भी आ रही समस्याः सर्वे

लॉकडाउन में लोगों का डिजिटल एक्सपोजर बढ़ा है। कंप्यूटर-मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स, वेब सीरीज, मूवी, टीवी शो, ई-स्पोर्ट्स आदि में लोग खासा समय लगा रहे हैं। नतीजा रहा कि छात्रों व युवाओं में मोबाइल-इंटरनेट एडिक्शन बढ़ा है। ऐसे मरीज 4 गुना तक बढ़ गए हैं।

मुंबई, दिल्ली, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू जैसे बड़े शहरों के अलावा औरंगाबाद, आगरा, मेहसाणा, सिक्किम और मध्य प्रदेश, राजस्थान व हरियाणा के छोटे शहरों में भी मरीज बढ़ रहे हैं। यह बात केंद्र सरकार के दो शीर्ष एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर के आकलन में सामने आई है। पहले 10वीं या इससे बड़ी क्लास के छात्रों में ये लत ज्यादा थीं, अब 8वीं या इससे छोटी क्लास के बच्चे एडिक्ट होने लगे हैं।

पॉर्न कंटेंट देखने की लत भी बढ़ी

22-35 वर्ष के युवाओं में तो अश्लील कंटेंट देखने की लत भी बढ़ गई। ब्रिंज वॉचिंग यानी 120 मिनट से अधिक लगातार टीवी देखना बढ़ा है। डिजिटल बर्न आउट (थकान), डूम सर्फिंग (कोरोना सर्चिंग) जैसी समस्याएं भी आ रही हैं।

बेंगलुरू के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (निम्हांस) परिसर के शट (सर्विसेस फॉर हेल्दी यूज ऑफ टेक्नोलॉजी) क्लिनिक में वर्ष 2014 से कार्य कर रहे क्लीनिक प्रमुख और प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार कहते हैं कि लॉकडाउन के पहले रोज 1-2 मरीज आते थे। अब 3-4 मरीज संपर्क कर रहे हैं।

वहीं, दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) के बिहेवियरल एडिक्शन्स क्लीनिक के कंसल्टेंट इंचार्ज डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा कहते हैं कि पहले हम रोज 2-3 ऐसे मरीज देखते थे, अब यह आंकड़ा 10 से 12 हो गया।

हाल ही में कॉलेज छात्रों पर कराए हमारे एक सर्वे में 51% छात्रों ने माना कि लॉकडाउन के बाद से उनकी गेमिंग हैबिट बढ़ी हैं। छात्र सुबह आठ से दोपहर तक लैपटॉप या मोबाइल पर होते हैं। इतने समय वे पढ़ाई ही कर रहे हैं, जरूरी नहीं।

बल्हारा कहते हैं कि महिलाएं भी सोशल मीडिया और वेब सीरीज या मूवी के लिए अधिक समय स्क्रीन पर बिताती हैं। 40 से अधिक उम्र के वयस्क पुरुष गेम, पोर्न और वेब सीरीज अधिक देख रहे हैं। लोग मोबाइल-कंप्यूटर पर ज्यादा वक्त तक एक्टिव रहते हैं।

3 बातों से समझें- आप डिजिटल एडिक्शन के शिकार तो नहीं हो रहे

  • लगातार तलब लगी रहे।
  • एक बार प्रयोग के बाद फिर आपके रुकने में समस्या आए और फिर आप मोबाइल उठा लें।
  • पता होते हुए भी कि जीवन प्रभावित हो रहा है, खेलने, सोने, खाने या कहीं आने-जाने में देरी हो रही फिर भी मोबाइल या स्क्रीन न छोड़ पाएं।

सावधानी:

  • 30 मिनट से ज्यादा न हो स्क्रीन एक्सपोजर।
  • एक बार में 30 मिनट से अधिक स्क्रीन पर न रहें।
  • अगर ज्यादा देर तक रहना है, तो हर 30 मिनट बाद 10 बार पलकें झपकाएं।
  • 10 बार सिर को लेफ्ट-राइट और अप-डाउन करें। कलाइयों को क्लॉक वाइस और एंटी क्लॉक वाइस घुमाएं।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
22-35 वर्ष के युवाओं में तो अश्लील कंटेंट देखने की लत भी बढ़ गई। ब्रिंज वॉचिंग यानी 120 मिनट से अधिक लगातार टीवी देखना बढ़ा है। (प्रतीकात्मक फोटो)


from Dainik Bhaskar /national/news/mobile-computer-addiction-patients-increased-up-to-4-times-in-lockdown-problem-coming-in-children-of-class-8-to-8-127556553.html
https://ift.tt/39sNLWb

20 साल पहले आतंकियों ने गोली मार दी थी, तब से बेड पर हैं, लॉकडाउन में 1600 दिव्यांगों के घर खाना और दवाइयां भेज रहे

बिस्तर पर लेटे हुए 44 साल के जावेद अहमद टाक फोन पर दिव्यांग लोगों की जानकारी जुटा रहे हैं। वे चल तक नहीं सकते हैं। लेकिन, उन्होंने लॉकडाउन के दौरान 1600 दिव्यांग परिवारों का जिम्मा उठाया है। इनकी टीम जरूरतमंद लोगों तक खाना, दवा और वित्तीय मदद पहुंचा रही है। टाक श्रीनगर से 50 किमी दूर बिजबेहाड़ा में रहते हैं।

इन्होंने ह्यूमिनिटी वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन हेल्पलाइन नाम से एक एनजीओ बनाया है, जो दिव्यांगों और आतंक पीड़ितों की मदद करता है। टाक बताते हैं, ‘जब लॉकडाउन शुरू हुआ था तब मैं और मेरी टीम दिव्यांग लोगों की जानकारियां जुटा रहे थे। हम उन्हें पैसे, खाना और दवाएं पहुंचा रहे हैं। कुछ अच्छे साथी टीम में हैं इसलिए हम सबकी मदद कर पा रहे हैं।’

जावेद ने कइयों को बचाया

अनंतनाग के बशीर अहमद बताते हैं, ‘वे पैरों से विकलांग हैं और टेलरिंग कर परिवार चलाते हैं। पर लॉकडाउन में काम बंद हो गया। पत्नी और 10 साल के बेटे का पेट भरने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था, लेकिन इस मुश्किल वक्त में जावेद टाक ने हमें बचाया। वे दो महीने से वित्तीय मदद और खाना हम तक पहुंचा रहे हैं।’

अनंतनाग डिग्री कॉलेज से की पढ़ाई

टाक कश्मीर में सालों से जारी संघर्ष के शिकार हैं। 1997 से पहले वे एक आम और स्वस्थ कश्मीरी थे। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन कर चुके थे। जावेद बताते हैं ‘कुछ बंदूकधारी मेरे चाचा का अपहरण करने आए थे। उन्होंने गोलियां चलाईं। इनमें से कुछ मुझे भी लगीं, जिससे मेरी रीढ़ की हड्डी ने हमेशा के लिए शरीर का साथ छोड़ दिया।

मैं करीब दो साल तक अस्पताल में रहा। सिर्फ व्हीलचेयर ही मुझे इधर-उधर ले जा सकती थी। इसके बाद शरीर के निचले हिस्से में लकवा मार गया।’ लेकिन इस हादसे के बाद भी जावेद ने 2005-06 में कश्मीर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया। जावेद की देखभाल के लिए उनकी बहन ने शादी तक नहीं की।

हादसे के ठीक पहले ईरान में एमबीबीएस के लिए उनका सिलेक्शन हो चुका था। वे कहते हैं, मेरा सपना टूट गया, इसलिए मैं लोगों से मिले पैसों और दूसरी मदद से दिव्यांगों की मदद करता हूं ताकि उनके सपने सच होते रहें।

दिव्यांगों को बुलंदियां छूना सिखाना ही मेरा मिशनः टाक

टाक बिजबेहाड़ा में ही दिव्यांग बच्चों के लिए जेबुनिसा हेल्पलाइन स्कूल भी चलाते हैं। यहां फिलहाल 103 बच्चे हैं। वे कहते हैं कि दिव्यांगों में विश्वास जगाना, उन्हें समझाना कि वह भी आसमान छू सकते हैं, अब यही मेरा मिशन है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
जावेद बताते हैं ‘कुछ बंदूकधारी मेरे चाचा का अपहरण करने आए थे। उन्होंने गोलियां चलाईं। इनमें से कुछ मुझे भी लगीं, जिससे मेरी रीढ़ की हड्‌डी ने हमेशा के लिए शरीर का साथ छोड़ दिया।


from Dainik Bhaskar /national/news/terrorists-were-shot-20-years-ago-have-been-in-bed-since-then-sending-food-and-medicines-to-1600-divyangs-in-lockdown-127556552.html
https://ift.tt/3g2UmsP

चीन युद्ध के बाद भीषण गरीबी देखी, फिर सेब की खेती से तस्वीर बदली, यहां का एक परिवार साल में 25 लाख रु. तक कमाता है

चीन सीमा पर भगीरथी नदी के किनारे पर उत्तराखंड का हर्षिल गांव बसा है। यहां के लोगों ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद बेहद गरीबी देखी। फिर यहां के युवाओं ने दुर्गम पहाड़ियों पर सेब के बाग लगाकर इलाके की तकदीर बदल डाली। आज इस क्षेत्र के 8 गांवों में हर परिवार सेब के कारोबार से जुड़ा है। 10 हजार हेक्टेयर में सेब के बागान हैं, जहां 20500 मीट्रिक टन उत्पादन होता है।

इसमें डेढ़ लाख पेटियां सेब की सबसे उम्दा किस्म गोल्डन और रेड डिलीशियस की होती हैं, जो अमेरिका समेत विभिन्न बाजारों में 10 करोड़ रुपए तक में बिक जाता है। इन गांवों में सेब का छोटा किसान भी सालाना कम से कम पांच लाख रुपए कमाता है। कई ऐसे भी हैं जो देश-विदेश में 25 लाख रुपए तक के सेब बेच लेते हैं।

1962 के पहले तिब्बत के ताकलाकोट में बाजार लगते थे

दराली गांव के किसान सचेंद्र पंवार बताते हैं कि सैकड़ों सालों से हमारे पुरखे भेड़-पालन और ऊनी कपड़े बेचकर आजीविका चलाते थे। 1962 के युद्ध से पहले तक तिब्बत की ताकलाकोट में बाजार लगते थे। खुद मेरे पिता केशर सिंह नेलांग घाटी के रास्ते व्यापार करने तिब्बत जाते थे।

तिब्बती व्यापारी सोना, चांदी, मूंगा, पश्मीना ऊन और चैंर गाय लेकर हर्षिल, बगोरी, नागणी तक आते थे और यहां से ग्रामीण मंडुआ, जौ का आटा, सत्तू, रामा सिराईं पुरोला का लाल चावल, गुड़, दालें, ऊनी वस्त्र आदि सामान ले जाते थे। भारत-चीन युद्ध के बाद ये व्यापार बंद हो गया। इसके बाद पूरे इलाके ने बेहद गरीबी देखी।

1978 में भीषण बाढ़ आई

काश्तकार माधवेन्द्र बताते हैं कि 1978 में इस इलाके में भीषण बाढ़ आई। उस वक्त कुछ ही लोग ही अपने खाने के लिए सेब उगाते थे। लेकिन, बाढ़ के बाद आर्थिक तौर पर टूट चुके लोगों ने देखा कि झाला गांव के राम सिंह का सेब भारतीय सेना ने दस हजार रुपए में खरीद लिया। उस समय यह बड़ी रकम थी।

इस सौदे की खूब चर्चा हुई और लोगों ने सेब के बाग लगाने शुरू हुए। आज यह राज्य का सबसे समृद्ध इलाका है। हमारे बच्चे उत्तरकाशी के स्कूल में पढ़ रहे हैं। मुखवा गांव के सोमेश सेमवाल बताते हैं कि उन्होंने अपने घर पर सेब से बनने वाली चिप्स की मशीन भी लगाई है। वो बताते हैं कि 30% सेब तो पर्यटक ही गांव से खरीद लेते हैं। यहां बुनाई का काम भी होता है। आदमी हो या औरतें, यहां सभी सूत कातते दिख जाएंगे।

ब्रिटिश सेना के अफसर ने शुरू की थी खेती

इस बेल्ट में आजादी से बहुत पहले ब्रिटिश सैन्य अफसर फ्रेडरिक ई विल्सन ने सेब की खेती शुरू की थी। उन्हें उत्तराखंड में पहाड़ी विल्सन के नाम से भी जाना जाता है। 1925 में उन्होंने गोल्डन डिलीशियस और रेड डिलीशियस प्रजाति के सेब के बगीचे लगाए थे। हर्षिल और उसके आसपास की आबादी ने 1960 में इस खेती को अपनाया। राॅबर्ट हचिंसन की किताब द राजा ऑफ हर्षिल में भी विल्सन का वर्णन मिलता है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
इस बेल्ट में आजादी से बहुत पहले ब्रिटिश सैन्य अफसर फ्रेडरिक ई विल्सन ने सेब की खेती शुरू की थी। उन्हें उत्तराखंड में पहाड़ी विल्सन के नाम से भी जाना जाता है।


from Dainik Bhaskar /national/news/after-the-china-war-saw-severe-poverty-then-apple-farming-changed-the-picture-a-family-here-spent-25-lakh-in-a-year-earns-up-to-127556551.html
https://ift.tt/2CP5U4w

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर 83% ज्यादा समय दे रहे भारतीय; लॉकडाउन में ओरिजिनल सीरीज देखने वाले सबसे ज्यादा बढ़े, मूवी देखने में सबसे ज्यादा समय खर्च किया

सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म 'दिल बेचारा' का प्रीमियर 24 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर हुआ। ट्रेड एनालिस्ट्स के मुताबिक, तीन दिन में ही इस फिल्म को 7.5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा। कोरोनाकाल में किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई ये दूसरी बड़ी फिल्म है। इससे पहले अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की गुलाबो-सिताबो भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी।

पिछले चार महीने में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर न सिर्फ यूजर बढ़े हैं बल्कि पर यूजर्स टाइम स्पेंड भी बढ़ा है। लोग मूवी देखने में सबसे ज्यादा समय खर्च कर रहे हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर आने वाली ओरिजिनल सीरीज देखने वाले लोगों में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है।

कोरोनाकाल में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर 83% ज्यादा समय दे रहे लोग
इन्वेस्ट इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि कोरोनाकाल में अमेजन प्राइम, नेटफ्लिक्स और डिज्नी प्लस हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेफॉर्म्स पर यूजर्स का टाइम स्पेंड 82.63% बढ़ा है। इसी दौरान यू-ट्यूब जैसे फ्री एक्सेस प्लेटफॉर्म पर देश के लोगों ने 20.5% ज्यादा समय खर्च किया।

लॉकडाउन की शुरुआत में ही 13% व्यूज बढ़े

2020 के पहले तीन महीने में भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को 30 हजार करोड़ व्यूज मिले। 2019 के अंतिम तीन महीनों यानी अक्टूबर से दिसंबर 2019 के मुकाबले ये 13% ज्यादा है। ये आंकड़े उस वक्त तक के हैं, जब कोरोनावायरस शुरुआती दौर में था और देश में लॉकडाउन की शुरुआत ही हुई थी। जब 2020 के दूसरे तीन महीनों यानी, अप्रैल, मई और जून के नतीजे आएंगे तो ये आंकड़ा और बड़ा हो सकता है।

लॉकडाउन में जी-5 के सब्स्क्राइबर सबसे ज्यादा 80% बढ़े, अमेजन प्राइम दूसरे नंबर पर

मार्केट रिसर्च वेबसाइट वेलोसिटी एमआर की एक स्टडी के मुताबिक, 25 मार्च से 8 जून के बीच जी ग्रुप के ओटीटी प्लेटफॉर्म जी-5 के 80% सब्स्क्राइबर बढ़े। वहीं, अमेजन प्राइम वीडियो को 67% नए यूजर मिले। नेटफ्लिक्स के सब्स्क्राइबर भी इस दौरान 65% बढ़े हैं। ऑल्ट बालाजी को भी 60% नए सब्स्क्राइबर लॉकडाउन के दौरान मिले।

स्पोर्ट्स टेलीकास्ट बंद होने से इसे देखने वाले दर्शक घटे

लॉकडाउन के कारण खेल गतिविधियां बंद हैं। इसका असर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी दिखा। स्पोर्ट्स टेलीकास्ट देखने वाले दर्शक और उनका समय दोनों लगभग शून्य पर पहुंच गया। टीवी सीरियल्स की शूटिंग बंद होने के कारण टीवी शो देखने वाले दर्शक भी घटे। इस वजह से सिंडिकेटेड कंटेंट के यूजर्स में 44% की कमी आई।

ओटीटी प्लेटफॉर्म अगले तीन साल में 12 हजार करोड़ का मार्केट होगा

2018 तक भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का मार्केट 2150 करोड़ रुपए का था। 2019 के अंत में ये बढ़कर 2185 करोड़ रुपए का हो गया। यानी, एक साल में 35 करोड़ का इजाफा। इसके बाद भी एकाउंटिंग फर्म प्राइसवाटर हाउस कूपर्स ने 2023 तक इस मार्केट के 11 हजार 977 करोड़ रुपए का होने का अनुमान लगाया था। लेकिन, कोरोनाकाल में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को तेजी से यूजर मिले हैं। इससे ये आंकड़ा और बढ़ सकता है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
OTT platform subscriptions during lockdown in India


from Dainik Bhaskar /national/news/ott-platform-subscriptions-during-lockdown-in-india-127556512.html
https://ift.tt/39u9ZXK

रविवार, 26 जुलाई 2020

मुख्यमंत्री गहलोत होटल में फिर विधायकों से मिले, कल कांग्रेस देशभर में राज्यभवनों का घेराव करेगी

राजस्थान में सियासी उठापटक का आज 17वां दिन है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत होटल फेयरमोंट में सुबह योग क्लास के बाद विधायकों के साथ बैठक कर रहे हैं। गहलोत यहां रात 11:30 बजे ही पहुंच गए थे। इससे पहले कल देर रात तक चर्चा रही कि वे राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलेंगे, लेकिन यह नहीं हुआ। देर शाम भाजपा के 13 सदस्यों का दल जरूर राजभवन पहुंचा। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जिसमें राजभवन घेराव वाले बयान पर मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

अपडेट्स...

  • राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा- भाजपा हमारी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने के मुख्यमंत्री के अनुरोध की अनदेखी की है। इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
  • न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गहलोत सरकार 31 जुलाई को विधानसभा का सत्र बुलाना चाहती है। इसके लिए नया ड्रॉफ्ट भी तैयार किया गया है, जो जल्द ही राज्यपाल को भेजा जाएगा।
  • कांग्रेस ने 27 जुलाई को देशभर में राजभवन का घेराव करेगी। इस अभियान को 'प्रजातंत्र के लिए बोलो' नाम दिया गया है।
  • भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि राजभवन में कांग्रेस सरकार ने जो किया वह राजस्थान की राजनीति का निचला स्तर है। यहां कोई शासन नहीं है। जो सत्ता में हैं वे हफ्तों से फाइव स्टार होटल में ठहरे हैं। जनता कई मुद्दों की वजह से परेशान है।

पूनिया ने कहा- गहलोत का बयान गलत, सजा हो सकती है
शनिवार को राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा- राज्य के मुखिया ये चेतावनी देते हैं कि 8 करोड़ जनता राज्यपाल को घेर लेगी। यह गलत है। यह बयान उन्हें (मुख्यमंत्री गहलोत को) आईपीसी की धारा 124 के तहत सजा दिला सकता है। भाजपा के दल ने मुख्यमंत्री के बयान के संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा है।

मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए
नेता विपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री राज्य के मुखिया हैं। वे खुद कह रहे हैं कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के उल्लंघन के लिए वे जिम्मेदार नहीं होंगे। वे जिम्मेदार नहीं होंगे, तो कौन होगा? उन्हें ऐसी भाषा का उपयोग करने के लिए इस्तीफा देना चाहिए।

5 सवालों से समझिए... राजस्थान की सियासत की पूरी तस्वीर
1. हाईकोर्ट के फैसले का पायलट खेमे पर क्या असर होगा?

जवाब: हाईकोर्ट ने 19 विधायकों को नोटिस मामले में यथास्थिति को कहा है। मायने यह कि अभी उनकी सदस्यता रद्द नहीं होगी। आदेश का सोमवार को सुप्रीम कोर्ट रिव्यू करेगा।
2. क्या गहलोत सरकार के पास बहुमत है?
जवाब: गहलोत सरकार ने राजभवन ले जाकर विधायकों की परेड करवाई। इसमें 102 का आंकड़ा दिया है। इनमें कांग्रेस के 88, निर्दलीय 10, बीटीपी के 2, सीपीएम और आरएलडी का एक-एक विधायक है। यदि इतने विधायक फ्लोर टेस्ट में सरकार का साथ देते हैं तो सरकार बहुमत हासिल कर लेगी। यदि दो-पांच विधायक भी इधर-उधर हुए तो सरकार खतरे में है।
3. क्या राज्यपाल सोमवार को विशेष सत्र बुलाएंगे?
जवाब: राज्यपाल ने शुक्रवार रात कैबिनेट से कोरोना का हवाला देने और जल्दबाजी में विशेष सत्र बुलाने जैसे 6 सवाल पूछे थे। इससे लगता है कि राज्यपाल सोमवार को या इमरजेंसी में सत्र बुलाने की अनुमति नहीं देंगे। यदि कैबिनेट ने दूसरी बार राजभवन काे प्रस्ताव भेजा तो नियमानुसार राज्यपाल मना भी नहीं कर सकते। लेकिन तुरंत सत्र की गुंजाइश नहीं लग रही है।
4. आखिर सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं गहलोत?
जवाब: सत्र बुलाना तो बहाना है। मंशा बिल लाकर व्हिप जारी करना है। जो बागी बिल के खिलाफ वोट देंगे उनकी सदस्यता रद्द होगी। इसीलिए राज्यपाल को जो पत्र दिया, उसमें फ्लोर टेस्ट का उल्लेख नहीं। 19 की विधायकी गई तो बहुमत को 92 विधायक चाहिए जो सरकार के पास हैं।
5. भाजपा की सत्र बुलाने में रुचि क्यों नहीं है?
जवाब: भाजपा नहीं चाहती कि सरकार सत्र बुलाकर पायलट गुट पर एक्शन ले। वह चाहती है कि 19 विधायकों की सदस्यता बची रहे और जरूरत पड़े तो सरकार को हिला सकें।

सियासी संग्राम से पहले विधानसभा में स्थिति
107 कांग्रेस
...और अब ये हालात

गहलोत के पक्ष में: 88 कांग्रेस, 10 निर्दलीय, 2 बीटीपी, 1 आरएलडी, 1 माकपा यानी कुल 102
पायलट गुट: 19 बागी कांग्रेस, 3 निर्दलीय। कुल 22
भाजपा प्लस: 72 भाजपा, 3 आरएलपी। कुल 75
माकपा 1 : गिरधारी मईया फिलहाल तटस्थ।

राजस्थान के सिायासी ड्रामे से जुड़ी ये खबरें भी आप पढ़ सकते हें...

1. प्रदेश अध्यक्ष पूनिया ने कहा- राजभवन घेराव वाला बयान मुख्यमंत्री गहलोत को सजा दिला सकता है

2. गहलोत बोले- राजभवन घेरने जनता आ गई तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी

3.पायलट गुट को राहत: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पीकर को बागी विधायकों पर कार्रवाई करने से रोका



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Rajasthan News Update | Ashok Gehlot Sachin Pilot Camp MLA Latest News | Does Gehlot Rajasthan Government have a majority? All You Need To Know


from Dainik Bhaskar /national/news/rajasthan-political-crisis-ashok-gehlot-and-sachin-pilot-bjp-and-congress-news-and-updates-july-26-127553681.html
https://ift.tt/30RJjfw

मोदी आज 67वीं बार ‘मन की बात’ करेंगे, कोरोना काल में आने वाले त्योहारों में सावधानियों पर चर्चा कर सकते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को 67वीं बार मन की बात कार्यक्रम में देश की जनता को संबोधित करेंगे। कोरोना महामारी के बीच अगस्त में ईद, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी आने वाले हैं। इसको
लेकर मोदी लोगों से सावधानियां बरतने की चर्चा कर सकते हैं।

पिछली बार चीन को करारा जवाब दिया था
पिछले महीने 28 जून को मोदी ने मन की बात में गलवान झड़प पर चीन को करारा जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि लद्दाख में भारत की भूमि पर आंख उठाकर देखने वालों को करारा जवाब
मिला। हमें दोस्ती निभाना और आंखों में आंखें डालकर जवाब देना आता है। लद्दाख में हमारे जो वीर जवान शहीद हुए हैं, उनके शौर्य को पूरा देश नमन कर रहा है।

बच्चे घर में दादा-दादी का इंटरव्यू करें
मोदी ने यह भी कहा कि कोरोना की वजह से कई लोगों ने मानसिक तनाव जिंदगी गुजारी। वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि कैसे उन्होंने इस दौरान छोटे-छोटे पलों को परिवारों के साथ बिताया। मेरे नन्हें साथियों से भी मैं आग्रह करना चाहता हूं। माता-पिता से पूछकर मोबाइल उठाइए और दादा-दादी और नाना-नानी का इंटरव्यू कीजिए। पूछिए, उनका बचपन में रहन-सहन कैसा था, क्या खेलते थे, मामा के घर जाते थे, त्योहार कैसे मनाते थे। उन्हें 40-50 साल पीछे जिंदगी में जाना आनंद देगा और आपको तब की चीजें सीखने को मिलेंगी।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Modi will do 'Mann ki Baat' for 67th time today, can discuss precautions in festivals coming in the Corona period


from Dainik Bhaskar /national/news/pm-narendra-modi-address-radio-programme-mann-ki-baat-on-26-june-127553679.html
https://ift.tt/3019YaC

इस साल का पहला तूफान हन्ना टेक्सॉस की तरफ बढ़ा, 145 किमी. प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल रहीं, भारी बारिश

अमेरिका के टेक्सॉस राज्य में इस साल के पहले अटलांटिक तूफान हन्ना ने परेशानियां बढ़ा दी हैं। यह राज्य कोरोनावायरस से भी काफी प्रभावित रहा है। तूफान की वजह से यहां शनिवार दोपहर के बाद अचानक मौसम बदला। 145 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। और तेज बारिश हुई। कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा है।

मौसम विभाग ने क्या कहा

यूएस नेशनल हरिकेन सेंटर और मौसम विभाग ने अलग-अलग बयान जारी किए। मौसम विभाग ने कहा- कैटेगरी 1 का तूफान टेक्सॉस के दक्षिणी हिस्से से टकरा चुका है। लोगों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। पेड्रे आइलैंड्स और मैक्सिको के कुछ हिस्सों तक इसका असर रहेगा। इसकी वजह से भारी बारिश और जानलेवा बाढ़ का खतरा है। लोगों को काफी सावधानी बरतनी होगी।

समुद्र की तरफ बिल्कुल न जाएं

हरिकेन सेंटर ने कहा- हम लोगों को आगाह करते हैं कि वो किसी भी समुद्री किनारे पर न जाएं। 6 फीट से ज्यादा ऊंची लहरें उठ रही हैं। तेज हवाओं के चलते ये बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। सोमवार तक 45 सेंटीमीटर तक बारिश होने का खतरा है। इस दौरान लोगों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

अलर्ट पर टीमें

लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि तूफान के दौरान बिजली की सप्लाई कई जगह बंद की जा सकती है क्योंकि इससे लाइनें टूटने का खतरा है। लिहाजा, लोग इसके लिए तैयार रहें। रेस्क्यू टीमें कई जगहों पर तैनात की गई हैं। इसके अलावा हेल्थ डिपार्टमेंट को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने कहा है कि सोमवार तक ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।

ये खबरें भी पढ़ें:

1.साउथ चाइना सी विवाद:अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो बोले- यह चीन का जल साम्राज्य नहीं; ऑस्ट्रेलिया ने कहा- चीन के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं

2.विदेशी छात्रों के लिए नया आदेश:अमेरिका ने कहा- जिन नए विदेशी छात्रों का पूरा कोर्स ऑनलाइन हो चुका है, उन्हें देश में आने की मंजूरी नहीं दी जाएगी



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
फोटो शनिवार की है। टेक्सॉस के क्रिस्टी सिटी बीच पर कुछ लोग टहलते नजर आए। शाम को यहां मौसम तेजी से बदला। 145 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और तेज बारिश का दौर शुरू हो गया।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3hAt5OB
https://ift.tt/30MHu3B

प्रधानमंत्री ओली के विरोधी प्रचंड ने कहा- प्रधानमंत्री जिद पर अड़े हैं, पार्टी में टूट की आशंका अब सबसे ज्यादा

नेपाल की सियासत में कुछ दिन की शांति के बाद फिर घमासान शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की इस्तीफे की मांग पर अड़े मुख्य विरोधी पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड ने माना है कि सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में टूट का खतरा बढ़ रहा है। प्रचंड के मुताबिक, ओली इस जिद पर अड़े हुए हैं कि वे पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद में से किसी पद से इस्तीफा नहीं देंगे। यही विवाद की सबसे बड़ी जड़ है।

दो हिस्से में बंट सकती है पार्टी
नेपाल में सियासी घमासान करीब दो महीने से जारी है। लेकिन, पिछले हफ्ते इस तरह के संकेत मिले थे कि प्रचंड और ओली समझौते के करीब हैं। ये भी साफ है कि दोनों नेताओं पर समझौते का दबाव है। लेकिन, शनिवार को प्रचंड के बयान से साफ हो जाता है कि दोनों नेता अलग राह पर चल रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी में फूट का खतरा अब करीब दिखने लगा है।

प्रचंड का बड़ा आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने ओली पर गंभीर आरोप लगाया। इसके सबूत भी दिखाए। प्रचंड ने कहा- एक तरफ तो प्रधानमंत्री सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं, दूसरी तरफ वो अलग पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। हम इसे कामयाब नहीं होने देंगे। ओली ने कुछ लोगों को साथ लेकर सीपीएन- यूएमएल नाम से नेशनल इलेक्शन कमीशन में एक नई पार्टी रजिस्टर करा ली है।

देश का नुकसान
प्रचंड ने आगे कहा- यह किस तरह की सियासत है। नई पार्टी बनाने की हरकत तब की गई जब ओली से मेरी बातचीत चल रही थी। क्या इससे ये साफ नहीं हो जाता कि एक तरफ तो वे समझौते की बात करते हैं, दूसरी तरफ सत्ता में बने रहने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सिर्फ पार्टी नहीं बल्कि देश का भी काफी नुकसान हो रहा है। देश के विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता सबसे जरूरी है। हमें लोगों के भरोसे को कायम रखना होगा।

नेपाल से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ सकते हैं...

1. सस्ता सामान खरीदने नेपाल से भारत के इस बाजार आते थे लोग

2. 6 लगातार मुलाकातों के बावजूद मुख्य विरोधी प्रचंड को नहीं मना सके प्रधानमंत्री ओली



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
फोटो नेपाल में प्रधानमंत्री के मुख्य विरोधी पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने अपने समर्थकों के जरिए इलेक्शन कमीशन में एक नई पार्टी का रजिस्ट्रेशन करा लिया है। (फाइल)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3jIUM9M
https://ift.tt/39squDG

24 घंटे में रिकॉर्ड 36327 मरीज ठीक हुए, बीते हफ्ते 2 लाख से ज्यादा संक्रमितों की अस्पताल से छुट्‌टी हुई, अब कुल 13.85 लाख केस

देश में बीते 24 घंटे में कोरोना के 48 हजार 479 केस मिले। इसके साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या 13.85 लाख के पार हो गई। 692 लोगों की मौत हुई, जबकि 36 हजार 327 की अस्पताल से छुट्‌टी भी हुई। यह एक दिन में अस्पताल ठीक होने वाले मरीजों की सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले 23 जुलाई को 33 हजार 326 लोग ठीक हुए थे। अब तक देश में कुल 8 लाख 86 हजार से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं।

बीते एक हफ्ते में 3 लाख 7 हजार 622 नए केस आए, लेकिन इसी दौरान 2 लाख 8 हजार 665 मरीज ठीक भी हो गए, जिससे संक्रमितों की संख्या में 93 हजार 860 की बढ़ोतरी हुई।

तारीख ठीक हुए संक्रमित बढ़े मौत
19 जुलाई 22730 16827 675
20 जुलाई 24303 11905 596
21 जुलाई 27590 10908 671
22 जुलाई 31875 12589 1130
23 जुलाई 33326 14361 755
24 जुलाई 32514 15610 762
25 जुलाई 36327 11660 692

कुल 208665 93860 5281

5 राज्यों का हाल

मध्य प्रदेश: 24 घंटे में यहां 716 मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसी के साथ संक्रमितों की संख्या 26 हजार 926 हो गई। इनमें 18 हजार 488 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि 799 मरीजों की मौत हो चुकी है। 7639 मरीजों का इलाज चल रहा है। इंदौर में संक्रमण में फिर एक बार तेजी आई है। यहां बीते 24 घंटे में 153 नए केस आए हैं।

इसके बाद भोपाल में 132 मरीज बढ़े। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

महाराष्ट्र: पिछले 24 घंटे में राज्य में संक्रमण के 9251 नए मामले सामने आए हैं। इसके बाद पॉजिटिव केस की संख्या बढ़कर 3 लाख 66 हजार 368 हो गई है। इसमें से 1 लाख 45 हजार 481 एक्टिव केस हैं और इलाज के बाद 2 लाख 7 हजार 194 लोग अब तक रिकवर हो चुके हैं। शनिवार को 257 लोगों की मौत हो गई।

मुंबई में कल 1090 मामले सामने आए। 52 लोगों की मौत हुई। 617 लोग ठीक हुए। अब शहर में संक्रमितों की संख्या 1 लाख 7 हजार 981 हो गई है। अब तक यहां 6033 लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं।

राजस्थान: बीते 24 घंटे में 1120 नए मामले सामने आए। पिछले एक हफ्ते में यह छठवीं बार है जब 900 से ज्यादा केस मिले। शुक्रवार को 958 रोगी मिले थे। इसी के साथ संक्रमितों का आंकड़ा अब 35 हजार 298 पर पहुंच गया है। इनमें 25 हजार 306 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 613 मरीजों की मौत हो चुकी है। 9379 लोगों का अभी इलाज चल रहा है।

बिहार: बीते 24 घंटे में रिकॉर्ड 2803 संक्रमितों की पहचान की गई। हालांकि, सैम्पल के पेंडिंग केस क्लियर होने से यह आंकड़ा बढ़ा है। इनमें 24 जुलाई के 1021, जबकि 23 जुलाई और इससे पहले के 1782 पेंडिंग केसों को शामिल किया गया है। यहां एक दिन पहले 1820 संक्रमित मिले थे। शनिवार को 11 कोरोना संक्रमित मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई।

उत्तरप्रदेश: बीते 24 घंटे में रिकॉर्ड 2984 संक्रमित मिले। 2191 मरीज ठीक हुए। 39 लोगों की मौत मौत हुई। राज्य में इस बीमारी से अब तक 1387 लोग जान गंवा चुके हैं। बीते 24 घंटे में राज्य में सबसे ज्यादा 57 हजार 68 सैम्पल की जांच की गई। राज्य में इस महीने 40 हजार 902 मरीज मिल चुके हैं, जबकि मार्च से जून तक सिर्फ 23 हजार 70 केस आए थे थे।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Mumbai Delhi Coronavirus News | Coronavirus Outbreak India Cases LIVE Updates; Maharashtra Mumbai Madhya Pradesh Indore Rajasthan Uttar Pradesh Haryana Bihar Telangana Punjab Novel Corona (COVID 19) Death Toll India Today


from Dainik Bhaskar /national/news/coronavirus-outbreak-india-cases-live-news-and-updates-26-july-127553625.html
https://ift.tt/3fW22Nr

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने 5 साल पहले उड़ा दिया था पुल, तब से सीढ़ी के सहारे आवाजाही करते हैं 100 गांव के लोग

ये है तीन जिलाें के 100 गांवाें काे जाेड़ने वाला झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझारिया गांव का पुल। पांच साल पहले नक्सलियाें ने 300 मीटर लंबे इस पुल के दाे स्पैन काे उड़ा दिया था। ग्रामीणाें ने टूटे पुल से सीढ़ी जाेड़ी और आना-जाना शुरू कर दिया। वह सीढ़ी से बाइक भी ले जाते हैं। नक्सली नहीं चाहते कि पुल बने। हजारीबाग, रामगढ़ और बाेकाराे जिला के टाटीझरिया, आंगो, चुरचू, विष्णुगढ़, झुमरा पहाड़, बेड़म, परतंगा, मंगरपट्टा, चोंचा, जुल्मी, चुड़को, कंदागढ़ा, आदि गांवाें काे जाेड़ने वाला पुल तीन करोड़ में बेडम नदी पर बनाया गया था।

यमुना में मछली पकड़ने पहुंचे मछुआरे

कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में लागू किए गए सख्त लॉकडाउन में दिल्ली की यमुना नदी बिल्कुल साफ हो गई थी। लेकिन अनलॉक-2 के दौरान कुछ ही दिनों में दोबारा दूषित हो गई। शनिवार को यमुना में केमिकल से बने झाग के ऊपर मछुआरे मछली पकड़े के लिए जाल फेंकते हुए नजर आए।

पटरी पर दौड़ती ट्रेन के आगे से बच्चे लगाते हैं छलांग

बिहार के सीवान जिले में अलग-अलग स्थानों पर नदियों पर बने रेल पुल से बच्चे नहाने के लिए जानलेवा छलांग लगा रहे हैं। आश्चर्य यह है कि जिस वक्त ये बच्चे इस घटना को अंजाम दे रहे होते हैं उस वक्त ट्रेन पटरी पर बड़ी तेजी से दौड़ती आ रही होती है। हैरत की बात यह है कि ये बच्चे ट्रेन के बिल्कुल नजदीक आ जाने का इंतजार करते हैं और फिर वो एक-एक कर नदी में छलांग लगा देते हैं। इस लापरवाही की वजह से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

सब कुछ निगलने को बेताब है गंडक

फोटो बिहार के गोपालगंज जिले के दुबौली की है। यहां गंडक नदी की तबाही से लगभग 100 गांव प्रभावित हैं। पीड़ित परिवार बच्चों व मवेशियों के साथ रेलवे ट्रैक और हाइवे पर रात गुजारने को विवश हैं। इसी बीच शनिवार को बाढ़ में घिरी नीलगायों का झुंड 8 किलोमीटर पानी में तैरकर स्थान की तलाश में दुबौली पहुंचा।

सेना ने हेलीकॉप्टर से पीड़ितों के लिए गिराए फूड पैकेट

बिहार के 10 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इससे करीब 10 लाख लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे ज्यादा 3.30 लाख लोग दरभंगा में प्रभावित हैं। बाढ़ का प्रमुख कारण नदियों पर बने बांधों को टूट जाना रहा है। गंगा और सोन नदी को छोड़कर राज्य की लगभग सभी नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। खासकर गंडक, बागमती, अधवारा भारी उफान पर हैं। बाढ़ और बिजली गिरने से राज्य में अब तक 115 लोगों की मौत हो चुकी है।

पीपीई किट, मास्क और ग्लव्स खुले में न फेकें

रांची में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, प्रशासन, पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग लगातार लापरवाही बरत रहा है। सदर अस्पताल में जहां-तहां कचरा फैला है। पूरा कैंपस संक्रमित हो चुका है। दूसरी ओर, अस्पताल परिसर में ही पीपीई किट, ग्लव्स, इंजेक्शन और पानी की बोतलें फेंक दी हैं। इससे कोई भी संक्रमित हो सकता है। आईसीएमआर ने सख्त आदेश दिया है कि पीपीई किट, मास्क और ग्लव्स को खुले में नहीं फेंकना है। प्रयोग करने के बाद इसे जमीन के 3 फीट नीचे गड्ढे में गाड़ देना है या जला दें।

कोरोना काल का सफल आंदोलन

महाराष्ट्र में सांगली के भोसे गांव के लोगों ने येलम्मा मंदिर के पास 400 साल पुराने बरगद के पेड़ को कटने से बचा लिया। 400 वर्ग मीटर में फैला पेड़ रत्नागिरी-सोलापुर स्टेट हाईवे के बीच में आ रहा था। पेड़ कटने वाला था, तभी 20 ग्रामीण पेड़ घेरकर खड़े हो गए। चिपको आंदोलन हुआ। ऑनलाइन पिटीशन में 14 हजार से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल गया। आखिरकार मंत्रालय को हाईवे का नक्शा बदलने का फैसला करना पड़ा।

हैदरनगर में गरीब की झोपड़ी पर आकाशीय बिजली

फोटो झारखंड के पलामू जिले के सजवन गांव की है। यहां स्थित सोन नदी के तट पर आसमानी बिजली (वज्रपात) से जितेंद्र साव की एक गाय की मौत हो गई, जबकि सोन नदी के तट पर ही स्थित सूर्य मंदिर के समीप पशुओं के लिए फूस से बनी 3-4 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास कर अन्य झोपड़ियों को जलने से बचा लिया।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Naxalites blew the bridge in Chhattisgarh 5 years ago, since then 100 people of the village move using the ladder


from Dainik Bhaskar /local/delhi-ncr/news/naxalites-blew-the-bridge-in-chhattisgarh-5-years-ago-since-then-100-people-of-the-village-move-using-the-ladder-127553620.html
https://ift.tt/3hAKqqL

20 साल में कितना बढ़ा भारत-पाकिस्तान का डिफेंस पर खर्च? दोनों सेनाओं में कौन कहां कितना भारी

आज विजय दिवस है। करगिल युद्ध में भारत की जीत के 21 साल हो चुके हैं। इन 21 सालों में कई बार भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी। पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए भारत ने पिछले 20 साल में अपने डिफेंस बजट में 5 गुना की बढ़ोत्तरी की है। पाकिस्तान ने भी इन 20 सालों में अपना डिफेंस बजट तीन गुना कर लिया। हालांकि, आज भी उसका कुल डिफेंस बजट भारत के डिफेंस बजट का सिर्फ 14% है।

करगिल के बाद दोनों देशों का डिफेंस बजट कैसे बढ़ा? आर्मी, नेवी, एयरफोर्स में दोनों की ताकत कैसी है? न्यूक्लियर और मिसाइल पावर में कौन आगे है? इस रिपोर्ट में हम इन सभी सवालों का जवाब देंगे।

भारत और पाकिस्तान दोनों के पास न्यूक्लियर वेपन हैं। भारत की 'नो फर्स्ट यूज' की परमाणु नीति है। वहीं, पाकिस्तान इस नीति को नकारता है। फिलहाल दोनों के पास लगभग बराबर न्यूक्लियर वॉर-हेड हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के मुताबिक, इस वक्त भारत के पास करीब 150 तो पाकिस्तान के पास 160 न्यूक्लियर वॉर-हेड हैं।

करगिल के वक्त हमारा डिफेंस बजट जितना था, पाकिस्तान का आज भी उतना बजट नहीं

करगिल के वक्त भारत का डिफेंस बजट 104 हजार करोड़ रुपए का था। वहीं, पाकिस्तान का डिफेंस बजट 23 हजार करोड़ रुपए का था। 20 साल में पाकिस्तान का डिफेंस बजट बढ़कर 77 हजार करोड़ हो गया। यानी, आज भी पाकिस्तान का डिफेंस बजट 1999 के हमारे डिफेंस बजट से 27 हजार करोड़ कम है।

20 साल में भारत ने आर्म्ड फोर्स में 7 लाख का इजाफा किया, पाकिस्तान सिर्फ एक लाख बढ़ा पाया

भारत आर्म्ड फोर्स के हिसाब से पाकिस्तान से तीन गुना ज्यादा बड़ा है। 1999 में भारत की आर्म फोर्सेज की संख्या जहां 23 लाख के आसपास थी। 2019 में यह बढ़कर 30 लाख से ऊपर हो गई। यानी, 20 साल में 7 लाख का इजाफा। वहीं, पाकिस्तान की आर्म्ड फोर्सेज की संख्या 1999 में 8 लाख थी जो अब 9 लाख ही है।

भारत के पास 14,44,000 एक्टिव सेना के अलावा 21,00,000 रिज़र्व सेना भी है जो किसी भी इमरजेंसी के समय एक्टिव सेना में मर्ज हो सकती है। जबकि पाकिस्तान के पास 6,54,000 एक्टिव सेना और 5,50,000 रिज़र्व सेना है। इस लिहाज से भारत की आर्मी पाकिस्तान की आर्मी से तीन गुना से ज्यादा पावरफुल है।

भारत की अग्नि-3 पाकिस्तान के शाहीन से दो गुना ताकतवर

सेंटर फॉर स्ट्रेटिजिक स्टडीज के मुताबिक, भारत के पास 9 बैलिस्टिक मिसाइल हैं जिसमें अग्नि-3 भी है। अग्नि-3 भारत की सबसे आधुनिक और ताकतवर मिसाइल है। जो पाकिस्तान के सबसे ताकतवर मिसाइल शाहीन-2 की तुलना में ज्यादा ताकतवर है। भारत की अग्नि-3 न्यूक्लियर बैलिस्टिक के साथ 3000 से 5000 किलोमीटर तक मार कर सकती है, जबकि पाकिस्तान की शाहीन-2 सिर्फ 2000 किलोमीटर तक मार कर सकती है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
India Army Vs Paksitan News: Kargil Vijay Diwas 2020 | Know Whose Army Is Powerful India Or Pakistan, Comparison Military Strength and Defence Budget


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2WSlNOo
https://ift.tt/30PGH1E

Popular Post