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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के नए टाइटल स्पॉन्सर का ऐलान आज होगा। नई कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ 18 अगस्त से 31 दिसंबर 2020 तक के लिए ही रहेगा। दावेदारी की दौड़ में टाटा संस कंपनी सबसे आगे मानी जा रही है, जबकि पतंजलि आयुर्वेद रेस से बाहर हो गई है। हालांकि, उसे भी प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
इनके अलावा रिलायंस जियो, बायजू, अन-एकेडमी, और ड्रीम इलेवन जैसी कंपनियां भी रेस में हैं। इस बार कोरोना के कारण आईपीएल 19 सितंबर से 10 नवंबर तक यूएई में होगा। यह टूर्नामेंट पूरी तरह से बायो-सिक्योर माहौल में होगा।
बाबा रामदेव ने पतंजलि की दावेदारी से इनकार किया
बाबा रामदेव का कहना है कि पतंजलि कंपनी तभी स्पॉन्सरशिप के लिए आगे आएगी, जब कोई दूसरी भारतीय कंपनी आगे नहीं आती है। उन्होंने इस दावे का खंडन किया कि पतंजलि ने स्पॉन्सरशिप के लिए बोली लगाई है।
सालाना 440 करोड़ रुपए देने वाली चाइनीज कंपनी वीवो से करार तोड़ा
चीन के साथ तनाव के कारण देशभर में चीनी कंपनियों का बायकॉट किया जा रहा है। इसी के चलते हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सर से चीनी मोबाइल कंपनी वीवो को हटाया था। वीवो का आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए 2190 करोड़ रुपए के साथ 5 साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। कंपनी सालाना 440 करोड़ रुपए देती थी।
यह कॉन्ट्रैक्ट 2018 से 2022 तक का था। बीसीसीआई सूत्रों की मानें तो वीवो के साथ एक साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया है। यह 2021 से 2023 तक के लिए बढ़ाया जा सकता है।
बोर्ड ने टाइटल स्पॉन्सरशिप की रकम 100 करोड़ रुपए कम की
बीसीसीआई ने भारतीय मूल की कंपनियों को लुभाने के लिए स्पॉन्सरशिप की रकम को पहले की तुलना में कम कर दिया है। पहले यह रकम 440 करोड़ रुपए सालाना थी, लेकिन बोर्ड ने इसको अब 300 से 350 करोड़ रुपए सालाना कर दिया है।
स्मिथ की गैरमौजूदगी में उनादकट कप्तानी करेंगे
जयदेव उनादकट नियमित कप्तान स्टीव स्मिथ की गैरमौजूदगी में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी करेंगे। स्मिथ आईपीएल के शुरुआती हफ्ते में नहीं खेलेंगे, क्योंकि उस समय वे आइसोलेशन में होंगे। वहीं, अफगानिस्तान में शापेजा क्रिकेट लीग 6 से 18 सितंबर तक होगी। इसलिए अफगान खिलाड़ी भी आईपीएल के शुरुआती मैचों से बाहर रह सकते हैं।
दुबई नहीं, अबु धाबी में होगा केकेआर का बेस
केकेआर टीम 20 या 21 अगस्त को यूएई रवाना होगी। उसका बेस अबु धाबी का द रिट्ज-कार्लटन होटल होगा। इस होटल में केकेआर के मालिक शाहरुख खान की हिस्सेदारी है। खिलाड़ी बायो-सिक्योर बबल में रहेंगे।
ट्रम्प प्रशासन ने इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक पर कब्जा छोड़ने की शर्त पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को इजरायल के साथ सामान्य संबंधों के लिए राजी कर बहुत बड़ा काम किया है। यह डील क्षेत्र के हर बड़े पक्ष को प्रभावित करती है क्योंकि इससे अमेरिका समर्थक, संयत इस्लाम समर्थक, इजरायल के साथ संघर्ष खत्म करने के पक्षकार और ईरान समर्थक, अमेरिका विरोधी, इजरायल के साथ स्थायी संघर्ष के पक्षकार इस्लाम समर्थक, ये सभी अकेले पड़ गए हैं और पीछे छूट गए हैं।
यह भू-राजनैतिक भूकंप है। ऐसा क्यों है, यह जानने के लिए आपको डील को समझना होगा। ट्रम्प की यह शांति योजना जैरेड कुशनर ने बनाई। कुशनर ने मूलत: इजरायल और फिलस्तीन के बीच शांति की कोशिश की, जिसमें इजरायल को वेस्ट बैंक के 30% हिस्से पर कब्जा मिलता और फिलिस्तीनियों को बाकी 70% पर असैनिकीकरण के साथ राज्य स्थापित करने मिलता। फिलिस्तीनियों ने इससे इनकार कर दिया। लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनकी योजना के कब्जे वाले हिस्से को 1 जुलाई तक लागू करने की मंशा है, लेकिन वे फिलिस्तीनियों को 70% बाकी हिस्सा देने पर सहमत नहीं हैं।
इस पर बात नहीं बनी क्योंकि कुशनर को मिस्र, जॉर्डन और खाड़ी के अरबों से यह सुनने मिल रहा था कि ऐसा एकपक्षीय इजरायली कब्जा डील तोड़ देगा। कुशनर ने ट्रम्प को मनाया कि वे नेतन्याहू को मर्जी से कब्जा करने से रोकें। इससे नेतन्याहू का जनता में समर्थन कम हो रहा था। इसलिए ट्रम्प, कुशनर, नेतन्याहू और अमीरात के प्रिंस मोहम्मद बिन ज़ायेद ने मुसीबत को फायदे में बदलने का फैसला लिया। वाशिंगटन के लिए पूर्व राजदूत इतामार राबिनोविच कहते हैं, ‘उन्होंने फिलिस्तीनी राज्य के लिए इजरायली कब्जे की जगह, यूएई से शांति के बदले इजरायल द्वारा कब्जा न करने की शर्त रखी। यह शांति के बदले शांति थी, न कि जमीन के बदले शांति।’
यूएई लंबे समय से इजरायल के साथ खुले राजनयिक संबंधों की कोशिश कर रहा था लेकिन यह कब्जे को रोकने की चर्चा ही थी जिसने ऐसी रूपरेखा तैयार की, जहां यूएई को इजरायल के साथ सामान्यीकरण करने पर बदले में फिलिस्तीनियों के लिए भी कुछ मिलता दिख रहा था। दरअसल नेतन्याहू इजरायली दक्षिणपंथी ताकतों को खुश करने के लिए सबकुछ करने का तौयार थे, ताकि वे भ्रष्टाचार के मामले में उनका साथ दें। इस डील को अपनाकर नेतन्याहू ने अपने उन वैचारिक सहयोगियों को नकार दिया है, जिन्हें कब्जे की उम्मीद थी। लेकिन अब नेतन्याहू को मध्य और मध्य-दक्षिणपंथियों पर निर्भर रहना होगा। इस डील की वजह से फिलिस्तीनी प्राधिकरण का नेतृत्व कर रहे महमूद अब्बास भी किसी चीज से वंचित थे, शायद जिसकी वजह से वे बातचीत के लिए आए। वे अपने इस विचार से वंचित हो गए थे कि खाड़ी के अरब, इजरायल के साथ तभी सामान्यीकृत होंगे जब इजरायली फिलिस्तीनी प्राधिकरण की मनपसंद राज्य की मांग पूरी कर देंगे।
इस डील से खाड़ी के अन्य शेख, जैसे बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत और सऊदी अरब के शेख भी अमीरात के नक्शे कदम पर चलने को प्रोत्साहित होंगे। वे नहीं चाहेंगे कि यूएई अपनी वित्तीय राजधानी को इजरायल की सायबर टेक्नोलॉजी, कृषि तकनीक और स्वास्थ्य सेवा तकनीक से जोड़ने में उनसे आगे निकल जाए।
तीन अन्य विजेता हैं: 1) जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला। उनका यह डर फिलहाल खत्म हो गया कि इजरायली कब्जा, जॉर्डन को फिलिस्तीनी राज्य में बदलने के प्रयासों को बढ़ावा देगा। 2) अमेरिकी यहूदी समुदाय। अगर इजरायल ने वेस्ट बैंक के हिस्से पर कब्जा कर लिया होता तो इससे अमेरिका का हर यहूदी मंदिर और समुदाय दो हिस्सों में बंट जाता। और 3) जो बाइडेन। अगर बाइडेन ट्रम्प की जगह आते हैं तो उन्हें कब्जे के कष्टकारी मुद्दे की चिंता नहीं करनी होगी। इसमें भू-राजनैतिक रूप से बड़े असफल ईरान और उसके करीबी हैं। ये हैं इराकी नागरिक सेना हिज़बुल्लाह, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद, हमस, इस्लामी जिहाद, यमन और तुर्की में हाउती। अब तक यूएई को ईरान और इजरायल के बीच संतुलन बनाना पड़ता था। लेकिन यह डील ईरान को सीधा जवाब है: ‘इजरायल अब हमारी तरफ है, इसलिए हमसे मत उलझना।’ लेकिन यहां एक और संदेश है कि यूएई ईरानियों और उसके करीबियों को बता रहा है कि आज इलाके में दो गठबंधन हैं। पहला जो भविष्य के लिए अतीत को दफनाना चाहता है और दूसरा अतीत के लिए भविष्य को दफना रहा है। यूएई पहले का नेता बन गया है और उसने ईरान को दूसरे के नेतृत्व के लिए छोड़ दिया है।
मध्य पूर्व में संप्रदायवाद, भ्रष्टाचार और विविधता का विरोध गहरे तक समाए हैं। लेकिन वहां ऐसे युवा भी हैं जो पुराने खेलों, लड़ाइयों और पुराने घावों से थक चुके हैं। आप उन्हें बेरूत की सड़कों पर अच्छे शासन की मांग करते देख सकते हैं, जिससे उन्हें अपनी क्षमता पहचानने का मौका मिला है। यूएई, इजरायल और अमेरिका ने दिखा दिया है कि जरूरी नहीं है कि अतीत हमेशा भविष्य को दफनाए और नफरत करने वाले, बांटने वाले हमेशा जीतें। उम्मीद है कि यह ताजी हवा एक दिन तेज हवा बनकर पूरे क्षेत्र में फैले। (ये लेखक के अपने विचार हैं)
जो बाइडेन द्वारा कमला हैरिस को अमेरिका के उप-राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने पर भारत में उत्साह को समझा जा सकता है। हैरिस आधी भारतीय और आधी जमैका मूल की हैं। और आज वे पूरी अमेरिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि अपने भारतीय मूल के कारण वे अपने ‘मादरे वतन’ का पक्ष लेंगी या खुद को अमेरिकियों से भी ज्यादा अमेरिकी साबित करने के लिए भारत विरोधी रुख अपनाएंगी? भारतीय मूल से किसी भी तरह जुड़ा कोई व्यक्ति दुनिया में मशहूर होता है, तब हम भारतीय तुरंत दावा करने लगते हैं कि उसका बेहतर हिस्सा हम ही हैं। अगर किसी भी पीढ़ी का कोई भारतीय प्रवासी है, जो शक्तिशाली, अमीर और प्रसिद्ध है, तो वह हमारा है।
हम भारतीय प्रायः ऐसे ही होते हैं। हरगोविंद खुराना को 1968 में जब चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल मिला तब मैं पानीपत के सनातन धर्म हायर सेकेंडरी स्कूल में नौवीं का छात्र था और हमने तुरंत उस पुरस्कार को अपना बता दिया था। हमारे साइंस टीचर ने न केवल ‘हरगोविंद’ को अपना पुराना स्कूली साथी बताया, बल्कि यह भी दावा किया कि वे खुद उनसे बेहतर छात्र थे मगर मजबूरियों के कारण अमेरिका नहीं जा पाए। खुराना 1966 में ही पूर्ण अमेरिकी नागरिक बन चुके थे।
अमेरिकी सार्वजनिक हस्तियों के मामले में हमारी यह ‘भारत समर्थक’ या ‘भारत विरोधी’ वाली सनक ज्यादा तेज हो जाती है। इसलिए केनेडी हमारे सबसे बड़े दोस्त थे, तो निक्सन सबसे बड़े दुश्मन। और बिल क्लिंटन को आप किस खाते में डालेंगे? इसपर हम आगे बात करेंगे।
1980 से 1990 के दशकों के बीच जब अमेरिका के साथ भारत के संबंध कुछ खिंचे-खिंचे से थे तब न्यूयॉर्क के प्रतिनिधि स्टीफन सोलार्ज भारत के साथ बेहतर रिश्ते के सच्चे पैरोकार बनकर उभरे थे। कई लोग मानते थे कि इसके पीछे वहां बसे भारतीय वोटरों में उनका बड़ा आधार था। इसके बाद दिवंगत प्रोफेसर स्टीफन पी. कोहेन ने कहा कि स्टीव सोलार्ज ‘भारत समर्थक’ या कोई और ‘भारत विरोधी’ नहीं हैं। वे बस अमेरिका समर्थक हैं। फर्क सिर्फ यह है कि कोई यह मानता है कि भारत के साथ बेहतर रिश्ता अमेरिका के लिए फायदेमंद होगा, तो कोई पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते को अच्छा मानता है।
इसी कसौटी पर हमें आज कमला हैरिस को कसने की जरूरत है। यह सोचना मूर्खतापूर्ण ही होगा कि भारत के बारे में हैरिस के विचार उनके डीएनए से तय होंगे। रिपोर्टरों को हैरिस के किसी भारतीय अंकल के पास इस सवाल के साथ जाने की जरूरत नहीं है कि भारत के प्रति उनका रुख उनके मूल स्थान से तय होगा या मानवाधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से?
जब हम हैरिस को एक अमेरिकी मान लेते हैं तब इस विचार को आगे बढ़ा सकते हैं और बिल क्लिंटन पर आते हैं कि वे भारत के लिए अच्छे अमेरिकी राष्ट्रपति थे या नहीं। इसका जवाब है कि वे पहले कार्यकाल में बुरे रहे, तो दूसरे में अच्छे। उनका पहला कार्यकाल तब शुरू हुआ था जब भारत एक लंबे राजनीतिक-आर्थिक संकट से गुजर रहा था। 1989-91 के बीच तीन साल में हमें चौथे प्रधानमंत्री के रूप में पी.वी. नरसिंहराव मिले थे। 1991 में हम कर्ज के लिए आईएमएफ के दरबार में जा खड़े हुए थे। पंजाब में अलगाववादी हिंसा चरम पर थी, कश्मीर उबलने लगा था। राव की सरकार ने पूरे संकल्प के साथ मुक़ाबला किया। पश्चिम के मानवाधिकार समुदाय ने इसका विरोध किया।
क्लिंटन का पहला प्रशासन इसी विवाद के बीच उलझा रहा। इसके साथ ही परमाणु अप्रसार खेमा दबाव डाल रहा था कि भारत परमाणु घेरे से बाहर रहे। इस पर यह व्यापक धारणा भी बनी थी कि 1995 की सर्दियों में राव परमाणु परीक्षण करना चाहते थे मगर क्लिंटन ने उन्हें रोक दिया था। बाद में 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी ने जब परमाणु परीक्षण किया तब क्लिंटन का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। 1999 में क्लिंटन ने पाकिस्तान को करगिल में अपनी सीमा में रहने को भी मजबूर किया, इस उपमहाद्वीप का दौरा किया मगर पाकिस्तान में चंद मिनट से ज्यादा नहीं रुके। ये अपने पहले कार्यकाल वाले क्लिंटन नहीं थे। क्लिंटन के दो कार्यकालों में क्या फर्क आ गया था? फर्क यह आया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था बदल गई थी और दुनिया में अपना रुतबा बना रही थी। राव-मनमोहन के आर्थिक सुधारों की शुरुआत 1991 में हुई। भारत बदल गया था, क्लिंटन वही थे। वे वही कर रहे थे, जो उन्हें अमेरिका के लिए सबसे अच्छा लगता था।
आज के लिए यही सबक है। भारत को अगर दुनिया की शक्तिशाली राजधानियों में अपना रुतबा और अपनी इज्ज़त बढ़ानी है, तो उसे अपनी अर्थव्यवस्था, आंतरिक समरसता और बाह्य सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। पिछले तीन साल में हमारा देश इन तीनों मामलों में फिसलकर पीछे चला गया है। मोदी सरकार के चहेते यह नहीं मानेंगे, लेकिन इतना तो वे मानेंगे ही कि पिछले तीन साल में हमारी अर्थव्यवस्था लस्तपस्त हो चुकी है। अगली जनवरी में इसकी जो भी हालत रहेगी, भारत के बारे में कमला हैरिस के विचार उसी से तय होंगे, न कि उनके वंशाणु से। वह भी तब, जब बाइडेन का टिकट जीतता है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)
रक्षा उत्पादन में भारत के निजी क्षेत्र से बड़ी खबर है। निजी क्षेत्र ने अपनी पहली मिसाइल बना ली है। तीसरी पीढ़ी की यह एंटी टैंक मिसाइल परीक्षण के लिए तैयार है। 12 महीने के भीतर इसका परीक्षण होने की उम्मीद है।
निजी क्षेत्र में मिसाइल बनाने की खबर ऐसे समय में आई है, जब रक्षा मंत्रालय ने देश में हथियार और रक्षा उपकरणों के बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हफ्तेभर पहले ही 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर बैन की घोषणा की थी।
इस काम को करने के लिए सोमवार को भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों, रक्षा उत्पादन विभाग और निजी क्षेत्र के दिग्गजों के बीच विचार-विमर्श हुआ। इसके उद्घाटन सत्र में ही निजी क्षेत्र की मिसाइल तैयार होने का खुलासा हुआ। सेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने उद्यमियों के बीच ऐलान किया कि सेना स्वदेशी हथियारों से लड़कर ही जंग जीतेगी। पर हमें ध्यान रखना है कि भविष्य की जंग कुछ अलग तरह की होंगी। हमें पुराने हथियार छोड़कर नई टेक्नोलॉजी पर फोकस करना होगा।
विचार-विमर्श में सेना के शीर्ष प्रतिनिधियों ने बताया कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन के 30 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पिछले 20 महीने में शुरू किए गए हैं। इस तरह के पहले प्रोजेक्ट का टेंडर पिछले महीने जारी किया गया, जो एयर डिफेंस मिसाइलों के लिए है। सेना ने 28 प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है। इनमें से 13 प्रोजेक्ट निजी क्षेत्र ने अपनी सोच के आधार पर पेश किए हैं। 5000 करोड़ रुपए के नए प्रोजेक्ट की घोषणा जल्दी की जाएगी।
सेना ने देश में हथियार निर्माण के फायदे भी गिनाए
सैन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि जंग के समय स्वदेशी हथियार सबसे भरोसेमंद साबित होते हैं। इनके चार रणनीतिक लाभ हैं:
आयात पर दुश्मन की निगाह होती है। लेकिन देश में हथियार और गोला बारूद बनेगा तो शत्रु हमारे भंडार को जान नहीं सकता।
गोला बारूद का बड़ा भंडार रखने की जरूरत नहीं। सिर्फ क्षमता हासिल करना जरूरी। जरूरत के हिसाब से तुरंत उत्पादन संभव।
हथियारों की सुनिश्चित सप्लाई की गारंटी। बाहरी हथियारों की आपूर्ति दूसरे देश पर निर्भर।
आयात पर निर्भरता से दूसरे देश पर रणनीतिक-कूटनीतिक दबाव की स्थिति नहीं।
दागने के लिए ट्राइपॉड की जरूरत नहीं
यह मिसाइल हैदराबाद की वीईएम टेक्नाेलाॅजीस ने तैयार की है। डीआरडीओ ने भी ऐसी एंटी टैंक मिसाइल बनाई थी। यह मिसाइल उससे हल्की है। 18 किलो की इस मिसाइल काे सैनिक अपने साथ आराम से ले जा सकता है। इसके वजन में 6 किलो की लॉन्च यूनिट भी शामिल है। इसे दागने के लिए ट्राइपॉड की जरूरत नहीं पड़ती। मिसाइल थर्मोग्राफिक कैमरा से लैस है। इसका इंफ्रारेड सीकर किसी भी एक्सप्लाेसिव रिएक्टिव आर्मर यानी रासायनिक ऊर्जा से प्रूफ बख्तरबंद वाहन को भी नेस्तनाबूद कर सकता है। इसे एंटी टेरर ऑपरेशन में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी रेंज 2.5 किलाेमीटर की है।
कोरोना संकट के कारण अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार के तरीके बदल गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेशनल कन्वेंशन को कड़ी टक्कर देने के लिए बड़ा डिजिटल अभियान चलाने की योजना बनाई है। यह कन्वेंशन चार दिन तक चलेगा। ट्रम्प के प्रवक्ता टिम मुर्तो ने कहा कि उनकी पार्टी इन चार दिनों में डिजिटल प्रचार पर 75 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यू ट्यूब पर लगातार 96 घंटे भी प्रचार किया जाएगा। इसके अलावा कई बड़ी वेबसाइट और न्यूज आउटलेट्स पर कैंपेन चलाए जाएंगे।
डेमोक्रेटिक कैंडिडेट जो बिडेन टेलीविजन और रेडियो के जरिए प्रचार कर रहे हैं। एड ट्रैकिंग फर्म एडवरटाइजिंग एनालिटिक्स के मुताबिक, बिडेन ने 8 अगस्त से 14 अगस्त तक प्रचार पर 111 करोड़ और ट्रम्प ने 53 करोड़ रुपए खर्च किए। दोनों पार्टियां इस बार चुनाव प्रचार कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रही हैं। कई कार्यकर्ताओं ने वोटिंग के दिन भी काम करने से मना कर दिया है। अकेले मैरीलैंड राज्य में ही 14 हजार कार्यकर्ताओं की कमी है।
कोरोना के चलते कई कार्यक्रम रद्द
रैलियां, चंदा जुटाने के लिए सभाएं और चुनावी मुद्दों पर बहस जैसे कार्यक्रम लगभग रद्द किए जा चुके हैं। इस बार प्रत्यक्ष रैलियों, घर-घर पहुंचकर प्रचार जैसी गतिविधियों का स्थान डिजिटल माध्यम ने ले लिया है। पार्टियां वेबसाइट, यूट्यूब आदि पर विज्ञापन देकर प्रचार कर रही हैं। पहले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अगस्त के मध्य तक पार्टियों के कार्यकर्ता वोटरों के दरवाजों पर दस्तक दे चुके होते थे। इस साल ऐसा नहीं हुआ।
चुनाव में दोनों पार्टियों का नेशनल कन्वेंशन अहम होता है। यहीं पार्टियां उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार करती हैं। इस साल डेमोक्रेटिक पार्टी का नेशनल कन्वेंशन अप्रैल में होना था। इसे बढ़ाकर जुलाई और फिर 17 अगस्त करना पड़ा। पहले ट्रम्प कह रहे थे कि उनकी चुनावी रैलियों में ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंचना चाहिए। इससे कोरोना का डर खत्म होने लगेगा, लेकिन ट्रम्प को फ्लोरिडा में कन्वेंशन रद्द करना पड़ा। वे चारलोट के कन्वेंशन में भी शामिल नहीं होंगे।
यहीं नहीं, ट्रम्प वॉशिंगटन डीसी के एंड्रयू मेलन ऑडिटोरियम में नॉमिनेशन स्वीकार करेंगे, लेकिन भाषण व्हाइट हाउस से ही देंगे। चारलोट कन्वेंशन में 400 पार्टी डेलिगेट्स हिस्सा लेंगे।
भारतीयता: डेमोक्रेट का कन्वेंशन मंत्र और अरदास के साथ शुरू हुआ
डेमोक्रेटिक पार्टी का चार दिवसीय नेशनल कन्वेंशन सोमवार से शुरू हुआ। इसके लिए देशभर में अलग-अलग जगह कार्यक्रम हो रहे हैं। पहले दिन टेक्सास में ऑनलाइन सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई। इसमें वेदों और महाभारत के श्लोक पढ़ गए। सिख धर्म की अरदास भी गई। टेक्सास में चिन्मय मिशन की एक अनुयाई ने मंत्रोच्चार किया। विस्कोंसिन गुरुद्वारे से जुड़े सिख समुदाय के एक नेता ने अरदास की।
इस सम्मेलन में बिडेन को डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति और भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुना जाएगा। इससे पहले ‘बिडेन फॉर प्रेसीडेंट’ अभियान के लिए रविवार को भी सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई। इसमें बिडेन और हैरिस के लिए महाभारत की पंक्तियां पढ़ते हुए कहा गया- ‘यतो कृष्ण ततो धर्म, यतो धर्म ततो जय।' ट्रम्प और बिडेन के बीच पहली बहस 29 सितंबर को होनी है।
असम विधानसभा के डिप्टी स्पीकर और भाजपा विधायक अमीनुल हक लश्कर प्लाज्मा डोनेट करने वालों से मिलने उनके घर जा रहे हैं। साथ ही डोनर के पैर धोकर उनका शुक्रिया अदा कर रहे हैं। दरअसल, असम में भाजपा के एकमात्र मुस्लिम विधायक लश्कर हाल ही में कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक हुए हैं। इसलिए अब वे लोगों को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
हाल ही में लश्कर काछार जिले के सोनाई इलाके में प्लाज्मा डोनेट करने वाले नाबिदुल इस्लाम के घर पहुंचे। यहां उन्होंने नाबिदुल को एक स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इसके बाद नाबिदुल के पैर धोकर कहा- ‘‘मैं हमेशा आपका ऋणी रहूंगा। मैं जीवित रहने और कोरोना से लड़ने में कामयाब रहा, क्योंकि कोई प्लाज्मा दान करने के लिए राजी हो गया था। मैं प्लाज्मा डोनेट करने वाले सभी लोगों का कर्जदार हूं। इस कारण मैंने उनसे मिलने और उनके पैर धोकर सम्मानित करने का फैसला किया है।’’
उन्होंने कहा- सिल्चर मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थैरेपी से ठीक होने वाला मैं पहला कोरोना मरीज था। अब मुझे ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्लाज्मा दान करने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।
ज्यादा से ज्यादा लोग प्लाज्मा डोनेट करें
अमीनुल हक ने कहा, ‘‘सिल्चर मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण से अब तक 125 लोग ठीक हुए हैं, लेकिन 18 साल की उम्र से 55 साल के व्यक्ति ही प्लाज्मा दान कर सकते हैं। हालांकि, प्लाज्मा दान करने को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है इसलिए मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मानव सेवा में अपना योगदान दें।’’
प्लाज्मा से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार
प्लाज्मा डोनर नाबिदुल इस्लाम कहते हैं- ‘‘मैं एक आम आदमी हूं। यह सोच भी नहीं सकता कि मेरे एक छोटे से योगदान के लिए एक विधानसभा के डिप्टी स्पीकर मेरे पैर धोएंगे। मैं उनकी इस अद्भुत कोशिश के लिए आभारी हूं। इससे हम सबको अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलेगी।’’
देश के कई राज्यों में कोरोना मरीजों का प्लाज्मा थैरेपी से इलाज किया जा रहा है। दावा है कि प्लाज्मा से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है।
खबरों की दुनिया में कल क्या घटा और आज क्या होने वाला है? कल की बड़ी खबरें आपने मिस कर दी हों या आज की बड़ी खबरें जानना चाहते हैं तो पढ़िए ये मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ।
पहले जान लेते हैं आज क्या खास होने वाला है...
सुप्रीम कोर्ट में तय होगा कि डिग्री के लिए फाइनल ईयर और सेमेस्टर के स्टूडेंट्स को परीक्षा देनी पड़ेगी या नहीं। कोर्ट यूजीसी गाइडलाइन के खिलाफ छात्रों की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
सुशांत सिंह राजपूत मामले में सीबीआई अपने अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्टता चाहती है। इसके लिए उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। याचिका पर आज सुनवाई होगी।
नेशनल स्पोर्ट्स अवॉर्ड के लिए खेल मंत्रालय की स्पेशल कमेटी की मीटिंग का आज दूसरा और आखिरी दिन है। आज ही अर्जुन और खेल रत्न पुरस्कार का ऐलान हो सकता है।
बीसीसीआई आज आईपीएल के नए टाइटल स्पॉन्सर का ऐलान करेगा। इस रेस में टाटा सन्स सबसे आगे है।
मालदीव और भारत के बीच आज से ट्रैवल बबल यानी हवाई यात्रा की शुरुआत होगी। ट्रैवल बबल दो देशों के बीच हवाई सेवा के लिए बनाया गया एयर कॉरिडोर होता है। कोरोना के चलते लगे प्रतिबंधों को बीच जरूरी शर्तों के साथ दो देश इसे आपस में शुरू कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के मुताबिक 10वीं और 12वीं की ऑनलाइन क्लासेस आज से शुरू हो जाएंगी।
ये तो बात हुई आज की, अब कल की 10 अहम खबरें...
1. कांग्रेस और भाजपा की ‘हेट स्पीच’ में फंसी फेसबुक
एक ‘हेट स्पीच’ किसी भी नेता को हेडलाइन बना देती है। नेता ‘हेट स्पीच’ देकर सुर्खियों में आते रहे हैं। लेकिन, इस बार उनकी ‘हेट स्पीच’ में फेसबुक फंस गई है। एक अमेरिकी अखबार ने दावा किया कि फेसबुक ने भाजपा नेताओं की ‘हेट स्पीच’ वाली पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई करने में जानबूझकर कोताही बरती। दावे के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। कांग्रेस जांच के लिए संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) बनाने की मांग कर रही है। वहीं, भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के ऊपर ही नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। ये उनकी खीझ और बौखलाहट है। विवाद में फंसी फेसबुक खुद को निष्पक्ष बता रही है।
कांग्रेस लीडरशिप ये तय नहीं कर पा रही कि उनका अगला अध्यक्ष कौन हो? गांधी परिवार के खास नेता राहुल के नाम की रट लगाते रहते हैं। वहीं, बागी लीडरशिप पर सवाल खड़े करते रहते हैं। नए सवाल कांग्रेस से निलंबित संजय झा ने खड़े किए हैं। उनका दावा है कि पार्टी के करीब 100 नेताओं ने सोनिया गांधी को लीडरशिप बदलने के लिए चिट्ठी लिखी है। हालांकि, झा के दावों को पार्टी ने सिरे से नकारा है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि फेसबुक-भाजपा की साठगांठ से ध्यान हटाने के लिए ऐसे दावे किए जा रहे हैं।
जाने माने शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का सोमवार को 90 साल की उम्र में निधन हो गया। पद्म विभूषण पंडित जसराज पिछले कुछ समय से अपने परिवार के साथ अमेरिका में ही थे। वहीं, उन्होंने अंतिम सांस ली। 28 जनवरी 1930 को हरियाणा के हिसार में जन्मे पंडित जसराज ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो 4 पीढ़ियों से शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ा रहा था। वे 14 साल की उम्र तक तबला सीखते थे। बाद में उन्होंने गायिकी की तालीम ली।
भारतवंशी महिला सबरीना सिंह बनीं कमला हैरिस की प्रेस सेक्रेटरी।
4. कमला हैरिस ने भारतवंशी सबरीना को प्रेस सेक्रेटरी बनाया
पहले भारतवंशी कमला हैरिस अमेरिका के चुनाव में उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनीं। अब उन्होंने एक भारतवंशी महिला सबरीना सिंह को अपना प्रेस सेक्रेटरी बनाया है। सबरीना अमेरिका में किसी भी उप राष्ट्रपति उम्मीदवार की प्रेस सेक्रेटरी बनने वाली पहली भारतीय अमेरिकी हैं। 1940 में अमेरिका में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले सरदार जेजे सिंह सबरीना के दादा थे। इसी आंदोलन के बाद अमेरिका में हर साल 100 भारतीयों के इमिग्रेशन को अनुमति मिली थी।
5. बिहार में चुनाव से पहले नेताओं की अदला-बदली, नीतीश 3-1 से आगे
दल-बदल की खबरें ज्यादा आना चुनाव की आहट देती हैं। बिहार में इस वक्त वही आहट सुनाई दे रही है। कभी चिराग पासवान नीतीश की मुश्किल बढ़ाते दिखते हैं तो कभी जीतनराम मांझी अपनी कश्ती के लिए नया किनारा तलाशते। सोमवार को भी चार नेताओं ने पाला बदला। जदयू वाले श्याम रजक जो पिछली सरकार तक नीतीश के खास थे। 11 साल बाद वापस राजद में लौट गए। वहीं, तेजस्वी की पार्टी के तीन विधायकों प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव और अशोक कुमार ने जदयू का दामन थाम लिया। जाने की आहट मिलते ही राजद ने रविवार को तीनों को पार्टी से निकाला दिया था।
शूटिंग कोच जसपाल राणा और हॉकी कोच रोमेस पठानिया समेत 13 कोच इस साल द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजे जाएंगे। राणा की कोचिंग में मनु भाकर, सौरभ चौधरी और अनीष भानवाला जैसे वर्ल्ड क्लास शूटर निकले हैं। 15 स्पोर्ट्स लीजेंड्स को मेजर ध्यानचंद सम्मान के लिए चुना गया है। खेल मंत्रालय की 12 सदस्यीय स्पेशल कमेटी की मीटिंग के पहले दिन इन नामों का ऐलान हुआ। आज मीटिंग का दूसरा दिन होगा। इसके बाद राजीव गांधी खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड विजेताओं के नाम घोषित किए जाएंगे।
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब उनके दोस्त और सीरियल पवित्र रिश्ता के डायरेक्टर कुशल झवेरी ने एक वॉट्सऐप चैट जारी कर दावा किया है कि सुशांत डिप्रेशन में नहीं थे। बताया जा रहा है कि यह चैट 1 या 2 जून के बीच की है। इसे सुशांत और कुशल के बीच चैट पर हुई आखिरी बातचीत भी कहा जा रहा है। जो स्क्रीनशॉट झावेरी की ओर से शेयर किए गए हैं, उसमें सुशांत और वह दोनों बीते दिनों की बात कर रहे हैं।
8. 60 साल में आए 10 जानलेवा वायरस, कौन कितना खतरनाक
पिछले साठ साल में जितने वायरस आए उनमें कोरोना पहला है ,जो दुनिया के 215 देशों और द्वीपों तक फैला है। इससे पहले किसी भी वायरस का प्रकोप इतने देशों तक नहीं फैला। कोरोना को लेकर राहत की बात ये है कि इसका डेथ रेट बाकी संक्रमणों के मुकाबले काफी कम है। इसकी चपेट में आए 3.5% लोगों की जान गई है। डेथ रेट के मामले में सबसे खतरनाक वायरस मारबर्ग था। इसके चपेट में आए 80% लोगों की जान गई थी।
वर्ल्ड मीटियरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन का अनुमान है कि 2100 तक धरती का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो धरती के कई इलाकों में इंसानों का रह पाना आसान नहीं होगा। भारत के हालात भी कुछ ऐसे ही रहने हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि गर्मी बढ़ने की वजह से 2030 तक साउथ एशिया में 4.3 करोड़ से ज्यादा नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा, क्योंकि 2030 तक बढ़ती गर्मी से 3.4 करोड़ लोगों की नौकरियां चली जाएंगी।
10. NEET और JEE मेन 2020 प्रवेश परीक्षाएं नहीं टलेंगी
NEET और JEE मेन 2020 प्रवेश परीक्षाओं को टालने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब 1 सितंबर से 6 सितंबर तक JEE मेन 2020 की परीक्षा होगी। वहीं, 13 सितंबर को तय शेड्यूल के हिसाब से ही NEET 2020 का आयोजन होगा। जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जिंदगी को ऐसे रोका नहीं जा सकता। हमें सुरक्षा उपायों के साथ आगे बढ़ना होगा, छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकते। कोर्ट ने याचिकाकर्ता छात्रों से यह भी पूछा कि, क्या आप परीक्षाओं को रद्द करवा कर अपना एक साल बर्बाद करना चाहते हैं?
आज के दिन इतिहास में क्या खास रहा, आइये जानते हैं ...
18 अगस्त 1951 को भारत को पहला आईआईटी यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी मिला। कोलकाता के पास खड़गपुर में इस संस्थान का उद्घाटन देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने किया था।
आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि है। 18 अगस्त 1945 को ताइवान के नजदीक हुई एक हवाई दुर्घटना में नेताजी की मौत हुई थी। हालांकि, उनकी मृत्यु रहस्यमयी ही रही और अक्सर उसको लेकर सवाल उठते रहे। नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ था। 1920 में उन्होंने इंग्लैंड में इंडियन सिविल सर्विस एग्जामिनेशन क्लियर किया था।
आज गुलजार का जन्मदिन है। वहीं, बिहार की राजनीति में नेताओं का दल-बदल जारी है। राजनीति की इसी दल-बदल पर चलते-चलते गुलजार की ये दो लाइनें…
रक्षा उत्पादन में भारत के निजी क्षेत्र से बड़ी खबर है। निजी क्षेत्र ने अपनी पहली मिसाइल बना ली है। तीसरी पीढ़ी की यह एंटी टैंक मिसाइल परीक्षण के लिए तैयार है। 12 महीने के भीतर इसका परीक्षण होने की उम्मीद है।
निजी क्षेत्र में मिसाइल बनाने की खबर ऐसे समय में आई है, जब रक्षा मंत्रालय ने देश में हथियार और रक्षा उपकरणों के बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हफ्तेभर पहले ही 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर बैन की घोषणा की थी।
इस काम को करने के लिए सोमवार को भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों, रक्षा उत्पादन विभाग और निजी क्षेत्र के दिग्गजों के बीच विचार-विमर्श हुआ। इसके उद्घाटन सत्र में ही निजी क्षेत्र की मिसाइल तैयार होने का खुलासा हुआ। सेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने उद्यमियों के बीच ऐलान किया कि सेना स्वदेशी हथियारों से लड़कर ही जंग जीतेगी। पर हमें ध्यान रखना है कि भविष्य की जंग कुछ अलग तरह की होंगी। हमें पुराने हथियार छोड़कर नई टेक्नोलॉजी पर फोकस करना होगा।
विचार-विमर्श में सेना के शीर्ष प्रतिनिधियों ने बताया कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन के 30 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पिछले 20 महीने में शुरू किए गए हैं। इस तरह के पहले प्रोजेक्ट का टेंडर पिछले महीने जारी किया गया, जो एयर डिफेंस मिसाइलों के लिए है। सेना ने 28 प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है। इनमें से 13 प्रोजेक्ट निजी क्षेत्र ने अपनी सोच के आधार पर पेश किए हैं। 5000 करोड़ रुपए के नए प्रोजेक्ट की घोषणा जल्दी की जाएगी।
सेना ने देश में हथियार निर्माण के फायदे भी गिनाए
सैन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि जंग के समय स्वदेशी हथियार सबसे भरोसेमंद साबित होते हैं। इनके चार रणनीतिक लाभ हैं:
आयात पर दुश्मन की निगाह होती है। लेकिन देश में हथियार और गोला बारूद बनेगा तो शत्रु हमारे भंडार को जान नहीं सकता।
गोला बारूद का बड़ा भंडार रखने की जरूरत नहीं। सिर्फ क्षमता हासिल करना जरूरी। जरूरत के हिसाब से तुरंत उत्पादन संभव।
हथियारों की सुनिश्चित सप्लाई की गारंटी। बाहरी हथियारों की आपूर्ति दूसरे देश पर निर्भर।
आयात पर निर्भरता से दूसरे देश पर रणनीतिक-कूटनीतिक दबाव की स्थिति नहीं।
दागने के लिए ट्राइपॉड की जरूरत नहीं
यह मिसाइल हैदराबाद की वीईएम टेक्नाेलाॅजीस ने तैयार की है। डीआरडीओ ने भी ऐसी एंटी टैंक मिसाइल बनाई थी। यह मिसाइल उससे हल्की है। 18 किलो की इस मिसाइल काे सैनिक अपने साथ आराम से ले जा सकता है। इसके वजन में 6 किलो की लॉन्च यूनिट भी शामिल है। इसे दागने के लिए ट्राइपॉड की जरूरत नहीं पड़ती। मिसाइल थर्मोग्राफिक कैमरा से लैस है। इसका इंफ्रारेड सीकर किसी भी एक्सप्लाेसिव रिएक्टिव आर्मर यानी रासायनिक ऊर्जा से प्रूफ बख्तरबंद वाहन को भी नेस्तनाबूद कर सकता है। इसे एंटी टेरर ऑपरेशन में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी रेंज 2.5 किलाेमीटर की है।
असम विधानसभा के डिप्टी स्पीकर और भाजपा विधायक अमीनुल हक लश्कर प्लाज्मा डोनेट करने वालों से मिलने उनके घर जा रहे हैं। साथ ही डोनर के पैर धोकर उनका शुक्रिया अदा कर रहे हैं। दरअसल, असम में भाजपा के एकमात्र मुस्लिम विधायक लश्कर हाल ही में कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक हुए हैं। इसलिए अब वे लोगों को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
हाल ही में लश्कर काछार जिले के सोनाई इलाके में प्लाज्मा डोनेट करने वाले नाबिदुल इस्लाम के घर पहुंचे। यहां उन्होंने नाबिदुल को एक स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इसके बाद नाबिदुल के पैर धोकर कहा- ‘‘मैं हमेशा आपका ऋणी रहूंगा। मैं जीवित रहने और कोरोना से लड़ने में कामयाब रहा, क्योंकि कोई प्लाज्मा दान करने के लिए राजी हो गया था। मैं प्लाज्मा डोनेट करने वाले सभी लोगों का कर्जदार हूं। इस कारण मैंने उनसे मिलने और उनके पैर धोकर सम्मानित करने का फैसला किया है।’’
उन्होंने कहा- सिल्चर मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थैरेपी से ठीक होने वाला मैं पहला कोरोना मरीज था। अब मुझे ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्लाज्मा दान करने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।
ज्यादा से ज्यादा लोग प्लाज्मा डोनेट करें
अमीनुल हक ने कहा, ‘‘सिल्चर मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण से अब तक 125 लोग ठीक हुए हैं, लेकिन 18 साल की उम्र से 55 साल के व्यक्ति ही प्लाज्मा दान कर सकते हैं। हालांकि, प्लाज्मा दान करने को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है इसलिए मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मानव सेवा में अपना योगदान दें।’’
प्लाज्मा से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार
प्लाज्मा डोनर नाबिदुल इस्लाम कहते हैं- ‘‘मैं एक आम आदमी हूं। यह सोच भी नहीं सकता कि मेरे एक छोटे से योगदान के लिए एक विधानसभा के डिप्टी स्पीकर मेरे पैर धोएंगे। मैं उनकी इस अद्भुत कोशिश के लिए आभारी हूं। इससे हम सबको अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलेगी।’’
देश के कई राज्यों में कोरोना मरीजों का प्लाज्मा थैरेपी से इलाज किया जा रहा है। दावा है कि प्लाज्मा से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है।
देश में फेसबुक और वॉट्सऐप के 'कंट्रोल' मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देकर इस मामले की जांच संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) कराने की मांग की है।
उधर, फेसबुक के प्रवक्ता ने सोमवार कहा कि पूरे विश्व में हमारी नीतियां एक जैसी हैं। हम किसी की भी राजनीतिक हैसियत/पार्टी की संबद्धता के बिना हम घृणा फैलाने वाले भाषण और कंटेंट को बैन करते हैं। हम निष्पक्षता और सटीकता के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इसके लिए नियमित ऑडिट करते हैं।
क्या है फेसबुक विवाद
अमेरिका के अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) ने फेसबुक की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। डब्ल्यूएसजे ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि फेसबुक ने भाजपा नेताओं और कुछ समूहों के ‘हेट स्पीच’वाली पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई करने में जानबूझकर कोताही बरती। उन्हें जल्द नहीं हटाया।
इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में फेसबुक की पॉलिसी डायरेक्टर आंखी दास ने भाजपा नेता टी राजा सिंह के खिलाफ फेसबुक के हेट स्पीच नियमों को लागू करने का विरोध किया था। उन्हें डर था कि इससे कंपनी के संबंध भाजपा से बिगड़ सकते हैं। फेसबुक को भारत में कारोबार में नुकसान हो सकता है। टी राजा तेलंगाना से भाजपा विधायक हैं। उन पर भड़काऊ बयानबाजी के आरोप लगते रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आंखी दास ने चुनाव प्रचार में भाजपा की मदद भी की। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान फेसबुक ने कहा था कि उसने पाकिस्तानी सेना, भारत के राजनीतिक दल कांग्रेस के अप्रमाणिक फेसबुक पेज और भाजपा से जुड़ी झूठी खबरों वाले पेज हटा दिए हैं।
विपक्ष बोला- भाजपा के वश में फेसबुक, वॉट्सऐप, भाजपा ने विरोध किया
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा- 'भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत में फेसबुक और वॉट्सऐप को नियंत्रित करते हैं। वे इनके जरिए फर्जी खबरें और नफरत फैलाते हैं और इनका इस्तेमाल वोटरों को प्रभावित करने के लिए करते हैं। आखिरकार, अमेरिकी मीडिया फेसबुक को लेकर सच्चाई के साथ सामने आया।'
केंद्रीय मंत्री, रविशंकर प्रसाद ने कहा- अपनी ही पार्टी में लोगों को प्रभावित नहीं कर सकने वाले हारे हुए लोग कहते हैं कि भाजपा, संघ दुनिया को नियंत्रित करते हैं। चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाने के लिए आपको कैंब्रिज एनालिटिका, फेसबुक के साथ गठजोड़ करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। अब हमसे पूछताछ की गुस्ताखी कर रहे हैं।
from Dainik Bhaskar /national/news/facebook-said-our-policies-around-the-world-do-not-see-the-same-political-status-congress-demanded-a-probe-by-jpc-127623244.html
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सीमा विवाद और बयानबाजी के बीच भारत और नेपाल 9 महीने बाद आज पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक करेंगे। इसमें भारत की ओर से नेपाल में शुरू होने वाले और चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा होगी। हालांकि, दोनों देश सीमा विवाद समेत कुछ दूसरों मुद्दों पर भी बातचीत कर सकते हैं। नेपाल की तरफ से विदेश मंत्रालय में सचिव शंकर दास बैरागी शामिल होंगे। भारतीय दल की अगुआई नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा करेंगे।
इस बीच, भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने कहा है कि भगवान राम और बुद्ध दोनों देशों को बांटते नहीं, एकजुट करते हैं। बीते दिनों नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा था कि भगवान राम नेपाल के हैं। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के भगवान बुद्ध को भारत का कहे जाने पर नेपाली विदेश मंत्री ने आपत्ति जताई थी।
दोनों देशों का भगवान राम और बुद्ध में विश्वास: आचार्य
आचार्य ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत-नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भगवान राम और बुद्ध के बयानों के बारे में स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। हम दोनों भगवान राम और बुद्ध में विश्वास रखते हैं। यह भी मानते हैं कि बुद्ध का जन्मस्थान लुंबिनी है। राम और बुद्ध सर्किट दोनों देशों के आपसी तालमेल से जुड़े प्रोजेक्ट्स हैं। ये सारी चीजें हमें दूरी नहीं करतीं, बल्कि करीब लाती हैं। हमें इन मुद्दों पर किसी तरह का विवाद पैदा करने से बचना चाहिए।
दोनों देशों के बीच आठवीं बातचीत
2016 में नेपाल के तब के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड भारत आए थे। दोनों देशों ने आपसी विवाद सुलझाने और सहयोग बढ़ाने के लिए मैकेनिज्म तैयार किया था। 17 अगस्त को इसी मैकेनिज्म के तहत 8वीं बातचीत होगी। हाल के दिनों में सीमा विवाद और दूसरे मुद्दों की वजह से भारत और नेपाल के रिश्तों में खटास दिखी थी। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन पर भी नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने बयानबाजी की थी।
दोनों देशों के बीच कैसे शुरू हुआ विवाद
भारत ने अपना नया राजनीतिक नक्शा 2 नवंबर 2019 को जारी किया था। इस पर नेपाल ने आपत्ति जताई थी और कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख इलाके को अपना क्षेत्र बताया था। इस साल 18 मई को नेपाल ने इन तीनों इलाकों को शामिल करते हुए अपना नया नक्शा जारी कर दिया। इस नक्शे को अपने संसद के दोनों सदनों में पारित कराया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। मई-जून में नेपाल ने भारत से सटी सीमाओं पर सैनिकों की तादाद बढ़ा दी। बिहार में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली सैनिकों ने भारत के लोगों पर फायरिंग भी की थी।
from Dainik Bhaskar /international/news/after-9-months-nepal-and-india-will-meet-via-video-conferencing-nepals-ambassador-to-india-said-ram-and-buddha-do-not-divide-us-together-127623234.html
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देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 26 लाख 47 हजार 316 हो गया है। पिछले 24 घंटे के अंदर 58 हजार 108 नए मरीज बढ़े। राहत की बात है कि हफ्ते में यह दूसरी बार है जब संक्रमितों के बढ़ने की रफ्तार कम हुई है। वहीं, दूसरी अच्छी बात है कि संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा भी 19 लाख के पार हो चुका है।
उधर, देश में कोरोना की टेस्टिंग भी बढ़ी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में 16 अगस्त तक 3 करोड़ से ज्यादा टेस्ट किए जा चुके हैं। पिछले चार दिन में पॉजिटिविटी रेट में कमी आई। 12 अगस्त को यह 8.93% थी, तो यह घटकर 16 अगस्त को 8.84% रह गई।
कोरोना अपडेट्स
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को अपने आंकड़े जारी किए। इसके मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 57 हजार 982 केस सामने आए। वहीं, 941 मरीजों की मौत हो गई। देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 26 लाख 47 हजार 664 हो गई। इनमें 6 लाख 76 हजार 900 एक्टिव केस हैं। वहीं, 19 हजार 843 मरीज स्वस्थ हो गए हैं। उधर, अब तक 50 हजार 921 लोग इस बीमारी से दम तोड़ चुके हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकाल रिसर्च (आईसीएमआर) ने बताया कि 16 अगस्त को देश में 7 लाख 31 हजार 697 टेस्ट हुए। वहीं, अब तक 3 करोड़ 41 हजार 400 सैंपल की जांच की गई।
पांच राज्यों का हाल
1. मध्यप्रदेश
भोपाल में रविवार को दो संक्रमितों की मौत के साथ कुल मौतों का आंकड़ा 250 पर पहुंच गया है। 2 जुलाई को आंकड़ा 100 पर था यानी बीते 45 दिन में 150 मौतें हुईं। वहीं, दो दिन में शहर में 269 नए केस मिले हैं। 152 शनिवार और 117 रविवार को। 533 मरीज ठीक हुए। इनमें भी 316 रविवार को स्वस्थ हुए। यह शहर में किसी एक दिन में स्वस्थ होने वाले मरीजों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
नए संक्रमितों में ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे की पत्नी और बेटा शामिल हैं। संजय शुक्रवार को पॉजिटिव मिले थे। वे चिरायु अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि पत्नी-बेटा होम आइसोलेशन में हैं। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया की पत्नी भी पॉजिटिव आई हैं।
2. राजस्थान
राजधानी जयपुर में पिछले 15 दिन से रोजाना आंकड़ा 100 के पार जा रहा है। रविवार को 164 संक्रमित मिले। इनमें से 3 की मौत हुई है। सेंट्रल जेल में कोरोना फिर पैर पसारने लगा है। जेल में आए नए कैदियों की रेंडम सेंपलिंग में 14 कैदी और तीन कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलते ही सभी को तत्काल अस्पताल भेज दिया। इससे पहले भी जून माह में जिला और सेंट्रल जेल में 254 कैदी पॉजिटिव आए थे। उधर, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत कोरोना पॉजिटिव हैं। उन्होंने रविवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।
3. बिहार
बिहार में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा एक लाख पार कर गया। शुरुआती 10 हजार की संख्या पार करने में 102 दिन लगे थे। जबकि, इसके बाद के 90 हजार संक्रमित मिलने में महज 45 दिन ही लगे। यानी 147 दिन में बिहार में कोरोना मरीजों का आंकड़ा एक लाख पार कर गया।
देश में एक लाख से अधिक संक्रमित मरीजों वाला बिहार आठवां राज्य बन गया है। हालांकि, अब तक 72566 संक्रमित कोरोना को परास्त करने में सफल रहे हैं, जो कुल संक्रमित का 69.71% है। पिछले 24 घंटे में 67212 सैंपल की जांच हुई। उधर, पटना के एम्स में पिछले दो दिनों में 13 कोरोना मरीजों की मौत हो गई।
4. महाराष्ट्र
राज्य में अब तक कुल 31 लाख 62 हजार 740 सैंपल्स की जांच कराई गई है। इनमें 5 लाख 95 हजार 865 पॉजिटिव हैं। इनमें से 3.36% मरीजों की मौत हो गई। राज्य में 10 लाख 53 हजार 897 लोग होम क्वारैंटाइन में हैं। इसके अलावा 38 हजार 203 लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारैंटाइन में रखा गया है।
5. उत्तरप्रदेश
प्रयागराज में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी कोरोना अपडेट रिपोर्ट में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी के पति के कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव बता दी गई। बाद में पता चला कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव है। रविवार को राज्य में 95,614 सैंपल्स की जांच की गई । अब तक 37 लाख 86 हजार 633 सैंपल की जांच की जा चुकी है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास भारतीय वायु सेना ने हेलिकॉप्टर के जरिए सोमवार को एक युवक का रेस्क्यू किया। युवक खूंटाघाट डैम के वेस्टवियर में नहाने गया था, तभी अचानक तेज बहाव में आकर फंस गया था। आरएएफ की तरफ से एयरफोर्स से मदद मांगी गई थी।
बिलासपुर रेंज के आईजी दीपांशु काबरा ने बताया कि रतनपुर के युवक रविवार से छोटे से पेड़ के भरोसे टिका हुआ था। आसपास लोगों की भीड़ उमड़ी थी। अंधेरा होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई। रात में बिलासपुर से रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। अंधेरा होने के कारण युवक ठीक से नजर भी नहीं आ रहा था। एसपी प्रशांत अग्रवाल का कहना था कि रेस्क्यू टीम रविवार शाम से मौके पर थी। लेकिन बहाव बहुत तेज था। इसके चलते रेस्क्यू में दिक्कत हो रही थी। युवक कहां का रहने वाला है और किसके साथ वहां आया था, इसका पता नहीं चल पाया है।
सेना को लोकेशन भेजी गई, सुबह रेस्क्यू
इससे पहले पेड़ को पकड़कर बैठा युवक इशारे से बचाव के लिए गुहार लगा रहा था। पुलिस अन्य लोगों के साथ रातभर वहां मौजूद रही। एसपी प्रशांत अग्रवाल के अनुसार युवक को बचाने एसईसीएल और एनटीपीसी की टीम भिजवाई है। इस संबंध में एयरफोर्स के अधिकारियों से भी मदद मांगी थी। उन्हें लोकेशन भेजी गई। इसके बाद सुबह रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया।
from Dainik Bhaskar /national/news/indian-air-force-iaf-chopper-today-rescued-a-man-at-khutaghat-dam-near-bilaspur-in-chhattisgarh-127623230.html
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देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 26 लाख 47 हजार 316 हो गया है। पिछले 24 घंटे के अंदर 58 हजार 108 नए मरीज बढ़े। राहत की बात है कि हफ्ते में यह दूसरी बार है जब संक्रमितों के बढ़ने की रफ्तार कम हुई है। वहीं, दूसरी अच्छी बात है कि संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा भी 19 लाख के पार हो चुका है।
उधर, देश में कोरोना की टेस्टिंग भी बढ़ी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में 16 अगस्त तक 3 करोड़ से ज्यादा टेस्ट किए जा चुके हैं। पिछले चार दिन में पॉजिटिविटी रेट में कमी आई। 12 अगस्त को यह 8.93% थी, तो यह घटकर 16 अगस्त को 8.84% रह गई।
कोरोना अपडेट्स
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को अपने आंकड़े जारी किए। इसके मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 57 हजार 982 केस सामने आए। वहीं, 941 मरीजों की मौत हो गई। देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 26 लाख 47 हजार 664 हो गई। इनमें 6 लाख 76 हजार 900 एक्टिव केस हैं। वहीं, 19 हजार 843 मरीज स्वस्थ हो गए हैं। उधर, अब तक 50 हजार 921 लोग इस बीमारी से दम तोड़ चुके हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकाल रिसर्च (आईसीएमआर) ने बताया कि 16 अगस्त को देश में 7 लाख 31 हजार 697 टेस्ट हुए। वहीं, अब तक 3 करोड़ 41 हजार 400 सैंपल की जांच की गई।
पांच राज्यों का हाल
1. मध्यप्रदेश
भोपाल में रविवार को दो संक्रमितों की मौत के साथ कुल मौतों का आंकड़ा 250 पर पहुंच गया है। 2 जुलाई को आंकड़ा 100 पर था यानी बीते 45 दिन में 150 मौतें हुईं। वहीं, दो दिन में शहर में 269 नए केस मिले हैं। 152 शनिवार और 117 रविवार को। 533 मरीज ठीक हुए। इनमें भी 316 रविवार को स्वस्थ हुए। यह शहर में किसी एक दिन में स्वस्थ होने वाले मरीजों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
नए संक्रमितों में ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे की पत्नी और बेटा शामिल हैं। संजय शुक्रवार को पॉजिटिव मिले थे। वे चिरायु अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि पत्नी-बेटा होम आइसोलेशन में हैं। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया की पत्नी भी पॉजिटिव आई हैं।
2. राजस्थान
राजधानी जयपुर में पिछले 15 दिन से रोजाना आंकड़ा 100 के पार जा रहा है। रविवार को 164 संक्रमित मिले। इनमें से 3 की मौत हुई है। सेंट्रल जेल में कोरोना फिर पैर पसारने लगा है। जेल में आए नए कैदियों की रेंडम सेंपलिंग में 14 कैदी और तीन कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलते ही सभी को तत्काल अस्पताल भेज दिया। इससे पहले भी जून माह में जिला और सेंट्रल जेल में 254 कैदी पॉजिटिव आए थे। उधर, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत कोरोना पॉजिटिव हैं। उन्होंने रविवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।
3. बिहार
बिहार में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा एक लाख पार कर गया। शुरुआती 10 हजार की संख्या पार करने में 102 दिन लगे थे। जबकि, इसके बाद के 90 हजार संक्रमित मिलने में महज 45 दिन ही लगे। यानी 147 दिन में बिहार में कोरोना मरीजों का आंकड़ा एक लाख पार कर गया।
देश में एक लाख से अधिक संक्रमित मरीजों वाला बिहार आठवां राज्य बन गया है। हालांकि, अब तक 72566 संक्रमित कोरोना को परास्त करने में सफल रहे हैं, जो कुल संक्रमित का 69.71% है। पिछले 24 घंटे में 67212 सैंपल की जांच हुई। उधर, पटना के एम्स में पिछले दो दिनों में 13 कोरोना मरीजों की मौत हो गई।
4. महाराष्ट्र
राज्य में अब तक कुल 31 लाख 62 हजार 740 सैंपल्स की जांच कराई गई है। इनमें 5 लाख 95 हजार 865 पॉजिटिव हैं। इनमें से 3.36% मरीजों की मौत हो गई। राज्य में 10 लाख 53 हजार 897 लोग होम क्वारैंटाइन में हैं। इसके अलावा 38 हजार 203 लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारैंटाइन में रखा गया है।
5. उत्तरप्रदेश
प्रयागराज में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी कोरोना अपडेट रिपोर्ट में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी के पति के कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव बता दी गई। बाद में पता चला कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव है। रविवार को राज्य में 95,614 सैंपल्स की जांच की गई । अब तक 37 लाख 86 हजार 633 सैंपल की जांच की जा चुकी है।
(मनीषा भल्ला) देश में पहली बार आवाज के आधार पर काेराेना का परीक्षण होने जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) एक हजार लोगों पर पायलट प्रोजेक्ट के जरिए ऐप आधारित तकनीक से कोरोना के लक्षणों की जांच करेगी। इस जांच में आधे कोरोना पॉजिटिव मरीज होंगे और आधे कोरोना के संभावित मरीज। बीएमसी के एडिशनल कमिश्नर सुरेश ककानी का कहना है कि इजराइल और अमेरिका में इस तकनीक से कोरोना का टेस्ट किया जा रहा है। इसी महीने शुरू होने वाला पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे आगे भी अमल में लाया जाएगा। टेस्ट को अंजाम देने वाली वोकलिस हेल्थ अमेरिकी कंपनी है।
भारत में पहले से काम कर रही यह कंपनी फार्मास्युटिकल और आईटी दोनों क्षेत्रों में कार्यरत है। जिन मरीजों का कोरोना के लिए आवाज का टेस्ट लिया जाएगा, उनका आरटी-पीसीआर (ड्राई स्वैब के प्रोटेक्टिव ट्यूब में लिए नमूने) टेस्ट भी होगा। फिर दोनों टेस्ट का अध्ययन और मूल्यांकन किया जाएगा कि कौन सा टेस्ट ज्यादा सटीक है और कौन से टेस्ट में रिजल्ट कितनी जल्दी आते हैं।
अमेरिका और इजराइल में पहले से हो रहा टेस्ट
इस टेस्ट को पहले से इजराइल और अमेरिका में किया जा रहा है। इसे करने के पीछे बीएमसी का भरोसा सिर्फ इतना है कि अगर कोई कोरोना पॉजिटिव है, तो उसकी आवाज बदल जाती है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल यह टेस्ट मुफ्त में किया जाएगा। इस टेस्ट की तकनीक तैयार करने वाली कंपनी वोकलिस हेल्थ के सीईओ टाल वेंड्रिओ का कहना है- ‘कोरोना के लिए यह स्क्रीनिंग समाधान सिर्फ सॉफ्टवेयर आधारित है। इसकी सर्वर और डेटा बैंडविड्थ क्षमता इतनी है कि इससे एक दिन में बहुत सारे टेस्ट किए जा सकते हैं। इसके नंबर की कोई सीमा नहीं है।
ऐसे होगा इस्तेमाल
यह सॉफ्टवेयर स्मार्टफोन या टैब में डाउनलोड करना होगा। उसमें अपनी आवाज रिकॉर्ड करनी होगी और 30 मिनट में कोरोना का रिजल्ट आ जाएगा। सॉफ्टवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए काम करेगा और घर पर, ऑफिस में या ट्रेवल पर निकलने से पहले खुद टेस्ट करके फायदा लिया जा सकता है। यह टेस्ट शुरुआती लक्षण दिखने पर कारगर है। इसका विदेशों में 85% तक सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है।’
हेल्थकेयर पर कम भार पड़े इसलिए तकनीक आजमा रहे कई देश
वोकलिस के सीईओ का कहना है कि इस तकनीक का प्रयोग करने वाले देशों ने इस प्रयोग को इसलिए आजमाया ताकि हेल्थकेयर सिस्टम पर पड़ने वाला भार कम किया जा सके। महाराष्ट्र में जिस तेजी से कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। कंपनी का इजराइल, अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों की सरकार के साथ साझेदारी में प्रोजेक्ट सफल रहा है।
दुनिया में कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक 2 करोड़ 18 लाख 24 हजार 14 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1 करोड़ 45 लाख 58 हजार 310 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 7 लाख 73 हजार 28 की मौत हो चुकी है। ये आंकड़े https://ift.tt/2VnYLis के मुताबिक हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए न्यूजीलैंड ने लोकसभा चुनाव टालने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने रविवार को कहा कि अब चुनाव 17 अक्टूबर को होंगे। चुनाव के लिए पहले 19 सितंबर का समय तय किया गया था। अब तक देश में 1622 मामले सामने आए हैं और 22 लोगों की मौत हुई हैं। लिहाजा चुनावों को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
वहीं, इटली ने सोमवार से तीन हफ्ते के लिए अपने सभी नाइटक्लब, डिस्को और क्लब बंद करने का ऐलान किया है। यहां लोगों से कुछ इलाकों में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे के बीच मास्क पहनना जरूरी कर दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्टो स्पेरांजा ने रविवार को कहा कि हम इस बीमारी से हुई मौतों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। लोगों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।
10 देश, जहां कोरोना का असर सबसे ज्यादा
देश
कितने संक्रमित
कितनी मौतें
कितने ठीक हुए
अमेरिका
55,66,632
1,73,128
29,22,724
ब्राजील
33,40,197
1,07,879
24,32,456
भारत
26,47,316
51,045
19,18,076
रूस
9,22,853
15,685
7,32,968
साउथ अफ्रीका
5,87,345
11,839
4,72,377
पेरू
5,35,946
26,281
3,65,367
मैक्सिको
5,22,162
56,757
3,55,101
कोलंबिया
4,68,332
15,097
2,87,436
चिली
3,85,946
10,452
3,58,828
स्पेन
3,58,843
28,617
उपलब्ध नहीं
मैक्सिको: एक दिन में करीब 5 हजार मामले
मैक्सिको के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटे में 4 हजार 448 नए मामले सामने आए और 214 मौतें हुईं। अब देश में संक्रमितों का आंकड़ा 5 लाख 22 हजार 162 हो गया है। अब तक देश में 56 हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं। मैक्सिको सरकार ने कहा कि देश में जल्द वैक्सीन तैयार करने की कोशिश हो रही है। 14 अगस्त को सरकार ने एस्ट्रेजेनेका कंपनी के साथ करार किया है। देश को महामारी से लड़ने के लिए करीब 20 करोड़ वैक्सीन की जरूरत होगी।
फ्रांस: लगातार दूसरे दिन 3 हजार से ज्यादा मामले
फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को बताया कि देश में लगातार दूसरे दिन 3 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए। रविवार को 3015 केस मिले। यहां चार दिन पहले लॉकडाउन हटाया गया था। इसके साथ ही देश में संक्रमितों का आंकड़ा 2 लाख 18 हजार 536 हो गया है। संक्रमण बढ़ने के साथ ही सरकार ने राजधानी पेरिस और मार्सेल में मास्क पहनना जरूरी कर दिया है। सरकार ने दूसरे देशों से आने वाले लोगों के लिए नई ट्रेवल गाइडलाइन्स भी जारी की गई हैं।