मंगलवार, 19 मई 2020

पुलिस ने कई बार समझाया कि यहां से कोई बस नहीं चलेगी, लेकिन लोगों को अफवाह पर ही भरोसा है, वो घर पहुंचने की उम्मीद देती है

चिलचिलाती धूप में सैकड़ों लोग नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर कतारबद्ध खड़े हैं। इस उम्मीद के साथ कि कोई ट्रेन आएगी और इन्हें इनके घर तक पहुंचा देगी। कुछ लोगों को बिहार जाना है, कुछ को पूर्वी उत्तर प्रदेश और कुछ को बंगाल। तपती गर्मी में ये लोग कई घंटों से सिर्फ इसलिए खड़े हैं क्योंकि इन्होंने उड़ती-उड़ती ख़बर सुनी है कि यहां से अलग-अलग राज्यों के लिए गाड़ियां चल रही हैं।

इसी कतार में विजय कुमार भी अपने छह साथियों के साथ खड़े हैं। ये सभी बेलदारी करते हैं और दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में रहते हैं। इन लोगों ने भी सुना ही है कि रेलवे स्टेशन से गाड़ियां चल रही हैं। लिहाज़ा सुबह पांच बजे अपने घरों से निकल कर, पांच घंटे पैदल चलने के बाद ये लोग नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे हैं।

विजय बताते हैं, ‘हमें सुल्तानपुर जाना है। यहां मज़दूरी करते थे और घर पैसा भेजते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद उल्टा करना पड़ रहा है। हमें घर से पैसा मांगना पड़ रहा है। तीन बार पैसा मंगा चुके हैं लेकिन अब नहीं हो पा रहा इसलिए लौट रहे हैं। किसी ने बताया था कि यहां से शायद बस मिल जाए। ट्रेन तो सिर्फ अमीरों के लिए चल रही है। हमें तो स्टेशन के अंदर भी नहीं घुसने दे रहे।’

दिल्ली स्टेशन के बाहर दो तस्वीरें देखने को मिलती हैं। एक मजदूर हैं, जिनके पास टिकट नहीं है। और दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं जो मर्सिडिज से उतरकर ई-टिकट दिखाकर अंदर चले जाते हैं।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोग दो बड़े समूहों में बंट गए हैं। एक तरफ वो लोग हैं जो एक-एक कर अपनी निजी कारों से उतर रहे हैं, अपने ट्रॉली बैग लेकर स्टेशन की तरफ बढ़ रहे हैं और ई-टिकट दिखाकर स्टेशन में दाखिल हो रहे हैं। दूसरी तरफ विजय जैसे सैकड़ों लोगों का समूह है जो तपती धूप में कपड़ों की गठरी बांधे हुए पहाड़गंज के बसंत रोड की तरफ जमा हुआ है और रेलवे स्टेशन की तरफ टकटकी लगाए हुए है। इन लोगों के पास चूंकि ई-टिकट नहीं है लिहाज़ा इन्हें स्टेशन में दाख़िल होने की इजाजत नहीं है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सिर्फ़ राजधानी ट्रेन चलाई जा रही हैं। सुबह साढ़े ग्यारह से शुरू होकर रात के सवा नौ बजे तक 11 राजधानी ट्रेनें आज देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए यहां से निकल रही हैं। और इन ट्रेनों के टिकट सिर्फ ऑनलाइन ही बुक हो रहे हैं। ऐसे में मजदूर वर्ग के लिए इन ट्रेनों के दरवाजे बंद हो गए हैं क्योंकि न तो इस वर्ग के पास ऑनलाइन टिकट बुक करने के संसाधन हैं और न ही इसकी समझ।

पहाड़गंज में परांठों का ठेला लगाने वाले मुजीब उल कहते हैं, ‘मुझे ऑनलाइन टिकट बुक करना नहीं आता। लेकिन एक भतीजा है मेरा जो कॉलेज तक पढ़ा है। उसे मैंने कहा था दिल्ली से कटिहार (बिहार) का टिकट बुक करने को। वो बोला कि चाचा बिहार की टिकट ऑनलाइन भी नहीं मिल रही है। घर जाने के लिए हम महंगी टिकट खरीदने को भी तैयार हैं लेकिन टिकट किसी भी तरह नहीं मिल रही।’

रेलवे स्टेशन के गेट के पास ही हिंदू महासभा के नेता बीएस मुंजे की मूर्ति। इस मूर्ति के नीचे आजकल प्रवासी मजदूरों ने बैठने का ठिकाना बना लिया है।

दिल्ली से जो राजधानी ट्रेनें चल रही हैं उनमें जम्मू या गुजरात जाने वाली ट्रेनों के ऑनलाइन टिकट तो आसानी से उपलब्ध हैं लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल की तरफ जाने वाले यात्रियों की संख्या इतनी ज़्यादा है कि यहां के टिकट ऑनलाइन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे। लिहाज़ा मजदूर वर्ग के जो लोग इन ट्रेनों का किराया चुकाने को तैयार भी हैं, उन्हें भी यह टिकट नसीब नहीं हो रहे।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के गेट के पास ही बनी हिंदू महासभा के नेता बीएस मुंजे की एक मूर्ति के नीचे निढाल होकर बैठे 60 साल के राम किशन कहते हैं, ‘काउंटर खुल जाते तो हम 30-40 घंटे भी लाइन में खड़े रहकर टिकट खरीद लेते। लेकिन काउंटर पर टिकट मिल ही नहीं रहे और ऑनलाइन टिकट करना हमें नहीं आता। ऐसे में क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा। अब यहीं पड़े रहेंगे जब तक कोई व्यवस्था नहीं हो जाती।’

दिल्ली से कई श्रमिक ट्रेनें भी देश भर के लिए चलाई जा रही हैं। लेकिन इनमें भी टिकट मिलना आसान नहीं है। ट्रेन की उम्मीद में फ़रीदाबाद से नई दिल्ली पहुंचे 56 वर्षीय अरविंद कुमार एक काग़ज़ दिखाते हुए कहते हैं, ‘हमने एक साहब से कहकर श्रमिक ट्रेन के लिए नाम लिखवाया था। उन्होंने ये काग़ज़ भी दिया है। लेकिन कई दिन बीत जाने तक भी उधर से कोई फ़ोन नहीं आया।’ जो काग़ज़ अरविंद दिखा रहे हैं उस पर अंग्रेज़ी में लिखा है, ‘हरियाणा से अन्य राज्यों में जाने की अनुमति के लिए गृह मंत्रालय में पंजीकरण करने का धन्यवाद।’

पुलिस दिन में कई बार इन मजदूरों को समझाती रहती है कि यूपी-बिहार के लिए कोई ट्रेन नहीं चलेगी। फिर भी ये लोग मानने को तैयार नहीं हैं।

ऐसे दर्जनों लोग यहां मौजूद हैं जिन्होंने अपने निकटतम थानों में जाकर श्रमिक ट्रेन में सफ़र करने के लिए पंजीकरण करवाया है। लेकिन इन सभी लोगों की शिकायत है कि पंजीकरण करवाए हफ़्ते भर से ज़्यादा हो चुका है लेकिन थाने से वापस कोई फ़ोन नहीं आया। अरविंद कुमार कहते हैं, ‘जब हम थाने में पता करने गए तो उन्होंने कहा कि अब वो प्रक्रिया बंद हो गई है। जब ट्रेन चलेगी तो बता दिया जाएगा। फिर किसी ने कुछ नहीं बताया।’

रेलवे ने राजधानी ट्रेन और श्रमिक ट्रेनों के स्टेशन भी अलग-अलग कर दिए हैं। नई दिल्ली के चमचमाते रेलवे स्टेशन से सिर्फ़ राजधानी ट्रेनें चलाई जा रही हैं और पुरानी दिल्ली के जर्जर स्टेशन से श्रमिक ट्रेनें। लेकिन फिर भी सैकड़ों ऐसे मज़दूर नई दिल्ली स्टेशन पहुंच रहे हैं जिन्हें श्रमिक एक्सप्रेस में जगह नहीं मिल रही।

मज़दूरों के रेलवे स्टेशन पहुंचने का ये सिलसिला उसी दिन से शुरू हो चुका है जिस दिन से ट्रेन चलना शुरू हुई हैं। हर सुबह सैकड़ों मज़दूर रेलवे स्टेशन पहुंचना शुरू होते हैं और शाम होने तक स्थानीय प्रशासन इन्हें बसों में बैठाकर पास के किसी सरकारी स्कूल, किसी सराय, किसी रैन बसेरे या किसी ऐसे मैदान में छोड़ आता है जहां इनके रहने-खाने की न्यूनतम सुविधा उपलब्ध हो। ऐसी ही बसों में लोगों को बैठते देख इन लोगों ने मान लिया है कि शायद बसों से लोगों को अलग-अलग राज्यों तक छोड़ा जा रहा है।

साठ साल के दया शंकर गुप्ता भी इसी उम्मीद में यहां बैठे हैं। वो कहते हैं, ‘मैं पहाड़गंज में रुई के गद्दे बनाने वाली दुकान में काम करता हूं। महीने का 12 हज़ार मिलता था लेकिन जब से लॉकडाउन हुआ तब से अब तक मालिक ने कुल 1700 रुपए दिए हैं। मालिक कहता है दुकान बंद है तो मैं भी पैसा कहाँ से दूं। अब खाने को भी पैसा नहीं है इसलिए घर जा रहा हूं। सुना है यहां से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए बस चलती हैं।’

बस चलने की उम्मीद में जो लोग सुबह से लाइन बनाकर खड़े थे, शाम होने तक उसी जगह पर बैठ गए हैं। भारी असुविधा में बैठे इन सैकड़ों मज़दूरों के ठीक सामने ही दिल्ली पुलिस का एक ‘सुविधा केंद्र’ है। वहां से पुलिस ने कई बार आकर इन्हें समझा दिया है कि कोई भी बस उत्तर प्रदेश या बिहार के लिए नहीं चलने वाली लेकिन लोग ये मानने को तैयार नहीं हैं। इन लोगों को उस अफ़वाह पर ही ज़्यादा विश्वास है जिससे इन्हें घर पहुंच जाने की उम्मीद मिल रही है।

दिनभर ये मजदूर ट्रेन के इंतजार में स्टेशन के बाहर बैठे थे और शाम होते ही पुलिस ने इन्हेंमौलाना आज़ाद राष्ट्रीय कौशल अकादमी के अंदर लाकर बैठा दिया।

यहां मौजूद दिल्ली पुलिस के सब इन्स्पेक्टर ललित कुमार कहते हैं, ‘हमारे कई बार समझाने पर भी ये लोग फिर नहीं मान रहे। इन्हें अफ़वाह पर ही ज़्यादा भरोसा है। ऐसी अफ़वाहों तो तोड़ने का एक ही तरीक़ा है - लट्ठ। अभी दो लोगों को लट्ठ पड़ जाएगा तो बाक़ी सब भाग जाएंगे और तुरंत बात भी सबमें फैल जाएगी कि यहां से कोई गाड़ी नहीं चल रही बल्कि लट्ठ चल रहे हैं। फिर कोई अफ़वाह नहीं फैलेगी। लेकिन हम लट्ठ नहीं चला सकते, ये लोग भी परेशान ही हैं।’

शाम के सात बजे तक स्थानीय पुलिस ने इन लोगों को हिंदू महासभा के नेता बीएस मुंजे की मूर्ति के नीचे से उठाकर ‘मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय कौशल अकादमी’ के भीतर बैठा दिया है। इनमें कई लोग केंद्रीय दिल्ली के नबी करीम इलाक़े से भी आए हैं। नबी करीम वह इलाक़ा है जहां कोरोना के कई मामलों की पुष्टि हो चुकी है। सम्भव है कि इनमें भी कुछ लोगों को कोरोना संक्रमण हो लेकिन फ़िलहाल इनमें से किसी के लिए भी यह चिंता का विषय तक नहीं है। सब लोग एक पार्किंग शेड ने नीचे ग़रीबी और मजबूरी की समान डोर से बंधे हुए एक साथ बैठ गए हैं।

विजय कुमार कहते हैं, ‘सुबह तक इंतज़ार करेंगे। कुछ इंतज़ाम हुआ तो ठीक, नहीं तो हम भी पैदल ही निकल जाएंगे। जब हमारे लिए ट्रेन नहीं हैं, बस नहीं हैं तो और क्या करें?’ ट्रेनें चलने के बाद भी ये मज़दूर पैदल क्यों जा रहे हैं? यह सवाल करने वालों को शायद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बैठे इन लोगों की व्यथा जानकर जवाब मिल जाए कि आख़िर मार्च से हुआ मज़दूरों का पैदल मार्च ख़त्म क्यों नहीं हो रहा।



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रेलवे स्टेशन के बाहर मजदूर अपना सामान लेकर ट्रेन आने की उम्मीद में बैठे हैं। इन मजदूरों को बस घर जाने की चिंता है।


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ब्रिटेन में पहले से भर्ती 20% मरीज कोरोना पॉजिटिव मिले, वजह- स्टाफ की जांच और सुरक्षा के इंतजाम नहीं

कोरोना का खतरा घर से बाहर ही नहीं है बल्कि हॉस्पिटल में पहले से बीमारी का इलाज करा रहे मरीजों को भी है। ब्रिटेन में ऐसे ही मामले सामने आए हैं। हॉस्पिटल में भर्ती 20 फीसदी सामान्य मरीज कोरोना से संक्रमित पाए गए। यह आंकड़ा ब्रिटेन की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एजेंसी नेशनल हेल्थ सर्विस ने जारी किया है। ऐसे मामले जब सामने आए जब ब्रिटेन में कोरोना से मरने वालों की संख्या 34 हजार 636 तक पहुंची।

मेडिकल स्टाफ का कोरोना टेस्ट तक नहीं किया गया

डेलीमेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ विशेषज्ञ का कहना है कि इसकी एक वजह मेडिकल स्टाफ का कोरोना टेस्ट न होना भी है। जिससे संक्रमण उनके जरिए मरीजों तक पहुंचा। वहीं दूसरी वजह बताई गई कि कुछ स्वास्थ्यकर्मियों के पास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

सर्जन ने भी माना उनके डिपार्टमेंट ऐसा हुआ
ब्रिटेन के ही एक हॉस्पिटल के सर्जन का कहना है कि लॉकडाउन से पहले मेरे डिपार्टमेंट के कुछ मरीजों के साथ ऐसा हुआ और उनकी मौत हो गई। मार्च में 80 साल की मैरिटा एडवर्ड्स की गॉल ब्लडैर सर्जरी हुई थी और कुछ समय बाद संक्रमण से मौत हो गई। ब्रिटेन में कोरोना से मरने वाली मैरिटा पहली इंसान थीं।

बेटे ने बताई मां की कहानी
एक महिला सफाईकर्मी को साउथ वेल्स के रॉयल ग्वेंट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। 28 फरवरी को उनका ऑपरेशन हुआ। कुछ समय बाद उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव और करीब तीन हफ्तों बाद मौत हो गई। उनके बेटा का कहना है, जब लगा कि कोरोना हो सकता है तो मां को आइसोलेटेड वार्ड में शिफ्ट किया गया लेकिन हॉस्पिटल में कोरोनावायरस तब तक फैल चुका था।

इटली में भी ऐसी गलती हुई थी
बेटे का कहना है कि अंतिम समय में मैं अपनी मां के हाथ को चूम तक नहीं सका। उनके चेहरे पर मास्क लगा था और उनकी बेहद दर्दनाक मौत हुई। वायरस विशेषज्ञ जॉर्जिओ पालू ने चेतावनी दी है ब्रिटेन और यूरोप के हेल्थ सिस्टम भी कोरोनावायरस फैल सकता है। वह कहते हैं जनवरी में इटली में एक ऐसी ही गलती से मामले की संख्या बढ़ी थी।

मरीज को घर पर रहने की सलाह
जॉर्जिओ पालू का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लिए कोरोना पॉजिटिव मरीजों को उनके घर पर ही रहने की सलाह देनी चाहिए, वरना हॉस्पिटल में इसके मामले और बढ़ेंगे। ऐसा करके संक्रमण के मामलों में कमी लाई जा सकती है।



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20% of patients already admitted in the UK were found to be Corona positive, the reason - no staff checks and security arrangements


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बारिश शुरू होने से 5-7 दिन पहले मंदिर की छत से टपकने लगती हैं बूंदें, इसी से लगाते हैं मानसून का अनुमान

उत्तर प्रदेश के कानपुर से करीब 40 किमी दूर बेहटा बुर्जुग स्थित है। ये भीतरगांव विकास खंड के अंतर्गत आता है। यहां एक ऐसा मंदिर स्थित है जो मानसून की भविष्यवाणी करता है। करीब एक हजार साल पुराने मंदिर की बनावट कुछ ऐसी है कि बारिश होने से 5-7 दिन पहले ही इसकी छत से बूंदे टपकने लगती हैं। मंदिर का निर्माण एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। इस पर कई रिसर्च हो चुकी हैं।

मंदिर के पुजारी केपीशुक्ला ने बताया कि यहां भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की छत पर मानसून पत्थर लगा हुआ है। इस पत्थर से टपकने वाली बूंदों से अंदाजा लग जाता है कि बारिश कैसी होगी। अगर ज्यादा बूंदे टपकती हैं तो ज्यादा बारिश होने की संभावनाएं बनती हैं। ये कोई कोरी मान्यता नहीं है, इसमें पूरा विज्ञान है। मंदिर बनाते समय ही संभवतः इस बात को ध्यान में रखा गया होगा। मंदिर की दीवारों और छत को इस तरह से बनाया गया है कि ये मानसून शुरू होने के 5-7 दिन पहले काम करना शुरू कर देती हैं।

15 फीट चौड़ी हैं दीवारें

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, लखनऊ के सीनियर सीए मनोज वर्मा ने बताया कि ये मंदिर कई बार टूटा और बना है। यहां कई लोगों ने रिसर्च की है। अधिकतर रिसर्च का अनुमान है कि ये मंदिर 9वी-10वीं सदी के आसपास का है। मंदिर की दीवारें करीब 15 फीट चौड़ी हैं। मंदिर को बनाने में चूना-पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। बारिश से पहले मौसम में उमस बढ़ने लगती हैं, जिससे चूना वातावरण से नमी ग्रहण करता है।

ये नमी पत्थर तक पहुंचती है और पत्थर से पानी की बूंदें बनकर टपकने लगती हैं। जब भी वातावरण में उमस बढ़ती है, तो बारिश होती है। इसी वजह से इस मंदिर को मानसून मंदिर कहा जाता है। मंदिर के गर्भगृह की छत पर लगे पत्थर को मानसून पत्थर कहा जाता है क्योंकि इसी से पानी टपकता है। हालांकि, ये पत्थर किसी विशेष प्रजाति का नहीं है, ये सामान्य पत्थर ही है।

तीन भागों में बना है मंदिर

भीतरगांव के विकास खंड अधिकार सौरभ बर्णवाल ने बताया कि ये मंदिर तीन भागों में बना हुआ है। गर्भगृह का एक छोटा भाग है और फिर बड़ा भाग है। ये तीनों भाग अलग-अलग काल में बने हैं। यहां भगवान विष्णु की प्रतिमा की स्थापित है। यहां विष्णु के 24 अवतारों की, पद्मनाभ स्वामी की मूर्ति स्थापित हैं।

मंदिर में स्थापित भगवान की मूर्ति और पुजारी के.पी. शुक्ला।

मंदिर के इतिहास को लेकर मतभेद

मंदिर की देखरेख करने वाले केपीशुक्ला ने बताया कि मंदिर के इतिहास को लेकर कई मतभेद हैं। पुराने समय में अलग-अलग राजाओं ने मंदिर का जिर्णोद्धार करवाया है। यहां कुछ खंडित मूर्तियां हैं, उनकी शैली बहुत ही प्राचीन समय की है। मंदिर के निर्माण को लेकर कहीं भी कोई लिखित प्रमाण नहीं है। मंदिर में प्रवेश करते समय दक्षिण में एक विशेष मूर्ति है। कुछ लोग इसे विष्णुजी की मानते हैं और कुछ लोग इसे शिवजी की मूर्ति मानते हैं। इस तरह की प्रतिमाएं लगभग दो हजार साल पहले बनाई जाती थी।



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Monsoon Prediction News | Monsoon Forecast 2020 News Updates/ Kanpur Jagannath Mandir (Temple) From Uttar Pradesh | All You Need To Know about Kanpur Jagannath Mandir


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लॉकडाउन के बाद सैनिटाइजर की मांग 64% बढ़ी, यूपी सबसे ज्यादा रोजाना 2 लाख लीटर प्रोडक्शन कर 23 राज्यों को भेज रहा

रिसर्च टीम. कोरोना के चलते पूरी दुनिया में हर कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन सैनिटाइजर का बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है। लॉकडाउन के बाद से करीब 500 छोटी-बड़ी मैन्यूफैर्क्चस यूनिट इस सेक्टर में उतर चुकी हैं। इसमें 152 ऐसी कंपनियां हैं, जो साबुन, बॉडी, फेश और हैंड वॉश के साथ-साथ सैनिटाइजर का भी उत्पादन कर रही हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार 150 से अधिक डिस्टिलरी भी देश में सैनिटाइजर का उत्पादन कर रही हैं। देश में एल्कोहल बेस्ट सैनिटाइजर की मांग में 64% का इजाफा हुआ है।

सबसे ज्यादा कंपनियां यूपी में बना रहीं सैनिटाइजर

सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 85 चीनी मिलें, 12 डिस्टिलरी, 37 कंपनियां और 9 अन्य संस्थाएं प्रतिदिन 2 लाख लीटर सैनिटाइजर का निर्माण कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सात मई तक प्रदेश में 45 लाख 15 हजार लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन हुआ, जिसमें से 19 लाख 31 हजार लीटर 23 राज्यों को सप्लाई किया गया है।

एक साल इस सेक्टर का आकार 30 करोड़ रुपए बढ़ा

निल्सन इंडिया के मुताबिक महामारी के बाद से भारत के सैनिटाइजर बाजार में चार गुना का इजाफा हुआ है। 2019 में मार्च महीने में इस सेक्टर का कुल कारोबार 10 करोड़ रुपए था। मार्च 2020 में 43 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। कोरोना वायरस का टीका न बनने की सूरत में अगले पांच साल में इस सेक्टर में 10-15 फीसदी की ग्रोथ की संभावना है।

यूपी में अप्रैल में रोजाना2 लाख लीटर प्रोडक्शन हुआ

उत्तर प्रदेश के गन्ना और चीनी आयुक्त संजय भूसरेड्डी के अनुसार मार्च में करीब 50 उत्पादन इकाइयां रोजाना 60 हजार लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन करती थीं, लेकिन मांग बढ़ने के बाद कुछ और चीनी मिलें, डिस्टिलरी व अन्य संस्थाओं को अनुमति दी गई। जिससे प्रोडक्शन 2 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया। लॉकडाउन के बाद से हरियाणा में सबसे ज्यादा सैनिटाइजर की खपत हुई। वहां पर 4.11 लाख लीटर सैनिटाइजर की सप्लाई की जा चुकी है।

  • भारत में स्थिति-

152 नए निर्माताओं के आने से सैनिटाइजर बाजार की हिस्सेदारी का अनुपात 60-40 तक पहुंचा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सैनिटाइजर सेक्टर की शीर्ष तीन कंपनी रेकिट बेंकिसर इंडिया लिमिटेड, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और हिमालया ड्रग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की बाजार हिस्सेदारी जनवरी और फरवरी में 85% से मार्च में गिरकर 39% हो गई। लॉकडाउन के बाद से देश में 152 नए निर्माताओं के आने से बाजार में हिस्सेदारी का अनुपात 60-40 तक पहुंच चुका है। आईटीसी लिमिटेड, डाबर इंडिया लिमिटेड, मैरिको लिमिटेड, इमामी लिमिटेड और ज्योति लेबोरेटरीज लिमिटेड जैसी कंपनियों ने भी तेजी से सैनिटाइजर का प्रोडक्शन शुरू किया है। यहां तक कि शराब बनाने वाली कंपनी डियाजियो इंडिया भी इस रेस में कूद पड़ी है।

  • दुनिया में स्थिति-

इस साल ग्लोबल सैनिटाइजर मार्केट का आकार 14 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान

अमेरिका की मार्केट रिर्सच कंपनी फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट के विश्लेषण के मुताबिक 2020 में ग्लोबल सैनिटाइजर बाजार की वार्षिक वृद्धि दर 5.06% से बढ़कर 45.7% होने का अनुमान है। कोरोनावायरस के आउटब्रेक से पहले 2020 में सैनिटाइजर का बाजार करीब 10 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान था, जो अब बढ़कर करीब 14 हजार करोड़ रुपए होने की उम्मीद है।

  • डब्ल्यूएचओ क्या कहता है?

हर 2घंटे में हाथ धुलना या सैनिटाइजर के प्रयोग ही कोरोना का सबसे कारगर इलाज

डब्ल्यूएचओ के अनुसार मौजूदा हालत में कोरोना महामारी से बचाव का सबसे सरल और सस्ता उपाय हर दो घंटे में हाथ धुलना या फिर एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना है। चिकित्सकों के अनुसार ऐसा करने से कोरोना का वायरस नष्ट हो जाता है और संक्रमण की संभावना क्षीण हो जाती है। भारत में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों को डिस्टलरीज और चीनी कंपनियों को लाइसेंस देने का निर्देश दिया था, ताकि मांग को पूरा करने के लिए हैंड सैनिटाइजर का निर्माण किया जा सके।



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Coronavirus India (UP) Lockdown Updates; Hand Sanitizer Demand Increased Sixty-four Percent After Lockdown In Uttar Pradesh


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अमेरिका में कोरोना की वजह से शहर छोड़ रहे अमीर, 4.20 लाख लोगों ने न्यूयॉर्क छोड़ा, यहां 1% की सालाना कमाई 16 करोड़ रु.

अमेरिका इस समय कोरोना से दुनिया में सबसे बुरी तरह प्रभावित देश है। यहां 15 लाख से ज्यादा मामले और 90 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा असर न्यूयॉर्क पर पड़ा है, जहां साढ़े तीन लाख से ज्यादा मरीज और 28 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इस बीच, एक चौंकाने वाली खबर आई है कि कोरोना की वजह से न्यूयॉर्क सिटी में रहने वाले अमीर शहर छोड़कर जा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च से 1 मई के बीच करीब 4.20 लाख लोग शहर छोड़कर जा चुके हैं, जो यहां की कुल आबादी का करीब 5% है। इनमें भी एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का है, जो आर्थिक रूप से संपन्न है और शहर के अमीरों में गिने जाते हैं। खास बात यह है कि सालाना 16 करोड़ रुपए कमाने वाले शहर के 1% अमीर अन्य जगहों पर शिफ्ट हो गए हैं। इनमें से ज्यादातर किसी आइलैंड या महंगी जगह गए हैं।

'80% आबादी ने शहर नहीं छोड़ा है'
वहीं, सालाना करीब 67 लाख रुपए कमाने वाली 80% आबादी ने शहर नहीं छोड़ा है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर डॉ. किम फिलिप्स-फेन कहते हैं,‘हर समुदाय अलग व्यवहार कर रहा है। यहां से जाने वाले ज्यादातर श्वेत हैं। इन जगहों पर महंगा किराया है और गरीबी कम है। यह कहना मजबूत बात है कि सब साथ हैं, लेकिन ऐसा है नहीं।’

विश्लेषण से बता चला है कि सबसे ज्यादा लोग अपर-ईस्ट साइड, वेस्ट विलेज, सोहो और ब्रुकलिन हाइट्स छोड़कर गए हैं। संपन्न माने जाने वाले इन चारों इलाकों में करीब 40% आबादी कम हो गई है। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जो डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा किराया चुका रहे थे, ज्यादातर के पास कॉलेज की डिग्री है और करीब 75 लाख रुपए तक कमा रहे थे। इनके अलावा छात्रों ने भी शहर छोड़ा है।

साउथ फ्लोरिडा, कनेक्टिकट जैसी जगहों पर शिफ्ट हुए ज्यादातर लोग

न्यूयॉर्क सिटी में 1% अमीरों की सालाना कमाई 16 करोड़ रुपए हैं। वे महंगे आइलैंड और शहरों में शिफ्ट हुए हैं। दक्षिणी फ्लोरिडा, कनेक्टिकट, पेन्सिल्वेनिया, न्यूजर्सी, मार्था विनयार्ड, केप कॉड, रोड आइलैंड, हैम्पटन, हडसन वैली और जर्सी शोर इनकी पसंदीदा जगहों में शामिल हैं। रिपोर्ट में इन्हें तथाकथित ‘कोरोनावायरस शरणार्थी’ कहा गया है।



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रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च से 1 मई के बीच करीब 4.20 लाख लोग शहर छोड़कर जा चुके हैं, जो यहां की कुल आबादी का करीब 5% है।


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महामारी में स्कैम से कैसे बचें; वेबसाइट का डोमेन नेम देखें, एड ब्लॉकर इंस्टॉल कर जानकारी चुराने वाले विज्ञापन रोकें

कोरोनावायरस में बढ़ी अनिश्चितता ऑनलाइन जालसाजी करने वालोंकेलिए बड़ा माैका लेकर आई है। बेरोजगार सरकार से मदद की आस लगाए हैं। काेई बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर फाेन करता है या ई-मेल भेजता है ताे उसे नजरअंदाज करना मुश्किल हाे जाता है। आइए जानें खुद काे स्कैम और हैकिंग से किन तरीकाें से सुरक्षित रहा जा सकता है:

फर्जी वेबसाइट्स से महारथी भी धोखा खा जाते हैं

  • यूआरएल चेक करें: फर्जी वेबसाइट सरकारी या बैंक की वेबसाइट की ही तरह नजर आती है। डाेमेन नेम से फर्जीवाड़ा उजागर हाे सकता है। इसके लिए एड्रेस बार पर देखें कि यह .com या .org याgov.inहै या नहीं।
  • एड ब्लाॅकर इंस्टाॅल करें : निजी जानकारी जुटाने वाले विज्ञापनाें से बचने के लिए एड ब्लाॅकर इंस्टाॅल करें।

स्कैम कॉल से ऐसे बचें

  • फाेन रख दें, दाेबारा काॅल करें : काॅलर पर संदेह हाे ताे काॅल काटकर कस्टमर सर्विस पर फाेन करके तस्दीक करें।
  • काॅन्टेक्ट लिस्ट : ठग किसी बैंक के नंबर से स्पूफ काॅल करे ताे आप समझ नहीं पाएंगे। इसलिए काॅन्टेक्ट लिस्ट से ऐसे नंबर हटा दें।

ई-मेल और टेक्स्ट मैसेज

  • चेक भेजने वाले को जांचें: असली और फर्जी ई-मेल एड्रेस में एक-दाे कैरेक्टर का अंतर हाेता है। इसी तरह स्कैम टैक्स्ट के फाेन नंबर 10 से अधिक अंक के हाेते हैं।
  • चेक करें, क्लिक न करें : अंजान लिंक पर क्लिक करने या जवाब देने से बचें। कई लिंक पर माउस का कर्सर ले जाने पर पेज का प्रिव्यू दिख जाता है। संदिग्ध पेज दिखे ताे उसे स्पैम मार्क कर दें या डिलीट कर दें।

वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं...

  • नेटवर्क सिक्यूरिटीःकंप्यूटर की तरह वाई-फाई राउटर भी सुरक्षित हाेना चाहिए। इसका लेटेस्ट वर्जन हाे। पासवर्ड भी स्ट्राॅन्ग हाे।
  • निजी औरऑफिस के सिस्टम अलग हों: वर्क फ्राॅम हाेम के चलते कर्मचारी निजी कंप्यूटर, ई-मेल एड्रेस या मैसेजिंग एप इस्तेमाल करने लगते हैं। हाे सकता है आपके उपकरण औरएप कंपनी के नेटवर्क सिक्युरिटी जैसे सुरक्षित न हाे। इसलिए कंपनी के सिस्टम, इंटरनेट अकाउंट औरसाॅफ्टवेयर पर ही काम करें।


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ठग किसी बैंक के नंबर से स्पूफ काॅल करे ताे आप समझ नहीं पाएंगे। इसलिए काॅन्टेक्ट लिस्ट से ऐसे नंबर हटा दें।


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कबड्‌डी खिलाड़ियों के लिए एंटी-वायरस किट बने, कराते में फेस अटैक बंद हों; ओलिंपिक में ताइक्वांडो खिलाड़ी नई ड्रेस में दिखेंगे

लॉकडाउन के बाद जब खिलाड़ी मैदान पर लौटेंगे तो कॉम्बैट और कॉन्टैक्ट खेल का स्वरूप बदल सकता है। कबड्‌डी, कुश्ती, बॉक्सिंग, ताइक्वांडो, कराते ऐसे खेल हैं, जिनमें खिलाड़ियों को एक-दूसरे को छूना पड़ता ही है। खेल संघों के सामने खिलाड़ियों को वायरस के संक्रमण से बचाने की चुनौती होगी। ऐसे में कुश्ती, कबड्‌डी जैसे खेलों के इंटरनेशनल संघ ने रेफरी, कोच, एसोसिएशन से सुझाव मांगे हैं कि खिलाड़ियों को संक्रमण से बचाने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं या फिर नियमों में क्या बदलाव हो सकते हैं। इन 5 खेलों के इंटरनेशनल रेफरी ने अपने सुझाव शेयर किए।

कबड्‌डी: बोनस लाइन क्रॉस करने पर डबल अंक
रेडर को बोनस लाइन क्रॉस करने पर डबल अंक मिलें। सफल रेड के बाद डिफेंड कर रही टीम का एक खिलाड़ी आउट हो। डिफेंडर के टच से रेड खत्म हो जाए और रेडर बाहर हो। खिलाड़ियों के लिए एंटी वायरस किट बने, जो उनके हिसाब से सुरक्षित और आरामदायक हो। जैसे- ईरान की महिला टीम हिजाब पहनकर खेलने उतरती है, किट उसी तरह की हो।
-जेसी शर्मा, इंटरनेशनल रेफरी

कुश्ती: कैंप से पहले हर खिलाड़ी क्वारैंटाइन हो
हमें एहतियात बरतना जरूरी होगा। कैंप में शामिल होने वाले खिलाड़ियों को क्वारैंटाइन में रहना अनिवार्य कर देना चाहिए। उन्हें कैंप से बाहर जाने की इजाजत न दी जाए। चैंपियनशिप से पहले हर खिलाड़ी, कोच और ऑफिशियल का टेस्ट हो। इसके लिए बाकायदा संघों से कोरोना फीस भी लेना चाहिए। मैट को भी लगातार सैनिटाइज करना होगा।
-कृपा शंकर, इंटरनेशनल रेफरी

कराते: ऑनलाइन टूर्नामेंट को बढ़ावा मिले
ऑनलाइन और स्किल कॉम्पिटीशन पर फोकस करना होगा, ताकि खिलाड़ी जब वापसी करे तो उसकी स्किल स्ट्रांग हो। हमें निचले लेवल से ही एक वेट कैटेगरी और एज कैटेगरी में खिलाड़ियों को फिल्टर करना होगा। ताकि एक इवेंट में एक ही खिलाड़ी ऊपर जाए। फेस अटैक को बंद कर देना चाहिए। मिडिल अटैक को अनुमति दे सकते हैं।
-परितोष शर्मा, इंटरनेशनल रेफरी

बॉक्सिंग: क्लोजर रेंज और होल्डिंग वर्जित हो
खिलाड़ियों द्वारा क्लोजर रेंज, क्लिपिंग और होल्डिंग करना वर्जित कर दिया जाए। चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से पहले हर खिलाड़ी का टेस्ट हो। रिपोर्ट के बाद ही उसे चैंपियनशिप में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए। ग्लव्स, हेड कवर, रिंग का सैनिटाइजेशन हो। फाइट के दौरान इंस्पायरिंग सेशन कम कर दिए जाएं। खिलाड़ी और रेफरी की मेडिकल स्क्रीनिंग हो।
-जोगिंदर सोन, इंटरनेशनल रेफरी

ताइक्वांडो: रेफरी को रबर के ग्लव्स पहनने होंगे
वर्ल्ड ताइक्वांडो फेडरेशन ने तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओलिंपिक के लिए खिलाड़ियों की पोशाक बदल दी है। खिलाड़ी स्किन टाइट पैंट और शर्ट पहनेंगे। इनके हेड गेयर, क्राउन गार्ड, चेस्ट गार्ड, स्किन गार्ड और ग्लव्ज भी बदले हुए नजर आएंगे। रेफरी को भी रबर के ग्लव्स पहनने होंगे।
-राजीव कुमार, इंटरनेशनल रेफरी



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खेल संघों के सामने खिलाड़ियों को वायरस के संक्रमण से बचाने की चुनौती होगी। दुनियाभर में कोरोना महामारी के कारण कई चीजों में बदलाव किए गए।


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देसी कंपनियों ने शुरू की ग्लोबल तैयारी, विस्तार के लिए नए प्लांट लगाने की योजनाएं बनाईं; अब रिसर्च पर भी रहेगा फोकस

स्वदेशी उत्पाद खरीदने में ‘लोकल के लिए वोकल’ बनने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद स्वदेशी कंपनियों में लोकल ब्रांड के लिए नई स्फूर्ति देखी जा रही है। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग के मद्देनजर कई कंपनियों ने अगले वित्त वर्ष से विस्तार की योजना भी बनाई है। साथ ही यह उम्मीद भी जताई है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद उनकी कंपनियों की स्थिति तेजी से ठीक होगी।

मोबाइल हैंडसेट, चाय, साबुन, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियां अपने कारोबार के बारे में नए सिरे से सोच रहीं हैं और उसी के अनुसार अपनी योजनाएं बनाने में जुट गई हैं। ऐसा केवल देश में ही नहीं, अमेरिका में भी हो रहा है।

देसी कंपनियों को सपोर्ट करने से अर्थव्यवस्था पुनर्जीवित होगी
इस सिलसिले में पतंजलि आयुर्वेद के स्वामी रामदेव कहते हैं कि खाद्य तेलों से लेकर फूड प्रोडक्ट व एफएमसीजी में एक लाख करोड़ रुपए तक करने की भूमिका निभाने के लिए पतंजलि प्रतिबद्ध है। उनकेमुताबिक इससे 10 से 20 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

वहीं, घड़ी डिटरजेंट बनाने वाली कंपनी आरएसपीएल के ज्वाइंट एमडी राहुल ज्ञानचंदानी कहते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था तभी पुनर्जीवित होगी, जब हम देसी कंपनियों को सपोर्ट करेंगे। हमारे 20 प्लांट हैं, खपत लगातार बढ़ रही है। जरूरत हुई तो हम एक और प्लांट लगाएंगे।

कई कंपनियों नेब्रांडिंग की योजना भी बनाई
इधर, कई कंपनियों ने अपनी ब्रांडिंग की योजना भी बनाई है। बाघ बकरी टी ग्रुप के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पराग देसाई ने कहा कि हमारी चाय 40 देशों में बिकती है। हम और प्रचार करेंगे कि लोकल कंपनी होने के बाद भी हम आगे कैसे बढ़े। प्रधानमंत्री की अपील के बाद उम्मीद है कि हमारे उत्पाद की डिमांड भी बढ़ेगी।

अभी स्टॉक की चाय ही बिक रही है, लेकिन बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए एक साल बाद हम नया प्लांट लगाएंगे। वहीं, एक बड़ी ऑटो मोबाइल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पीएम की अपील और लेबर रिफॉर्म्स के साथ ही अन्य निर्णयों के जमीन पर उतरने के बाद भारतीय कंपनियों को न सिर्फ आगे बढ़ने में मदद मिलेगी बल्कि वे ग्लोबल भी बनेंगी।

40% अमेरिकियों ने कहा कि उन्हें चीन के बने उत्पाद नहीं चाहिए
इधर, ब्लूमबर्ग की हालिया सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 40% अमेरिकियों ने कहा कि उन्हें चीन के बने उत्पाद नहीं चाहिए जबकि 22% अमेरिकियों ने भारत में बने उत्पादों को भविष्य में खरीदने से मना किया है। ऐसे में भारतीय भी स्वदेशी उत्पाद खरीदने के लिए आगे आ सकते हैं।

प्रोडक्ट और सर्विस विश्वस्तरीय देने से ही मुकाबला होगा

विश्व की पांचवी सबसे बड़ी फीचर फोन बनाने वाली कंपनी लावा इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी हरिओम राय कहते हैं कि कोई भी देश जो बड़ा बना है, वो सिर्फ इसलिए बड़ा हुआ है क्योंकि उनकी कंपनी बड़ी बनी है। कंपनियों को अपने प्रोडक्ट और सर्विस को विश्वस्तरीय करना पड़ेगा, तभी हम मल्टी नेशनल कंपनियों से मुकाबला कर पाएंगे।

19-20 का थोड़ा-बहुत फर्क होगा तो लोग स्थानीय प्रोडक्ट को ही पसंद करेंगे लेकिन यही अंतर 17-25 का होगा तो फिर स्थानीय होते हुए भी उत्पाद नहीं बिक सकेगा। नई पॉलिसी आने के बाद हम चीन से पूरा प्रोडक्ट शिफ्ट कर रहे हैं और भारत में ही आर एंड डी सेंटर सहित डिजाइन और निर्माण का काम भी यहीं कर रहे हैं।



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चाय, साबुन, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियां अपने कारोबार के बारे में नए सिरे से सोच रहीं हैं और उसी के अनुसार अपनी योजनाएं बनाने में जुट गई हैं। -प्रतीकात्मक फोटो


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श्रीनगर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी, मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद की गई

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सोमवार देर रात दो बजे से सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। दो साल में ये पहला मौका है जब श्रीनगर में इस तरह की मुठभेड़ हुई है।

इससे पहले रविवार को हुई एक मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी ताहिर अहमद भट मारा गया था। 11 दिन पहले मारे गए रियाज नाइकू के बाद ये दूसरा बड़ा एनकाउंटर था।

6 मई को हिजबुल का रियाज मारा गया

कश्मीर में 6 मई को सुरक्षाबलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर रियाज नायकू मारा गिराया था। वह दो साल से मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। वह बीमार मां से मिलने पुलवामा के गांव बेगपोरा आया था। पुलिस को इस गांव में नायकू और उसके कुछ साथियों की मौजूदगी का इनपुट मिला था। सुरक्षाबलों ने नायकू के शव को परिवार के पांच लोगों के सामने सोनमर्ग के उस कब्रिस्तान में दफनाया, जहां इन दिनों आतंकियों के शव दफनाए जाते हैं।



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Jammu and Kashmir: An encounter has started at Kanemazar Nawakadal area of Srinagar


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सोमवार, 18 मई 2020

यात्रा प्रतिबंध और मानसून के कारण आईपीएल के अगले 4 महीने तक होने के आसार कम; टी-20 वर्ल्ड टला तो अक्टूबर में हो सकती है लीग

गृह मंत्रालय ने रविवार रात लॉकडाउन के चौथे फेज के लिए गाइडलाइन जारी कर दी। इसमें स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खोलने की मंजूरी तो दी। लेकिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध कम से कम 31 मई तक जारी रहेगा। ऐसे में घरेलू और विदेशी दोनों खिलाड़ी यात्रा नहीं कर सकेंगे। इसलिए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के अगले 4 महीने तक होने के आसार कम हैं।

बीसीसीआई ने भी बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार ने 31 मई तक हवाई यात्रा पर लगी पाबंदियों को जारी रखा है। ऐसे में बोर्ड खिलाड़ियों की ट्रेनिंग या टूर्नामेंट शुरू करने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा।

हम जल्दबाजी में ट्रेनिंग नहीं शुरू करेंगे: बीसीसीआई

बोर्ड कोषाध्यक्ष अरूण धूमल ने कहा ने कहा, “हमारे लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा अहम है। ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जाएगा, जिससे कोरोना से निपटने की भारत की कोशिशों पर असर पड़े।

1 जून से मानसून सीजन शुरू होता है

भारत में मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक होता है। हालांकि, इस पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है। देश के ज्यादातर हिस्सों में यह 15 जून तक ही सक्रिय हो पाता है। इस बार भी केरल में मानसून 4 दिन की देरी से आएगा।आईपीएल के संदर्भ में बात करें तो मानसून को देखते हुए जून से मध्य अक्टूबर तक इसका भारत में होना लगभग नामुमकिन है।टीम इंडिया का व्यस्त शेड्यूल

सितंबर तक टीम इंडिया का व्यस्त शेड्यूल

टीम इंडिया को जून-जुलाई में श्रीलंका से उसी के घर में 3 वनडे और 3 टी-20 की सीरीज खेलनी है। इसके बाद अगस्त में जिम्बाब्वे दौरे पर 3 वनडे खेलने हैं। अगले महीने ही एशिया कप भी होना है।भारतीय टीम अगस्त के तीसरे हफ्ते से लेकर 15 नवंबर तक व्यस्त रहेगी। इस दौरान केवल 7 दिन का गैप रहेगा। अगर बीसीसीआई आईपीएल के लिए एक तरफा फैसला लेकर इन सीरीज को रद्द करता है, तो आईसीसी उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

अक्टूबर में टी-20 वर्ल्ड कप

इस साल ऑस्ट्रेलिया में टी-20 वर्ल्ड कप होना है। टूर्नामेंट 18 अक्टूबर से 15 नवंबर तक होगा।अगर टी-20 वर्ल्ड कप टलता या रद्द होता है तो आईपीएल की संभावना नवंबर के आखिर से पूरे दिसंबर तक हो सकती है।

आईसीसी की बोर्ड मीटिंग में टी-20 वर्ल्ड कप फैसला

28 मई को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल(आईसीसी) की बोर्ड मीटिंग होने वाली है। इसमें ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप की किस्मत को लेकर फैसला होगा। इस बैठक पर बीसीसीआई और आईपीएल फ्रेंचाइजियों की नजर है।

फ्रेंचाइजी मालिकों का क्या कहना है

आईपीएल के फ्रेंचाइजी ओनर को अभी भी लीग के होने की उम्मीद है। लेकिन इससे पहले कई जमीनी काम हैं, जिसे टूर्नामेंट के आयोजन के लिए पूरा करना जरूरी है। चेन्नई फ्रेंचाइजी के सीईओ काशी विश्वनाथन का कहना है किसरकार का आदेश सकारात्मक है। लेकिन हमें देखना होगा कि कब दर्शकों को स्टेडियम में आने की अनुमति मिलती है। अगर आपको यात्रा करने की अनुमति नहीं है तो आप कैसे खेलेंगे? अभी भी कंटेनमेंट जोन में कई तरह की पाबंदियां लागू हैं।

बंद स्टेडियम में टूर्नामेंट होने की उम्मीद: केकेआर

कोलकाता फ्रेंचाइजी के सीईओ वैंकी मैसूर ने कहा- मुझे लगता है कि साल के अंत तक हालात सुधार जाएंगे, तब लीग कराई जा सकती है। अगर हम आईपीएल को कराने में सफल रहे तो यह मानकर चलिए कि टूर्नामेंट बंद स्टेडियम में ही होगा। दुनिया में जहां भी खेल गतिविधियां शुरू हुई हैं। वहां यही तरीका अपनाया गया है। यह सही है कि इसके कारण टिकट से होने वाली कमाई, फूड औऱ बेवरेज और टीम से जुड़े सामान से होने वाली कमाई पर असर पड़ेगा।

गेंदसरकार और बोर्ड के पाले में: किंग्स इलेवन पंजाब

पंजाब के सीईओ सतीश मेनन का कहना है कि अब बीसीसीआई और सरकार को यह तय करना है कि क्या वे आईपीएल का 13वां सीजन कराना चाहते हैं या नहीं। मुझे लगता है कि खिलाड़ियों और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। अगर आईपीएल खाली स्टेडियम में होता है तो भी खिलाड़ियों, फ्रेंचाइजियों को इससे खुशी ही होगी।

खिलाड़ियों का इस पर क्या कहना है
खाली स्टेडियम में मैच कराने को लेकर भारतीय कप्तान विराट कोहली का कहना है कि ईमानदारी से कहूं तो हमें दर्शकों की भीड़ के सामने खेलने की आदत है। ऐसे में अगर बगैर फैन्स के मैच होते हैं तो हैं पता नहीं खिलाड़ी इसे कैसे लेंगे। लेकिन विदेशों में भी टूर्नामेंट ऐसे ही शुरू हो रहे हैं।

बिना दर्शकों के खेलने को तैयार: कमिंस

वहीं, आईपीएल-13 की नीलामी में सबसे महंगे 15.5 करोड़ में बिके ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज पैट कमिंस को उम्मीद है कि आईपीएल इस साल होगा। वे पहले भी कह चुके हैं कि पहली प्राथमिकता लोगों और खिलाड़ियों की सुरक्षा है, जबकि दूसरा हालात सामान्य होना है। अगर इसका मतलब यह है कि हमें कुछ समय के लिए बिना दर्शकों के खेलना पड़े तो इसे मंजूर करना चाहिए। क्योंकि लोग तब भी घऱ बैठे तो मैच देख ही सकेंगे।
आईपीएल की 8 टीमों में 64 विदेशी खिलाड़ी
आईपीएल की 8 टीमों में 189 खिलाड़ी हैं। इनमें 64 विदेशी हैं। इनका अब 31 मई तक भारत आना नामुमकिन है, क्योंकि देश में सभी प्रकार की घरेलू और विदेशी उड़ानों पर रोक है। साथ ही विदेशी बोर्ड भी अपने खिलाड़ियों को कोरोना रुकने तक भारत आने की अनुमति नहीं देंगी।

आईपीएल रद्द करने से 3 हजार करोड़ का नुकसान
बीसीसीआई कोषाध्यक्ष अरूण धूमल पहले ही कह चुके हैं किआईपीएल को सीधे रद्द नहीं किया जा सकता है। अगर टूर्नामेंट रद्द होता है, तो करीब 3 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा।



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आईपीएल का 13वां सीजन 29 मार्च से शुरू होना था। लेकिन कोरोनावायरस और विदेशी खिलाड़ियों के वीजा प्रतिबंध की वजह से इसे पहले 15 अप्रैल तक के लिए टाला गया था। लेकिन इसके बाद सरकार द्वारा 3 मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ाने पर लीग को अगले आदेश तक के लिए टाल दिया गया था। (फाइल)


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बस-ट्रक की टक्कर में 12 प्रवासी मजदूर घायल, 7 की हालत गंभीर; बस में 39 लोग सवार थे

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक बस ट्रक से टकरा गई। हादसे में बस में सवार 12 प्रवासी मजदूर घायल हो गए। घायलों को तमकुही सीएचसी में भर्ती करावाया गया। इनमें से 7 की हालत गंभीर होने की वजह से जिला अस्पताल रैफर कर दिए गए। बस नोएडा से 39 लोगों को बिहार के भागलपुर जा रही थी।

मुख्यमंत्री ने जांच के निर्देश दिए
हादसा रविवार रात साढ़े नौ बजे एनएच-28 पर पटहेरवा इलाके में हुआ। डुमरभार गांव के पास बस ओवरटेक करने की कोशिश में ट्रक से भिड़ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन को घायलों के इलाज की व्यवस्था करने और हादसे की जांच के निर्देश दिए। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से जांच रिपोर्ट मांगी है।

प्रयागराज पुलिस मजदूरों की आवाजाही पर नजर रखेगी
उत्तरप्रदेश के औरैया में शनिवार को हुए हादसे में 24 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। इससे सबक लेते हुए प्रयागराज जोन पुलिस ने फैसला किया है कि प्रवासी मजदूरों को ले जाने वाले मालवाहक वाहनों (गुड्स कैरियर) पर नजर रखी जाएगी। सिर्फ खाली वाहनों यानी जिनमें कोई भारी सामान नहीं होगा उन्हें ही लोगों को ले जाने की छूट दी जाएगी। प्रवासियों को टू-व्हीलर या साईकिल से जाने की इजाजत नहीं होगी, पैदल भी सफर नहीं कर सकेंगे। पुलिस वाहनों की स्पीड पर भी नजर रखेगी।



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हादसा कुशीनगर में एनएच-28 पर रविवार रात साढ़े नौ बजे हुआ।


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150 अंक ऊपर खुला सेंसेक्स शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान 700 अंक तक गिरा, निफ्टी भी 219 पॉइंट नीचे

सप्ताह में आज सोमवार को कारोबार के पहले दिन बाजार बढ़त के साथ खुला। सेंसेक्स 150.53अंक ऊपर और निफ्टी 21.45पॉइंट ऊपर खुला। हालांकि, ट्रेडिंग के शुरुआती आधा घंटे में हीसेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा नीचे गिर गया। अभीसेंसेक्स 729.95 अंक नीचे 30,367.78 पर और निफ्टी 219.80 पॉइंट नीचे 8,917.05 पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले शुक्रवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 173.39 अंक ऊपर और निफ्टी 39.65 पॉइंट ऊपर खुला था। दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स 352 अंक से ज्यादा नीचे लुढ़क गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 25.16 अंक या 0.08% नीचे 31,097.73 पर और निफ्टी 5.90 पॉइंट या 0.06% नीचे 9,136.85 पर बंद हुआ था।

शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए अमेरिकी बाजार
शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों के साथ अन्य देशों के बाजारों में भी बढ़त देखने को मिली। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 0.25 फीसदी की बढ़त के साथ 60.08 अंक ऊपर 23,685.40 पर बंद हुआ। वहीं, अमेरिका के दूसरे बाजार नैस्डैक 0.79 फीसदी बढ़त के साथ 70.84 अंक ऊपर 9,014.56 पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, एसएंडपी 0.39 फीसदी बढ़त के साथ 11.20 पॉइंट ऊपर 2,863.70 पर बंद हुआ। चीन का शंघाई कम्पोसिट 0.45 फीसदी बढ़त के साथ 12.79 अंक ऊपर 2,881.25 पर बंद हुआ था। इधर फ्रांस, जर्मनी, कनाडा के बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए।कोरोना से देश और दुनिया में मौतें

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 95,698 हो गई है। इनमें 95,698 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 36,795 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,025 हो चुकी है। ये आंकड़े covid19india.org के अनुसार हैं। दूसरी तरफ, दुनियाभर में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4,801,875 हो चुकी है। इनमें 316,671 की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 90,978 हो चुकी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया 20 लाख करोड़ के पैकेज का हिसाब

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का पूरा हिसाब दिया। इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को की थी। इस पैकेज के अंदर इस घोषणा से पहले जारी किए जा चुके पैकेज भी शामिल हैं। पीएम की घोषणा के बाद वित्त मंत्री ने बुधवार से रविवार तक हर दिन अलग-अलग सेक्टर के लिए पैकेज और सुधारों की घोषणा कर रही थीं। रविवार को इसका पांचवां और आखिरी चरण था।

पैकेज का चरण

घोषित राशि (करोड़ रुपए में)
बुधवार, 13 मई 2020 को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 5,94,550
गुरुवार, 14 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 3,10,000
शुक्रवार, 15 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 1,50,000
शनिवार और रविवार, 16 और 17 मई को वित्त मंत्री द्वारा घोषित पैकेज 48,100
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सहित पुराने पैकेज 1,92,800
आरबीआई के कदम, जो अब तक लागू हो चुके हैं 8,01,403
कुल 20,97,053

09:55 AMसेंसेक्स 729.95 अंक नीचे 30,367.78 पर और निफ्टी 219.80 पॉइंट नीचे 8,917.05 पर कारोबार कर रहा है।
09:51 AMबीएसई सेंसेक्स बैंकेक्स में शामिल सभी कंपनियों के शेयरों में गिरावट है; फेडरल बैंक के शेयर में सबसे ज्यादा 6.39% गिरावट है।

09:47 AM

निफ्टी 50 के टॉप-10 लूजरस्टॉक्स; सबसे ज्यादा गिरावट कोलइंडिया के शेयर में है।

09:45 AM

निफ्टी 50 के टॉप-10 गेनर स्टॉक्स; सबसे ज्यादा बढ़त सिप्ला के शेयर में है।

09:39 AMबीएसई सेंसेक्स के 23 में से 6 सेक्टर में बढ़त और 17 सेक्टर में गिरावटहै।

09:35 AMबीएसई सेंसेक्स के सभी 32 इंडेक्स में आज गिरावट है।

09:29 AMसेंसेक्स 211.97 अंक नीचे 30,885.76 पर और निफ्टी 63.90 पॉइंट नीचे 9,072.95 पर कारोबार कर रहा है।
09:23 AM बीएसई सेंसेक्स 30 में शामिल 8 कंपनियों के शेयरों में बढ़त और 22 कंपनियों के शेयर में गिरावट है।

09:15 AM

सेंसेक्स 21.45 अंक नीचे 30,926.66 पर और निफ्टी 45.75 पॉइंट नीचे 9,091.10 पर कारोबार कर रहा है।

शुक्रवार को विदेशी बाजारों का हाल



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पिछले सप्ताह कारोबार के आखिरी दिन सेंसेक्स 25 अंक नीचे 31,097 पर बंद हुआ था, वहीं आज ये 150 अंक ऊपर खुला है


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मौत, जन्म के बीच संघर्ष करता भारत का बचपन, इस पराक्रम से देश का बढ़ा हौसला...

किसी ने सच कहा हैकि जीवन एक संघर्ष है। उस पर चलकर ही हर चुनौती को पार करते हुए मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। कोरोना की वजह से देशभर में लॉकडाउन होने के कारण हर किसी की जिंदगी एक नए मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है। देशभर में पलायन का दौर जारी है। घर पहुंचने की जिद और जीवन को गंवा देने का डर कदमों को अपने घरों की ओर मोड़ चुका है। इस बीच बचपन भी आपदा का गवाह बन रहा है। क्या राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़... नवजात अपनी मां के साथ सफर कर रहे हैं। यह नवजात अव्यवस्था का गवाह बनकर अपने जीवन की बुनियाद लिख रहे हैं। इनके पीछे क्या इच्छाशक्ति है, यह तो वही जानें, लेकिन इतना तय है कि इस संघर्ष के बीच मां की गोद में ये मासूम जिंदगी जीने का वो सिरा तलाश रहे हैं, जहां से उन्हें व्यवस्थित भारत की तस्वीर नजर आए। कोई अपनी मां की गोद में बैठकर इस कहानी को पूरा कर रहा है, तो कोई उंगली पकड़कर।हौसला देती मासूमों की यह 15 तस्वीरें सिस्टम से कुछ बुनियादी सवाल कर रही हैं.....

बागनदी बॉर्डर पर रविवार को भी दिनभर मजदूरों के प्रवेश का सिलसिला चलता रहा। भीड़ की वजह से बसें कम पड़ने लगी। गर्मी, थकान और बेबसी के बीच गोद में मासूम बिलखते बच्चे को पानी पिलाकर चुप कराता पिता।

खंडेला में ईंट भट्टे पर काम करने वाले श्रमिक का परिवार रविवार को उत्तर प्रदेश के लिए पैदल ही रवाना हो गया। बेटे को परेशानी न हो, इसके लिए श्रमिक ने जुगाड़नुमा साइकिल बनाई। उसमें बेटे को बिठाकर दंपती निकल पड़े अपने गांव के लिए। पूछा तो बोले- यहां रहकर क्या करें? अब तो रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गांव जाने के सिवाय कोई चारा नहीं है। पता है- गांव तक पहुंचने का सफर आसान नहीं है, लेकिन जाना भी जरूरी है। हम तो कष्ट सह लेंगे, लेकिन बेटे को तकलीफ नहीं उठाने देंगे, इसलिए ये हाथगाड़ी बनाई,ताकि हमारे कलेजे के टुकड़े को पैदल न चलना पड़े।

मारेंगा चेकपोस्ट पर रविवार को दो साल की इस मासूम को कुछ खाने को मिला। उसने हाथ में रखा फल 9 महीने के भाई को थमाया और उसे दुलारने लगी। यह परिवार ओडिशा से पहुंचा था। दंपती, 4 बच्चे और खराब मोपेड, चार झोले। कुल इतनी संपत्ति के साथ अब्बास अली कर्नाटक के बीदर जाने निकला था।

प्रवासियों के लिए घर पहुंचने की जल्दी और अज्ञानता उनकी भागदौड़ का सबसे बड़ा कारण बना है। ऐसा नहीं कि प्रवासियों ने घर जाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं करवाई, लेकिन 10 से 15 दिन पहले रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद भी जब कोई मैसेज नहीं कि कौन सी तारीख को कहां से ट्रेन मिलेगीतो ये चल पड़ते हैं अपने किराए के घर छोड़कर।

लॉकडाउन, कर्फ्यू ये शब्द उन लोगों के लिए अब कोई मायने नहीं रखते, जिन लोगों ने अब अपना रोजगार छोड़ घरों को जाने काठान लिया है। जिंदगी ने इन प्रवासी श्रमिकों को अब ऐसे दिन दिखा दिए हैं कि कोरोनावायरस जैसी बड़ी मुसीबत भी इनके लिए कुछ नहीं है। चंडीगढ़ में कई साल से काम कर रहे श्रमिक अब बड़ी संख्या में घरों को लौटने लगे हैं। वहीं, इनके भूखे बच्चों को पुलिस के जवान खाने का सामन उपलब्ध करा रहे है।

चिलचिलाती धूप में महाराष्ट्र से सैकड़ों श्रमिक हर रोज महाराष्ट्र से यूपीजा रहे हैं। भोपाल बायपास पर मुंबई से निकले एक श्रमिक परिवार ने 10 महीने के छोटे बच्चे को दचका न लगे, इसलिए ऑटो में भी चादर से झूला बनाकर लिटा दिया। फोटो : शान बहादुर

बिलासपुर के धर्मपुरा गांव के राजेंद्र यादव और उनकी पत्नी ईश्वरी को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आते समय उनके घर एक नन्ही परी ने जन्म लिया। रात के 2 बजे थे, राजेंद्र की पत्नी ईश्वरी बाई को लेबर पेन शुरू हुआ। महिला मजदूरों ने डिलीवरी कराई। लड़की हुई। बिलासपुर आने के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को सिम्स में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की स्थिति सामान्य है। वहीं दुर्ग केनवागढ़ के एक नट का पूरा परिवार दिल्ली से दुर्ग आ रही मजदूरों की ट्रेन में शनिवार की रात 8 बजे चढ़ा। रात 3 बजे के करीब सीमा ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची सुंदर थी, अच्छी थी, लेकिन एक घंटे बाद अचानक उसकी मौत हो गई। सीमा की सास 14 घंटे तक उस बच्ची के शव को गोद में रखकर सफर करती रही। दुर्ग में उन्हें गाड़ी से नवागढ़ पहुंचाया गया।

एबी रोड स्थित बिजासन घाट पर रविवार सुबह 8:15 बजे भीषण हादसा हुआ। मंदसौर से उडपी (कर्नाटक) जा रहा टैंकर ब्रेक फेल होने से बाइक पर पलट गया। हादसे में बाइक सवार निवाली के मजदूर दंपती और उनकी दो बेटियों की मौत हो गई, जबकि दो बेटियों को चोट आई। टैंकर के नीचे दबी दो बालिकाओं को पुलिस ने निकालकर अस्पताल भिजवाया। शेष चारों के शवों को घंटेभर की मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा श्रमिकों को चप्पल बांटे जाने की घोषणा के बाद राजधानी रायपुर में विधायक विकास उपाध्याय सुबह से ही मजदूरों की सेवा में लग गए और देर रात तक वे राहगीरों को चप्पल पहनाने के साथ ही भोजन भी कराते रहे। सीएम बघेल ने कहा था कि छत्तीसगढ़ पहुंचने वाले श्रमिकों किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यहां इनके रहने और भोजन का इंतजाम किया गया है।

शनिवार की देर रात पलामू जिला प्रशासन का मानवीय चेहरा सामने आया। रायगढ़ महाराष्ट्र से जब विशेष ट्रेन श्रमिकों को लेकर डालटनगंज रेलवे स्टेशन पर करीब 2:30 बजे रात में पहुंची, उसी दौरान रूपा कुमारी नामक एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पने लगी। इसके बाद उसका पति राहुल ठाकुर परेशान हो गया। वह कुछ कर पाता इससे पहले ही प्रशासन की टीम ने वहां पहुंचकर उसे सांत्वना दी और उसे उसकी पत्नी के साथ पीएमसीएच एंबुलेंस से भेज दिया गया। पीएमसीएच में प्रतिनियुक्त सिस्टर चंचला कुमारी ने प्रशासन के सूचना पर सभी तैयारी कर ली थी। महिला को पहुंचते ही उसे डॉक्टर कादरी के दिशा निर्देश के अनुरूप सुरक्षित प्रसव कराने में सफल हुई।
सिस्टर चंचला ने उसे पूरी तन्मयता के साथ सेवा की और खुद चाय बनाकर पिलाई। यह सब देख महिला रूपा कुमारी को सहज विश्वास नहीं हुआ कि एक सरकारी अस्पताल में उसे यह सब सुविधा नसीब होगी।

प्रशासन की चौकसी के तमाम दावों के बावजूद प्रवासी मजदूर बॉर्डर तक पहुंच गए। गाजीपुर में रोके जाने पर रविवार को हंगामा किया। वहीं तीन दिनों तक पैदल चलकर यूपी बॉर्डर पहुंचा प्रवासी मजदूर सत्येंद्र अब यूपी में प्रवेश करने का इंतजार कर रहा है। इस दौरान वह अपनी बेटी के पैर की मालिश करता हुआ।

रेहड़ीके जरिए अपने घर पहुंचने की कोशिश करते हुए लोगों को प्रशासन ने धैर्य बनाएं रखने की अपील की और ऐसे ही 70 प्रवासियों को प्रशासन ने नसिर्फ रोका बल्कि उनके खाने-पीने और ठहरने का भी प्रबंध किया।

कोरोना काल में दूसरे राज्यों के लोगों का अपने घरों में जाने का क्रम जारी है। 2 मई से लेकर अब तक 7.30 लाख लोगों ने अपने घरों में जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया है। वहीं ये लोगों ने जरूरत के सारे सामान समेत अपने परिवार के साथ गुरुनानक स्टेडियम में अपनी बारी का इस भीषण गर्मी में इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान एक बच्चा अपने छोटे भाई को संभालता हुआ।

पंजाब, राजस्थान और हरियाणा से लगातार अपने घरों को लौट रहे प्रवासी भूख-प्यास और थकान से बेहाल। छोटे बच्चे तपती दोपहरी में बेजान से हो गए। पहली तस्वीर में एक मां अपनी बच्ची को खाना खिलाती हुई। वहीं दूसरी तस्वीर में परिजन अपने बच्चों को गोद में लेकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हुए।



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पराक्रम देश के सबसे कम उम्र के बच्चों में से है, जिसने काेरोना काे हराया मैं पराक्रम हूं। 26 मार्च को मुंबई के एक अस्पताल में मेरा जन्म हुआ। तब एक चूक के कारण मैं कोरोनावायरस की चपेट में आ गया। लंबे संघर्ष के बाद मेरी मम्मी, पापा, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों ने मुझे बचाया है। मेरी आंखों में जिंदगी की चमक है, क्योंकि स्वास्थ्यकर्मियों और मेरे अपनों ने सोशल डिस्टेंसिंग और सतर्कता की अपनी जिम्मेदारी पूरी शिद्दत से निभाई।


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