रविवार, 26 जुलाई 2020

कोरोना ने शिवराज को घेरा, सोशल डिस्टेंसिंग न रखना भारी पड़ा; तीज-त्योहार के दिनों में रतजगे कर रही राजस्थान की राजनीति

तारीख 26 जुलाई। हमारे गर्व और अभिमान की एक अमर तारीख। आज करगिल में पाकिस्तान पर विजय को 21 साल पूरे हो रहे हैं। दिलों में जोश है, उमंग है और इसीलिए आज का दिन रविवार की छ़ुट्टी की तरह नहीं, विजय दिवस के रूप में मनाएंगे। नमन करेंगे उन 527 शहीदों और 1363 घायल जवानों को जिनके बलिदानों ने तिरंगा झुकने नहीं दिया।

शहीद परमवीर कैप्टन विक्रम बत्रा के इस उद्घोष के साथ कि “या तो मैं लहराते तिरंगे के पीछे आऊंगा, या तिरंगे में लिपटा हुआ आऊंगा, पर मैं आऊंगा जरूर”, आज की मॉर्निंग ब्रीफ में सबसे पहले उन खबरों पर नजर जो देश का मिजाज बताती हैं।

बात सबसे पहले कोरोनावायरस के विस्तार की, जिसके आगे छोटे-बड़े, नेता-अभिनेता सबके गणित फेल होते दिख रहे हैं-

1. शिवराज सिंह चौहान भी नहीं बच पाए कोरोना से

कोरोना के संकट में सोशल डिस्टेंसिंग न मानने का नतीजा क्या होता है, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह के उदाहरण से सीखिए। वे संक्रमित होने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। 24 की रात से भोपाल में लॉकडाउन शुरू हुआ और 25 की सुबह शिवराज ने अमिताभ बच्चन की तरह खुद के संक्रमित होने की खबर दी।

बोले- ‘मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जनता सावधानी रखें, जरा सी असावधानी कोरोना को निमंत्रण देती है।’ मंत्री अरविंद भदौरिया के साथ दिवंगत राज्यपाल लालजी टंडन के अंतिम दर्शन के लिए लखनऊ जाना शिवराज के लिए भारी पड़ा। भदौरिया पहले संक्रमित हुए और अब सीएम भी कोरोना से न बच सके।

अब मध्य प्रदेश से चलते हैं पड़ोसी सूबे राजस्थान में, जहां सत्ता की जोड़-तोड़ के आगे तो कोरोना जैसे वायरस ने समर्पण कर दिया है-

2. तीज-त्योहार के दिनों में राजस्थान में राजनीतिक रतजगे

राजस्थान को त्योहार के दिनों में लगे सियासी संक्रमण का आज 17वां दिन है। रस्साकशी के रुस्तम अब चेहरे बदलते दिख रहे हैं। मुकाबला अब पायलट बनाम गहलोत न होकर, राज्यपाल (भाजपा) बनाम कांग्रेस हो रहा है। 16 की शाम भाजपा की टीम राज्यपाल से मिली।

बाद में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पूनिया बोले- राज्य के मुखिया यह चेतावनी देते हैं कि 8 करोड़ जनता राज्यपाल को घेर लेगी। यह बयान उन्हें (गहलोत को) धारा 124 के तहत सजा दिला सकता है। इससे पहले दिनभर कांग्रेस समर्थकों ने प्रदेश में भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किए।

गहलोत आधी रात तक बैठकें कर रहे हैं तो सचिन पायलट खामोश हैं और हवा का रुख भांप रहे हैं, क्योंकि अब आगे की राह कोर्ट से ही निकलेगी। सोमवार को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट और जयपुर में हाईकोर्ट में सुनवाई पर नजर रहेगी।

अब राजस्थान से उत्तर प्रदेश का रुख करते हैं, जो रामजी के रंग में रंगा नजर आ रहा है, माहौल में रामधुन है, बातें हैं, किस्से हैं, और 5 अगस्त का इंतजार है-

3. अयोध्या में अगले हफ्ते दो दिन दीवाली मनेगी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत होने वाली है। 5 अगस्त को पीएम मोदी मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे। शनिवार को तैयारियों की समीक्षा करने के लिए सीएम योगी खुद कारसेवक पुरम पहुंचे। रामलला के दर्शन करने के बाद आने वाले दिनों की खुशी से गदगद योगी बोले- कि हम सभी शुभ कार्यक्रम के लिए एक साथ आएंगे।

4 और 5 अगस्त की रात को घरों और मंदिरों में ‘दीपोत्सव’ मनाया जाएगा। दीपावली अयोध्या से जुड़ी है और अयोध्या के बिना त्योहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 500 साल बाद अयोध्या में ऐसा शुभ मुहूर्त आया है। दुनिया मंदिर निर्माण का भव्य कार्यक्रम देखेगी।

अब कोरोना और राजनीति से दूर, दो ऐसी खबरें जो आज रविवार के दिन आपको परिवार के साथ शेयर करनी चाहिए, और उनकी बातें भी करनी चाहिए-

4. होम लोन के इतने अच्छे दिन आएंगे, कभी सोचा न था

आपने शायद कभी नहीं सोचा होगा, और न ही कभी सुना होगा कि हमारे देश में होम लोन की ब्याज दरें अब 2.5 पर्सेंट तक पहुंच गई हैं। मान लीजिए कि अगर आप 27 लाख रुपए का लोन लेते हैं और इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), टैक्स पर छूट जोड़ देते हैं तो सिर्फ 2.5 पर्सेंट ब्याज पर लोन मिल रहा है।

अगर आप पीएमएवाई के पात्र नहीं हैं तो फिर आपको 4 पर्सेंट और अगर कोई टैक्स छूट नहीं होती है तो फिर रेट 6.80 पर्सेंट पड़ेगी। तीनों ही स्थितियों में होम लोन की ब्याज दरें ऑल टाइम लो पर हैं। एचडीएफसी, एसबीआई, आईसीआईसीआई 6.95% जबकि एक्सिस 7.75 % पर, एलआईसी 6.90 प्रतिशत पर होम लोन दे रहा है। यूनियन बैंक सबसे कम 6.80% पर होम लोन दे रहा है।

5. ग्राहकों के फायदे की खबर, नए कानून-कायदे अमल में आए

अब ऑनलाइन शॉपिंग में होने वाली धोखाधड़ी में ग्राहकों के अच्छे दिन आने वाले हैं। भारत सरकार ने पिछले हफ्ते कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत नए ई-कॉमर्स नियम नोटिफाई कर दिए हैं। नए नियम अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स पर भी लागू होंगे। नकली और मिलावटी सामान बेचने वाले को उम्रकैद तक हो सकती है।

नए कानून से कंज्यूमर को कहीं से भी ई-कंप्लेंट दर्ज कराने का विकल्प मिल गया है। वे अपने घर के पास के किसी भी कंज्यूमर फोरम में भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। भ्रामक विज्ञापन करने पर सेलिब्रिटी पर भी 10 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है।

6. अब देख लेते हैं कि आज रविवार के दिन क्या रहे हैं आपके सितारे-अंक और टैरो कार्ड

  • एस्ट्रोलॉजर डॉ. अजय भाम्बी के अनुसार आज तिथि और नक्षत्र से मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। जिसके प्रभाव से नए कामों की योजनाएं बनेंगी। बड़े लोगों से मदद भी मिल सकती है। कुछ लोगों को रुका हुआ पैसा भी मिल सकता है।
  • पढ़ें: पूरा भविष्यफल
  • न्यूमेरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार गणेश के अनुसार 26 जुलाई का मूलांक 8, भाग्यांक 1, दिन अंक 1, 4, मासांक 7 और चलित अंक 2, 7 है। रविवार को अंक 1, 4 की अंक 8 के साथ परस्पर प्रबल विरोधी युति और अंक 1 की अंक 4 के साथ विरोधी युति बनी हुई है।
  • पढ़ें: पूरा अंकफल
  • टैरो कार्ड रीडर शीला एम. बजाज आज 12 में से 8 राशियों के लिए दिन काफी अच्छा रहने वाला है। दिन सफलता और मौजमस्ती से भरा रह सकता है। अपनी घरेलू और प्रोफेशनल जिम्मेदारियों को पूरा करने में समय लगाना होगा। 4 राशियों के लिए दिन कुछ बिखरा सा रह सकता है।
  • पढ़ें: पूरा टैरो भविष्यफल

7. अब आखिर में, देख लेते हैं कि आज किन खबरों और इवेंट पर रहनी चाहिए आपकी नजर और विजिट करते रहना चाहिए दैनिक भास्कर ऐप-

  1. आज करगिल जीत के 21वें विजय दिवस के मौके पर पढ़िए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक की पत्नी रंजना मलिक के यादगार अनुभव कि कैसे वे हर हफ्ते सरहद पर 5000 सैनिकों को हाथ से लिखी चिट्ठियां और पौष्टिक मिठाई भेजा करती थीं।

  2. पीएम मोदी आज 11 बजे देश की जनता से ‘मन की बात’ करेंगे। कोरोना संकट की वजह से लगे लॉकडाउन और अनलॉक के दौर में मोदी का यह 5वां, दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद 14वां और ओवरऑल 67वां 'मन की बात' कार्यक्रम होगा।

  3. अपनी चुनी हुई राज्य सरकारों को गिराने में भाजपा की भूमिका के विरोध में कांग्रेस आज से एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन अभियान 'लोकतंत्र के लिए बोलो' शुरू करेगी। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।

  4. साल की इकलौती ब्लॉकबस्टर फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' का रात 8 बजे स्टार प्लस चैनल पर वर्ल्ड प्रीमियर होगा। मराठा योद्धा तानाजी मालुसरे के जीवन पर बनी इस फिल्म में अजय देवगन के साथ सैफ अली, शरद केलकर और काजोल नजर आएंगे।

  5. आज हरियाणा के सोहना ​​​​​​- रिठोज गांव में सचिन पायलट के समर्थन में गुर्जर महापंचायत होगी। इसमें हरियाणा, राजस्थान और यूपी के गुर्जर समाज के लोगों को बुलावा भेजा गया है। महापंचायत में राजस्थान के 9 गुर्जर विधायकों पर पायलट को समर्थन देने का दबाव बनाया जाएगा।



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खून में लथपथ सैनिकों से मिलिट्री हॉस्पिटल में मिलती थी, कहते थे हम ठीक हैं, उनकी आंखें सवाल करती थीं, उन्हें हौसला देना बड़ी जिम्मेदारी थी

खून में लथपथ सैनिक मिलिट्री हॉस्पिटल पहुंचते थे और वो बाकी आर्मी वाइव्स के साथ मिलकर उनके लिए कपड़े से लेकर शेविंग किट जुटाती थीं। फिर जब सर्वोच्च बलिदान दे चुके सैनिकों के शव आने लगे तो उन्होंने शहीद की पत्नी ‘वीर नारी’ के साथ खड़े होकर न केवल उन्हें हौसला दिया बल्कि उनकी हर जरूरत का ख्याल रखा।

ये मामला है करगिल युद्ध का। जब जनरल वेद मलिक सेना प्रमुख थे और उनकी पत्नी रंजना मलिक आर्मी वाइव्स एसोसिएशन की मुखिया। जब सरहद और सैनिकों का जिम्मा जनरल वेद मलिक संभाले हुए थे तो उन्हीं सैनिकों की पत्नी, बच्चों और परिवारों का हौसला बनी हुई थी खुद रंजना मलिक। फिर चाहे उनकी छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करना हो या फिर शहीदों के शव घर पहुंचने पर उनकी पत्नी के साथ हिम्मत बनकर खड़े रहना।

तस्वीर करगिल वॉर मेमोरियल की है। पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक और उनकी पत्नी रंजना मलिक, जो आर्मी वाइव्स एसोसिएशन की मुखिया रह चुकीं हैं।

रंजना मलिक खुद एक डॉक्टर हैं, सेना में रह चुकी हैं। आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की मुखिया का काम तब संभाल रहीं थीं, जब वो सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। शहीदों की पत्नी खुद सेना में अफसर बन पाएं ये उन्हीं की कोशिशों का नतीजा था। यहीं नहीं 'वीर नारी' को पहले सेना में 'वॉर विडोज' कहा जाता था, रंजना मलिक ने ही उन्हें 'वीर नारी' कहने की परंपरा शुरू की। और सेप्रेटेड फैमिली एकोमोडेशन को फील्ड एरिया फैमिली एकोमोडेशन नाम भी उन्होंने ही दिया है।

करगिल में सोल्जर्स को मिठाई और चिट्ठियां भेजने से लेकर शहीदों के परिवारों से उनके घर जाकर मुलाकात करने वाली हर याद उन्होंने हमसे साझा की .....

करगिल युद्ध और आर्मी वाइव्स की मुखिया, क्या कुछ जिम्मे था आपके?

वो वक्त मुश्किल भी था और बहुत व्यस्त भी। आर्मी वाइव्स एसोसिएशन ‘आवा’ का बहुत सारा काम था। जिनके पति करगिल में लड़ रहे थे, यहां हम पर उनका जिम्मा था। परिवार बैचेन थे, डरे हुए थे। तब हम उनके पास जाते थे, उनके सवालों के जवाब देते थे। उनको हिम्मत दिलाते थे, उनके बच्चों की दिक्कतें सुलझाते थे। मैं भी बार-बार इन क्वार्टर्स में जाती थी ताकि उन सबसे बार-बार मिल सकूं।
जिनके लोग शहीद होकर आते थे, उनके साथ भी हम भी खड़े रहते थे। मैं और मेरे पति सभी शहीदों के परिवारों से मिले, उनके घर गए, उन्हें बताना होता था कि उन्हें कहां रहना है, उनकी फाइनेंशियल दिक्कतों का क्या करना है।

रंजना मलिक खुद एक डॉक्टर हैं, सेना में रह चुकी हैं। 'वीर नारी' को पहले सेना में 'वॉर विडोज' कहा जाता था, रंजना मलिक ने ही उन्हें वीर नारी कहने की परंपरा शुरू की।

यहीं नहीं करगिल से जो घायल सैनिक आने शुरू हुए, वो खून में लथपथ आते थे। तो हम उनसे मिलिट्री हॉस्पिटल में जाकर मिलते थे, उनके लिए सामान जुटाते थे। कपड़े, शेविंग किट लाकर देते थे। इन घायल सैनिकों से जब पूछो कि कैसे हो? तो सावधान होकर कहते थे, ‘हम ठीक हैं’। लेकिन, उनकी आंखों में सवाल होते थे। मेरी बाजू कट गई मेरा क्या होगा, मेरी आंख चली गई, उन सबको हौसला देना बड़ी जिम्मेदारी थी।
कई लोग आते थे कि हम सैनिकों के लिए कुछ देना चाहते थे। तब फोन भी नहीं होते थे। मेरे पास भी नहीं था। तो हम उन लोगों से जिनके पास फोन हैं, कहते थे कि आप हॉस्पिटल में आकर घायल सैनिकों की उनके परिवारों से बात करवा दो। कोशिश यही रहती थी कि सबसे जुड़े रहें।

करगिल में तैनात सैनिकों को हाथ से लिखी चिट्ठियां और पौष्टिक मिठाई पहुंचाई थीं आपने और बदले में सरहद से चिट्ठियां आई थीं आपके पास?

जुलाई 1999 की बात है, हमने सोचा कि जो सैनिक सरहद पर तैनात हैं, उनके लिए कुछ मिठाई भेजते हैं। हम कुछ लेडीज मिलकर गए, दिल्ली की कलेवा स्वीट्स की दुकान पर गए। हमने चुनीं वो पौष्टिक मिठाई जो लंबे समय तक रह सकती है। मैंने सभी लेडीज से कहा कि हर सैनिक को हम एक हाथ से लिखी चिट्ठी भेजेंगे, ये लिखकर कि हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। लगभग 5000 पैकेट्स हर हफ्ते एयरफोर्स के प्लेन से लेह जाते और फिर वहां से सैनिकों के पास।

अपने पति पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक के साथ रंजना मलिक। शहीदों की पत्नियों को सेना में ऑफिसर बनाने की शुरूआत रंजना ने ही की थीं।

कुछ समय बाद हमें सरहद से चिट्ठियां आने लगीं। कोई कलेवा स्वीट्स पर आती थीं, कुछ बंगला साहेब गुरुद्वारे पर, कुछ आर्मी वाइव्ज एसोसिएशन के नाम पर। घूम फिरकर सभी चिट्ठियां हम तक पहुंची। इसमें कुछ चिट्ठी यंग ऑफिसर्स की थीं। कुछ यंग सोल्जर्स की। उन्हें पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा। कुछ जवान ये भी नहीं जानते थे कि आवा यानी आर्मी वाइव्ज एसोसिएशन क्या होता है।
एक चिट्ठी हमें आवा मैनेजर के नाम पर मिली। उस चिट्ठी में लिखा था- ‘हम करगिल की पहाड़ियों पर चढ़ रहे थे कि अचानक आपका भेजा मिठाई का डिब्बा मिला। इतनी खुशी मिली जैसे हमारे घर से मिठाई आई हो। हम जब पहाड़ पर चढ़ते- चढ़ते थक कर चूर हो जाते तो हम वो मिठाई निकालकर खा लेते और हमें फिर ताकत मिल जाती। हमने अपने काम में विजय पाई।’

आपका डॉक्टर होना और घायल सैनिकों से मिलना, या फिर आर्मी ऑफिसर के अनुभवों के साथ शहीदों के परिवारों को संभालना, सचमुच किसी और से बेहतर कर पाई होंगी आप?

मैं एक डॉक्टर भी थी। डॉक्टर होने से इंसान ज्यादा कॉन्फिडेंट होता है, ज्यादा हिम्मत दिला सकता है। जब भी पीएम से या सरकार से बात हुई तो मैंने यही कहा कि हमें अपने घायल सैनिकों के इलाज के लिए बेस्ट फेसिलिटी मिलनी चाहिए। मैं आर्मी ऑफिसर तो थी लेकिन इस वक्त डॉक्टर होने का सबसे ज्यादा फायदा मिला। सबको कॉन्फिडेंस देना, सबको संभालना, सही राय देना बेहद जरूरी था।

तस्वीर करगिल वॉर मेमोरियल की है। पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक, शहीद मेजर पद्मपाणि आचार्य की बेटी, रंजना मलिक और शहीद कैप्टन विजयंत थापर के पिता कर्नल वीएन थापर।

जब शहीदों के शव करगिल से लौटते थे, उस वक्त सारे ऑफिसर होते थे, शहीद का शव होता था, सेरेमनी चल रही होती थी। शहीद की पत्नी, बच्चे और परिवार वाले भी। ऐसे समय में किसी के कंधे पर हाथ रखकर सहारा देना बहुत जरूरी बात होती है। ‘हीलिंग टच’ बहुत जरूरी होती है। उनका दर्द समझने के लिए। उन्हें ये समझाना कि तुम अकेली नहीं हो, पूरी फौज तुम्हारे साथ है। हर समय तुम्हारी मदद करेगी।

हम उन शहीदों के परिवारों से हमेशा मिलते रहे। जिस भी शहर में गए तो जो परिवार उस शहर में थे, मैं और जनरल मलिक उनके घर जाते थे। हम अनुज नैय्यर के घर भी गए। अमित भारद्वाज, विक्रम बत्रा और सौरभ कालिया के घर भी गए। मेजर सुधीर कुमार भी करगिल में शहीद हुए थे, उन्हें अशोक चक्र मिला था। वो जनरल वीपी मलिक के एडीसी भी रह चुके थे, हमारा उनसे खास लगाव था। जिस भी स्टेशन में हम गए टूर पर हम वहां शहीदों के परिवार से मिलते रहे।

पूरा देश शहीदों के लिए कुछ करना चाहता था, आप उनके परिवारों के साथ मौजूद थीं, सरहद से दूर यहां दिल्ली में तब क्या चल रहा होता था?

मेरा दिन बहुत व्यस्त रहता था, मेरे ऑफिस में दिनभर लोग आते रहते थे। लोग सैनिकों को कुछ देना चाहते थे थे, स्कूली बच्चे अपनी पॉकेट मनी देते आते थे। शाम को न्यूज ब्रीफिंग होती थी तो उसका इंतजार करते थे।
मैं प्रार्थना करती थी कि सब ठीक हो जाए। हर किसी की जिंदगी में कोई न कोई तरह की प्रार्थना होती है। जरूरत होती है कि हम अपने इमोशन कंट्रोल में रखें, दूसरों को हौसला दिखाएं। जो लड़ रहे हैं उन्हें ये तसल्ली हो कि हमारा परिवार और बच्चे ठीक हैं तो वो हिम्मत से काम कर पाते हैं। ये हमारी सेना की ताकत है। हम आर्मी वाइव्स ने टीम बनकर यही काम किया।

ये तस्वीर तब की है जब रंजना मलिक करगिल युद्ध के दौरान घायल हुए जवानों का हालचाल जानने अस्पताल पहुंची थीं।

करगिल हीरो योगेंद्र यादव से अस्पताल में मुलाकात और उन्हें परमवीर चक्र देने की बात बताने का वाकया सुनाना चाहेंगी?

योगेंद्र यादव से मिलने मैं अपने पति जनरल मलिक के साथ गई थी। वो बुरी तरह घायल था। तब छोटा सा 22-23 साल का लड़का था। इसकी शादी भी शायद तभी हुई थी। जब जनरल मलिक ने योगेंद्र यादव से कहा कि उसे परम वीर चक्र मिला है तो उसे नहीं पता था कि परमवीर चक्र क्या होता है। उस वक्त हम सबके चेहरे पर मुस्कान थी। अब वो बड़े हो चुके हैं। हम जहां भी फंक्शन में जाते हैं तो वो बड़े प्यार से आकर मिलते हैं।

आप खुद सेना में, पति आर्मी चीफ और बेटा भी सेना में, इन गुजरे 21 साल में सेना में क्या बदलाव की गवाह बनीं आप?

पिछले साल 20 साल हुए थे, तब हम करगिल गए थे। इससे पहले भी कई बार गए हैं। मैं लड़ाई से ठीक एक साल पहले भी गई थी करगिल। पूरा इलाका मैंने देखा है। बहुत कुछ बदल गया है। सेना में बहुत कुछ बदला है, कितनी आधुनिक हो गई है। मेरा बेटा सेना में ही ब्रिगेडियर है, पिछले साल तक वह कश्मीर में ही पोस्टेड था।

जब बेटा और जनरल मलिक बात करते हैं तो मैं बस सुन ही सकती हूं। बेटे को बहुत कुछ पूछना और बताना होता है अपने पिता को। उस पर हमें बहुत गर्व है कि उसने सेना में जाने का फैसला लिया। इन दिनों बहुत सारी फील्ड्स हैं, बच्चे अपना फैसला कर सकते हैं। लेकिन हमारा बेटा हमेशा से सेना में जाना चाहता था।

जब सैनिक मिलिट्री हॉस्पिटल पहुंचते थे और रंजना बाकी आर्मी वाइव्स के साथ मिलकर उनके लिए कपड़े से लेकर शेविंग किट तक जुटाती थीं। ये तस्वीर उन दिनों अखबार में छपी थी।

फील्ड में तैनात सैनिकों की फैमिली से जुड़ा एक किस्सा आप बता रहीं थीं?

हमारे यहां सेना में सेप्रेटेड फैमिली एकोमोडेशन होते थे। ये वो इलाके थे जहां सरहद पर फॉर्वर्ड लोकेशन पर तैनात ऑफिसर-जवानों की फैमिली रहती थीं। एक बार जालंधर में एक लेडी ने मुझे बताया कि वो ऑटो ढूंढ रही थी तो ऑटो वाले ने उनके इलाके को कहा, ‘जित्थे छडियां हुआ औरतां रहेंदी या...’। ये सुनकर मुझे अच्छा नहीं लगा। तो हमनें उसका नाम फील्ड एरिया फैमिली एकोमोडेशन कर दिया।

शहीदों की पत्नियों को सेना में ऑफिसर बनाने की शुरुआत आपने की, क्या है उसकी कहानी?

1998 में दो यंग लेडीज साउथ ब्लॉक में मेरे ऑफिस आईं। एक रविंदर जीत विजय रंधावा की पत्नी थी। उनके पति कुछ महीनों पहले कश्मीर में शहीद हुए थे और उन्हें कीर्ति चक्र भी मिला था। दूसरी सबीना सिंह थीं जिनके पति नॉर्थ ईस्ट में एयरक्राफ्ट क्रैश में शहीद हुए थे। दोनों के छोटे बच्चे थे।

वो मुझसे बोलीं हमें पता चला है कि हमें पूरी पेंशन मिलेगी, हम देश के लिए कुछ काम करना चाहते हैं, मुफ्त में पेंशन नहीं लेना चाहते। मैं ये सुनकर हैरान रह गई, पूछताछ भी की। उनकी उम्र ज्यादा थी, शादीशुदा थी, बच्चे भी थे। फिर मैंने आर्मी हेडक्वार्टर से पता किया, जनरल वीपी मलिक ने भी बात की।

तो हमको परमिशन मिली की ये लेडीज एग्जाम देकर, इंटरव्यू देकर फौज में जा सकती हैं। ये चेन्नई ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी चलीं गई। जब ये पास होने वाली थीं तो इन्होंने कॉल किया कि आप हमें रैंक लगाने आइए।

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Kargil Vijay Diwas : Exclusive Iinterview of Ranjana Malik wife of General Ved Prakash Malik


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एक के बाद एक हमले करते गए, हर दिन, और सब के सब युवा, जवान भी युवा थे और उनके लीडर्स भी युवा ऑफिसर्स थे, वो युद्ध था जिसे युवाओं ने लड़ा

करगिल विजय दिवस पर मैं उन तमाम वीरों को सैल्यूट करना चाहता हूं, जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया। और उन्हें भी जो उन वीरों को वापस लेकर आए। करगिल ऐसा युद्ध था जो युवाओं ने लड़ा अपने युवा लीडर्स के बूते। वहां युद्ध कंपनी और प्लाटून के बीच हो रहा था।

और उसका जिम्मा संभाले हमारे युवा फौजी ही थे जिनके बूते देश बच गया, जिन्होंने दुश्मन को करगिल से खदेड़कर हम सबको गौरवान्वित किया। मैं तब कर्नल था और जम्मू कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल पर ब्रेवेस्ट ऑफ द ब्रेव बटालियन को कमांड कर रहा था। नियंत्रण रेखा पर हर जगह गोलीबारी चल रही थी।

घुसपैठ की तमाम कोशिशें भीं। जिसके चलते कई सारे ऑपरेशन चलाए जा रहे थे। लेकिन, वहां करगिल में पूरा का पूरा युद्ध जारी था। हर दिन हम ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी का इंतजार करते थे। खबर के लिए सिटरेप्स यानी सिचुएशनल रिपोर्ट सुनते। हर दिन खबर मिलती कि एक और चोटी पर हमने कब्जा कर लिया है, एक और पहाड़ी अब सुरक्षित है।

रिटायर्ड ले. जनरल सतीश दुआ करगिल के समय कर्नल थे और जम्मू कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल पर ब्रेवेस्ट ऑफ द ब्रेव बटालियन को कमांड कर रहे थे।

वो बंजर पहाड़ियां थीं जो 12 हजार से लेकर 20 हजार फीट की ऊंचाई पर थीं। मैं करगिल में पहले तैनात रह चुका था, समझ सकता था कि उस इलाके में जहां ऑक्सीजन की कमी से इंसान हांफता है, वहां ऑपरेट करना कितना मुश्किल होगा। उस ऊंची चोटी पर हमला करना जहां माउंटेनियरिंग एक्सपिडिशन पर रस्सियों के सहारे चढ़ाई करते हैं, कितना चुनौतीपूर्ण होगा।

फिर भी भारतीय जांबाजों का कोई मुकाबला नहीं। एक के बाद एक हमले करते गए, हर दिन, और सब के सब युवा, युवा जवान जिनके लीडर्स भी युवा ऑफिसर्स थे। वो युद्ध था जिसे युवाओं ने लड़ा, सबकी उम्र 20-30 के बीच रही होगी।

प्वाइंट 5140 को दुश्मन के कब्जे से छुड़ा लेने के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा ने कहा, ये दिल मांगे मोर और वो सारे देश के युवाओं के बीच मशहूर हो गया, उनका नारा बन गया। फिर वो प्वाइंट 4875 को जीतने निकले और एक जख्मी ऑफिसर को बचाते अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी। वो यूं भी पहले कह चुके थे, मैं या तो तिरंगा फहराकर आऊंगा या फिर उसी में लिपट कर।

कैप्टन विक्रम बत्रा 7 जुलाई 1999 को शहीद हुए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव के हिस्से है सबसे कम उम्र में युद्ध का सर्वोच्च पदक, परमवीर चक्र। उन्हें जब उस अदम्य साहस के लिए ये पदक मिला तो वो बस 19 बरस के थे। टाइगर हिल पर हमले के वक्त दुश्मन ने उन पर कई बार हमला किया, लेकिन उन्होंने अपने हाथ को बेल्ट से बांधा और पैर में बंडाना लपेट रेंगकर दुश्मन का बंकर तबाह कर दिया। आमने-सामने की लड़ाई में चार दुश्मनों को मार गिराया। और अपनी प्लाटून की टाइगर हिल जीतने में मदद की। उन्हें 15 गोलियां लगीं और वो उस हमले में जीवित बचे इकलौते गवाह थे।

कैप्टन मनोज पांडे ने खालूबार हिल के जुबार टॉप पर हुए हमले में सर्वोच्च बलिदान दिया। वो कहते थे, यदि मौत पहले आई और मैं अपने खून का कर्ज नहीं चुका पाया तो कसम खाता हूं मैं मौत को मार डालूंगा।

कैप्टन विजयंत थापर ने तोलोलिंग फतह पर निकलने से पहले अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी। शायद उन्हें आभास हो गया था। उन्होंने लिखा था, ‘जब तक आपको ये खत मिलेगा मैं आपको आसमान से देख रहा होऊंगा और अप्सराएं मेरी खातिरदारी कर रही होंगी। मुझे कोई पछतावा नहीं है। और अगर में फिर से इंसान पैदा होता हूं तो मैं सेना में जाऊंगा और अपने देश के लिए लडूंगा। हो सके तो आप वो जगह आकर देखना जहां भारतीय सेना ने लड़ाई लड़ी।’

कैप्टन विजयंत थापर 29 जून 1999 को शहीद हुए थे। उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र दिया गया था।

ऐसे कई हैं, बहुत सारे हीरो। कैप्टन अनुज नायर, मेजर राजेश अधिकारी, मेजर विवेक गुप्ता, राइफलमैन संजय कुमार, कैप्टन नौंगरू और बहुत से। सबका नाम यहां लिखना मुमकिन नहीं। अपनी जिंदगी के बमुश्किल 20 बरस देखने वाले वो तमाम युवा जिन्होंने युद्ध लड़ा। भारतीय सेना के अफसरों की शहादत इसलिए सबसे ज्यादा होती है क्योंकि वो हर ऑपरेशन में सबसे आगे होते हैं।

जब भी मैं सर्वोच्च बलिदान देनेवाले इन योद्धाओं के माता-पिता से मिलता हूं तो बातों-बातों में जो एक बात हर जगह पता चलती है वो ये कि उनके बेटे बहादुर थे। वो इसलिए क्योंकि उनके परिवार और माता-पिता ने उन्हें ये संस्कार दिए थे। हर परिवार और परिवार के हर सदस्य के भीतर उन्हें लेकर गर्व है अफसोस नहीं। यही तो है जो हमारे देश को महान बनाता है।

भारत ने 527 योद्धाओं को करगिल युद्ध में खोया है। हम सैल्यूट करते हुए न सिर्फ उन सभी को जिन्होंने बलिदान दिया बल्कि उन्हें भी जो उन्हें लेकर वापस आए। वो भी कम बहादुर नहीं थे जो जिंदा रहे हमें अपने साथी की शहादत की कहानी सुनाने को। हमारा सलाम उन्हें जिन्हें वीरता पदक से नवाजा गया लेकिन उन्हें भी सलाम जो गुमनाम रहे या जिनके हिस्से मेडल नहीं आया। वो किसी भी लिहाज से कम बहादुर नहीं थे।

सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव ने टाइगर हिल को जीतने में अहम भूमिका निभाई थी। योगेंद्र को उनकी बहादुरी के लिए सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

सच तो ये है कि हर ऑपरेशन में, हर युद्ध में, दुनिया में हर जगह ये गुमनाम सोल्जर्स ही होते हैं जो जीत दिलाते हैं। एक सच्चे सैनिक के लिए पदक महत्व नहीं रखते। कोई भी सोल्जर मेडल के लिए नहीं लड़ता। ये तो जिंदगी और मौत का मसला है।

हमें गर्व है अपने सैनिकों पर और अपने यंग ऑफिसर्स पर। भारत को गर्व है, फिर चाहे वो करगिल हो या कश्मीर, इन जांबाजों ने हमेशा सीने पर गोली खाई है। हमारा सलाम भारत के हर नागरिक को। उन सभी को जिन्होंने भारतीय सेना का साथ दिया। भारतीय सैनिक के पीछे उसका साथ खड़ा पूरा देश जो है।

और किसी सोल्जर के लिए इससे ज्यादा भरोसा दिलाने वाला आखिर क्या होगा कि वह जिस देश के लिए जिंदगी दांव पर लगाता है, उसका वह देश उसकी परवाह करता है। फिर चाहे कश्मीर हो करगिल हो या लद्दाख, देश सलाम करता है बहादुर भारतीय सैनिकों को, देश के बहादुर युवाओं को।
जय हिंद।
(रिटायर्ड ले. जनरल सतीश दुआ, कश्मीर के कोर कमांडर रह चुके हैं, इन्ही के कोर कमांडर रहते सेना ने बुरहान वानी का एनकाउंटर किया। जनरल दुआ ने ही सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग की और उसे एग्जीक्यूट करवाया था। वे चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद से रिटायर हुए हैं।)

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स्वस्थ दिखने वाले लोग हो सकते हैं वायरस फैलाने के जिम्मेदार, एक्सपर्ट्स युवाओं को मान रहे हैं ट्रांसमिशन का मुख्य जरिया

मुरली कृष्णन. दुनियाभर में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई देश की सरकारें लॉकडाउन हटाने के बाद फिर से पाबंदियां लगाने की तैयारी कर रही हैं। बीती 18 जुलाई को एक दिन में सबसे ज्यादा (करीब 2 लाख 60 हजार) मरीज मिले। रिसर्च बताती हैं कि जो लोग स्वस्थ नजर आते हैं वो वायरस फैलाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

संक्रमण के बारे में जानकारी नहीं होना भी हो सकता है बड़ा कारण
लगातार बढ़ रहे मामलों के पीछे का कारण संक्रमण की जानकारी न होना हो सकता है। कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि वो वायरस की चपेट में आ गए हैं। चीन में अमेरिका से लौटने वाली एक महिला में कोई लक्षण नजर नहीं आए थे, लेकिन वो सेल्फ क्वारैंटाइन कर रही थी। बाद में यह महिला ही उसकी बिल्डिंग में संक्रमण के 71 मामलों का कारण बनी।

जापान में तोहोकु यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मेडिसिन में वायरोलॉजी के प्रोफेसर हितोशी ओशीतानी कहते हैं "काफी सारा डाटा यह बताता है कि प्रिस्म्प्टोमैटिक ट्रांसमिशन आम बात है, यह वायरस पर नियंत्रण पाने में मुश्किलें पैदा करता है।"

हाल ही में एक स्टडी हुई थी, जिसमें शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस समूहों का पता लगाया, जिसमें ऐसे युवा शामिल थे जो बीमार महसूस नहीं कर रहे थे। ओशीतानी इस स्टडी के को-ऑथर थे। सीडीसी के इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिसीज जर्नल में प्रकाशित हुई स्टडी में जापान में 3 हजार से ज्यादा मामलों की जांच की गई थी।

शोधकर्ताओं ने हॉस्पिटल के बाहर कोरोनावायरस क्लस्टर का संभावित कारण बने 22 लोगों को चुना। इनमें से आधे लोगों की उम्र 20 से 39 साल के बीच थी। स्टडी के मुख्य लेखक और क्योटो यूनिवर्सिटी में वायरोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर यूकी फुरुसे ने कहा कि यह खासतौर पर चौंकाने वाला था, क्योंकि उस वक्त जापान में मिलने वाले मरीज 50-60 साल की उम्र के थे।

युवाओं का ज्यादा घूमना भी हो सकता है कारण
लेखकों ने कहा कि अभी तक यह साफ नहीं है कि युवाओं और बुजुर्गों के बीच संक्रमण फैलने का कारण सोशल या जैनेटिक और बायोलॉजिकल फैक्टर्स हैं। ओशीतानी ने कहा कि चूंकि युवा खुद को कम जोखिम में मानते हैं और इसलिए वे ज्यादा घूमते फिरते हैं। इसका मतलब है कि जोखिम भरे माहौल में युवाओं के होने की संभावना ज्यादा है। फुरुसे ने कहा कि या फिर वे बीमारी के हल्के लक्षण ही महसूस कर रहे हैं और उन्हें यह एहसास नहीं है कि वो वायरस फैला रहे हैं।

तेजी से और बड़े स्तर पर हो रही टेस्टिंग में नजर आया है कि युवाओं में कोरोनावायरस के मामले बढ़े हैं। अमेरिका के सिएटल में हुए स्टेट डाटा के एनालिसिस में पता चला है कि नए मामलों में करीब आधे लोगों की उम्र 20 से 30 साल के बीच की है। सीडीसी के डाटा के मुताबिक, अमेरिका में 30 मई के बाद पॉजिटिव पाए गए करीब 70 प्रतिशत लोग 60 साल से कम उम्र के थे।

बिना लक्षणों का मामले बढ़ने का जोखिम
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में मेडिसिन की प्रोफेसर मोनिका गांधी समेत कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोविड 19 के दुनिया में तेजी से फैलने को तभी समझाया जा सकता है, जब यहां ऐसे लोग हों जो संक्रमित नहीं लगते हैं, लेकिन वायरस फैला रहे हैं।

गांधी के मुताबिक, बिना लक्षण वालों से वायरस फैलने के सबूत साफ हैं। उन्होंने कहा "आपको लगता है कि आपने उन्हें पहचान लिया जो सिम्प्टोमैटिक हैं, आपने आइसोलेट किया, आपने क्वारैंटाइन किया, लेकिन स्वस्थ लोगों में इस वायरस का भंडार है।"

स्टडी ने बताया- बिना लक्षण वाले लोग वायरस के आधे फैलने का कारण हो सकते हैं
फरवरी में डायमंड प्रिंसेज क्रूज शिप में मिले 712 पॉजिटिव केस महामारी के दौरान बिना लक्षणों वाले ट्रांसमिशन के पहले शुरुआती उदाहरणों में से एक है। यहां मिले कुल 712 पॉजिटिव मामलों में एक तिहाई लोगों में कोई भी लक्षण नजर नहीं आया था। मई में अमेरिका में सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर रॉबर्ट रेडफील्ड ने कहा था कि "संक्रमितों में से 25 प्रतिशत लोगों में लक्षण नजर नहीं सकते हैं।"

हॉन्गकॉन्ग और लंदन में हुई स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि जिन लोगों में लक्षण नजर नहीं आते हैं वो SARS-CoV-2 के आधे फैलने के जिम्मेदार हो सकते हैं। सिंगापुर और चीन में शुरुआती वायरस फैलने से मिला डाटा में पाया गया कि जो लोग शुरुआती दौर में बीमार नहीं लग रहे थे, वे सिंगापुर में 48 प्रतिशत और तियानजिन में 62 प्रतिशत ट्रांसमिशन के जिम्मेदार थे।

गांधी ने कहा कि बिना लक्षणों के वायरस फैलना और युवाओं का पॉजिटिव आना संभावित तौर पर एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं। क्योंकि ऐसा लग रहा है कि असिम्प्टोमैटिक इंफेक्शन का कारण हेल्दी इम्यून सिस्टम है, जिसके युवाओं में होने की ज्यादा संभावना है।

सफाई और मास्क वायरस को रोकने में सक्षम
यह साफ नहीं है कि बिना लक्षण वाले लोग कितने संक्रामक हो सकते हैं या वे वायरस फैलने के कितने जिम्मेदार हैं। इस बात पर जरूर सहमति है कि हाथ धोना, दूरी बनाए रखना और मास्क पहनने जैसे सफाई के उपाय वायरस के फैलने के खिलाफ असरदार हैं। ओशीतानी के अनुसार, इन उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कुछ जगहों पर सरकार दोबारा लॉकडाउन की पाबंदियां लगाने के लिए मजबूर हो गई हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य अधिकारियों ने हाल ही में लोगों से सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने की अपील की है। भले ही वे बीमार महसूस करें न करें। यह उन देशों के विपरीत है, जहां मास्क पहनना अप्रैल आखिर से ही जरूरी है। जैसे जर्मनी में एक स्टडी बताती है कि दुकानों, वर्क-प्लेस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मास्क पहनने से वायरस ट्रांसमिशन रेट में 40 प्रतिशत की कमी आई है।

हालांकि डब्ल्यूएचओ ने शुरुआत में सिम्प्टमलैस ट्रांसमिशन की भूमिका को कम बताया था। इसके एपेडेमियोलॉजिस्ट ने कहा था कि यह दुर्लभ घटना थी। बाद में समूह ने सूट का पालन किया और 5 जून से दुनियाभर में मास्क पहने जाने की अपील की।



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Healthy-looking people may be responsible for spreading the virus, experts are considering the youth as the main means of transmission


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खून में 55 फीसदी होता है प्लाज्मा, कोविड 19 से उबर चुके मरीज ही कर सकते हैं दान; 5 सवालों से जानें क्या है कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा थैरेपी

चीन से शुरू हुआ कोरोनावायरस अब तक दुनियाभर में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। इसके अलावा इस वायरस के कारण अब तक 6 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इससे बचने के लिए दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिक और संस्थान वैक्सीन की खोज में लगे हुए हैं। हाल यह है कि 7 महीने गुजर जाने के बाद भी हमारे पास कोरोना से निपटने का कोई पुख्ता हथियार नहीं है।

ऐसे में डॉक्टर्स ने मरीजों के इलाज के लिए कई तरीके अपनाए। इन्हीं में शामिल है कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा थैरेपी। इस थैरेपी के तहत बीमारी से उबर चुके व्यक्ति के खून से प्लाज्मा को अलग कर मरीज के खून में मिलाया जाता है। इस प्लाज्मा में शामिल एंटी बॉडीज मरीज को वायरस से लड़ने में मदद करती हैं। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा को कोविड 19 के गंभीर मरीजों को दिया जा सकता है। इससे उनकी वायरस की क्षमता बढ़ेगी।

क्या होता है प्लाज्मा?
प्लाज्मा इंसान के खून का तरल हिस्सा है। यह 91 से 92 प्रतिशत पानी से बना और हल्के पीले रंग का होता है। यह आपके खून का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा है। बचा हुए 45 फीसदी में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स होती हैं।

कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा को हम "उधार की इम्युनिटी" भी कह सकते हैं। क्योंकि इसे बीमारी से उबर चुके व्यक्ति के खून से निकालकर मरीज को दिया जाता है। इसमें एंटी बॉडीज होती हैं जो कुछ निश्चित समय के लिए प्लाज्मा से चिपक जाती हैं और वायरस के दूसरी बार लौटने पर उससे लड़ने के लिए तैयार रहती हैं।

कोविड 19 में कितनी मददगार है कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा थैरेपी?
यह थैरेपी पहले भी मरीजों की मदद कर चुकी है। डॉक्टर्स 1918 में आए स्पेनिश फ्लू के खिलाफ भी कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन की मदद ले चुके हैं। हाल ही में यह प्रक्रिया सार्स, इबोला, एच1एन1 समेत कई दूसरे वायरस से जूझ रहे मरीजों पर भी की जा चुकी है। कुछ स्टडीज बताती हैं कि यह एच1एन1 और सार्स समेत कई दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की हालत सुधारने में मदद कर सकता है।

जब एक व्यक्ति कोविड 19 से रिकवर हो जाता है तो उनके खून में एंटी बॉडीज बन जाती हैं, जो वायरस से लड़ने में मदद करती हैं। चूंकि, यह वायरस नोवल है, इसका मतलब कि इस महामारी से पहले कोई भी इसका शिकार नहीं हुआ है। इसलिए हमारे शरीर में पहले से ही इससे लड़ने के लिए एंटी बॉडीज मौजूद नहीं है। हालांकि, एक्सपर्ट्स अभी भी कोविड 19 से जूझ रहे मरीजों में कॉन्वॉलैसेंट प्लाज्मा के असर के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।

कैसे होता है कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा डोनेशन?
अमेरिकन रेड क्रॉस के मुताबिक, कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा डोनेशन कोविड 19 से पूरी तरह उबर चुके मरीज ही कर सकते हैं। प्लाज्मा डोनेशन के दौरान व्यक्ति के हाथ से प्लाज्मा निकाला जाता है और सुरक्षित तरीके से कुछ सेलाइन के साथ रेड सेल्स वापस डाले जाते हैं। इस प्रक्रिया के कारण यह आम ब्लड डोनेशन से ज्यादा वक्त लेती है।

कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर प्लाज्मा को ब्लड कलेक्ट करने के 24 घंटे के भीतर -18 डिग्री सेल्सियस पर जमा या ठंडा किया जाता है तो इसे 12 महीने तक स्टोर कर रख सकते हैं।

कौन कर सकता है डोनेट

  • एफडीए के अनुसार, कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा केवल उन्हीं लोगों से कलेक्ट किया जाना चाहिए जो ब्लड डोनेशन के लिए योग्य हैं।
  • अगर व्यक्ति को पहले कोरोनावायरस पॉजिटिव रह चुका है तो ही वे दान कर सकता है।
  • संक्रमित व्यक्ति कोविड 19 से पूरी तरह उबरने के 14 दिन बाद ही डोनेशन कर सकता है। डोनर में किसी भी तरह के लक्षण नहीं होने चाहिए।
  • दान देने वाले के शरीर में ब्लड वॉल्यूम ज्यादा होना चाहिए। यह आपके शरीर की लंबाई और वजन पर निर्भर करता है।
  • डोनर की उम्र 17 साल से ज्यादा और पूरी तरह से स्वस्थ्य होना चाहिए।
  • आपको मेडिकल एग्जामिनेशन से गुजरना होगा, जहां आपकी मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जाएगी।

यह ब्लड डोनेशन से अलग कैसे है?
इंसान के खून में कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे- रेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लाज्मा। ब्लड डोनेशन के दौरान व्यक्ति करीब 300ml रक्तदान करता है, लेकिन प्लाज्मा डोनेशन में व्यक्ति को एक बार उपयोग में आने वाली एफेरेसिस किट के साथ एफेरेसिस मशीन से जोड़ दिया जाता है। यह मशीन प्लाज्मा को छोड़कर खून की सभी कंपोनेंट्स को वापस शरीर में डाल देती है। इस प्रक्रिया में एक ही सुई का इस्तेमाल होता है।

क्या कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा सुरक्षित है?
अमेरिकी की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन संस्था के मुताबिक, आमतौर पर प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन ज्यादातर मरीजों में सुरक्षित होते हैं, लेकिन इससे एलर्जी और दूसरे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। अभी तक यह साफ नहीं है कि कोविड 19 के मरीजों को कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा के दूसरे क्या रिएक्शंस हो सकते हैं।

भारत में कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा थैरेपी की स्थिति
भारत में कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा थैरेपी के क्लीनिकल ट्रायल्स की शुरुआत हो चुकी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2 जुलाई को राजधानी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलियरी साइंसेज (ILBS) में देश के पहले कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा बैंक की शुरुआत की। केजरीवाल के मुताबिक, अभी तक इस बीमारी के लिए कोई भी वैक्सीन नहीं है, लेकिन शुरुआती परिणामों से पता चला है कि प्लाज्मा ने कोविड से होने वाली मौतों को कम किया है।

इस बैंक में 200 यूनिट से ज्यादा प्लाज्मा स्टोर किया जा सकता है। इसके साथ कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल इस बैंक से कोविड 19 के मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा ले सकता है। इस डोनेशन सेंटर में 10 प्लाज्माफेरेसिस मशीनें हैं।



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Plasma contains 55 percent of the blood of the body, only patients recovered from Covid 19 can donate; Learn from 5 questions what is Convalescent Plasma


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इंसानों और वाहनों का शोर कम होने से वाइब्रेशन 50% तक घटा, भूकम्प का पता लगाना पहले से आसान हुआ

कोरोनाकाल में इंसानों के कारण धरती में होने वाले वाइब्रेशन यानी कम्पन में 50 फीसदी की कमी हुई। धरती के अंदर का शोर कम हुआ है। यह आंकड़ा बेल्जियम की रॉयल वेधशाला ने दुनियाभर के 117 देशों के 268 रिसर्च स्टेशन से मिली जानकारी के आधार पर जारी किया।

रॉयल वेधशाला की रिपोर्ट के मुताबिक, आम दिनों में शहरी क्षेत्र में इंसान, कार, ट्रेन और बसों के कारण धरती में वाइब्रेशन पैदा होता है लेकिन लॉकडाउन के दौरान धरती काफी हद तक शांत रही।

  • भूकम्प का पता लगाना आसान हुआ

रिसर्च रिपोर्ट से एक बात साफ हुई कि धरती में कंपन कम होने के कारण भूकंप की जानकारी समय से पहले देना आसान हो जाता है। धरती में कम्पन कितना हुआ इसे सिस्मोमीटर्स के जरिए मापा जाता है। इन सेंसर्स का इस्तेमाल भूकंपीय तरंगों के साथ मानव गतिविधियों से होने वाली ध्वनि को पकड़ने और समझने में काम आता है। यह बारीक से बारीक वाइब्रेशन साउंड को माप सकता है। दुनिया के हर हिस्सों में इससे मॉनिटरिंग की जाती है।

  • अप्रैल में ही जताई थी सम्भावना

इस रिसर्च के मुख्य शोधकर्ता डॉ. थॉमस लीकॉक ने अप्रैल में कहा था कि इंसानों की गतिविधि कम होने के कारण हमें ऐसी नई बातें पता चलेंगी जो पर्यावरण और दूसरी चीजों के लिए सबक साबित होगा।

  • लॉकडाउन के कारण पहली बार पता चली 4 बड़ी बातें

1. दुनियाभर में शोर कम हुआ
शोधकर्ताओं के मुताबिक, 2020 का लगभग आधा साल एक ऐसा लम्बा समय था, जिस दौरान दुनियाभर में होने शोर में कमी आई। रिपोर्ट कहती है कि इससे वैज्ञानिकों को ऐसी कई बातें पता चली हैं जो आम दिनों में इंसानी गतिविधियों के कारण नहीं पता चल पाती थीं।

2. इंसानों की गतिविधि कम हो तो नई जानकारी मिलना आसान
अधिक घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इंसानों के कारण होने वाली गड़गड़ाहट का असर बुरा होता है। ऐसी स्थिति में समय से पहले भूकम्प के असर को बताने की क्षमता कम हो जाती है। भूकम्प विज्ञानी इसका पता लगाने के लिए ध्वनि की फ्रीक्वेंसी को जांचते हैं जो लोगों की गतिविधि से पैदा होती है। इससे पता चलता है कि प्राकृतिक आपदा आ सकती है या नहीं।

3. आबादी बढ़ी तो लोग प्राकृतिक और भौगोलिक आपदा से जूझेंगे
शोधकर्ताओं के मुताबिक, दुनियाभर में जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है वैसे-वैसे लोगों के प्राकृतिक और भौगोलिक आपदा से जूझने का खतरा भी बढ़ रहा है। शहरीकरण बढ़ने से इंसानों के बीच शोर बढ़ेगा और भूकम्प जैसे गतिविधियों को मॉनिटर करना मुश्किल होगा।

4. कंपन कम होने से भूकम्प के सटीक आंकड़े समझ में आए
शोधकर्ताओं के मुताबिक, लॉकडाउन के कारण हम मैक्सिको जैसे देश में समय से पहले भूकम्प का पता लगा पाए। यहां के शहर पेटेटलन में शोर 40 फीसदी तक घट गया। इस वजह से सटीक आंकड़े सामने आ पाए जो आमतौर पर कंपन अधिक होने के कारण आसानी से नहीं समझे जा पाते थे।



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Human-activity induced vibrations have lessened by 50% says study of Royal Observatory belgium


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कोरोना ने शिवराज को घेरा, सोशल डिस्टेंसिंग न रखना भारी पड़ा; तीज-त्योहार के दिनों में रतजगे कर रही राजस्थान की राजनीति

तारीख 26 जुलाई। हमारे गर्व और अभिमान की एक अमर तारीख। आज करगिल में पाकिस्तान पर विजय को 21 साल पूरे हो रहे हैं। दिलों में जोश है, उमंग है और इसीलिए आज का दिन रविवार की छ़ुट्टी की तरह नहीं, विजय दिवस के रूप में मनाएंगे। नमन करेंगे उन 527 शहीदों और 1363 घायल जवानों को जिनके बलिदानों ने तिरंगा झुकने नहीं दिया।

शहीद परमवीर कैप्टन विक्रम बत्रा के इस उद्घोष के साथ कि “या तो मैं लहराते तिरंगे के पीछे आऊंगा, या तिरंगे में लिपटा हुआ आऊंगा, पर मैं आऊंगा जरूर”, आज की मॉर्निंग ब्रीफ में सबसे पहले उन खबरों पर नजर जो देश का मिजाज बताती हैं।

बात सबसे पहले कोरोनावायरस के विस्तार की, जिसके आगे छोटे-बड़े, नेता-अभिनेता सबके गणित फेल होते दिख रहे हैं-

1. शिवराज सिंह चौहान भी नहीं बच पाए कोरोना से

कोरोना के संकट में सोशल डिस्टेंसिंग न मानने का नतीजा क्या होता है, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह के उदाहरण से सीखिए। वे संक्रमित होने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। 24 की रात से भोपाल में लॉकडाउन शुरू हुआ और 25 की सुबह शिवराज ने अमिताभ बच्चन की तरह खुद के संक्रमित होने की खबर दी।

बोले- ‘मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जनता सावधानी रखें, जरा सी असावधानी कोरोना को निमंत्रण देती है।’ मंत्री अरविंद भदौरिया के साथ दिवंगत राज्यपाल लालजी टंडन के अंतिम दर्शन के लिए लखनऊ जाना शिवराज के लिए भारी पड़ा। भदौरिया पहले संक्रमित हुए और अब सीएम भी कोरोना से न बच सके।

अब मध्य प्रदेश से चलते हैं पड़ोसी सूबे राजस्थान में, जहां सत्ता की जोड़-तोड़ के आगे तो कोरोना जैसे वायरस ने समर्पण कर दिया है-

2. तीज-त्योहार के दिनों में राजस्थान में राजनीतिक रतजगे

राजस्थान को त्योहार के दिनों में लगे सियासी संक्रमण का आज 17वां दिन है। रस्साकशी के रुस्तम अब चेहरे बदलते दिख रहे हैं। मुकाबला अब पायलट बनाम गहलोत न होकर, राज्यपाल (भाजपा) बनाम कांग्रेस हो रहा है। 16 की शाम भाजपा की टीम राज्यपाल से मिली।

बाद में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पूनिया बोले- राज्य के मुखिया यह चेतावनी देते हैं कि 8 करोड़ जनता राज्यपाल को घेर लेगी। यह बयान उन्हें (गहलोत को) धारा 124 के तहत सजा दिला सकता है। इससे पहले दिनभर कांग्रेस समर्थकों ने प्रदेश में भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किए।

गहलोत आधी रात तक बैठकें कर रहे हैं तो सचिन पायलट खामोश हैं और हवा का रुख भांप रहे हैं, क्योंकि अब आगे की राह कोर्ट से ही निकलेगी। सोमवार को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट और जयपुर में हाईकोर्ट में सुनवाई पर नजर रहेगी।

अब राजस्थान से उत्तर प्रदेश का रुख करते हैं, जो रामजी के रंग में रंगा नजर आ रहा है, माहौल में रामधुन है, बातें हैं, किस्से हैं, और 5 अगस्त का इंतजार है-

3. अयोध्या में अगले हफ्ते दो दिन दीवाली मनेगी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत होने वाली है। 5 अगस्त को पीएम मोदी मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे। शनिवार को तैयारियों की समीक्षा करने के लिए सीएम योगी खुद कारसेवक पुरम पहुंचे। रामलला के दर्शन करने के बाद आने वाले दिनों की खुशी से गदगद योगी बोले- कि हम सभी शुभ कार्यक्रम के लिए एक साथ आएंगे।

4 और 5 अगस्त की रात को घरों और मंदिरों में ‘दीपोत्सव’ मनाया जाएगा। दीपावली अयोध्या से जुड़ी है और अयोध्या के बिना त्योहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 500 साल बाद अयोध्या में ऐसा शुभ मुहूर्त आया है। दुनिया मंदिर निर्माण का भव्य कार्यक्रम देखेगी।

अब कोरोना और राजनीति से दूर, दो ऐसी खबरें जो आज रविवार के दिन आपको परिवार के साथ शेयर करनी चाहिए, और उनकी बातें भी करनी चाहिए-

4. होम लोन के इतने अच्छे दिन आएंगे, कभी सोचा न था

आपने शायद कभी नहीं सोचा होगा, और न ही कभी सुना होगा कि हमारे देश में होम लोन की ब्याज दरें अब 2.5 पर्सेंट तक पहुंच गई हैं। मान लीजिए कि अगर आप 27 लाख रुपए का लोन लेते हैं और इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), टैक्स पर छूट जोड़ देते हैं तो सिर्फ 2.5 पर्सेंट ब्याज पर लोन मिल रहा है।

अगर आप पीएमएवाई के पात्र नहीं हैं तो फिर आपको 4 पर्सेंट और अगर कोई टैक्स छूट नहीं होती है तो फिर रेट 6.80 पर्सेंट पड़ेगी। तीनों ही स्थितियों में होम लोन की ब्याज दरें ऑल टाइम लो पर हैं। एचडीएफसी, एसबीआई, आईसीआईसीआई 6.95% जबकि एक्सिस 7.75 % पर, एलआईसी 6.90 प्रतिशत पर होम लोन दे रहा है। यूनियन बैंक सबसे कम 6.80% पर होम लोन दे रहा है।

5. ग्राहकों के फायदे की खबर, नए कानून-कायदे अमल में आए

अब ऑनलाइन शॉपिंग में होने वाली धोखाधड़ी में ग्राहकों के अच्छे दिन आने वाले हैं। भारत सरकार ने पिछले हफ्ते कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत नए ई-कॉमर्स नियम नोटिफाई कर दिए हैं। नए नियम अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स पर भी लागू होंगे। नकली और मिलावटी सामान बेचने वाले को उम्रकैद तक हो सकती है।

नए कानून से कंज्यूमर को कहीं से भी ई-कंप्लेंट दर्ज कराने का विकल्प मिल गया है। वे अपने घर के पास के किसी भी कंज्यूमर फोरम में भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। भ्रामक विज्ञापन करने पर सेलिब्रिटी पर भी 10 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है।

6. अब देख लेते हैं कि आज रविवार के दिन क्या रहे हैं आपके सितारे-अंक और टैरो कार्ड

  • एस्ट्रोलॉजर डॉ. अजय भाम्बी के अनुसार आज तिथि और नक्षत्र से मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। जिसके प्रभाव से नए कामों की योजनाएं बनेंगी। बड़े लोगों से मदद भी मिल सकती है। कुछ लोगों को रुका हुआ पैसा भी मिल सकता है।
  • पढ़ें: पूरा भविष्यफल
  • न्यूमेरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार गणेश के अनुसार 26 जुलाई का मूलांक 8, भाग्यांक 1, दिन अंक 1, 4, मासांक 7 और चलित अंक 2, 7 है। रविवार को अंक 1, 4 की अंक 8 के साथ परस्पर प्रबल विरोधी युति और अंक 1 की अंक 4 के साथ विरोधी युति बनी हुई है।
  • पढ़ें: पूरा अंकफल
  • टैरो कार्ड रीडर शीला एम. बजाज आज 12 में से 8 राशियों के लिए दिन काफी अच्छा रहने वाला है। दिन सफलता और मौजमस्ती से भरा रह सकता है। अपनी घरेलू और प्रोफेशनल जिम्मेदारियों को पूरा करने में समय लगाना होगा। 4 राशियों के लिए दिन कुछ बिखरा सा रह सकता है।
  • पढ़ें: पूरा टैरो भविष्यफल

7. अब आखिर में, देख लेते हैं कि आज किन खबरों और इवेंट पर रहनी चाहिए आपकी नजर और विजिट करते रहना चाहिए दैनिक भास्कर ऐप-

  1. आज करगिल जीत के 21वें विजय दिवस के मौके पर पढ़िए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक की पत्नी रंजना मलिक के यादगार अनुभव कि कैसे वे हर हफ्ते सरहद पर 5000 सैनिकों को हाथ से लिखी चिट्ठियां और पौष्टिक मिठाई भेजा करती थीं।

  2. पीएम मोदी आज 11 बजे देश की जनता से ‘मन की बात’ करेंगे। कोरोना संकट की वजह से लगे लॉकडाउन और अनलॉक के दौर में मोदी का यह 5वां, दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद 14वां और ओवरऑल 67वां 'मन की बात' कार्यक्रम होगा।

  3. अपनी चुनी हुई राज्य सरकारों को गिराने में भाजपा की भूमिका के विरोध में कांग्रेस आज से एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन अभियान 'लोकतंत्र के लिए बोलो' शुरू करेगी। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।

  4. साल की इकलौती ब्लॉकबस्टर फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' का रात 8 बजे स्टार प्लस चैनल पर वर्ल्ड प्रीमियर होगा। मराठा योद्धा तानाजी मालुसरे के जीवन पर बनी इस फिल्म में अजय देवगन के साथ सैफ अली, शरद केलकर और काजोल नजर आएंगे।

  5. आज हरियाणा के सोहना ​​​​​​- रिठोज गांव में सचिन पायलट के समर्थन में गुर्जर महापंचायत होगी। इसमें हरियाणा, राजस्थान और यूपी के गुर्जर समाज के लोगों को बुलावा भेजा गया है। महापंचायत में राजस्थान के 9 गुर्जर विधायकों पर पायलट को समर्थन देने का दबाव बनाया जाएगा।



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26 July Kargil Vijay Divas|Corona virus Shivraj singh, Rajasthan politics|High court Indian Army, Nari Shakti and Rafale missile|News Brief/Dainik Bhaskar Morning Latest [Updates]; Rajasthan, Ashok Gehlot, Sachin Pilot, Ram Mandir & Aaj Ka Rashifal


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शनिवार, 25 जुलाई 2020

कोरोना से बड़ी भूख, स्टेशन पर पड़ा अनाज बना बुजुर्गों का निवाला; दंतेवाड़ा में मजबूरी बना ताड़ के पेड़ का पुल

झारखंड के पलामू में डाल्टनगंज रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को कुछ बुजुर्ग महिलाएं चावल और गेहूं के रैक अनलोड होने के बाद प्लेटफॉर्म पर गिरे हुए अनाज को चुन रही थीं। पेट की आग के सामने उनके लिए न तो कोरोना का कोई डर था और न मास्क बांधने और कोरोना पर दी गई हिदायत को न मानने पर भारी-भरकम जुर्माना का। गेहूं चुनने में जुटीं बुधिया, लगनी और धनोइया को जब कोरोना और मास्क के बारे में बताया तो उनका जवाब यही था कि सबसे बड़हन बीमारी त ई पेट बा बाबू।

नाले पर पेड़ रखकर आना-जाना कर रहे 45 परिवार

यह तस्वीर रायपुर के दंतेवाड़ा जिले की है। यहां के नकुलनार से ग्राम पंचायत पखनाचूहा के पटेलपारा तक जाने के लिए नाले पर पुलिया नहीं है। ग्रामीणों ने जुगाड़ से नाले पर ताड़ का पेड़ रख पुलिया बनाई है, इसी के सहारे पखनाचूहा पंचायत के 45 परिवार आना-जाना कर रहे हैं। नाले पर पुलिया नहीं होने से ग्रामीणों को सालों से परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद ग्रामीण नक्सली दहशत के चलते खुलकर मांग नहीं कर रहे हैं।

उफनते नाले में खतरनाक होगी ऐसी छलांग

यह तस्वीर रायपुर के नवगढ़ ब्लॉक के एक गांव की है। यहां के ग्राम केसला कंजी नाला में इस समय भरपूर पानी है। शुक्रवार को इस पर पुल से 6 फीट नीचे पानी बह रहा था। इसकी रफ्तार भी बहुत ही ज्यादा है। इसके बावजूद यहां बच्चे पानी में छलांग मारकर हादसे को न्योता देते नजर आए।

टैंकर से अमोनिया का रिसाव, 45 मिनट दहशत में रहे लोग

जयपुर के शिवदासपुरा के पास एक बड़ा हादसा होने से बच गया। शुक्रवार शाम को टैंकर से अमोनिया का रिसाव होने से 45 मिनट तक दहशत में लोग रहे। पुलिस ने टैंकर की तरफ आने वाले मार्ग को बंद कर लोगों की आवाजाही रोक दी। हादसे के बाद टैंकर चालक वाहन छोड़ भाग गया। टैंकर पर लिखे नंबरों के आधार पर उसके मालिक से संपर्क किया जा रहा है। टैंकर कोटा से जगतपुरा की तरफ जा रहा था।

यहां से गुजरेगी डबल डेकर मालगाड़ी

हरियाणा के सोहना में अरावली की पहाड़ियों में बन रही एक किमी लंबी टनल की खुदाई का काम पूरा हो गया है। शुक्रवार को यहां अंतिम ब्लास्ट किया गया। टनल बनने के बाद इस कॉरिडोर की दूरी 50 किमी कम हो जाएगी। यह दुनिया की सबसे लंबी इलेक्ट्रिफाई टनल होगी। यहां से डबल डेकर मालगाड़ी गुजरेगी। टनल 14.2 मीटर चौड़ी और 10.5 मीटर ऊंची होगी। इसमें से 25 टन एक्सल लोड वाली मालगाड़ी 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी। 84 हजार करोड़ की लागत से बन रहे ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर 2022 तक तैयार होने की संभावना है।

कमल के फूलों ने ढंक लिया तालाब

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडी के राजा तालाब की खूबसूरती बढ़ गई है। यहां चारो ओर हरियाली की चादर बिछ गई है। तालाब को कमल के फूलों और पत्तियों ने पूरी तरह ढंक लिया है। इसका वानस्पतिक नाम नेलुम्बो न्युसिफेरा है। वेद-पुराणों में सहस्त्र दल वाले कमल का उल्लेख है, लेकिन इस कमल को कम लोगों ने ही देखा होगा।

1.5 इंच बारिश, 15 गांव का संपर्क टूटा

रायपुर के धमतरी जिले में बीते एक हफ्ते से धूप-छांव के बीच रुक-रुककर बारिश हो रही है। बीते 24 घंटे में जिले में डेढ़ इंच पानी गिरा है। नगरी ब्लॉक में अच्छी बारिश होने से नदी, नाले उफान पर है। नगरी से बोराई को जोड़ने वाली आठदहरा रपटा के ऊपर करीब 3 फीट पानी बह रहा है, जिससे 15 से अधिक गांव का संपर्क ब्लॉक मुख्यालय से टूट गया है। सुरक्षा के लिए नदी किनारे बोराई पुलिस की टीम तैनात है।

छलक आया बुजुर्ग का दर्द

उदयपुर के भींडर कस्बे में कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति का 10 वर्षीय बेटा भी शुक्रवार को संक्रमित मिला। मेडिकल टीम उसे लेने पहुंची। बच्चा एंबुलेंस की ओर बढ़ा तो दादी भी पीछे-पीछे चल दी, लेकिन बैरिकेड के पास पहुंचकर रो पड़ी। आंचल से आंखें पोंछते हुए पुलिस और मेडिकल टीम से बोली- म्हारे पोता रो ध्यान राखजो। टीम ने वृद्धा को हौसला दिया।

सीकर में सक्रिय हुआ मानसून

राजस्थान के सीकर में बीते 34 दिन में 137 मिमी बारिश हुई। शुक्रवार को हर्ष पर्वत पर दिनभर इसी तरह का नजारा था। बादल पहाड़ों से छूते हुए गुजर रहे थे, मानो बरसने के लिए नीचे उतर रहे हों। बीते 5 दिन में यहां 49 एमएम बारिश हुई। अब खाली पड़े बांधों को मूसलाधार का इंतजार है।



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Big epidemic 'hunger' from Corona, elderly food made at cereals lying at station; Palm tree bridge became a compulsion in Dantewada


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इस मौसम में रोजाना 5 हजार टूरिस्ट आते थे, कोरोना की वजह से अब यहां 300 पर्यटक ही पहुंच रहे हैं

कर्नाटक के शिवमोगा जिले में सिदापुर तालुक में मौजूद है देश का तीसरा सबसे ऊंचा जोग वॉटरफॉल। इसकी उंचाई 833 फीट है यहां पर एक साथ 4 झरने गिरते है, जिनके नाम राजा, रानी, रोरर और रॉकेट है। देश के सबसे ऊंचे वॉटरफॉल में पहले नंबर पर मेघालय का नोहकालिकाई है, इसकी ऊंचाई 1115 फीट है। दूसरे नंबर पर गोवा का दूध सागर वॉटरफॉल है, इसकी ऊंचाई 1049 फीट है।

हमेशा पर्यटकों से गुलजार रहने वाला जोग वॉटरफॉल इस बार सूना पड़ा हुआ है। यहां के टिकट टेकर प्रभाकर बताते हैं कि पिछले साल जून-जुलाई के महीने में रोजाना 4 से 5 हजार तक पर्यटक आते थे, लेकिन कोरोना के चलते अब यहां दिनभर में 150 से 200 टूरिस्ट ही पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर लोकल टूरिस्ट ही हैं। महामारी को ध्यान में रखते हुए यहां भी कुछ बदलाव किए गए हैं। गेट के बाहर सफेद गोले बनाए हैं, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे। पर्यटकों को गेट पर थर्मल जांच और हैंड सैनिटाइजेशन के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।

पिछले साल जून-जुलाई के महीने में रोजाना 4 से 5 हजार तक पर्यटक आते थे लेकिन अभी यहां दिनभर में 150 से 200 टूरिस्ट ही पहुंच रहे हैं। फोटो : ताराचंद गवारिया

यहां मौजूद 18 दुकानों की रोजी-रोटी अब राम भरोसे

अनुषा रेस्त्रां की ललिता बताती हैं कि यहां जून से लेकर जनवरी तक पर्यटकों की भरमार रहती है, लेकिन इस बार सब भगवान के भरोसे ही है। कोविड-19 के चलते इस बार तो दुकान का किराया भी निकल जाए तो बड़ी बात है। यहां कुल 18 दुकानें हैं, इनमें पांच दुकानें फोटोग्राफर्स की हैं। फोटोग्राफर अंजू बताते हैं कि पहले इस सीजन में रोजाना करीब 100 फोटोज क्लिक कर लेता था लेकिन अभी दिनभर में 5-6 क्लिक हो जाएं, तो बड़ी बात है।

डैम के पूरा भर जाने के बाद जोग वॉटरफॉल का नजारा देखने लायक होता है। फोटो : ताराचंद गवारिया

लिंगनमक्की डैम के पूरा भर जाने के बाद जोग वॉटरफॉल का नजारा देखने लायक होता है। अभी डैम करीब 85 फीट खाली है। इसके पूरा भर जाने के बाद अतिरिक्त पानी बहकर जोग वॉटरफॉल में आता है, वहां से ये पानी गेरसोप्पा डैम में चला जाता है। इस डैम के भर जाने के बाद सारा वेस्ट वॉटर समुद्र में मिल जाता है।

अभी डैम करीब 85 फीट खाली है, इसके पूरा भर जाने के बाद अतिरिक्त पानी बहकर जोग वॉटरफॉल में आता है। फोटो : ताराचंद गवारिया

जल विद्युत परियोजना से 1035 मेगावॉट बिजली पैदा होती है

जोग वॉटरफॉल के पास जल बिजली परियोजना भी है। इसमें शरावती विद्युत गृह, गेरसोप्पा जल विद्युत परियोजना और लिंगनमक्की जल विद्युत परियोजना शामिल हैं। इन सभी प्रोजेक्ट से 1035 मेगावॉट बिजली पैदा होती है।



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कर्नाटक के शिवमोगा जिले में सिदापुर तालुक में मौजूद है देश का तीसरा सबसे ऊंचा जोग वॉटरफॉल। इसकी उंचाई 833 फीट है। फोटो : ताराचंद गवारिया


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अमेरिका ने कहा- जिन नए विदेशी छात्रों का पूरा कोर्स ऑनलाइन हो चुका है, उन्हें देश में आने की मंजूरी नहीं दी जाएगी

अमेरिकी सरकार उन नए विदेशी छात्रों को फिलहाल देश आने की मंजूरी नहीं देगी, जिन्होंने हाल ही में किसी अमेरिकी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया है और जिनकी सभी क्लासेज ऑनलाइन कंडक्ट होनी हैं। यह नया आदेश डोनाल्ड ट्रम्प एडिमिनिस्ट्रेशन के इमीग्रेशन और कस्टम एन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट (आईसीई) ने जारी किया है।

क्या है आदेश में?
शुक्रवार रात जारी आईसीई के बयान में कहा गया- जिन स्टूडेंट्स ने 9 मार्च 2020 के बाद एडमिशन लिया है, वे अगले आदेश अमेरिका नहीं आ सकेंगे। ये नॉन इमिग्रेंट स्टूडेंट्स हैं, जिनके सेमेस्टर की पूरी पढ़ाई ऑनलाइन है। इसके लिए एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को एक नया फॉर्म आई-20 जारी करना होगा। इसके जरिए नॉन-इमिग्रेंट स्टूडेंट्स का एलिजिबिलिटी स्टेटस चेक किया जा सकेगा।

गाइडेंस पहले ही जारी किया गया था
स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम के तहत 9 मार्च को गाइडेंस जारी किए गए थे। आईसीई से कहा गया है कि वो सभी विदेशी छात्रों से इसका पालन कराए। इसमें कहा गया है कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूट डिस्टेंस लर्निंग को बढ़ावा दें। दूसरे शब्दों में कहें तो यह आदेश फिलहाल, ऑनलाइन क्लासेज को बढ़ावा देने के लिए जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि कोरनावायरस महामारी के चलते यह आदेश जारी किया जा रहा है।

पहले हुआ था विवाद
दो हफ्ते पहले आईसीई ने ऐसा ही एक आदेश जारी किया था। इसमें विदेशी छात्रों के अमेरिका आने पर रोक के साथ उन स्टूडेंट्स को देश छोड़ने को कहा गया था, जिनकी क्लासेज ऑनलाइन हैं। विदेशी छात्रों के साथ ही अमेरिका के एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स ने भी इस पर सवाल उठाए थे। बाद में इसमें बदलाव किए गए थे।

दोहरा रवैया
ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का विदेशी छात्रों को लेकर यह रवैया चौंकाने वाला है। दरअसल, प्रशासन चाहता है कि महामारी के बावजूद अब स्कूल खोले जाएं। जबकि, मामले बढ़ रहे हैं। 50 में से 18 राज्यों और करीब 200 यूनिवर्सिटीज ने इसका विरोध किया है।

अमेरिका में विदेशी छात्रों से जुड़ी ये खबरें भी आप पढ़ सकते हैं...
1. अमेरिका में दुनिया भर से 10.9 लाख छात्र पढ़ने गए; पहली बार 2 लाख भारतीय गए, सबसे ज्यादा चीन से 3.69 लाख छात्र पहुंचे
2. अमेरिका ने कहा- जिन स्टूडेंट्स की सभी क्लासेस ऑनलाइन, उन्हें देश छोड़ना होगा; यूएस में 10 लाख विदेशी छात्र, इनमें करीब 2 लाख भारतीय



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अमेरिका ने उन नए विदेशी छात्रों के फिलहाल देश आने पर रोक लगा दी है, जिन्होंने इस साल एडमिशन लिया है। अमेरिका में सबसे ज्यादा विदेशी स्टूडेंट्स चीन के हैं। इसके बाद भारत का नंबर आता है। (प्रतीकात्मक फोटो)


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देश में 2 दिन में करीब एक लाख मरीज बढ़े, अब तक 13.37 लाख केस; दिल्ली एम्स में कोवैक्सीन के शुरुआती ट्रायल में कोई रिएक्शन नहीं दिखा

देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अब तक 13 लाख 37 हजार 22 हो चुकी है। शुक्रवार को देश में रिकॉर्ड 48 हजार 895 मरीज मिले। यह अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है। देश में सिर्फ दो दिन में 97338 मरीज मिले। शुक्रवार को 48 हजार 443 केस सामने आए थे। वहीं, पिछले 24 घंटे में 761 लोगों की मौत हो गई। यह आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।

कोवैक्सीन का दिल्ली के एम्स में ट्रायल शुरू हो गया है। पहले दिन शुक्रवार को 30 साल के एक शख्स को वैक्सीन लगाई गई। अच्छी बात यह रही कि वैक्सीनेशन के बाद शख्स को किसी भी प्रकार का रिएक्शन नहीं हुआ। एम्स ने बताया कि अब धीरे-धीरे ट्रायल में वॉलंटियर्स की संख्या बढ़ाई जाएगी।

5 राज्यों का हाल

मध्यप्रदेश : भोपाल में 10 दिन का लॉकडाउन शुरू हो गया है। इस दौरान राजधानी को छोड़कर राज्य में एक जिले से दूसरे जिले की यात्रा करने के लिए ई-पास की जरूरत होगी। लॉकडाउन में क्लीनिक खोलने की अनुमति दी गई है। किराने की दुकानें बंद रहेंगी। लॉकडाउन में होटल, रेस्तरां, किराना दुकानें, मॉल, धार्मिक स्थल, शिक्षण संस्थान, परिवहन सेवाएं, जिम, शराब दुकानें बंद रहेंगी। कोई समारोह नहीं होंगे।

उधर, इंदौर में हफ्ते में 6 दिन में बाजार खुले रहेंगे। 27 जुलाई से राखी समेत सभी दुकानें सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक खुली रहेंगी। ग्वालियर जिले में 2000 से ज्यादा मरीज हो गए हैं। उधर, श्योपुर में बिहार से धान रोपने आए 4 मजदूर भी पॉजिटिव मिले। उज्जैन में अब रविवार को लॉकडाउन रहेगा। शनिवार को बाजार खुले रहेंगे।

महाराष्ट्र: मुंबई में पिछले 24 घंटों में 1057 मामले सामने आए, जबकि इस महामारी से 54 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही मुंबई में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़कर 1 लाख 06 हजार 980 हो गए हैं। शहर में अब तक 5984 लोगों की मौत हो चुकी है।

राजस्थान: राज्य में एक हफ्ते में पांचवीं बार 900 से ज्यादा केस मिले। शुक्रवार को 958 रोगी मिले। बीते 24 घंटे में 8 लोगों की मौत हुई। इनमें सबसे ज्यादा 5 जोधपुर से थे। इसके अलावा बाड़मेर में 2 और नागौर में एक व्यक्ति की जान गई। जोधपुर के बाद अब अलवर में महाविस्फोट हुआ। सबसे ज्यादा 224 रोगी मिले। जयपुर में लगातार आठवें दिन कोई मौत नहीं हुई। यहां परिवहन आयुक्त रवि जैन भी कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।

बिहार: राज्य में शुक्रवार को रिकॉर्ड 1820 संक्रमित मिले। थोड़ी राहत यह कि इससे भी ज्यादा रिकॉर्ड 1873 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर भी लौटे। पटना में 7 लोगों ने कोरोना की वजह से दम तोड़ा। इनमें एक संक्रमित युवक वह भी शामिल है, जिसने एम्स की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। बिहार संक्रमितों की संख्या के मामले में राजस्थान को पीछे छोड़कर 10वें स्थान पर आ गया।

उत्तरप्रदेश: राज्य सरकार ने बताया शुक्रवार को 50 हजार 697 नमूनों की जांच की गई है। इसके साथ अब तक 17 लाख 5 हजार 348 सैंपल्स की जांच की जा चुकी है। अब तक 33 हजार 995 इलाकों में 1 करोड़ 33 लाख 06 हजार 810 घरों का सर्विलांस लिया गया है। इनमें छह करोड़ 77 लाख 18 हजार 224 लोग रहते हैं। प्रदेश में अब कोविड हेल्प डेस्क की संख्या बढ़कर 56 हजार 164 की गई है। इनके जरिए 69 हजार 633 पॉजिटिव की पहचान की गई है।



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यह फोटो दिल्ली की है। यहां टेस्ट बढ़ने के साथ मरीजों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। शुक्रवार को 1025 मरीज मिले। वहीं, अब तक 9 लाख से ज्यादा टेस्ट किए जा चुके हैं।


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